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  "title": "सौरव दास और आशुतोष रांका को याद कर भावुक हुए अभिजीत दिपके, तिहाड़ जेल में बंद हैं सीजेपी नेता",
  "summary": "दिल्ली के तिहाड़ जेल में बंद कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को याद करते हुए फाउंडर अभिजीत दिपके इंस्टाग्राम पर लाइव आकर भावुक हो गए। पुलिस ने दोनों नेताओं की न्यायिक हिरासत दो दिन बढ़ा दी है और मामले को अपराध शाखा को सौंप दिया है।",
  "content": "कॉकरोच जनता पार्टी के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका इस समय दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद हैं, जिन्हें लेकर पार्टी के फाउंडर अभिजीत दिपके काफी भावुक नजर आए। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर लाइव आकर अभिजीत दिपके ने अपने दोनों साथियों को याद किया और इस दौरान उनकी आंखें नम हो गईं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी आंखों में जो आंसू हैं, वे किसी भी प्रकार के डर की वजह से नहीं हैं, बल्कि इसलिए छलक आए क्योंकि सौरव और आशु इस वक्त जेल के सलाखों के पीछे हैं। अभिजीत दिपके ने दोनों को अपना भाई बताया और कहा कि वह उन्हें बेहद याद कर रहे हैं। उन्होंने यह भी साझा किया कि उनका एक व्हाट्सएप ग्रुप है, जिसमें वे तीनों नियमित रूप से एक-दूसरे को मीम्स भेजा करते थे।\n\n \n\nपरिवार के पास लौटने और गांधी के आदर्शों पर चलने की अपील\n\nलाइव सत्र के दौरान अभिजीत दिपके ने प्रदर्शन कर रहे लोगों से शांति बनाए रखने और अपने घरों को वापस लौटने की अपील की। उन्होंने कहा कि हमारे भीतर नफरत की जगह केवल प्यार होना चाहिए और इसके लिए यह बहुत जरूरी है कि हम अपने परिवार के आसपास रहें। उन्होंने समर्थकों से आग्रह किया कि वे अपने परिवारों के पास वापस जाएं और उनका पूरा ख्याल रखें। दिपके ने आगे कहा कि हम उन लोगों के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं जो व्यक्तिगत रूप से हमें जानते भी नहीं हैं। महात्मा गांधी ने भी दुनिया को यही सीख दी थी कि यदि किसी अनजान व्यक्ति को भी जरूरत पड़े, तो उसके अधिकारों के लिए डटकर लड़ाई लड़नी चाहिए।\n\n \n\nभावनात्मकता को ताकत बताते हुए संघर्ष जारी रखने का संकल्प\n\nअपनी बात को आगे बढ़ाते हुए अभिजीत दिपके ने कहा कि यदि कोई उनकी इस भावुकता को कमजोरी समझता है, तो यह उनकी अपनी आदत हो सकती है, लेकिन असल में यह भावना उनकी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने दृढ़ता के साथ कहा कि वे इस मुहिम से पीछे हटने वाले बिल्कुल नहीं हैं। जब सौरव और आशु जेल से बाहर आएंगे, तो वे अपने चेहरों पर वही पुरानी मुस्कान लेकर लौटेंगे और महात्मा गांधी के बताए हुए मार्ग पर आगे बढ़ते रहेंगे। दिपके ने आरोप लगाया कि सीजेपी नेताओं को बेवजह परेशान किया जा रहा है, इसके बावजूद वे मुस्कुराते हुए जेल के अंदर जा रहे हैं और कोर्ट में पेश हो रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि कोई भी व्यक्ति इन नेताओं के भीतर नफरत की भावना पैदा नहीं कर सकता है। उन्होंने समर्थकों से अपील की कि वे अपने भीतर के प्रेम और करुणा को कभी कम न होने दें, क्योंकि जिस दिन लोगों का प्रेम कम हो गया, उस दिन उन ताकतों की जीत हो जाएगी जो डरा-धमकाकर आवाज को चुप कराना चाहती हैं।\n\n \n\nसीजेपी नेताओं की बढ़ी हिरासत और दर्ज मामले\n\nइस बीच कानूनी कार्रवाई के तहत दिल्ली पुलिस ने सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत की अवधि को दो दिन के लिए और बढ़ा दिया है। इसके साथ ही पुलिस ने अनधिकृत प्रवेश से जुड़े इस पूरे मामले की जांच को सोमवार को अपनी अपराध शाखा को स्थानांतरित कर दिया है। इस सिलसिले में कनॉट प्लेस पुलिस थाने में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जिनमें धारा 223ए यानी लोक सेवक द्वारा विधिवत लागू आदेश की अवहेलना, धारा 332 यानी अपराध करने के उद्देश्य से अनधिकृत प्रवेश, और धारा 61(2) यानी आपराधिक साजिश के आरोप शामिल हैं।\n\n \n\nसंसद मार्ग थाने में भी दर्ज हैं गंभीर आरोप\n\nपुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक सीजेपी नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका के खिलाफ केवल एक नहीं बल्कि दो अलग-अलग थाने में मामले दर्ज हैं। संसद मार्ग पुलिस थाने में भी उनके ऊपर एक अन्य प्राथमिकी दर्ज की गई है। इस दूसरी प्राथमिकी में भारतीय न्याय संहिता की धारा 221 यानी लोक सेवक को उसके सार्वजनिक कार्यों के निर्वहन में बाधा उत्पन्न करना, धारा 115(2) यानी स्वेच्छा से चोट पहुंचाना, धारा 132 यानी लोक सेवक को उसके कर्तव्य के पालन से रोकने के लिए हमला करना या आपराधिक बल का प्रयोग करना, धारा 121(1) यानी लोक सेवक को उसके कर्तव्य से रोकने के लिए स्वेच्छा से गंभीर चोट पहुंचाना, और धारा 3(5) यानी समान मंशा को आधार बनाया गया है।\n\nइसका आप पर असर\nयह घटना और इससे जुड़े कानूनी घटनाक्रम उन लोगों के लिए सीधे तौर पर मायने रखते हैं जो राजनीतिक सक्रियता, नागरिक अधिकारों के आंदोलनों और पुलिस कार्रवाई से जुड़े मामलों पर नजर रखते हैं।\n\n• भारत में: प्रदर्शनकारियों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं को किसी भी आंदोलन के दौरान कानूनी प्रावधानों और पुलिस जांच प्रक्रियाओं की स्पष्ट जानकारी होनी चाहिए। इस मामले में हिरासत बढ़ने से यह स्पष्ट होता है कि कानूनी एजेंसियों की कार्रवाई आगे भी जारी रह सकती है।\n• दिल्ली में: स्थानीय स्तर पर कनॉट प्लेस और संसद मार्ग थाना क्षेत्रों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था और जांच की निगरानी बढ़ाई जा सकती है। इससे जुड़े समर्थकों और आम नागरिकों को प्रशासनिक आदेशों और निषेधाज्ञा का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह पूरा घटनाक्रम कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं द्वारा किए गए एक प्रदर्शन और उसके बाद पुलिस द्वारा की गई कानूनी कार्रवाई की वजह से सामने आया है।\n\n• प्रत्यक्ष कारण: सीजेपी नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की तरफ से किए गए विरोध प्रदर्शन के दौरान अनधिकृत प्रवेश और लोक सेवकों के कर्तव्यों में बाधा डालने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।\n• कानूनी प्रक्रिया: दिल्ली पुलिस ने दोनों नेताओं की न्यायिक हिरासत को दो दिन के लिए बढ़ा दिया है और मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसकी जांच अपराध शाखा को सौंप दी है।\n• संगठन की प्रतिक्रिया: पार्टी संस्थापक अभिजीत दिपके ने अपने सहयोगियों की गिरफ्तारी के विरोध में और कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखने के लिए इंस्टाग्राम पर लाइव आकर अपनी भावनाएं साझा कीं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. सौरव दास और आशुतोष रांका किस पार्टी से जुड़े हैं?\nसौरव दास और आशुतोष रांका कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता हैं।\n\n2. अभिजीत दिपके ने लाइव आकर क्या कहा?\nअभिजीत दिपके ने इंस्टाग्राम पर लाइव आकर अपने साथियों को याद किया और स्पष्ट किया कि उनके आंसू डर की वजह से नहीं बल्कि अपने भाइयों के जेल में होने के कारण हैं।\n\n3. सीजेपी नेताओं को कहां रखा गया है?\nसौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली के तिहाड़ जेल में बंद रखा गया है।\n\n4. पुलिस ने मामले की जांच किसे सौंपी है?\nदिल्ली पुलिस ने इस मामले की जांच अपनी अपराध शाखा को स्थानांतरित कर दी है।\n\n5. दोनों नेताओं की न्यायिक हिरासत कितने दिन बढ़ाई गई है?\nदिल्ली पुलिस ने सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत दो दिन बढ़ा दी है।",
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  "category": "राजनीति",
  "publishedAt": "2026-10-20",
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