# भारत में जुटे वैश्विक दिग्गज: नरेंद्र मोदी, व्लादिमीर पुतिन और शी जिनपिंग की जुगलबंदी ने बदला दुनिया का मिजाज, आर्थिक प्रभुत्व को खुली चुनौती

> भारत में आयोजित BRICS समिट में पीएम नरेंद्र मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने वैश्विक मंच पर एकतरफा आर्थिक प्रतिबंधों और पुराने नियमों के खिलाफ एकजुटता का संदेश दिया।

**Type:** article · **Category:** राजनीति · **Published:** 2026-09-12 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/politics/bharata-men-jute-vaishvika-diggaja-narendra-modi-vladimir-putin-aura-xi-jinping-ki-jugalabndi-ne-badala-duniya-ka-mijaja-arthika-p-31658 · **Language:** Hindi
**Tags:** ब्रिक्स समिट, नरेंद्र मोदी, व्लादिमीर पुतिन, शी जिनपिंग, वैश्विक कूटनीति, नई दिल्ली घोषणापत्र, ग्लोबल साउथ, यूएनएससी सुधार

वैश्विक कूटनीति के पटल पर अक्सर ऐसी तस्वीरें और बैठकें सामने आती हैं जो दशकों पुरानी व्यवस्थाओं के बदलने का स्पष्ट संकेत देती हैं। कई बार आम लोगों को लगता है कि ऐसे बड़े सम्मेलनों से कोई ठोस परिणाम नहीं निकलता और वैश्विक नेता केवल औपचारिक मुलाकात करने, हाथ मिलाने तथा तस्वीरें खिंचवाने के लिए एकत्र होते हैं। लेकिन कूटनीति की दुनिया में प्रतीकों और संदेशों का बहुत बड़ा महत्व होता है। इसी कूटनीतिक संदेश की अहमियत को समझते हुए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने नई दिल्ली का रुख किया। विशेष रूप से चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग सात वर्षों के लंबे अंतराल के बाद भारत की धरती पर कदम रख रहे थे, जिसने इस मुलाकात की संवेदनशीलता और महत्ता को कई गुना बढ़ा दिया। यह सम्मेलन एक ऐसे कठिन समय में आयोजित किया गया जब पूरी दुनिया दो बड़े सैन्य संघर्षों की आग में झुलस रही है और वैश्विक कूटनीति में गहरी दरारें दिखाई दे रही हैं। ऐसे नाजुक मोड़ पर भारत ने BRICS के मंच का उपयोग कर वैश्विक मंच पर अपनी धमक दिखाई है और महाशक्तियों को एक स्पष्ट कूटनीतिक उत्तर दिया है।

 

## भारत मंडपम में महाशक्तियों की एकजुटता और रणनीतिक संदेश

इस सम्मेलन के दौरान सबसे अधिक ध्यान आकर्षित करने वाले दृश्य भारत मंडपम से सामने आए। सम्मेलन की शुरुआत में जब सभी देशों के नेताओं ने वैश्विक भाईचारे और पर्यावरण संरक्षण के संकल्प को दोहराते हुए सामूहिक रूप से पौधारोपण किया, तो कूटनीति की एक असाधारण तस्वीर उभरी। इस अवसर पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक तरफ रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन खड़े थे तो दूसरी तरफ चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग मौजूद थे। यह केवल एक औपचारिक वृक्षारोपण नहीं था, बल्कि यह वैश्विक राजनीति के संतुलन में आए बदलाव का सीधा प्रदर्शन था। इसके बाद भारत मंडपम के गलियारों में जब ये तीनों शीर्ष नेता एक साथ आगे बढ़ते दिखाई दिए, तो पीएम नरेंद्र मोदी पूरी कमान और आत्मविश्वास के साथ इस समूह का नेतृत्व करते नजर आए। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में इस तरह की तस्वीरों के बेहद गहरे मायने निकाले जाते हैं। जब अमेरिका में घरेलू राजनीतिक बदलावों को लेकर चर्चाएं गर्म हैं और डोनाल्ड ट्रंप जैसे नेता लगातार यह दावा कर रहे हैं कि वे ही वैश्विक मंच के सर्वेसर्वा हैं, तब भारत से आई इन तस्वीरों ने वाशिंगटन के राजनीतिक गलियारों में बेचैनी बढ़ा दी है। पिछले साल हुए SCO समिट के दौरान भी जब इन नेताओं की मुलाकात हुई थी, तब डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी प्रशासन पर निशाना साधते हुए कहा था कि अमेरिका ने भारत को चीन के प्रभाव क्षेत्र में जाने दिया है। अब एक बार फिर इन तीनों दिग्गजों के इस दोस्ताना रुख ने पुरानी पश्चिमी धारणाओं को चुनौती दी है।

 

## बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था और साझा अधिकारों की पुरजोर वकालत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मंच का उपयोग कर दुनिया को यह स्पष्ट संदेश दिया कि अब किसी एक देश की इच्छा या प्रभुत्व से पूरी दुनिया नहीं चल सकती। उन्होंने अपने संबोधन में आधुनिक वैश्विक वास्तविकताओं को सामने रखते हुए कहा कि यदि हम सभी का भविष्य एक है, तो उस भविष्य के निर्माण का अधिकार भी सभी देशों के पास समान रूप से होना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अब समय आ गया है जब हमें पुरानी विशेषाधिकार वाली प्रणालियों को छोड़कर वास्तविक और न्यायसंगत साझेदारी की दिशा में कदम बढ़ाना होगा। यही BRICS के आगामी दशकों का मुख्य संकल्प होना चाहिए। पीएम नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट किया कि वर्तमान वैश्विक व्यवस्था को 'ग्लोबल साउथ' की प्राथमिकताओं और उनकी आकांक्षाओं के अनुसार ढालना होगा। विकासशील देशों की जरूरतों को लंबे समय तक अनदेखा करके कोई भी स्थायी वैश्विक संतुलन स्थापित नहीं किया जा सकता।

 

## ग्लोबल गवर्नेंस में बदलाव और ग्लोबल साउथ को अधिकार

भारत ने हमेशा से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर विकासशील और गरीब देशों की आवाज को बुलंद किया है। इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने वैश्विक नीति निर्माण की प्रक्रियाओं पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि आज ग्लोबल साउथ के देश दुनिया के सामने खड़े सबसे बड़े संकटों की पहली कतार में मौजूद हैं, लेकिन जब इन संकटों से निपटने के लिए नीतियां और नियम बनाने की बारी आती है, तो उन्हें पिछली कतारों में धकेल दिया जाता है। इस विसंगति को दूर करने की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि हमें 'पिरामिड ऑफ प्रिविलेज' को 'प्लेटफॉर्म ऑफ पार्टनरशिप' में बदलना होगा, जहां प्रत्येक देश की आवाज का महत्व हो। भारत का लक्ष्य विकासशील देशों को केवल अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करने वाला नहीं, बल्कि उन नियमों का निर्माण करने वाला बनाना है। इसके लिए पीएम नरेंद्र मोदी ने एक ठोस प्रस्ताव भी रखा कि BRICS के माध्यम से विकासशील देशों के युवा राजनयिकों और नीति निर्माताओं को कानूनी विशेषज्ञता और व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाए। उन्होंने वैश्विक समुदाय को आश्वस्त किया कि यह संगठन किसी अन्य ब्लॉक या देश के खिलाफ काम करने के लिए नहीं बना है, बल्कि यह समावेशी विकास और सहयोग का एक सकारात्मक मंच है।

 

## IMF, वर्ल्ड बैंक और UNSC सुधारों को टालना अब संभव नहीं

प्रधानमंत्री ने वैश्विक वित्तीय और राजनीतिक संस्थानों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि IMF और वर्ल्ड बैंक जैसी संस्थाओं में वोटिंग का अधिकार और नीतिगत प्राथमिकताएं आज की आर्थिक वास्तविकताओं के अनुकूल होनी चाहिए। जो देश वैश्विक आर्थिक विकास को गति दे रहे हैं, उन्हें इन संस्थाओं में निर्णय लेने की मुख्य भूमिका मिलनी चाहिए। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधारों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि अब इस प्रक्रिया को और अधिक समय के लिए टालना संभव नहीं है। सुधारों को लेकर लिखित प्रस्तावों पर एक निश्चित समय सीमा के भीतर और स्पष्ट परिणामों के साथ बातचीत शुरू होनी चाहिए। इस रुख को सम्मेलन के अंत में जारी किए गए नई दिल्ली घोषणापत्र में भी मजबूत स्थान मिला है। घोषणापत्र में साफ तौर पर कहा गया है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के दो स्थायी सदस्य देशों, रूस और चीन ने सुरक्षा परिषद में भारत और ब्राजील की अधिक सक्रिय और बड़ी भूमिका का खुलकर समर्थन किया है, जो भारत की कूटनीतिक जीत को दर्शाता है।

 

## एकतरफा टैरिफ और आर्थिक संरक्षणवाद पर कड़ा रुख

सम्मेलन का एक और बेहद महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहलू आर्थिक नीतियों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़ा था। अमेरिका में संरक्षणवादी नीतियों को बढ़ावा देने और मनमाने ढंग से सीमा शुल्क यानी टैरिफ लगाने के प्रस्तावों के बीच, BRICS देशों ने साझा घोषणापत्र में कड़ा रुख अपनाया है। बिना किसी देश का नाम लिए, नई दिल्ली घोषणापत्र में एकतरफा टैरिफ और गैर-टैरिफ उपायों का कड़ा विरोध किया गया है। घोषणापत्र में कहा गया है कि इस तरह के एकतरफा प्रतिबंध और व्यापारिक बाधाएं वैश्विक आर्थिक वृद्धि को बाधित करती हैं और विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों का उल्लंघन करती हैं। यह सीधे तौर पर उन देशों को एक संदेश है जो अपनी घरेलू राजनीति को साधने के लिए वैश्विक मुक्त व्यापार प्रणाली को नुकसान पहुंचा रहे हैं। भारत, रूस, चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों ने एकजुट होकर यह जता दिया है कि वे अपनी आर्थिक संप्रभुता से समझौता नहीं करेंगे और एकतरफा दबाव वाली आर्थिक नीतियों के खिलाफ मिलकर खड़े रहेंगे।

## इसका आप पर असर
नई दिल्ली में हुई इस घोषणा से वैश्विक स्तर पर आर्थिक और राजनयिक स्तर पर बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे, जिससे आम नागरिकों का जीवन भी प्रभावित होगा।

  - **व्यापार और महंगाई पर असर:** बहुपक्षीय देशों द्वारा एकतरफा टैरिफ और व्यापार बाधाओं का विरोध करने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थिरता आएगी। इससे आयातित वस्तुओं की कीमतों में होने वाली बेतहाशा बढ़ोतरी पर रोक लगेगी और आम उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी।

  - **युवाओं के लिए वैश्विक अवसर:** भारत के इस प्रस्ताव से कि ग्लोबल साउथ के युवा राजनयिकों और नीति निर्माताओं को प्रशिक्षित किया जाए, भारतीय युवाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय संगठनों और कूटनीतिक क्षेत्रों में करियर के नए रास्ते खुलेंगे।

  - **आर्थिक सुरक्षा और निवेश:** वैश्विक वित्तीय संस्थानों जैसे IMF और वर्ल्ड बैंक में विकासशील देशों की हिस्सेदारी बढ़ने से भारतीय बाजार अधिक लचीले होंगे। इसके परिणामस्वरूप देश में विदेशी निवेश का प्रवाह बढ़ेगा और स्थानीय उद्योगों को मजबूती मिलेगी।

  - **अंतरराष्ट्रीय साख में बढ़ोतरी:** संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थाई सदस्यता का समर्थन बढ़ने से वैश्विक स्तर पर देश का सम्मान और प्रभाव बढ़ेगा। इससे भविष्य में विदेश यात्रा करने वाले भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय नीतियों में उनकी प्राथमिकता सुनिश्चित होगी।

## ऐसा क्यों हुआ
इस ऐतिहासिक कूटनीतिक हलचल के पीछे वैश्विक स्तर पर चल रहे आर्थिक और राजनीतिक टकराव मुख्य कारण रहे हैं, जिन्होंने इन देशों को एक साझा मंच पर आने के लिए मजबूर किया है।

  - **एकध्रुवीय व्यवस्था और आर्थिक प्रतिबंध:** पश्चिमी देशों द्वारा विभिन्न देशों पर लगाए जाने वाले एकतरफा आर्थिक प्रतिबंधों और प्रभुत्व जमाने की कोशिशों के कारण विकासशील देशों में एक असुरक्षा का माहौल बन रहा था। इससे बचाव के लिए वैश्विक स्तर पर एक मजबूत आर्थिक विकल्प खड़ा करना बेहद जरूरी हो गया था।

  - **शी जिनपिंग की भारत यात्रा का महत्व:** भारत और चीन के बीच लंबे समय से चल रहे सीमा विवाद के बाद, दोनों देशों के आर्थिक विकास को गति देने के लिए आपसी संबंधों को संतुलित करना समय की मांग बन गया था। इसी आवश्यकता के कारण चीनी राष्ट्रपति सात वर्षों के बाद भारत आए।

  - **डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियां:** अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की संभावित वापसी और उनकी संरक्षणवादी नीतियों, विशेष रूप से आयात शुल्क (टैरिफ) बढ़ाने की चेतावनियों ने विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को चिंतित कर दिया था। इसके विरोध में देशों ने पहले से ही अपनी आर्थिक सीमाओं को सुरक्षित करने के लिए एकजुटता दिखाई है।

## सवाल-जवाब

### 1. भारत में आयोजित BRICS समिट में कौन-कौन से प्रमुख नेता शामिल हुए?
इस समिट में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग सहित अन्य सदस्य देशों के शीर्ष नेताओं ने भाग लिया।

### 2. पीएम नरेंद्र मोदी ने ग्लोबल साउथ की स्थिति को स्पष्ट करने के लिए क्या कहा?
पीएम मोदी ने कहा कि ग्लोबल साउथ आज वैश्विक संकटों का सामना करने में सबसे आगे (फ्रंट रो) खड़ा है, लेकिन जब निर्णय लेने की बात आती है तो उसे सबसे पीछे (बैक रो) धकेल दिया जाता है।

### 3. नई दिल्ली घोषणापत्र में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) को लेकर क्या कहा गया है?
घोषणापत्र में सुरक्षा परिषद में सुधार की प्रक्रिया को तुरंत शुरू करने और इसमें भारत तथा ब्राजील की बड़ी भूमिका का रूस और चीन द्वारा खुलकर समर्थन किए जाने का जिक्र किया गया है।

### 4. BRICS देशों ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार और टैरिफ पर क्या स्टैंड लिया है?
साझा घोषणापत्र में बिना किसी देश का नाम लिए एकतरफा टैरिफ और व्यापारिक प्रतिबंधों का कड़ा विरोध किया गया है, जो कि अंतरराष्ट्रीय मुक्त व्यापार के नियमों के खिलाफ हैं।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._