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  "title": "सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास पर बरसीं भाजपा सांसद कंगना रनौत, 28 साल की उम्र में दो नेशनल अवॉर्ड जीतने की बात रखकर कसा तंज",
  "summary": "भाजपा सांसद कंगना रनौत ने सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास के बयानों पर नाराजगी जताते हुए उन्हें 28 साल की उम्र तक दो राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने की याद दिलाई और हुनर सीखने की सलाह दी।",
  "content": "भारतीय जनता पार्टी की सांसद और प्रख्यात अभिनेत्री कंगना रनौत तथा कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के बीच चल रही राजनीतिक बयानबाजी एक बार फिर तेज हो गई है। हालिया घटनाक्रम में कंगना रनौत ने सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास पर जोरदार हमला बोलते हुए उन्हें कौशलहीन और रोजगारविहीन करार दिया है। इंस्टाग्राम पर अपनी बात रखते हुए सांसद ने तंज कसा कि जिस 28 वर्ष की आयु में सौरव दास खुद को छात्र बता रहे हैं, उस उम्र तक वह भारतीय सिनेमा जगत के दो प्रतिष्ठित राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार अपने नाम कर चुकी थीं। यह तीखा जुबानी हमला उस वक्त सामने आया है जब हाल ही में नीट-यूजी परीक्षा से जुड़ा एक बड़ा छात्र आंदोलन समाप्त हुआ है।\n\nइंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए सौरव दास पर सीधा निशाना\nकंगना रनौत ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर समाचार एजेंसी एएनआई के एक साक्षात्कार की तस्वीर साझा करते हुए सीजेपी प्रवक्ता पर अपनी भड़ास निकाली। उन्होंने बताया कि इंटरनेट पर सौरव दास की जानकारी तलाशने पर उन्हें पता चला कि उनकी वर्तमान आयु 28 वर्ष है। सांसद ने इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया कि 28 साल की उम्र में भी कोई व्यक्ति खुद को छात्र किस आधार पर बता सकता है।\n\nसौरव दास की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कंगना रनौत ने लिखा कि जो व्यक्ति पूरी तरह समय व्यतीत कर रहा है और जिसके पास कोई रचनात्मक काम नहीं है, वह सार्वजनिक जीवन की व्यस्तताओं को कभी नहीं समझ सकता। उन्होंने सीजेपी नेता को सलाह दी कि दूसरों पर टिप्पणी करने से पहले उन्हें जीवन में कोई उपयोगी हुनर सीखना चाहिए और वहीं से अपने करियर की नई शुरुआत करनी चाहिए।\n\nएएनआई साक्षात्कार से भड़का था नया विवाद\nदोनों नेताओं के बीच इस ताजा वाकयुद्ध की शुरुआत समाचार एजेंसी एएनआई को दिए गए सौरव दास के एक बयान के बाद हुई। साक्षात्कार के दौरान सीजेपी प्रवक्ता ने कंगना रनौत की कार्यशैली और उनके हालिया बयानों की कड़ी आलोचना की थी। सौरव दास ने सवाल उठाया था कि जब खुद भारतीय जनता पार्टी के आंतरिक लोग ही कंगना रनौत की बातों को गंभीरता से नहीं लेते, तो देश की युवा पीढ़ी अथवा जेन जी से यह उम्मीद कैसे की जा सकती है कि वह उन्हें गंभीरता से ले।\n\nअपने साक्षात्कार में सीजेपी प्रवक्ता ने कंगना रनौत के उस बयान का विशेष रूप से उल्लेख किया था, जिसमें उन्होंने संसद सदस्य बनने के बाद काम के अत्यधिक बोझ और मानसिक दबाव की बात कही थी। सौरव दास का कहना था कि जनप्रतिनिधि बनने के बाद जिम्मेदारी से भागने के बजाय काम को संभालना चाहिए, जिससे नाराज होकर कंगना ने पलटवार किया।\n\nदो दशक के लंबे करियर और राष्ट्रीय पुरस्कारों का दिया हवाला\nसीजेपी प्रवक्ता के आरोपों का जवाब देते हुए कंगना रनौत ने अपने दो दशक लंबे सार्वजनिक जीवन का ब्योरा प्रस्तुत किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भले ही वह सक्रिय राजनीति के मैदान में पिछले दो वर्षों से कार्यरत हैं, लेकिन कला और सार्वजनिक क्षेत्र में उनका योगदान पिछले 20 वर्षों से निरंतर जारी है।\n\nकंगना ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी में लिखा कि 28 वर्ष की आयु तक पहुंचते-पहुंचते उन्होंने न केवल दो राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीते थे, बल्कि अभिनय के साथ-साथ पटकथा लेखन, फिल्म निर्माण, निर्देशन और व्यापारिक उद्यम जैसे कई क्षेत्रों में अपनी पहचान बना ली थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि निरंतर मांग में रहने वाले और बहुआयामी जिम्मेदारियां निभाने वाले व्यक्ति की मेहनत का आकलन कोई ऐसा व्यक्ति नहीं कर सकता जिसके पास कोई निश्चित कार्य या रोजगार न हो।\n\nनीट-यूजी 2026 आंदोलन और राजनीतिक पृष्ठभूमि\nकंगना रनौत और सीजेपी के बीच की यह तल्खी कोई नई बात नहीं है। इससे पूर्व भी सांसद ने सीजेपी द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शनों और उनके तौर-तरीकों पर सवाल उठाए थे। उस दौरान उन्होंने आंदोलनकारी युवाओं और जेन जी प्रदर्शनकारियों को लेकर कुछ बयान दिए थे, जिसके बाद सीजेपी ने उन पर पलटवार करते हुए उनके राजनीतिक अनुभव पर सवाल खड़े किए थे।\n\nयह नया विवाद नीट-यूजी 2026 परीक्षा के कथित प्रश्नपत्र लीक मामले से जुड़े लंबे आंदोलन के ठीक बाद उपजा है। सीजेपी के नेतृत्व में चले इस व्यापक छात्र प्रदर्शन के दबाव में तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था। इसके बाद केंद्र सरकार ने आंदोलनकारियों की कई प्रमुख मांगों को स्वीकार कर लिया था। सरकार ने प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा देने, प्रदर्शन में शामिल छात्रों पर दर्ज प्राथमिकियां (एफआईआर) वापस लेने और समूची परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का निर्णय लिया था।\n\nइस पूरे आंदोलन और प्रशासनिक संकट के समय भी कंगना रनौत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार के कदमों का पुरजोर समर्थन किया था। उन्होंने देश की शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी तथा पारदर्शी बनाने के प्रयासों की सराहना की थी। अब नीट आंदोलन समाप्त होने के बाद कंगना की इस नई इंस्टाग्राम पोस्ट ने एक बार फिर दोनों पक्षों के बीच सियासी घमासान को तीखा कर दिया है।\n\nइसका आप पर असर\nपाठकों पर प्रभाव:\n\n• भारत में: मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में पारदर्शिता और नीट-यूजी प्रणाली में सुधार के प्रशासनिक फैसलों का देश भर के छात्रों और परिवारों पर सीधा असर पड़ेगा।\n• राजनीतिक क्षेत्र में: जन प्रतिनिधियों और राजनीतिक प्रवक्ताओं के बीच सोशल मीडिया बयानबाजी से युवा मुद्दों पर जारी सार्वजनिक विमर्श प्रभावित होता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. कंगना रनौत ने सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास पर क्या टिप्पणी की?\nकंगना रनौत ने सौरव दास को 28 साल की उम्र में खुद को छात्र बताने पर सवाल उठाया और कहा कि इस उम्र तक वह दो नेशनल अवॉर्ड जीत चुकी थीं। उन्होंने उन्हें कोई हुनर सीखने की सलाह दी।\n\n2. सौरव दास ने एएनआई को दिए साक्षात्कार में क्या कहा था?\nसौरव दास ने कहा था कि जब खुद बीजेपी के लोग कंगना को गंभीरता से नहीं लेते, तो जेन जी या युवा पीढ़ी उन्हें क्यों गंभीरता से लेगी, और उनकी कार्यभार संबंधी शिकायतों पर सवाल उठाया।\n\n3. यह पूरा विवाद किस पृष्ठभूमि में हुआ है?\nयह जुबानी जंग नीट-यूजी 2026 पेपर लीक आरोपों को लेकर सीजेपी के नेतृत्व में चले लंबे आंदोलन के समाप्त होने के बाद सामने आई है।\n\n4. नीट-यूजी 2026 आंदोलन के बाद क्या प्रशासनिक कदम उठाए गए?\nतत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया, प्रदर्शनकारियों पर दर्ज एफआईआर वापस ली गईं, प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने की घोषणा हुई और परीक्षा सुधार हेतु समिति बनी।\n\n5. कंगना रनौत ने 28 साल की उम्र तक अपनी किन उपलब्धियों का जिक्र किया?\nकंगना ने बताया कि 28 साल की उम्र तक उन्होंने दो राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीते थे और अभिनय, पटकथा लेखन, निर्देशन, प्रोडक्शन तथा बिजनेस में सक्रिय थीं।",
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  "publishedAt": "2026-07-29",
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