# चुनावी राजनीति में युवा मतदाताओं की बढ़ती धमक के बीच विधानसभाओं में जेन-जी जनप्रतिनिधियों का अकाल

> देशभर के प्रमुख राजनीतिक दल आगामी चुनावों में जेन-जी को बड़े वोट बैंक के रूप में साधने में जुटे हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और हिमाचल समेत विभिन्न राज्यों की विधानसभाओं में इस युवा पीढ़ी की विधायी उपस्थिति 1 प्रतिशत से भी कम बनी हुई है।

**Type:** article · **Category:** राजनीति · **Published:** 2026-08-27 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/politics/chunavi-rajaniti-men-yuva-matadataon-ki-barhati-dhamaka-ke-bicha-vidhanasabhaon-men-gen-z-janapratinidhiyon-ka-akala-23205 · **Language:** Hindi
**Tags:** जेन जी विधायक, विधानसभा चुनाव, युवा राजनीति, उत्तर प्रदेश राजनीति, बिहार विधानसभा, रविन्द्र सिंह भाटी, राजनीतिक प्रतिनिधित्व

भारत की राष्ट्रीय और राज्यस्तरीय राजनीति में नवयुवाओं यानी जेन-जी की आवाज को साधने के लिए राजनीतिक दल तमाम तरह की रणनीतियां बना रहे हैं। 1997 से 2012 के बीच जन्मे इस युवा वर्ग को भावी चुनाव परिणामों को तय करने वाले सबसे बड़े संभावित वोट बैंक के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि राजनीतिक रैलियों और चुनावी वादों से इतर जब राज्य विधानसभाओं के वास्तविक विधायी ढाँचे पर नज़र डाली जाती है, तो चुनावी दावों और विधायी प्रतिनिधित्व के बीच भारी अंतर उजागर होता है। उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, उत्तराखंड, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और हरियाणा जैसे राज्यों के आधिकारिक चुनावी आंकड़े बताते हैं कि विशाल युवा आबादी और मतदाताओं के रूप में मजबूत उपस्थिति के बावजूद, विधानसभाओं के भीतर जेन-जी श्रेणी के विधायकों की उपस्थिति नगण्य बनी हुई है। देश के प्रमुख राज्यों में इस पीढ़ी के केवल एक या दो प्रतिनिधि ही विधायक बन सके हैं, जबकि कई राज्यों में इनका खाता तक नहीं खुला है। ऐसे में यह सवाल बेहद गंभीर हो जाता है कि राजनीतिक दल भले ही युवाओं को लुभाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हों, लेकिन विधानसभा की चौखट के भीतर जेन-जी के अधिकारों और उनकी जरूरतों को उठाने वाला कौन है।

 

## उत्तर प्रदेश विधानसभा में 15 प्रतिशत आबादी के मुकाबले महज दो जेन-जी चेहरे

उत्तर प्रदेश की राजनीति देश के चुनावी मिजाज को दिशा देने के लिए जानी जाती है। राज्य की कुल आबादी में जेन-जी वर्ग की हिस्सेदारी लगभग 15 फीसदी दर्ज की गई है। इस विशाल जनसांख्यिकीय आधार के बावजूद, 403 सदस्यीय उत्तर प्रदेश विधानसभा में इस युवा पीढ़ी के प्रतिनिधियों की संख्या नगण्य है। विधानसभा के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार तकनीकी रूप से वर्तमान में केवल 2 विधायक ही जेन-जी श्रेणी के अंतर्गत आते हैं।

वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में एक अन्य प्रत्याशी ने 26 साल की उम्र में जीत दर्ज की थी, लेकिन अब वे 30 वर्ष के हो चुके हैं, जिससे उन्हें अब जेन-जी श्रेणी में नहीं गिना जा सकता। सदन में मौजूद दो जेन-जी विधायकों में पहला नाम गाजीपुर जिले की सैदपुर विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के विधायक अंकित भारती का है। वहीं दूसरा नाम राहुल राजपूत का है, जिन्हें वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने रायबरेली जिले की हरचंदपुर विधानसभा सीट से मैदान में उतारा था। राहुल राजपूत ने उस चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी और वे उत्तर प्रदेश विधानसभा के सबसे युवा विधायक बनने का गौरव हासिल करने में सफल रहे थे। 403 सीटों वाले विशाल सदन में महज दो विधायकों का होना यह दर्शाता है कि 15 प्रतिशत आबादी का प्रतिनिधित्व नाममात्र का रह गया है।

 

## बिहार विधानसभा में 243 में से केवल दो युवा विधायक जेन-जी दायरे में

बिहार विधानसभा में भी युवा नेताओं की मौजूदगी को लेकर राजनीतिक हलकों में अक्सर चर्चाएं होती रहती हैं। हालांकि 243 विधायकों की कुल क्षमता वाले इस सदन में जब 1997 के बाद जन्मे जेन-जी विधायकों की गिनती की जाती है, तो संख्या केवल 2 पर सिमट कर रह जाती है। हालांकि अगर 40 वर्ष या उससे कम उम्र के विधायकों का दायरा देखा जाए, तो बिहार विधानसभा में ऐसे कुल 32 विधायक मौजूद हैं।

जेन-जी श्रेणी में आने वाली सबसे कम उम्र की दो महिला विधायकों में मैथिली ठाकुर और सोनम रानी का नाम शामिल है। आधिकारिक डेटा सूची के मुताबिक, अलीनगर विधानसभा सीट से चुनाव जीतने वाली मैथिली ठाकुर का जन्म 25 जुलाई 2000 को हुआ था और उनकी वर्तमान आयु लगभग 26 वर्ष है। वहीं त्रिवेणीगंज विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करने वाली सोनम रानी का जन्म 5 मई 1998 को हुआ था और उनकी उम्र लगभग 28 वर्ष है। इस प्रकार, 243 सदस्यों वाली बिहार विधानसभा में केवल यही दो महिला जनप्रतिनिधि जेन-जी पीढ़ी का प्रत्यक्ष प्रतिनिधित्व करती हैं।

 

## झारखंड विधानसभा में 81 सदस्यों के बीच जेन-जी का खाता भी नहीं खुला

झारखंड विधानसभा के वर्तमान 81 विधायकों की आधिकारिक सूची और उनकी जन्म तिथियों के विश्लेषण से बेहद चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। झारखंड की मौजूदा विधानसभा में जेन-जी श्रेणी से ताल्लुक रखने वाला एक भी विधायक निर्वाचित होकर नहीं पहुंचा है। सदन में इस पीढ़ी की उपस्थिति पूरी तरह शून्य है।

यदि 40 वर्ष या उससे कम उम्र के युवा जनप्रतिनिधियों की बात की जाए, तो झारखंड विधानसभा में ऐसे कुल 5 विधायक मौजूद हैं। हालांकि ये सभी 5 युवा विधायक जेन-जी से ठीक पहले की पीढ़ी, यानी मिलेनियल्स श्रेणी में आते हैं। राज्य की कुल 81 सीटों में युवा मुद्दों पर बात करने वाले कई चेहरे तो हैं, लेकिन 1997 के बाद जन्मी नई पीढ़ी का विधायी पटल पर सीधा प्रतिनिधित्व पूरी तरह गायब है।

 

## उत्तराखंड में आगामी चुनाव की तैयारी और दिल्ली बैठक के बाद भी सदन शून्य

उत्तराखंड में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, जिसके चलते सभी प्रमुख राजनीतिक दल हर वर्ग के मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए रणनीतियां तैयार कर रहे हैं। राज्य में 1997 से 2012 के बीच जन्मे जेन-जी युवाओं की उम्र वर्तमान में न्यूनतम 14 वर्ष और अधिकतम 29 वर्ष के बीच है। राजनीतिक दलों को इस वर्ग में भविष्य का मजबूत वोट बैंक नजर आ रहा है, जिसके चलते पार्टियां मिशन मोड में काम कर रही हैं।

हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान राजनीतिक नेतृत्व को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि वे आगामी चुनावी तैयारियों में जेन-जी युवाओं पर विशेष ध्यान केंद्रित करें। लेकिन अगर वर्तमान 70 सदस्यीय उत्तराखंड विधानसभा की तस्वीर देखें, तो वहां एक भी जेन-जी विधायक मौजूद नहीं है। सदन में गिने-चुने मिलेनियल विधायक ही मौजूद हैं, जो यह दर्शाता है कि चुनावी रणनीतियों में युवाओं को प्राथमिकता देने की घोषणाओं के बावजूद विधायी प्रतिनिधित्व में बड़ा शून्य बना हुआ है।

 

## राजस्थान में ढाई करोड़ जेन-जी आबादी पर शिव से अकेले निर्दलीय विधायक

राजस्थान की राजनीति में जेन-जी युवाओं का प्रभाव सड़कों और रैलियों में व्यापक रूप से दिखाई देता है। साढ़े आठ करोड़ से अधिक आबादी वाले राजस्थान में लगभग ढाई करोड़ लोग जेन-जी श्रेणी के अंतर्गत आते हैं। इतनी बड़ी आबादी और 200 विधानसभा सीटों वाले इस विशाल राज्य में इस पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करने वाले केवल एक विधायक मौजूद हैं।

बाड़मेर जिले के शिव विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय विधायक के रूप में चुनाव जीतने वाले रविन्द्र सिंह भाटी राजस्थान विधानसभा में जेन-जी श्रेणी के इकलौते विधायक हैं। उनके अलावा 200 सदस्यों वाले सदन में कोई अन्य विधायक इस श्रेणी में नहीं आता है। रविन्द्र सिंह भाटी को सही मायनों में जेन-जी का अग्रणी युवा नेता माना जाता है। उनकी चुनावी जीत में इस युवा पीढ़ी ने निर्णायक भूमिका निभाई थी और उनकी जनसभाओं तथा बैठकों में युवाओं की भारी भीड़ देखने को मिलती है। हालांकि ढाई करोड़ की युवा आबादी के लिए सदन में केवल एक विधायक का होना जनसांख्यिकी और प्रतिनिधित्व के असंतुलन को उजागर करता है।

 

## हिमाचल प्रदेश में विधानसभा में शून्य लेकिन पंचायत स्तर पर जेन-जी की मजबूत हिस्सेदारी

हिमाचल प्रदेश की विधानसभा में वर्तमान समय में कोई भी जेन-जी विधायक मौजूद नहीं है। हालांकि राज्य के ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों, जैसे पंचायतों, नगर निकायों और नगर निगमों में जेन-जी की भागीदारी काफी उत्साहजनक है। हाल ही में संपन्न हुए पंचायत चुनावों में बड़ी संख्या में जेन-जी युवाओं ने जीत दर्ज कर स्थानीय स्वशासन में अपनी जगह बनाई है।

राज्य विधानसभा में युवा विधायकों की स्थिति पर नजर डालें तो लाहौल स्पीति से विधायक अनुराधा राणा सबसे कम उम्र की विधायक हैं। अनुराधा राणा की वर्तमान आयु 33 वर्ष है और आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार उनका जन्म 1933 में हुआ था। उन्होंने 31 वर्ष की आयु में विधायक का चुनाव जीता था। इसके अलावा विक्रमादित्य सिंह वर्तमान में 36 वर्ष के हैं, जिन्होंने पहली बार 2017 में 26 साल की उम्र में विधानसभा चुनाव जीतकर विधायक पद संभाला था। अन्य युवा विधायकों में करसोग से भाजपा विधायक दीप राज 37 वर्ष के हैं, आनी सीट से भाजपा विधायक लोकेंद्र कुमार 37 वर्ष के हैं और हमीरपुर सदर से विधायक आशीष शर्मा 39 वर्ष के हैं। हिमाचल प्रदेश विधानसभा में 30 से 40 वर्ष की आयु सीमा के भीतर कुल 8 विधायक मौजूद हैं, लेकिन जेन-जी श्रेणी का एक भी प्रतिनिधि सदन में मौजूद नहीं है।

 

## हरियाणा में 90 विधायकों में 0.9 प्रतिशत से भी कम जेन-जी प्रतिनिधित्व

वर्ष 2024 के हरियाणा विधानसभा चुनाव के परिणामों और सांख्यिकी विश्लेषण के अनुसार, 90 सदस्यीय सदन में 40 वर्ष या उससे कम उम्र (वर्ष 1984 के बाद जन्मे) के कुल 9 विधायक चुनाव जीतकर आए हैं। हालांकि उम्र के तय मानकों के अनुसार इन 9 विधायकों को मिलेनियल्स श्रेणी में रखा जाता है।

अगर केवल जेन-जी श्रेणी की बात करें, तो 90 विधायकों वाले इस सदन में केवल 1 ही विधायक निर्वाचित होकर पहुंच सके हैं। प्रतिशत के लिहाज से देखा जाए तो कुल विधायकों में जेन-जी की हिस्सेदारी 0.9 प्रतिशत से भी कम है। वहीं यदि 40 वर्ष तक के सभी युवा विधायकों को एक साथ जोड़ दिया जाए, तो हरियाणा विधानसभा में युवाओं का कुल प्रतिनिधित्व लगभग 9 प्रतिशत के आसपास पहुंच जाता है।

 

## विधायी प्रतिनिधित्व की कमी और युवा राजनीति के भविष्य पर गहराते सवाल

विभिन्न राज्यों के विधानसभा आंकड़ों का यह तुलनात्मक अध्ययन स्पष्ट करता है कि भारत की चुनावी राजनीति में युवा मतदाताओं को आकर्षित करने की होड़ तो मची हुई है, लेकिन उन्हें नीति निर्माण की मुख्यधारा में लाने के प्रयास बेहद सीमित हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, हरियाणा, झारखंड, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में राजनीतिक दल युवा केंद्रित अभियानों पर करोड़ों रुपये खर्च कर रहे हैं, परंतु टिकट बंटवारे के समय जेन-जी उम्मीदवारों पर भरोसा जताने से परहेज करते नजर आते हैं।

जब तक राजनीतिक दल युवा कार्यकर्ताओं को चुनाव मैदान में उतारने और उन्हें विधायी संस्थाओं तक पहुँचाने के लिए गंभीर कदम नहीं उठाएंगे, तब तक विधानसभाओं के भीतर जेन-जी के मुद्दों और प्राथमिकताओं को वास्तविक आवाज मिलना कठिन रहेगा। विशाल जनसांख्यिकीय लाभांश वाले देश में चुनावी रैलियों की भीड़ और सदन के भीतर जनप्रतिनिधित्व के बीच का यह अंतर भारतीय लोकतंत्र के समक्ष एक नई चुनौती पेश कर रहा है।

## इसका आप पर असर
विधानसभाओं में जेन-जी जनप्रतिनिधियों की कमी देश के करोड़ों युवा नागरिकों और मतदाताओं पर सीधे असर डालती है।

  - **भारत में:** राजनीतिक दलों द्वारा युवा मुद्दों पर बात करने के बावजूद नीति निर्माण में जेन-जी का प्रत्यक्ष प्रतिनिधित्व नगण्य है। इसके परिणामस्वरूप रोजगार, तकनीकी कौशल, शिक्षा और युवा कल्याण से जुड़ी नीतियां अक्सर बुजुर्ग या मध्यम आयु वर्ग के नेताओं की प्राथमिकताओं के आधार पर तैयार की जाती हैं।

  - **उत्तर प्रदेश और बिहार में:** विशाल युवा आबादी वाले इन राज्यों में जेन-जी विधायकों की संख्या केवल 2-2 है। इसका मतलब है कि राज्य स्तरीय बजट और कल्याणकारी योजनाओं में युवा वर्ग के वास्तविक दृष्टिकोण को शामिल करने का अवसर काफी सीमित रह जाता है।

  - **राजस्थान में:** 2.5 करोड़ की विशाल जेन-जी आबादी का प्रतिनिधित्व केवल 1 विधायक कर रहे हैं। इससे स्थानीय युवाओं की रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित मांगों को सदन के पटल पर उठाने की जिम्मेदारी सीमित हाथों में सिमट जाती है।

  - **उत्तराखंड और झारखंड में:** सदन में शून्य जेन-जी प्रतिनिधित्व होने के कारण नए विचारों, डिजिटल अर्थव्यवस्था की ज़रूरतों और स्टार्टअप पहलों को विधायी प्राथमिकता मिलने में देरी हो सकती है।

  - **हिमाचल प्रदेश में:** यद्यपि विधानसभा में जेन-जी विधायक नहीं हैं, लेकिन पंचायतों में युवा भागीदारी बढ़ने से स्थानीय ग्रामीण स्तर पर विकास की नई सोच लागू हो रही है।

## सवाल-जवाब

### 1. उत्तर प्रदेश विधानसभा में कितने जेन-जी विधायक हैं?
उत्तर प्रदेश की 403 सदस्यीय विधानसभा में केवल 2 विधायक ही तकनीकी रूप से जेन-जी श्रेणी के अंतर्गत आते हैं। इनमें सैदपुर से अंकित भारती और हरचंदपुर से राहुल राजपूत शामिल हैं।

### 2. बिहार विधानसभा में सबसे कम उम्र के जेन-जी विधायक कौन हैं?
बिहार विधानसभा में मैथिली ठाकुर (अलीनगर, जन्म 25 जुलाई 2000, उम्र ~26 वर्ष) और सोनम रानी (त्रिवेणीगंज, जन्म 5 मई 1998, उम्र ~28 वर्ष) दो जेन-जी विधायक हैं।

### 3. राजस्थान में जेन-जी आबादी कितनी है और उनके कितने विधायक हैं?
राजस्थान में लगभग 2.5 करोड़ जेन-जी आबादी है, लेकिन 200 सीटों वाली विधानसभा में केवल 1 विधायक रविन्द्र सिंह भाटी (शिव विधानसभा क्षेत्र) इस श्रेणी से आते हैं।

### 4. झारखंड और उत्तराखंड विधानसभा में कितने जेन-जी विधायक हैं?
झारखंड की 81 सदस्यीय विधानसभा और उत्तराखंड की 70 सदस्यीय विधानसभा में एक भी (0) जेन-जी विधायक मौजूद नहीं है।

### 5. हिमाचल प्रदेश में युवा राजनीति की क्या स्थिति है?
हिमाचल प्रदेश विधानसभा में कोई जेन-जी विधायक नहीं है, हालांकि 30 से 40 वर्ष की आयु के 8 विधायक हैं। लाहौल स्पीति से अनुराधा राणा (उम्र 33) सबसे कम उम्र की विधायक हैं, जबकि स्थानीय पंचायतों में जेन-जी की भागीदारी काफी मजबूत है।

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