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  "title": "कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के बयान पर बरसे किरेन रिजिजू, तानाशाही मानसिकता का लगाया आरोप",
  "summary": "कांग्रेस नेता पवन खेड़ा द्वारा भाजपा नेताओं को लेकर दिए गए विवादित बयान पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने तीखा पलटवार करते हुए कांग्रेस पर लोकतांत्रिक मूल्यों के हनन का आरोप लगाया है।",
  "content": "कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के एक हालिया बयान ने देश के राजनीतिक हलकों में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस बयान पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कांग्रेस पर देश के लोकतांत्रिक मूल्यों की अनदेखी करने का बड़ा आरोप लगाया है। रिजिजू ने कहा कि कांग्रेस नेताओं की इसी दमनकारी और तानाशाही सोच की वजह से देश की जनता उन्हें फिर से सत्ता सौंपने के लिए तैयार नहीं है। दरअसल, कांग्रेस के मीडिया और प्रचार विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा ने 25 जून को आपातकाल की बरसी पर भारतीय जनता पार्टी पर तीखा निशाना साधा था, जिस पर अब सत्तापक्ष ने चौतरफा हमला शुरू कर दिया है।\n\nकेंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए पवन खेड़ा के बयान को आड़े हाथों लिया। उन्होंने लिखा कि कांग्रेस के नेता सत्ता में वापसी करने पर भाजपा नेताओं को सड़कों पर न निकलने देने की धमकी दे रहे हैं। रिजिजू के अनुसार, यह बयान कांग्रेस की तानाशाही मानसिकता का जीता-जागता सबूत है। उन्होंने आगे कहा कि यही वजह है कि भारत के लोग ऐसी निरंकुश सोच रखने वाली पार्टी को दोबारा सत्ता की चाबी नहीं सौंपेंगे। केंद्रीय मंत्री ने यह भी जोड़ा कि देश में हर नागरिक को अपनी बात कहने की आजादी है, लेकिन कांग्रेस इस आजादी का इस्तेमाल सिर्फ दिन-रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपशब्द कहने के लिए कर रही है।\n\nइस पूरे विवाद की जड़ में पवन खेड़ा का वह बयान है जो उन्होंने 25 जून को पत्रकारों से बातचीत के दौरान दिया था। जब मीडियाकर्मियों ने उनसे आपातकाल की बरसी को लेकर सवाल पूछा, तो खेड़ा ने कहा कि जब देश में कांग्रेस की सरकार दोबारा बनेगी और पिछले 12 से 15 सालों के कामकाज का हिसाब-काबू किया जाएगा, तब भाजपा के बड़े-बड़े नेताओं के लिए बिना सुरक्षा के सड़कों पर निकलना भी दूभर हो जाएगा। उन्होंने दावा किया कि भाजपा नेताओं को आम जनता के बीच आने के लिए भी भारी सुरक्षा घेरे की जरूरत पड़ेगी।\n\nलोकतांत्रिक संस्थाओं पर छिड़ी बहस\nअपने बयान के दौरान पवन खेड़ा ने वर्तमान सरकार पर भी गंभीर आरोप मढ़े। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा शासनकाल में देश का लोकतंत्र खतरे में है, मीडिया की स्वतंत्रता पर दबाव बनाया जा रहा है और देश की स्वतंत्र लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। खेड़ा का कहना था कि सरकार के इन सभी कदमों का पूरा ब्योरा तैयार किया जा रहा है और आने वाले समय में इन सब बातों का पूरा हिसाब लिया जाएगा। वहीं दूसरी तरफ, भाजपा ने पवन खेड़ा के इस बयान को सीधे तौर पर राजनीतिक डराने-धमकाने की कोशिश बताया है। सत्तारूढ़ दल का कहना है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के ऐसे डराने वाले बयान उनकी खुद की लोकतांत्रिक सोच पर बड़े सवाल खड़े करते हैं।\n\n1975 के आपातकाल की बरसी का संदर्भ\nराजनीतिक दलों के बीच यह तीखी बयानबाजी ऐसे समय में हो रही है जब देश में 1975 में लगाए गए आपातकाल की बरसी मनाई गई। भारतीय जनता पार्टी ने इस दिन को देशव्यापी स्तर पर संविधान हत्या दिवस के रूप में मनाया। भाजपा सरकार के कई केंद्रीय मंत्रियों और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इस ऐतिहासिक घटना को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला पन्ना करार दिया। गौरतलब है कि 25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने पूरे देश में आपातकाल की घोषणा की थी, जो 21 मार्च 1977 तक लागू रहा था। इस अवधि के दौरान नागरिकों के मौलिक अधिकारों को पूरी तरह से निलंबित कर दिया गया था, अखबारों पर कड़ा सेंसरशिप लागू था और विपक्ष के तमाम बड़े नेताओं को गिरफ्तार करके जेलों में बंद कर दिया गया था।\n\nइसका आप पर असर\nपाठकों पर प्रभाव: यह राजनीतिक विवाद दिखाता है कि भारत में आपातकाल जैसी ऐतिहासिक घटनाएं आज भी राजनीतिक विमर्श को गहराई से प्रभावित करती हैं। आम जनता के लिए, यह लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्थिति और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर राजनीतिक दलों के बीच चल रही वैचारिक जंग को समझने का एक अवसर है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. किरेन रिजिजू और पवन खेड़ा के बीच राजनीतिक विवाद क्यों शुरू हुआ?\nयह विवाद तब शुरू हुआ जब कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने बयान दिया कि सत्ता में लौटने पर कांग्रेस पिछले वर्षों का हिसाब करेगी और भाजपा नेताओं को सुरक्षा के बिना सड़कों पर निकलना मुश्किल होगा, जिस पर किरेन रिजिजू ने कांग्रेस को तानाशाही सोच वाली पार्टी बताया।\n\n2. पवन खेड़ा ने भाजपा नेताओं को लेकर क्या बयान दिया था?\nपवन खेड़ा ने कहा था कि जब कांग्रेस सत्ता में आएगी और पिछले 12 से 15 वर्षों का हिसाब होगा, तब भाजपा नेताओं को सार्वजनिक रूप से बाहर निकलने के लिए भी सुरक्षा की जरूरत पड़ेगी।\n\n3. किरेन रिजिजू ने पवन खेड़ा के बयान पर क्या पलटवार किया?\nकिरेन रिजिजू ने इस बयान को कांग्रेस की तानाशाही मानसिकता का सबूत बताया और कहा कि इसी सोच की वजह से देश की जनता कांग्रेस को दोबारा सत्ता में नहीं लाना चाहती।\n\n4. भारत में आपातकाल कब और किसके द्वारा लगाया गया था?\nभारत में आपातकाल तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा 25 जून 1975 को लगाया गया था, जो 21 मार्च 1977 तक लागू रहा था।\n\n5. भाजपा ने आपातकाल की बरसी को किस रूप में मनाया?\nभाजपा ने 25 जून को 'संविधान हत्या दिवस' के रूप में मनाया ताकि आपातकाल के दौरान नागरिक स्वतंत्रताओं और लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन को याद किया जा सके।",
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  "category": "राजनीति",
  "publishedAt": "2026-06-27",
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