# चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्षी दलों के प्रदर्शन से अलग रहे असदुद्दीन ओवैसी, चयन प्रक्रिया पर उठाए गंभीर सवाल

> चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्षी दलों के मार्च में शामिल न होने पर असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि वह इस गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं। साथ ही उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त के चयन की मौजूदा व्यवस्था को बदलने की मांग भी उठाई।

**Type:** article · **Category:** राजनीति · **Published:** 2026-10-07 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/politics/chunava-ayoga-ke-khilapha-vipakshi-dalon-ke-pradarshana-se-alaga-rahe-asaduddin-owaisi-chayana-prakriya-para-uthae-gnbhira-savala-44236 · **Language:** Hindi
**Tags:** असदुद्दीन ओवैसी, चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त, विपक्षी गठबंधन, हैदराबाद, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी

दिल्ली की सड़कों पर चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्षी दलों के सांसदों द्वारा निकाले गए विरोध प्रदर्शन में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी शामिल नहीं हुए। मंगलवार को हुए इस मार्च से दूरी बनाए रखने की वजह बताते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी इस गठबंधन का हिस्सा नहीं है, इसलिए वहां जाने का कोई औचित्य नहीं था। तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान अपनी बात रखते हुए उन्होंने इस मुद्दे पर खुलकर अपनी राय रखी।

## गठबंधन के प्रदर्शन से दूरी पर दी सफाई
विरोध प्रदर्शन में अपनी गैर-मौजूदगी पर टिप्पणी करते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि जब वह उस राजनीतिक गुट में शामिल ही नहीं हैं, तो उनके वहां जाने का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने एक प्रचलित मुहावरे का संदर्भ देते हुए कहा कि किसी दूसरे के मामले में अकारण शामिल होने की कोई जरूरत नहीं थी। इसके साथ ही उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और उसकी शीर्ष नियुक्तियों के तौर-तरीकों पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही।

> 

## मुख्य चुनाव आयुक्त के चयन की व्यवस्था पर सवाल
कार्यक्रम के दौरान असदुद्दीन ओवैसी ने मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति की मौजूदा कानूनी प्रणाली को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि मौजूदा व्यवस्था पूरी तरह से कार्यपालिका यानी सरकार के पक्ष में झुकी हुई है, जो लोकतांत्रिक संतुलन के लिहाज से सही नहीं है। उनका मानना है कि जब तक शीर्ष पद पर चयन का ढांचा पारदर्शी नहीं होगा, तब तक चुनावी व्यवस्था की निष्पक्षता पर सवाल उठते रहेंगे।

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने नियुक्ति पैनल में सुधार का एक स्पष्ट प्रस्ताव भी रखा। उन्होंने सुझाव दिया कि मुख्य चुनाव आयुक्त का फैसला किसी एक पक्ष के हाथ में नहीं होना चाहिए। इस प्रक्रिया में देश के मुख्य न्यायाधीश, प्रधानमंत्री और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष तीनों को मिलकर निर्णय लेना चाहिए, ताकि व्यवस्था में कार्यपालिका, न्यायपालिका और विपक्ष का उचित संतुलन बना रहे।

## बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण का विरोध
हैदराबाद के इसी मंच से असदुद्दीन ओवैसी ने बिहार राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया पर भी तीखा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने याद दिलाया कि जब बिहार में यह कवायद शुरू की गई थी, तब भी उन्होंने अपनी आपत्ति मजबूती से दर्ज कराई थी।

उन्होंने आरोप लगाया कि यह विशेष पुनरीक्षण सही और पारदर्शी तरीका नहीं है। इस प्रक्रिया पर कड़ा रुख अपनाते हुए उन्होंने दावा किया कि यह कवायद असल में पिछले दरवाजे से एनआरसी लागू करने जैसा कदम प्रतीत होती है, जिस पर तुरंत ध्यान देने की आवश्यकता है।

## विपक्षी दलों का संसद से आयोग दफ्तर तक मार्च
उल्लेखनीय है कि मंगलवार के दिन विपक्षी खेमे से जुड़ी 19 पार्टियों के सांसदों ने संसद भवन के मकर द्वार से लेकर निर्वाचन सदन तक विरोध मार्च आयोजित किया था। इस प्रदर्शन के दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा सुरक्षा घेरा पार करके आकाशवाणी भवन के परिसर में धरने पर बैठ गए थे।

घटनाक्रम के बाद पुलिस प्रशासन ने मंगलवार रात राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत कांग्रेस के कई नेताओं को हिरासत में ले लिया था। हालांकि प्रशासनिक कार्रवाई के कुछ ही समय बाद इन सभी नेताओं को रिहा कर दिया गया था। इसी पूरे सियासी घटनाक्रम के बीच असदुद्दीन ओवैसी ने स्पष्ट कर दिया कि वह इस संयुक्त मार्च से पूरी तरह अलग थे।

## इसका आप पर असर
यह राजनीतिक बयानबाजी चुनावी संस्थानों की कार्यप्रणाली और विपक्षी ध्रुवीकरण की दिशा को प्रभावित करती है।

- **चुनावी प्रक्रिया पर प्रभाव:** मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति व्यवस्था में बदलाव की मांग चुनावी संस्थाओं की स्वायत्तता पर सार्वजनिक चर्चा को बढ़ाती है। इससे आने वाले दिनों में चुनाव आयोग की कार्यशैली पर निगरानी और तीखी हो सकती है।
- **मतदाता सूची संशोधन:** मतदाता सूची में विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया पर उठाए गए सवालों से नागरिकों में जागरूकता बढ़ेगी। बिहार के मतदाताओं को अपनी प्रविष्टियों और दस्तावेजों की दोबारा जांच करने की जरूरत महसूस हो सकती है।
- **विपक्षी राजनीति की तस्वीर:** असदुद्दीन ओवैसी के इस कदम से स्पष्ट होता है कि विपक्षी गठबंधन संसद के बाहर सभी गैर-भाजपा दलों को एकजुट करने में पूरी तरह सफल नहीं है। इसका सीधा असर संसद के भीतर और बाहर क्षेत्रीय दलों के स्वतंत्र रुख पर दिखेगा।
- **कानूनी बहसों का दायरा:** मुख्य न्यायाधीश, प्रधानमंत्री और विपक्ष के नेता वाली चयन समिति की मांग कानूनी और संसदीय मंचों पर दोबारा चर्चा में आ सकती है। इस पर नागरिक समाज और कानूनी विशेषज्ञ नए सिरे से विमर्श कर सकते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
असदुद्दीन ओवैसी ने यह बयान विपक्षी दलों के उस मार्च के बाद दिया, जिसमें दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ 19 राजनीतिक दलों ने हिस्सा लिया था। उनकी पार्टी के इसमें शामिल न होने को लेकर सवाल उठ रहे थे, जिस पर उन्होंने औपचारिक स्पष्टीकरण दिया।

- **गठबंधन में गैर-शामिल होना:** असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी विपक्षी गठबंधन का औपचारिक हिस्सा नहीं है। इसी वजह से उन्होंने उनके संयुक्त विरोध प्रदर्शन में मंच या सड़क साझा करने से परहेज किया।
- **नियुक्ति कानून पर असहमति:** मुख्य चुनाव आयुक्त के चयन के लिए हाल में बने कानूनी ढांचे में कार्यपालिका को मुख्य भूमिका दी गई है। ओवैसी का तर्क है कि इससे आयोग की स्वतंत्रता कमजोर होती है और इसमें न्यायपालिका की भागीदारी जरूरी है।
- **बिहार पुनरीक्षण पर पुरानी आपत्ति:** बिहार में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण को लेकर ओवैसी पहले से ही आशंकाएं जताते रहे हैं। उनका मानना है कि यह प्रशासनिक कदम नागरिकता संबंधी नियमों को पिछले रास्ते से लागू करने का जरिया बन सकता है।

## सवाल-जवाब

### 1. असदुद्दीन ओवैसी चुनाव आयोग के खिलाफ हुए विपक्षी मार्च में क्यों नहीं गए?
उन्होंने बताया कि उनकी पार्टी विपक्षी गठबंधन का हिस्सा नहीं है, इसलिए वह उनके इस विरोध प्रदर्शन में शामिल नहीं हुए।

### 2. मुख्य चुनाव आयुक्त के चयन को लेकर ओवैसी ने क्या सुझाव दिया?
उन्होंने सुझाव दिया कि मुख्य चुनाव आयुक्त का चयन मुख्य न्यायाधीश, प्रधानमंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता की संयुक्त समिति द्वारा किया जाना चाहिए।

### 3. बिहार में मतदाता सूची के किस कदम पर ओवैसी ने आपत्ति जताई?
उन्होंने बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का विरोध किया और इसे पिछले दरवाजे से एनआरसी लाने जैसा कदम बताया।

### 4. मंगलवार को दिल्ली में किन दलों ने प्रदर्शन किया था?
विपक्षी गठबंधन से जुड़ी 19 पार्टियों के सांसदों ने संसद के मकर द्वार से निर्वाचन सदन तक विरोध मार्च निकाला था।

### 5. प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस के किन नेताओं को हिरासत में लिया गया था?
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई कांग्रेस नेताओं को पुलिस ने कुछ देर के लिए हिरासत में लिया था।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._