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  "title": "भरत तिवारी एनकाउंटर पर जीतन राम मांझी का कड़ा रुख, बोले- पुलिस की कार्रवाई पूरी तरह जायज़",
  "summary": "भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने पुलिस कार्रवाई को पूरी तरह सही बताया और कहा कि वह कभी भरत तिवारी के घर नहीं जाएंगे.",
  "content": "बिहार में भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर सियासी तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है, और इस बीच केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के संरक्षक जीतन राम मांझी ने इस पूरे विवाद पर बेहद तीखा और साफ रुख अपनाया है. मांझी ने दो टूक कहा कि भरत तिवारी के प्रति उनके मन में कोई सहानुभूति नहीं है और पुलिस ने जो कार्रवाई की, उसे वह पूरी तरह जायज मानते हैं.\n\nसम्राट चौधरी के फैसले पर मांझी ने जताया भरोसा\nजीतन राम मांझी ने बिहार सरकार के रुख की भी सराहना की. उनका कहना है कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस मामले में न्यायिक जांच कराने का निर्णय लेकर बिल्कुल सही रास्ता चुना है. मांझी के मुताबिक, सरकार चाहती तो सिर्फ एसआईटी गठित कर देती या फिर मजिस्ट्रेट स्तर की जांच से ही काम चला लेती, लेकिन न्यायिक जांच का रास्ता चुनना सबसे निष्पक्ष और भरोसेमंद विकल्प है. उन्होंने इसके लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को धन्यवाद भी दिया.\n\n'भरत तिवारी के लिए मेरे मन में कोई हमदर्दी नहीं'\nमांझी ने अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कहा कि उनके मन में भरत तिवारी के लिए कोई सहानुभूति नहीं है. उन्होंने सवाल दागा कि क्या भरत तिवारी के खिलाफ अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार अधिनियम के तहत पहले से कोई केस दर्ज नहीं था? उनका तर्क है कि अगर ऐसा मामला दर्ज था, तो इसका मतलब है कि भरत तिवारी के भीतर आपराधिक प्रवृत्ति जरूर रही होगी. मांझी ने एक और तीखा सवाल उठाया कि अगर भरत तिवारी मानसिक रूप से विक्षिप्त थे, तो फिर उनके हाथ में रिवॉल्वर आया कैसे? और अगर वह हथियार लाइसेंसी नहीं था, तो उसे अपने पास रखने की इजाजत उन्हें किसने दी?\n\nपुलिस पर हथियार तानने का आरोप\nकेंद्रीय मंत्री ने दावा किया कि भरत तिवारी ने खुद पुलिसकर्मियों पर रिवॉल्वर तान दिया था और बाद में वह हथियार दोबारा अपने कब्जे में लेने की कोशिश भी कर रहे थे. मांझी का कहना है कि इस हालात में पुलिस के सामने कार्रवाई करने के अलावा कोई चारा ही नहीं बचा था. उन्होंने अपनी बात को और स्पष्ट करते हुए कहा, \"अगर कोई मेरे ऊपर रिवॉल्वर ताने, तो मैं चुपचाप बैठा नहीं रह सकता. पुलिस ने जो किया, वह बिल्कुल सही किया.\"\n\n'मारना होता तो सिर या सीने पर निशाना लगाते'\nपुलिस कार्रवाई का बचाव करते हुए मांझी ने एक और दलील दी. उनके मुताबिक अगर पुलिस वाकई भरत तिवारी की जान लेना चाहती, तो गोली उनके सिर या सीने में मारी जाती. उन्होंने कहा कि पुलिस ने पैर में गोली मारकर यह जाहिर कर दिया कि उसने पूरा संयम बरता और कानून की सीमा के भीतर रहकर ही कदम उठाया. मांझी ने यह भी दावा किया कि अगर भरत तिवारी ने दोबारा रिवॉल्वर पर कब्जा जमा लिया होता, तो किसी की जान भी जा सकती थी.\n\nमहादलित नेता बताए जाने पर मांझी का पलटवार\nभरत तिवारी को महादलितों का नेता बताए जाने वाले बयानों पर जीतन राम मांझी ने कड़ी नाराजगी जताई. उन्होंने एक कहावत का सहारा लेते हुए कहा कि झुरमुट की आड़ में चहकने वाली हर चिड़िया का गुणगान जरूरी नहीं होता. मांझी ने आगे कहा कि यहां कई लोग लोटा दिखाकर असल में बटलोही गायब कर देते हैं, यानी दिखावे के लिए छोटा-मोटा काम करते हैं जबकि असली मकसद कुछ और होता है. उनका कहना था कि अनुसूचित जाति के नाम पर थोड़ा-बहुत काम कर देने से कोई अपने आप महादलितों का सच्चा नेता नहीं बन जाता.\n\nभगत सिंह और गांधी से तुलना पर उठाए सवाल\nमांझी ने उन बयानों पर भी एतराज जताया, जिनमें भरत तिवारी की तुलना भगत सिंह या महात्मा गांधी जैसी शख्सियतों से की जा रही है. उनका कहना है कि ऐसी तुलना करने भर से हकीकत नहीं बदल जाती. मांझी ने इसी क्रम में पुराना सवाल दोहराया कि राजगीर में जब दो पासवान युवकों की हत्या हुई थी, तब इस तरह की आवाजें कहीं सुनाई क्यों नहीं दी थीं.\n\n'मैं भरत तिवारी के घर कभी नहीं जाऊंगा'\nबातचीत के अंत में जीतन राम मांझी ने बेहद स्पष्ट शब्दों में ऐलान किया कि वह भरत तिवारी के घर कभी कदम नहीं रखेंगे. उनकी दलील है कि पुलिस ने इस पूरे मामले में कानून के दायरे में रहकर, पूरी तरह न्यायसंगत तरीके से कार्रवाई की है, इसलिए भरत तिवारी उनकी नजर में सहानुभूति के हकदार नहीं हैं. मांझी के इस रुख से साफ हो गया है कि भरत तिवारी प्रकरण को लेकर बिहार की सियासत में मतभेद अब और गहरे होते जा रहे हैं. एक तरफ विपक्ष लगातार पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े कर रहा है, तो दूसरी तरफ एनडीए में शामिल दलों के नेता खुलकर पुलिस के समर्थन में उतर आए हैं.\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: पुलिस एनकाउंटर और अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार अधिनियम से जुड़े मामलों में पुलिस कार्रवाई को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस और तेज होगी.\n• बिहार में: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा घोषित न्यायिक जांच से बिहार के लोगों को इस पूरे मामले की सच्चाई सामने आने की उम्मीद है, और इसका असर राज्य की सियासत पर भी पड़ेगा.\n\nसवाल-जवाब\n\n1. जीतन राम मांझी ने भरत तिवारी एनकाउंटर पर क्या कहा?\nउन्होंने कहा कि उन्हें भरत तिवारी के प्रति कोई सहानुभूति नहीं है और पुलिस ने जो कार्रवाई की वह पूरी तरह सही थी.\n\n2. बिहार सरकार ने इस मामले में क्या फैसला लिया है?\nमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मामले की न्यायिक जांच कराने का निर्णय लिया है.\n\n3. मांझी के मुताबिक पुलिस ने भरत तिवारी के पैर में गोली क्यों मारी?\nमांझी ने कहा कि अगर पुलिस की मंशा मारने की होती तो सिर या सीने में गोली मारी जाती, पैर में गोली मारना संयम का सबूत है.\n\n4. भरत तिवारी पर मांझी ने क्या आरोप लगाए?\nमांझी ने सवाल उठाया कि क्या उनके खिलाफ अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार अधिनियम से जुड़ा मामला दर्ज नहीं था, और कहा कि उनके भीतर आपराधिक प्रवृत्ति रही होगी.\n\n5. क्या जीतन राम मांझी भरत तिवारी के घर जाएंगे?\nनहीं, मांझी ने साफ कहा कि वह कभी भरत तिवारी के घर नहीं जाएंगे.\n\n6. मांझी ने राजगीर की किस घटना का जिक्र किया?\nउन्होंने राजगीर में दो पासवान युवकों की हत्या का जिक्र करते हुए पूछा कि उस समय ऐसी आवाजें क्यों नहीं उठी थीं.",
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  "category": "राजनीति",
  "publishedAt": "2026-07-03",
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