दक्षिणी राज्यों के संसदीय प्रतिनिधित्व पर मुख्यमंत्री विजय ने मांगी कानूनी गारंटी, विपक्ष ने यू-टर्न का लगाया आरोप महाबलीपुरम में आयोजित दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की 31वीं बैठक में मुख्यमंत्री विजय ने जनसंख्या नियंत्रण वाले राज्यों के संसदीय प्रतिनिधित्व की रक्षा के लिए केंद्र से कानूनी आश्वासन मांगा, जिसके बाद तमिलनाडु में परिसीमन पर सियासी बयानबाज़ी तेज़ हो गई है। तमिलनाडु में लोकसभा सीटों के परिसीमन को लेकर राजनीतिक घमासान फिर से तेज़ हो गया है। महाबलीपुरम में आयोजित दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की 31वीं बैठक में मुख्यमंत्री विजय ने केंद्र सरकार से एक स्पष्ट और वैधानिक गारंटी की मांग रखी। उन्होंने जोर देकर कहा कि जिन दक्षिणी राज्यों ने देश के जनसंख्या नियंत्रण कार्यक्रमों को सफलता पूर्वक लागू किया है, संसद में उनकी राजनीतिक हिस्सेदारी और प्रतिनिधित्व में किसी भी प्रकार की कटौती नहीं होनी चाहिए। मुख्यमंत्री के अनुसार, इस तरह का लिखित कानूनी आश्वासन मिलने से देश का संघीय संतुलन बना रहेगा, सभी राज्यों के साथ निष्पक्षता सुनिश्चित होगी और लोकतांत्रिक ढाँचे में राज्यों का विश्वास और अधिक सुदृढ़ होगा। परिसीमन पर दिए भाषण के बाद शुरू हुआ राजनीतिक विवाद हालांकि, इस सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री के संबोधन से एक प्रमुख पहलू गायब रहने के बाद विवाद पैदा हो गया। 12 अगस्त को तमिलनाडु विधानसभा में एक सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास किया गया था, जिसमें लोकसभा की वर्तमान 543 सीटों को यथावत रखने और विभिन्न राज्यों के बीच सीटों के मौजूदा आबंटन को स्थायी रूप से बनाए रखने का आग्रह किया गया था। महाबलीपुरम के भाषण में 12 अगस्त के इस विधानसभा प्रस्ताव का उल्लेख न किए जाने पर विपक्षी दलों ने मुख्यमंत्री की नीयत और राजनीतिक रुख पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं और उन पर अपनी बात से पीछे हटने के आरोप लगाए हैं। विपक्षी दलों के 'फ्लिप-फ्लॉप' और 'यू-टर्न' के गंभीर आरोप मुख्यमंत्री के इस रुख पर हमला बोलते हुए डीएमके के प्रवक्ता सरवनन अन्नादुरई ने उन पर परिसीमन जैसे गंभीर मुद्दे पर बार-बार 'फ्लिप-फ्लॉप' करने का आरोप लगाया। वहीं दूसरी ओर, एआईएडीएमके के आईटी विंग ने राज्य सरकार की इस प्रतिक्रिया को पूरी तरह से 'यू-टर्न' करार दिया है। एआईएडीएमके ने सोशल मीडिया पर अपनी टिप्पणी में कहा कि मुख्यमंत्री अब वही भाषा बोल रहे हैं जो केंद्र सरकार पहले से ही कहती आ रही है। पार्टी ने तीखा सवाल खड़ा किया कि जब राज्य की विधानसभा में परिसीमन के खिलाफ एक स्पष्ट प्रस्ताव पारित हो चुका था, तो फिर इस क्षेत्रीय बैठक में उस रुख में बदलाव क्यों दिखाई दिया। सत्तारूढ़ टीवीके और सरकार की तरफ से दी गई सफाई विपक्ष के इन तीखे हमलों का सत्तारूढ़ टीवीके ने मजबूती से खंडन किया है। टीवीके के आईटी विंग ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री विजय ने अपने भाषण में पूरे दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों और प्रतिनिधित्व को सुरक्षित करने के लिए एक व्यापक दूरदृष्टि प्रस्तुत की है। पार्टी का कहना है कि 12 अगस्त को पारित विधानसभा प्रस्ताव इसी व्यापक लक्ष्य को व्यावहारिक और ठोस कानूनी रूप प्रदान करता है। इसके साथ ही, राज्य के ऊर्जा संसाधन एवं कानून मंत्री सीटीआर निर्मल कुमार ने भी सरकार की स्थिति साफ करते हुए कहा कि परिसीमन पर सरकार के रुख में रत्ती भर भी बदलाव नहीं आया है। उन्होंने दोहराया कि टीवीके परिसीमन के प्रश्न पर अपने स्थापित सिद्धांत पर दृढ़ता से कायम है और संसद की कुल 543 लोकसभा सीटों तथा राज्यों के मौजूदा सीट वितरण को बनाए रखने की मांग पर कोई समझौता नहीं किया गया है। इस पूरे वाकये ने तमिलनाडु की राजनीति में परिसीमन और दक्षिण के राज्यों के संसदीय अधिकारों के मुद्दे को एक बार फिर गरमा दिया है। इसका आप पर असर • भारत में: परिसीमन का मुद्दा संसद में विभिन्न राज्यों की सीटों की संख्या और देश के संघीय राजनीतिक संतुलन को सीधे प्रभावित कर सकता है। • तमिलनाडु में: परिसीमन से राज्य के संसदीय प्रतिनिधित्व पर असर पड़ सकता है, जिससे स्थानीय नीतियां और केंद्रीय बजटीय आवंटन प्रभावित हो सकते हैं। सवाल-जवाब 1. महाबलीपुरम में मुख्यमंत्री विजय ने परिसीमन पर क्या मांग रखी? उन्होंने केंद्र सरकार से कानूनी गारंटी की मांग की कि जनसंख्या नियंत्रण में सफल रहने वाले राज्यों के संसदीय प्रतिनिधित्व में कोई कटौती न की जाए। 2. दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की यह बैठक कहाँ आयोजित हुई थी? यह 31वीं बैठक महाबलीपुरम में आयोजित की गई थी। 3. विपक्षी दल मुख्यमंत्री विजय पर यू-टर्न का आरोप क्यों लगा रहे हैं? क्योंकि उन्होंने अपने भाषण में 12 अगस्त के विधानसभा प्रस्ताव का सीधे ज़िक्र नहीं किया, जिसमें लोकसभा सीटों को 543 पर फ्रीज़ रखने की मांग की गई थी। 4. 12 अगस्त को तमिलनाडु विधानसभा में क्या प्रस्ताव पास हुआ था? विधानसभा में लोकसभा की 543 सीटों और राज्यों के मौजूदा सीट आवंटन को स्थायी रूप से बनाए रखने का प्रस्ताव पारित हुआ था। 5. ऊर्जा संसाधन एवं कानून मंत्री सीटीआर निर्मल कुमार ने क्या सफाई दी? उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है और टीवीके 543 लोकसभा सीटें बनाए रखने की मांग पर कायम है। https://trendkia.com/politics/dakshini-rajyon-ke-snsadiya-pratinidhitva-para-mukhyamntri-vijay-ne-mangi-kanuni-garnti-vipaksha-ne-yu-tarna-ka-lagaya-aropa-19655 TrendKia — Har trend, sabse pehle.