ब्रिक्स पर कांग्रेस में उभरे मतभेद: पी चिदंबरम ने उठाए ठोस लाभ पर सवाल, तो शशि थरूर ने गिनाई कूटनीतिक ताकत दिल्ली में आयोजित होने जा रहे BRICS सम्मेलन से पहले कांग्रेस में दो अलग-अलग राय सामने आई हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने संगठन से मिले ठोस फायदों पर सवाल उठाए, जबकि पार्टी सांसद शशि थरूर ने इसे वैश्विक मंच पर भारत की कूटनीतिक क्षमता का प्रदर्शन बताया। बहुपक्षीय कूटनीतिक मंचों पर भारत की भागीदारी और उससे मिलने वाले वास्तविक लाभों को लेकर कांग्रेस पार्टी के भीतर अलग-अलग राय सामने आई है। वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने हाल ही में सार्वजनिक रूप से यह सवाल उठाया कि पिछले कुछ सम्मेलनों से देश को आखिर कितना ठोस लाभ मिला है। दूसरी तरफ, पार्टी के वरिष्ठ सांसद शशि थरूर ने एक अलग दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए कहा कि BRICS केवल आर्थिक लेनदेन का साधन नहीं है, बल्कि यह ग्लोबल साउथ का एक सशक्त प्रतिनिधि मंच है और भारत की अंतरराष्ट्रीय साख को रेखांकित करता है। दिल्ली में आगामी BRICS सम्मेलन की तैयारियों के बीच दोनों नेताओं की इस अलग-अलग टिप्पणी ने राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। पी चिदंबरम ने बहुपक्षीय सम्मेलनों की उपयोगिता पर उठाए सवाल इस पूरे विवाद की शुरुआत पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम के उस बयान से हुई जिसमें उन्होंने भारत की अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मौजूदगी का विश्लेषण किया था। एक सार्वजनिक संबोधन में उन्होंने BRICS के अलावा शंघाई सहयोग संगठन, G20 और QUAD जैसे वैश्विक समूहों में भारत की भूमिका पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत लगातार ऐसे कई बड़े मंचों का हिस्सा बन रहा है, लेकिन अब यह हिसाब लगाना आवश्यक हो गया है कि इनसे देश को वास्तव में क्या हासिल हुआ है। पी चिदंबरम का तर्क था कि पिछले दो-तीन BRICS सम्मेलनों के नतीजों को देखने पर कोई बड़ा ठोस फायदा नजर नहीं आता। उन्होंने आगामी आयोजन को लेकर भी संशय व्यक्त किया और कहा कि उन्हें स्पष्ट नहीं है कि इस बैठक में कितने देशों के राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री हिस्सा लेने पहुंचेंगे। इसके साथ ही उन्होंने यह सवाल भी खड़ा किया कि इतने बड़े स्तर पर मेजबानी करने से भारत के हिस्से में क्या आया है। बीजेपी का तीखा हमला और 'नाराज फूफा' का तंज पी चिदंबरम के बयान के तुरंत बाद सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि विपक्ष का एक वर्ग भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव और कूटनीतिक सफलता को स्वीकार करने में सहज महसूस नहीं कर रहा है। राजनीतिक बयानबाजी के दौरान बीजेपी की ओर से पी चिदंबरम के रुख की तुलना शादी-विवाह में रहने वाले 'नाराज फूफा' से कर दी गई। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो क्लिप साझा की, जिसमें उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के कुछ नेता शीर्ष नेतृत्व के इशारे पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों का विरोध कर रहे हैं। हालांकि इसी बहस के बीच कांग्रेस के पूर्व नेता गौरव वल्लभ ने भी पी चिदंबरम के सवालों के जवाब में BRICS के पांच मुख्य लाभ गिनाए थे। बीजेपी का कहना था कि देश की विदेश नीति और वैश्विक प्रतिष्ठा जैसे विषयों पर सवाल उठाकर विपक्ष अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का रुख कमजोर कर रहा है। शशि थरूर ने गिनाए BRICS के सामरिक और कूटनीतिक फायदे इस पूरे घटनाक्रम के बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने BRICS संगठन को लेकर एक विस्तृत और कूटनीतिक विश्लेषण प्रस्तुत किया। यद्यपि शशि थरूर ने सीधे तौर पर पी चिदंबरम के बयानों का नाम लेकर खंडन नहीं किया, लेकिन उनका आकलन चिदंबरम के दृष्टिकोण से काफी अलग नजर आया। शशि थरूर ने स्पष्ट किया कि कूटनीति के हर पहलू को तुरंत पैसे या व्यापारिक आंकड़ों के तराजू में नहीं तौला जा सकता। शशि थरूर के अनुसार, ग्लोबल साउथ में 100 से अधिक देश शामिल हैं और BRICS के 11 सदस्य देश दुनिया की कुल आबादी और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लगभग 41 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि इतने विशाल आबादी और आर्थिक प्रभाव वाले समूह को एक मंच पर लाना अपने आप में एक बहुत बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि भारत द्वारा इस सम्मेलन की मेजबानी करना देश के लिए अत्यंत गर्व की बात है, क्योंकि एक दर्जन के करीब राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों को एकत्र करना भारत की कूटनीतिक सामर्थ्य को दुनिया के सामने प्रदर्शित करता है। संगठन की आंतरिक चुनौतियां और व्यापार असंतुलन की चिंता व्यापक कूटनीतिक महत्व पर बल देने के साथ ही शशि थरूर ने BRICS की व्यावहारिक सीमाओं और चुनौतियों को भी खुलकर स्वीकार किया। उन्होंने इस बात पर सहमति जताई कि अलग-अलग सदस्य देशों की अपनी-अपनी राष्ट्रीय प्राथमिकताएं और विदेश नीतियां हैं, जिसके कारण कई संवेदनशील वैश्विक मुद्दों पर एक राय बनाना बेहद कठिन होता है। इसके उदाहरण के रूप में उन्होंने हालिया अंतरराष्ट्रीय संघर्षों का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि रूस-यूक्रेन युद्ध और ईरान से जुड़े क्षेत्रीय तनावों पर BRICS देशों के विदेश मंत्री किसी संयुक्त बयान पर सर्वसम्मति नहीं बना सके थे। ऐसी स्थिति में भारत को चेयर की ओर से एक अलग वक्तव्य जारी करना पड़ा था। शशि थरूर ने माना कि यदि भविष्य में भी ऐसी परिस्थितियां दोहराई जाती हैं, तो यह संगठन की एक बड़ी कूटनीतिक कमजोरी मानी जाएगी। इसके अतिरिक्त व्यापारिक मोर्चे पर भी उन्होंने चिंताजनक आंकड़े रेखांकित किए। उन्होंने स्वीकार किया कि BRICS के सदस्य देशों के साथ भारत का व्यापार जरूर बढ़ा है, लेकिन इसका संतुलन भारत के पक्ष में नहीं है। आंकड़ों के अनुसार, भारत का इन देशों से आयात लगातार बढ़ा है जबकि भारतीय निर्यात में गिरावट दर्ज की गई है। इस व्यापार असंतुलन को उन्होंने देश के आर्थिक हितों के लिए एक गंभीर मुद्दा बताया। भारतीय विदेश नीति के मूल्यांकन के दो अलग नजरिए कांग्रेस के दो वरिष्ठ नेताओं के बयानों ने भारतीय विदेश नीति और बहुपक्षीय संगठनों में देश की भागीदारी के मूल्यांकन के दो अलग-अलग दृष्टिकोणों को उजागर किया है। एक तरफ पी चिदंबरम का दृष्टिकोण प्रत्यक्ष, तुरंत मिलने वाले आर्थिक और रणनीतिक फायदों का हिसाब मांगने पर आधारित है। दूसरी तरफ शशि थरूर का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में मंचों की उपलब्धता, बहुपक्षीय वार्ता की क्षमता और ग्लोबल साउथ का नेतृत्व करना भी अपने आप में एक बड़ा दीर्घकालिक लाभ है। दिल्ली सम्मेलन से ठीक पहले सामने आए इन बयानों ने भारत की कूटनीतिक प्राथमिकताओं पर एक नई राष्ट्रीय बहस को जन्म दे दिया है। इसका आप पर असर यह राजनीतिक बहस इस बात को स्पष्ट करती है कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का भारत की अर्थव्यवस्था और व्यापार पर क्या प्रभाव पड़ता है। • भारत में: बहुपक्षीय सम्मेलनों की मेजबानी से देश की वैश्विक साख बढ़ती है, लेकिन व्यापार असंतुलन आयात-निर्यात नीतियों को प्रभावित कर सकता है। इससे घरेलू उद्योग-धंधों और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा पर सीधा असर पड़ता है। • दिल्ली में: आगामी सम्मेलन के चलते राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में सुरक्षा चाक-चौबंद रहेगी और बुनियादी ढांचे के विकास में तेजी आएगी। इससे विदेशी प्रतिनिधियों के आगमन के दौरान स्थानीय यातायात प्रबंधन और आतिथ्य क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा। ऐसा क्यों हुआ यह विवाद पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम द्वारा BRICS और अन्य बहुपक्षीय मंचों से भारत को मिलने वाले प्रत्यक्ष लाभों पर सवाल उठाने के बाद शुरू हुआ। इसके बाद बीजेपी ने उनके रुख की आलोचना की, जबकि पार्टी सांसद शशि थरूर ने इसके कूटनीतिक महत्व पर एक विस्तृत नजरिया पेश किया। • सीधा कारण: आगामी दिल्ली सम्मेलन से पहले पी चिदंबरम ने सार्वजनिक मंच से पूछा कि पिछले सम्मेलनों से देश को क्या ठोस आर्थिक लाभ मिला है। • बीजेपी का रुख: सत्ताधारी पार्टी ने चिदंबरम के बयानों को देश के बढ़ते अंतरराष्ट्रीय प्रभाव को कम आंकने की कोशिश बताया और तीखी टिप्पणी की। • शशि थरूर का विश्लेषण: थरूर ने स्पष्ट किया कि 11 देशों वाला यह मंच वैश्विक आबादी और अर्थव्यवस्था के 41 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करता है, जिससे इसकी रणनीतिक उपयोगिता बनी रहती है। • आंतरिक चुनौतियां: रूस-यूक्रेन और ईरान मुद्दों पर साझा सहमति न बन पाना और BRICS देशों के साथ भारत का बढ़ता व्यापार घाटा इस बहस के मुख्य बिंदु बने। सवाल-जवाब 1. पी चिदंबरम ने BRICS को लेकर क्या सवाल उठाए? पी चिदंबरम ने सवाल उठाया कि BRICS के पिछले सम्मेलनों से भारत को क्या ठोस और वास्तविक फायदा मिला है तथा इसकी मेजबानी से देश को क्या हासिल होगा। 2. शशि थरूर ने BRICS के समर्थन में क्या तर्क दिया? शशि थरूर ने कहा कि BRICS ग्लोबल साउथ का एक बड़ा मंच है, जिसके 11 देश दुनिया की 41 प्रतिशत आबादी और अर्थव्यवस्था का प्रतिनिधित्व करते हैं। 3. बीजेपी ने पी चिदंबरम के बयान पर क्या प्रतिक्रिया दी? बीजेपी ने चिदंबरम के रुख की आलोचना करते हुए उन पर तंज कसा और आरोप लगाया कि विपक्ष को भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका स्वीकार नहीं हो रही है। 4. व्यापार के मोर्चे पर शशि थरूर ने क्या चिंता जताई? थरूर ने माना कि BRICS देशों के साथ भारत का आयात बढ़ा है जबकि निर्यात घटा है, जो व्यापार असंतुलन के लिहाज से चिंता का विषय है। 5. BRICS के विदेश मंत्रियों की बैठक में क्या समस्या आई थी? विदेश मंत्रियों की बैठक में रूस-यूक्रेन और ईरान संघर्ष जैसे मुद्दों पर सर्वसम्मति न बनने के कारण साझा बयान जारी नहीं हो सका था। https://trendkia.com/politics/brics-para-congress-men-ubhare-matabheda-p-chidambaram-ne-uthae-thosa-labha-para-savala-to-shashi-tharoor-ne-ginai-kutanitika-taka-31135 TrendKia — Har trend, sabse pehle.