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  "type": "article",
  "title": "बंगाल में बागी विधायकों की अयोग्यता पर सुप्रीम कोर्ट का दखल से इनकार, TMC को कलकत्ता हाई कोर्ट भेजा",
  "summary": "सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के 10 बागी विधायकों की अयोग्यता याचिका पर विधानसभा अध्यक्ष को निर्देश देने से इनकार कर दिया है। CJI सूर्यकांत की पीठ ने TMC को कलकत्ता हाईकोर्ट जाने की छूट दी है।",
  "content": "पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) को देश की सर्वोच्च अदालत से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य विधानसभा के बागी विधायकों की सदस्यता रद्द करने के मामले में तुरंत निर्देश देने की मांग वाली याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर हस्तक्षेप करने के बजाय याचिकाकर्ता को सबसे पहले कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना चाहिए।\n\nहाईकोर्ट जाने की दी गई अनुमति\nसुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष इस मामले पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने TMC की याचिका को खारिज कर दिया, लेकिन साथ ही पार्टी को उचित राहत के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट में नई याचिका दायर करने की स्वतंत्रता प्रदान की। पीठ ने अपने आदेश में कहा कि वर्तमान स्थिति में याचिकाकर्ता का पहले हाईकोर्ट में जाना ही अधिक न्यायसंगत और उपयुक्त रहेगा।\n\nडिवीजन बेंच करेगी मामले की त्वरित सुनवाई\nसुप्रीम कोर्ट ने इस कानूनी प्रक्रिया को तेजी देने के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से विशेष अनुरोध भी किया है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि इस पूरे मामले को जल्द से जल्द सुनवाई और अंतिम निर्णय के लिए हाईकोर्ट की एक डिवीजन बेंच के सामने सूचीबद्ध किया जाए। इससे बागी विधायकों की अयोग्यता याचिका पर लंबे समय से जारी संशय और कानूनी अड़चनों का समाधान शीघ्र हो सकेगा।\n\n10 विधायकों के खिलाफ अयोग्यता की प्रक्रिया\nअदालत में यह याचिका तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय की ओर से दाखिल की गई थी। इस याचिका के माध्यम से विधानसभा अध्यक्ष के पास लंबित 10 बागी विधायकों की अयोग्यता की कार्यवाही पर तत्काल निर्णय लेने का निर्देश देने की गुहार लगाई गई थी। जिन विधायकों को हटाने की मांग की जा रही है, उनमें रितब्रत बनर्जी का नाम प्रमुखता से शामिल है, जिन्हें पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता प्राप्त है।\n\nदल-बदल कानून के तहत दर्ज हैं याचिकाएं\nतृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि इन सभी बागी विधायकों ने पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होकर संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन किया है। इन 10 विधायकों के खिलाफ संविधान की दसवीं अनुसूची यानी दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता की याचिकाएं जुलाई 2026 में दायर की गई थीं। इसके बाद से ही TMC विधानसभा अध्यक्ष से इन पर जल्द से जल्द फैसला लेने का दबाव बना रही थी, लेकिन मामला अब हाई कोर्ट के विवेक पर निर्भर करेगा।\n\nइसका आप पर असर\nपश्चिम बंगाल की राजनीति और न्यायिक प्रक्रियाओं के लिहाज से यह फैसला बेहद महत्वपूर्ण मोड़ लेकर आया है।\n\n• भारत में: संवैधानिक मामलों में सर्वोच्च अदालत द्वारा राज्यों के उच्च न्यायालयों को प्राथमिकता देने की परंपरा इस फैसले से और मजबूत हुई है। इससे अन्य राज्यों में भी विधानसभा अध्यक्ष के पास लंबित दल-बदल याचिकाओं के लिए सही कानूनी रास्ता स्पष्ट होता है।\n• पश्चिम बंगाल में: तृणमूल कांग्रेस और बागी विधायकों के बीच की कानूनी लड़ाई अब कलकत्ता हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में ट्रांसफर होगी। 10 बागी विधायकों की विधानसभा सदस्यता का फैसला लंबित रहने से राज्य की राजनीतिक स्थिति और विपक्षी नेता की भूमिका पर प्रभाव पड़ेगा।\n\nऐसा क्यों हुआ\nसुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप करने के बजाय याचिका खारिज कर हाईकोर्ट जाने का आदेश कई न्यायिक कारणों से दिया।\n\n• संवैधानिक क्षेत्राधिकार: शीर्ष अदालत का मानना है कि राज्य स्तर के विधायी मामलों में पहले संबंधित राज्य के उच्च न्यायालय द्वारा सुनवाई किया जाना प्रक्रियात्मक रूप से उचित है।\n• हाईकोर्ट का प्राथमिक अधिकार: सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस चरण में याचिकाकर्ता के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना ही सही कानूनी मार्ग है।\n• त्वरित निर्णय की आवश्यकता: मामले की संवेदनशीलता और 10 विधायकों की अयोग्यता याचिका के लंबे समय से लंबित होने के कारण सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से इसे डिवीजन बेंच के सामने जल्दी निपटाने का अनुरोध किया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. सुप्रीम कोर्ट ने TMC की याचिका पर क्या फैसला सुनाया?\nसुप्रीम कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस की याचिका पर सीधा हस्तक्षेप करने से मना करते हुए उसे कलकत्ता हाईकोर्ट जाने की छूट दी है।\n\n2. याचिका में विधानसभा अध्यक्ष से क्या मांग की गई थी?\nयाचिका में पश्चिम बंगाल विधानसभा के स्पीकर को 10 बागी विधायकों की अयोग्यता पर जल्द फैसला लेने का निर्देश देने की मांग की गई थी।\n\n3. इस मामले की सुनवाई किस सुप्रीम कोर्ट बेंच ने की?\nयह सुनवाई CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने की।\n\n4. यह याचिका TMC के किस नेता ने दाखिल की थी?\nयह याचिका तृणमूल कांग्रेस के विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की थी।\n\n5. किन मुख्य नेताओं के खिलाफ अयोग्यता याचिका लंबित है?\nइनमें 10 बागी विधायक शामिल हैं, जिनमें पश्चिम बंगाल विधानसभा के विपक्ष के नेता रितब्रत बनर्जी का नाम प्रमुख है।",
  "url": "https://trendkia.com/politics/bngala-men-bagi-vidhayakon-ki-ayogyata-para-supreme-court-ka-dakhala-se-inakara-tmc-ko-kalakatta-high-court-bheja-56980",
  "category": "राजनीति",
  "publishedAt": "2026-11-05",
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    "तृणमूल कांग्रेस",
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