# बिहार के कद्दावर परिवार पर कानूनी शिकंजा: तेज प्रताप की गिरफ्तारी के बाद सामने आया लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव के मुकदमों का पूरा ब्यौरा

> तेज प्रताप यादव की ताजा गिरफ्तारी के बाद लालू प्रसाद यादव के परिवार पर दर्ज मुकदमों की चर्चा फिर तेज हो गई है। चुनावी हलफनामों के अनुसार, जहां तेज प्रताप पर 8 और तेजस्वी यादव पर 22 मामले दर्ज हैं, वहीं पिता लालू प्रसाद चारा घोटाले में दोषी ठहराए जाने के बाद फिलहाल जमानत पर हैं।

**Type:** article · **Category:** राजनीति · **Published:** 2026-07-26 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/politics/bihar-ke-kaddavara-parivara-para-kanuni-shiknja-tej-pratap-ki-giraphtari-ke-bada-samane-aya-lalu-prasad-yadav-aura-tejashwi-yadav--10536 · **Language:** Hindi
**Tags:** लालू प्रसाद यादव, तेज प्रताप यादव, तेजस्वी यादव, आरजेडी, आपराधिक मामले, बिहार राजनीति, चारा घोटाला

बिहार के प्रमुख राजनीतिक घराने के सदस्य तेज प्रताप यादव की हालिया गिरफ्तारी और उन्हें पटना की बेऊर जेल भेजे जाने के बाद, राष्ट्रीय जनता दल यानी आरजेडी के इस पहले परिवार पर चल रहे कानूनी मुकदमों की चर्चा एक बार फिर से तेज हो गई है। लोग इस बात को लेकर बेहद उत्सुक हैं कि इस कद्दावर राजनीतिक परिवार के अलग-अलग सदस्यों पर कुल कितने और किस तरह के मुकदमे दर्ज हैं। वर्ष 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान निर्वाचन आयोग के समक्ष दाखिल किए गए शपथ पत्रों से इस परिवार के कानूनी संकट की एक विस्तृत और स्पष्ट तस्वीर सामने आती है। इन आधिकारिक दस्तावेजों के विश्लेषण से पता चलता है कि तेज प्रताप यादव के खिलाफ वर्तमान में कुल 8 आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें हत्या और हत्या के प्रयास जैसे बेहद गंभीर आरोप भी शामिल हैं। वहीं, उनके छोटे भाई और आरजेडी के प्रमुख नेता तेजस्वी यादव के खिलाफ मुकदमों का दायरा और भी बड़ा है, जिन्होंने अपने चुनावी हलफनामे में खुद पर 22 आपराधिक मामले घोषित किए हैं। दूसरी तरफ, परिवार के मुखिया लालू प्रसाद यादव की कानूनी स्थिति इन दोनों से काफी अलग है, क्योंकि वे चारा घोटाले के मामलों में पहले ही अदालत द्वारा दोषी करार दिए जा चुके हैं और वर्तमान में केवल जमानत पर बाहर हैं।

##  तेज प्रताप यादव: चुनावी हलफनामे में दर्ज संगीन मामले और ताज़ा कार्रवाई 
वर्ष 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में महुआ निर्वाचन क्षेत्र से अपना नामांकन दाखिल करते समय तेज प्रताप यादव ने जो चुनावी हलफनामा जमा किया था, उसमें उन्होंने अपने खिलाफ लंबित मुकदमों का पूरा विवरण दिया था। मायनेता वेबसाइट पर उपलब्ध इस चुनावी हलफनामे के आंकड़ों के अनुसार, तेज प्रताप यादव पर कुल 8 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इन मामलों में भारतीय दंड संहिता यानी IPC की कई गंभीर धाराएं शामिल हैं। इनमें सबसे बड़ी धारा IPC की धारा 302 है जो हत्या के अपराध से संबंधित है। इसके अलावा, उनके खिलाफ IPC की धारा 307 भी लगाई गई है, जो हत्या के प्रयास के संगीन मामले में दर्ज की जाती है। महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों से जुड़ी धारा 498A भी उनके हलफनामे में दर्ज है, जो किसी विवाहित महिला के साथ उसके पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा की जाने वाली क्रूरता से संबंधित है। इसके साथ ही, सरकारी कर्मचारी को अपनी ड्यूटी करने से रोकने के उद्देश्य से जानबूझकर गंभीर चोट पहुंचाने के आरोप में दर्ज की जाने वाली IPC की धारा 333 भी उनके खिलाफ लंबित मुकदमों की सूची में शामिल है। हालांकि, कानूनी जानकारों का मानना है कि किसी भी व्यक्ति पर केवल मुकदमा दर्ज होना या हलफनामे में उसका उल्लेख होना उसे दोषी साबित नहीं करता है। ये सभी मामले वर्तमान में न्यायिक प्रक्रिया के दौर से गुजर रहे हैं और इन्हें केवल लंबित आरोपों के रूप में ही देखा जाना चाहिए जब तक कि अदालत इन पर कोई अंतिम फैसला नहीं सुना देती।

##  पटना कोतवाली थाना मामला और ताज़ा प्रदर्शनों का संबंध 
तेज प्रताप यादव की मौजूदा गिरफ्तारी के बाद एक बार फिर उनके खिलाफ हत्या के प्रयास यानी IPC की धारा 307 की चर्चाएं जोरों पर हैं। दरअसल, उनके वर्ष 2025 के हलफनामे में पहले से ही एक पुराने मामले में धारा 307 का उल्लेख मिलता है। यह मामला पटना के कोतवाली थाने में वर्ष 2021 में दर्ज किया गया था। इस मामले की पृष्ठभूमि में केवल हत्या के प्रयास की ही धारा नहीं थी, बल्कि इसमें कई अन्य धाराएं भी शामिल थीं। इनमें गैर-कानूनी ढंग से भीड़ जमा करने के लिए IPC की धारा 147 और 149, किसी व्यक्ति का रास्ता रोकने के लिए धारा 341 और उसे बंधक बनाने के लिए धारा 342 का उपयोग किया गया था। इसके साथ ही सामान्य मारपीट के लिए धारा 323, सरकारी काम में बाधा डालने और गंभीर चोट पहुंचाने के लिए धारा 333, उपेक्षापूर्ण व्यवहार से दूसरों की जान जोखिम में डालने के लिए धारा 337 और 338, सरकारी कर्मचारी पर हमला करने के लिए धारा 353 और शांति भंग करने की नीयत से अपमानित करने के लिए धारा 504 जैसी तमाम धाराएं शामिल थीं। अब हाल ही में NEET परीक्षा से जुड़े कथित घोटाले और विवाद को लेकर आयोजित एक राजनीतिक विरोध प्रदर्शन के दौरान तेज प्रताप यादव को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इस गिरफ्तारी के बाद उन पर एक बार फिर से IPC की धारा 307 लगाने की बात कही जा रही है। इसलिए यह स्पष्ट है कि तेज प्रताप यादव के लिए हत्या के प्रयास जैसी गंभीर धारा का सामना करना कोई नया अनुभव नहीं है, वे पहले भी ऐसे आरोपों के दायरे में आ चुके हैं।

##  राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मुकदमों का जाल 
तेज प्रताप यादव के खिलाफ दर्ज मुकदमों की पूरी सूची को गहराई से देखने पर यह स्पष्ट होता है कि उनके खिलाफ दर्ज अधिकांश मामले उनके राजनीतिक जीवन की गतिविधियों से जुड़े हुए हैं। एक सक्रिय राजनीतिक कार्यकर्ता और नेता होने के नाते वे लगातार विभिन्न आंदोलनों, रैलियों, मार्च और चुनाव प्रचार अभियानों में हिस्सा लेते रहे हैं। इसी दौरान प्रशासन और पुलिस द्वारा नियमों के उल्लंघन के आरोप में उन पर ये मुकदमे दर्ज किए गए हैं। उनके खिलाफ पटना, जहानाबाद और महुआ जैसे क्षेत्रों के अलग-अलग पुलिस थानों में मामले दर्ज हैं। इन मुकदमों में मुख्य रूप से यह आरोप लगाया गया है कि उन्होंने बिना सक्षम प्रशासनिक अनुमति के गैर-कानूनी तरीके से भीड़ को इकट्ठा किया, सरकार या स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी किए गए निषेधाज्ञा या अन्य आदेशों की अवहेलना की, और विरोध प्रदर्शन के दौरान सरकारी काम में लगे कर्मचारियों के रास्ते में बाधा उत्पन्न की। इसके साथ ही चुनाव प्रचार के दौरान आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के मामले भी उनके मुकदमों की फेहरिस्त में शामिल हैं। इस तरह के मामलों को राजनीतिक प्रकृति का माना जाता है, जो अक्सर जन आंदोलनों में भाग लेने वाले नेताओं पर दर्ज किए जाते हैं।

##  वैवाहिक विवाद: घरेलू हिंसा और फैमिली कोर्ट का चक्कर 
सक्रिय राजनीति और रैलियों से जुड़े मुकदमों के अतिरिक्त, तेज प्रताप यादव का निजी जीवन भी कानूनी विवादों से अछूता नहीं रहा है। उनकी पत्नी ऐश्वर्या राय के साथ उनका वैवाहिक विवाद लंबे समय से न केवल अदालतों में चल रहा है, बल्कि यह बिहार की राजनीति और स्थानीय मीडिया में भी काफी चर्चित रहा है। पटना की फैमिली कोर्ट में उनके तलाक का सिविल मामला काफी समय से लंबित है, जिस पर दोनों पक्षों की ओर से नियमित सुनवाई चल रही है। इस पारिवारिक कलह के बीच उनकी पत्नी ऐश्वर्या राय द्वारा उन पर घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम के तहत भी एक गंभीर मामला दर्ज कराया गया था। यह मामला भी वर्तमान में न्यायिक समीक्षा और कानूनी प्रक्रियाओं के अधीन है। इस प्रकार तेज प्रताप यादव को एक तरफ जहां राजनीतिक और आपराधिक मुकदमों की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ उन्हें अपनी निजी जिंदगी से जुड़ी अदालती लड़ाइयों से भी जूझना पड़ रहा है।

##  तेजस्वी यादव: पांच सालों में मुकदमों की संख्या हुई दोगुनी 
लालू परिवार के दूसरे और छोटे बेटे तेजस्वी यादव की कानूनी स्थिति की बात करें, तो उनके खिलाफ दर्ज मुकदमों की संख्या उनके बड़े भाई से कहीं अधिक है। आरजेडी के वरिष्ठ नेता तेजस्वी यादव ने वर्ष 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में राघोपुर विधानसभा क्षेत्र से दाखिल किए गए अपने चुनावी हलफनामे में खुद पर कुल 22 आपराधिक मामले घोषित किए हैं। यदि हम इसकी तुलना उनके पिछले चुनावी रिकॉर्ड से करें, तो वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव के समय दिए गए हलफनामे में उनके खिलाफ दर्ज मामलों की संख्या केवल 11 थी। इसका अर्थ यह हुआ कि पिछले पांच वर्षों के दौरान उन पर दर्ज मुकदमों की संख्या दोगुनी हो गई है। तेजस्वी यादव के खिलाफ दर्ज इन मुकदमों में कई तरह के वित्तीय और आपराधिक आरोप शामिल हैं। उनके हलफनामे के मुताबिक, उन पर धोखाधड़ी, सरकारी या निजी दस्तावेजों की जालसाजी, आपराधिक विश्वासघात और किसी को डराने-धमकाने जैसी गंभीर धाराओं के तहत मामले दर्ज किए गए हैं। हालांकि, तेज प्रताप यादव के मामलों की तरह ही तेजस्वी यादव पर दर्ज इन मुकदमों का होना भी उनकी दोषसिद्धि का प्रमाण नहीं है। मायनेता के उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, तेजस्वी यादव के वर्ष 2025 के हलफनामे में ऐसा कोई उल्लेख नहीं है जिससे यह संकेत मिले कि उन्हें किसी भी मामले में अदालत द्वारा दोषी पाया गया है या उन्हें कोई सजा सुनाई गई है। उनके सभी मामले अभी भी जांच या अदालती सुनवाई के प्रारंभिक स्तर पर ही हैं।

##  लालू प्रसाद यादव: चारा घोटाले में दोषसिद्धि और जमानत का कानूनी पेंच 
अपने दोनों बेटों की तुलना में राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की कानूनी स्थिति पूरी तरह से भिन्न और अधिक गंभीर है। उनके दोनों बेटों पर जहां केवल आरोप दर्ज हैं और वे मुकदमे की प्रक्रिया का सामना कर रहे हैं, वहीं लालू प्रसाद यादव बिहार के बहुचर्चित चारा घोटाले के कई मामलों में विशेष अदालतों द्वारा दोषी ठहराए जा चुके हैं और उन्हें सजा भी सुनाई जा चुकी है। कानूनी रूप से सजायाफ्ता होने के बावजूद, वे वर्तमान में अपनी खराब सेहत और अन्य आधारों पर अदालत से मिली नियमित जमानत पर जेल से बाहर हैं। हाल ही में इस मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी मोड़ तब आया जब सुप्रीम कोर्ट ने देवघर कोषागार से अवैध निकासी से जुड़े एक मामले में लालू प्रसाद यादव की जमानत को रद्द करने की याचिका को खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में राहत देते हुए झारखंड हाईकोर्ट को यह निर्देश दिया है कि वह लालू प्रसाद यादव की दोषसिद्धि के खिलाफ दायर की गई अपीलों पर अगले छह महीने के भीतर अपना अंतिम फैसला सुनाए। इसका मतलब यह है कि लालू प्रसाद यादव की सजा और उनकी जमानत, दोनों ही मामलों में कानूनी लड़ाई अभी भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है और उच्चतर अदालतों में उनके खिलाफ की गई अपीलें अभी भी लंबित हैं।

##  कानूनी स्थिति का अंतर: आरोपी बनाम दोषी 
लालू परिवार के इन तीनों प्रमुख सदस्यों की कानूनी स्थिति का तुलनात्मक अध्ययन करने पर कानून के कई बारीक पहलू सामने आते हैं। लालू प्रसाद यादव जहां चारा घोटाले के मामलों में सीधे तौर पर दोषी पाए जा चुके हैं और सजायाफ्ता होने के बाद जमानत पर हैं, वहीं उनके दोनों बेटे तेज प्रताप यादव और तेजस्वी यादव अभी केवल आरोपी की श्रेणी में आते हैं। तेजस्वी यादव के खिलाफ 22 और तेज प्रताप यादव के खिलाफ 8 मुकदमों की घोषणा की गई है, लेकिन भारतीय न्यायशास्त्र के इस सिद्धांत के अनुसार कि "जब तक दोष सिद्ध न हो जाए, तब तक हर व्यक्ति निर्दोष है", इन दोनों भाइयों पर लगे आरोपों को अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता। किसी भी व्यक्ति की वास्तविक कानूनी स्थिति को स्पष्ट रूप से समझने के लिए यह देखना अत्यंत आवश्यक होता है कि उसके खिलाफ दर्ज मामला केवल पुलिस FIR के स्तर पर है, अदालत में उसके खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय किए जा चुके हैं, या फिर सभी गवाहों और सबूतों को देखने के बाद किसी सक्षम अदालत ने उसे दोषी ठहराकर सजा का ऐलान कर दिया है। लालू परिवार के मामले में पिता और बेटों के बीच का यही कानूनी अंतर उनकी अलग-अलग राजनीतिक और कानूनी दिशाओं को तय करता है।

## इसका आप पर असर
- **बिहार में:** राज्य के इस प्रमुख राजनीतिक परिवार पर बढ़ते कानूनी मुकदमों का सीधा असर आगामी चुनावों की रणनीतियों और राज्य की राजनीतिक स्थिरता पर पड़ेगा।
- **राष्ट्रीय स्तर पर:** राजनीतिक नेताओं के चुनावी हलफनामों और उन पर लगे संगीन आरोपों के प्रति जनता की जागरूकता बढ़ेगी, जिससे लोकतंत्र में पारदर्शिता को बढ़ावा मिलेगा।

## सवाल-जवाब

### 1. तेज प्रताप यादव पर हाल ही में कौन सी धारा लगाई गई है?
हाल ही में NEET विवाद से जुड़े प्रदर्शन के बाद तेज प्रताप यादव की गिरफ्तारी हुई है, जिसमें उन पर हत्या के प्रयास से संबंधित धारा 307 लगाए जाने की बात सामने आई है।

### 2. चुनावी हलफनामे के अनुसार तेजस्वी यादव पर कितने आपराधिक मामले दर्ज हैं?
वर्ष 2025 के चुनावी हलफनामे के अनुसार, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव पर कुल 22 आपराधिक मामले दर्ज हैं, जबकि 2020 के विधानसभा चुनाव में यह संख्या 11 थी।

### 3. क्या लालू प्रसाद यादव वर्तमान में जेल में बंद हैं?
नहीं, लालू प्रसाद यादव चारा घोटाले के मामलों में दोषी ठहराए जाने के बावजूद वर्तमान में नियमित जमानत पर जेल से बाहर हैं।

### 4. तेज प्रताप यादव के चुनावी हलफनामे में कौन सी गंभीर धाराएं दर्ज हैं?
उनके चुनावी हलफनामे में हत्या (धारा 302), हत्या के प्रयास (धारा 307), विवाहित महिला के साथ क्रूरता (धारा 498A) और सरकारी काम में बाधा डालने (धारा 333) जैसी गंभीर धाराएं शामिल हैं।

### 5. सुप्रीम कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव के मामले में झारखंड हाईकोर्ट को क्या निर्देश दिया है?
सुप्रीम कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव की जमानत रद्द करने से इनकार करते हुए झारखंड हाईकोर्ट को निर्देश दिया है कि वह उनकी दोषसिद्धि के खिलाफ अपीलों पर छह महीने के भीतर अपना अंतिम फैसला सुनाए।

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