चुनाव नतीजों पर सवाल उठाने पर भड़के शिवराज चौहान, मल्लिकार्जुन खरगे और कांग्रेस पर साधा तीखा निशाना केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस पर हार के बाद जनादेश और चुनाव आयोग का अपमान करने का आरोप लगाते हुए कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कर्नाटक और तेलंगाना की जीत का हवाला देकर कांग्रेस के दोहरे रवैये पर सवाल खड़े किए। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और मुख्य विपक्षी दल पर तीखे प्रहार करते हुए आरोप लगाया है कि चुनावी शिकस्त मिलने के बाद जनादेश को खारिज करना पार्टी की पुरानी फितरत बन चुका है। चुनाव आयोग की विश्वसनीयता और मतदान प्रक्रिया को लेकर विपक्षी खेमे की तरफ से उठाए जा रहे सवालों पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा कि जब भी चुनावी नतीजे कांग्रेस के खिलाफ जाते हैं, पार्टी संवैधानिक संस्थाओं पर ठीकरा फोड़ने लगती है। जीत पर आयोग सही, हार पर गलत: तीन राज्यों का दिया हवाला शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस के दोहरे मानदंड पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी जब कहीं विजय हासिल करती है तब उसे चुनाव आयोग की निष्पक्षता में कोई खोट नजर नहीं आता। उन्होंने पूछा कि अगर देश की चुनावी व्यवस्था में ही कोई गड़बड़ी है, तो कांग्रेस कर्नाटक, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश में सरकार बनाने में कैसे सफल रही? केंद्रीय मंत्री के अनुसार, जीत का सेहरा खुद बांधना और पराजय मिलते ही आयोग को कटघरे में खड़ा करना विपक्ष के गैर-जिम्मेदाराना रवैये को उजागर करता है। बैलेट पेपर की मांग पर घेरा, तकनीकी सुधारों का किया बचाव मतपत्रों के जरिए चुनाव कराने की विपक्ष की लगातार उठ रही मांग को आड़े हाथों लेते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि कांग्रेस देश की चुनावी प्रक्रिया को 80 और 90 के दशक के दौर में पीछे धकेलना चाहती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आधुनिक तकनीक के समावेश ने मतदान और मतगणना की पूरी प्रणाली को बेहद पारदर्शी बना दिया है। ऐसे में पारदर्शी व्यवस्था को नकारते हुए पुराने ढर्रे पर लौटने की मांग करना समझ से परे है और यह प्रगतिशील भारत की सोच के खिलाफ है। आपातकाल की याद दिलाते हुए संवैधानिक संस्थाओं पर हमले का आरोप संवैधानिक मर्यादाओं का जिक्र करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने आरोप लगाया कि हार का सामना करने पर चुनाव आयोग को बदनाम करना और स्वायत्त संस्थाओं के ढांचे को चोट पहुंचाना कांग्रेस के डीएनए का हिस्सा है। उन्होंने इतिहास के पन्नों को पलटते हुए कहा कि कांग्रेस पहले भी आपातकाल थोपकर देश के लोकतंत्र को गहरी चोट पहुंचा चुकी है। वर्तमान समय में भी संवैधानिक संस्थाओं के प्रति अविश्वास पैदा करके एक बेहद खतरनाक राजनीतिक खेल खेला जा रहा है। अराजकता की राह पर जाने की चेतावनी केंद्रीय मंत्री ने चेताया कि देश की स्थापित संस्थाओं और प्रक्रियाओं को बार-बार कटघरे में खड़ा करके उन्हें ध्वस्त करने का प्रयास राष्ट्रहित के लिए बेहद घातक साबित हो सकता है। यह रवैया समाज और राजनीति को अराजकता की तरफ धकेलने जैसा है। उन्होंने भरोसा जताया कि कांग्रेस के इस प्रकार के मंसूबे और नापाक इरादे कभी सफल नहीं हो पाएंगे। इसके साथ ही उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती के लिए सभी राजनीतिक दलों से परिपक्वता और जिम्मेदारी भरा आचरण करने की अपील की। इसका आप पर असर यह राजनीतिक बहस भारतीय चुनावी व्यवस्था और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की विश्वसनीयता को सीधे तौर पर प्रभावित करती है। • मतदाताओं के लिए: चुनावी नतीजों पर राजनीतिक बयानबाजी से मतदान प्रणाली और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों पर चर्चा तेज होगी। नागरिक चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और संवैधानिक संस्थाओं के काम करने के तौर-तरीकों को लेकर अधिक जागरूक होंगे। • चुनावी प्रक्रिया पर प्रभाव: मतपत्रों की वापसी बनाम डिजिटल वोटिंग की बहस से तकनीक आधारित मतदान सुधारों पर विमर्श बढ़ेगा। इससे भविष्य के चुनावों में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए चुनाव आयोग पर दबाव और ध्यान दोनों केंद्रित रहेंगे। • संवैधानिक संस्थाओं का भरोसा: राजनीतिक दलों द्वारा लगाए जाने वाले आरोपों से संस्थाओं की साख पर सार्वजनिक राय बनेगी। मतदाताओं में चुनाव आयोग और निष्पक्ष चुनाव संचालन के प्रति भरोसा बनाए रखना सबसे अहम मुद्दा रहेगा। • राजनीतिक जवाबदेही: हार-जीत के बाद राजनीतिक दलों के बदलते बयानों से मतदाता उनके रुख का मूल्यांकन करेंगे। जनता चुनावी दावों और वास्तविक चुनावी प्रदर्शन के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से समझ सकेगी। ऐसा क्यों हुआ चुनावी पराजयों के बाद विपक्षी दलों द्वारा चुनाव आयोग और मतदान प्रक्रिया पर लगातार उठाए जा रहे सवालों के जवाब में केंद्रीय मंत्री का यह बयान सामने आया है। • तात्कालिक पृष्ठभूमि: कांग्रेस और विपक्षी दल हालिया चुनावी नतीजों और वोटिंग व्यवस्था को लेकर चुनाव आयोग पर निष्पक्ष न होने के आरोप लगा रहे थे। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस नेतृत्व और मल्लिकार्जुन खरगे के इन्हीं आरोपों का कड़ा जवाब दिया। • दोहरे रुख का मुद्दा: विपक्ष पर यह आरोप लगाया गया कि वह अपनी जीत वाले राज्यों में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को स्वीकार करता है जबकि हार मिलने पर उसे कटघरे में खड़ा करता है। इसी विरोधाभास को उजागर करने के लिए कर्नाटक, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश का उदाहरण सामने रखा गया। • मतपत्र बनाम तकनीक का विवाद: कई विपक्षी दल ईवीएम की जगह मतपत्रों से मतदान कराने की मांग दोहरा रहे हैं। सत्ता पक्ष इस मांग को आधुनिक तकनीकी पारदर्शिता के विरुद्ध और पुरानी व्यवस्था की तरफ लौटने का प्रयास मानता है। सवाल-जवाब 1. शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस और मल्लिकार्जुन खरगे पर क्या आरोप लगाए? उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव हारने के बाद जनादेश का अपमान करना और संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करना कांग्रेस की पुरानी आदत है। 2. केंद्रीय मंत्री ने कर्नाटक, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश का जिक्र क्यों किया? उन्होंने सवाल उठाया कि अगर चुनाव आयोग की व्यवस्था गलत थी, तो कांग्रेस इन तीनों राज्यों में चुनाव कैसे जीत गई। 3. मतपत्र से चुनाव कराने की मांग पर शिवराज चौहान का क्या रुख रहा? उन्होंने कहा कि मतपत्रों की मांग करके कांग्रेस देश को 80 और 90 के दशक में वापस धकेलना चाहती है, जबकि तकनीक ने व्यवस्था में पारदर्शिता लाई है। 4. शिवराज सिंह चौहान ने आपातकाल का उल्लेख किस संदर्भ में किया? उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने आपातकाल लगाकर पहले भी लोकतंत्र को कमजोर किया था और अब वह संस्थाओं पर सवाल उठाकर खतरनाक खेल खेल रही है। https://trendkia.com/politics/chunava-natijon-para-savala-uthane-para-bharake-shivraj-chouhan-mallikarjun-kharge-aura-congress-para-sadha-tikha-nishana-42623 TrendKia — Har trend, sabse pehle.