दस मिनट रुकने की बात कहकर पहुंचे थे जस्टिस संजय किशन कौल, सौरव दास संग वायरल फोटो पर दी सफाई सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस संजय किशन कौल ने सौरव दास के साथ अपनी वायरल तस्वीर पर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि वह केवल दस मिनट के लिए कार्यक्रम में गए थे और दास के साथ उनके कोई करीबी रिश्ते या मेंटरशिप नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस संजय किशन कौल ने कॉकरोच जनता पार्टी के सह-संयोजक और प्रवक्ता सौरव दास के साथ सोशल मीडिया पर सामने आई अपनी तस्वीर पर खुलकर बात की है। उन्होंने उन तमाम चर्चाओं को खारिज कर दिया जिनमें उनके और दास के बीच किसी तरह के मार्गदर्शक रिश्ते होने का दावा किया जा रहा था। उनका कहना है कि सौरव दास से उनकी मुलाकात तब हुई थी जब वह पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय थे और दोनों के बीच संवाद बहुत सीमित रहा था। हालांकि उन्होंने यह जरूर माना कि उन्होंने बातचीत के दौरान दास को अपनी भाषा में थोड़ा संयम बरतने की नसीहत जरूर दी थी। दिवाली के एक निजी समारोह का मामला एक मीडिया इंटरव्यू के दौरान जस्टिस कौल ने स्पष्ट किया कि यह विवादित फोटो लगभग एक साल पुरानी है जो दिवाली के आसपास एक निजी आयोजन के दौरान कैमरे में कैद की गई थी। उनके अनुसार इस तस्वीर को इस तरह पेश किया जा रहा है मानो उनकी कोई गहरी वैचारिक सांठगांठ हो। उन्होंने बताया कि उस अवसर पर सौरव दास ने उन्हें कार्यक्रम में आने का न्योता दिया था और उस वक्त वह पत्रकार के रूप में काम कर रहे थे। कौल ने उस दिन के वाकये को याद करते हुए कहा कि उनकी योजना कहीं और जाने की थी लेकिन आग्रह पर वह कुछ देर के लिए वहां रुकने को राजी हो गए थे। उन्होंने अपनी पत्नी से भी यह कहा था कि वह केवल दस मिनट के लिए वहां ठहरेंगे और चाय पीकर तुरंत रवाना हो जाएंगे। भाषा और संवाद को लेकर हुई थी बात पूर्व जज ने इस बात पर जोर दिया कि उस मुलाकात को अब एक अलग रंग देकर उनके बीच वैचारिक निकटता साबित करने का प्रयास किया जा रहा है जबकि उस वक्त सौरव दास मुख्यधारा की सुर्खियों में भी नहीं थे। जब उनसे यह सवाल किया गया कि क्या उन्होंने कभी दास का मार्गदर्शन किया था तो उन्होंने साफ शब्दों में इससे इनकार कर दिया। हालांकि उन्होंने यह स्वीकार किया कि उन्होंने दास से मुलाकात के दौरान उनकी भाषा शैली को लेकर एक सामान्य टिप्पणी की थी। कौल के मुताबिक उन्होंने दास को सलाह दी थी कि उन्हें अपनी बात रखते समय भाषा को थोड़ा नरम रखना चाहिए। बातचीत के दौरान उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि अलग-अलग पीढ़ियों के लोगों के संवाद के तरीकों में जमीन-आसमान का फर्क होता है। उनके अपने दौर में बातचीत में शालीनता को प्राथमिकता दी जाती थी जबकि मौजूदा जेन-जी पीढ़ी का अंदाज पूरी तरह जुदा हो सकता है। उनका मानना था कि कई बार युवा पीढ़ी के कुछ शब्द या लहजा पुरानी पीढ़ी के लोगों को चुभ सकते हैं, इसलिए भाषा में संतुलन होना जरूरी है। जब उनसे यह पूछा गया कि क्या सीजेपी के युवा नेताओं को अपने आक्रामक तेवरों में किसी तरह का बदलाव लाने की आवश्यकता है, तो उन्होंने इस पर कोई भी सीधी सलाह देने से पूरी तरह किनारा कर लिया। उन्होंने हंसते हुए कहा कि वह इस मामले में कोई राय नहीं देना चाहते क्योंकि अगले ही पल यह खबर बन जाएगी कि वह सीजेपी के नेताओं को हिदायत दे रहे हैं। सौरव दास का क्या है पक्ष जस्टिस कौल के इन बयों के सामने आने के बाद सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने भी अपनी बात सामने रखी। उन्होंने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर एक बयान जारी करते हुए यह स्पष्ट किया कि वह तस्वीर एक निजी समारोह के दौरान की है और उस समय जस्टिस कौल सुप्रीम कोर्ट के जज नहीं बल्कि एक आम नागरिक की भूमिका में थे। दास के अनुसार उनके और पूर्व जज के बीच कभी भी गुरु और शिष्य जैसा कोई संबंध नहीं रहा है। सौरव दास ने अपने स्पष्टीकरण में यह भी जोड़ा कि पत्रकारिता के अपने दिनों के दौरान और उसके बाद भी उनका परिचय कई वकीलों, सेवारत जजों तथा पूर्व न्यायविदों से रहा है। उन्होंने जस्टिस कौल की तरफ से भाषा को लेकर मिली सलाह को एक सामान्य बातचीत का हिस्सा बताया। दास के मुताबिक उनके काम और संघर्ष का समर्थन करने वाले कई शुभचिंतकों ने उन्हें पहले भी इस तरह की बातें समझाई हैं। इसके साथ ही उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इस तस्वीर को लेकर चल रही बहस का असली मकसद वास्तविक और गंभीर मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाना मात्र है। दास का दावा है कि चर्चा का केंद्र इस बात को नहीं बनाया जाना चाहिए कि कौन किसकी तस्वीर में है, बल्कि न्यायपालिका से जुड़े उन गंभीर विषयों पर ध्यान दिया जाना चाहिए जिन्हें जस्टिस कौल ने अपने बयानों में उठाया है। सवाल-जवाब 1. जस्टिस संजय किशन कौल ने सौरव दास के साथ वायरल तस्वीर पर क्या कहा? जस्टिस कौल ने स्पष्ट किया कि यह तस्वीर एक साल पहले दिवाली के दौरान एक निजी समारोह में खींची गई थी और उनके बीच कोई मेंटरशिप या करीबी रिश्ते नहीं हैं। 2. सौरव दास कौन हैं? सौरव दास कॉकरोच जनता पार्टी के सह-संयोजक और प्रवक्ता हैं, जो पहले पत्रकार के रूप में काम करते थे। 3. जस्टिस कौल कार्यक्रम में कितनी देर रुके थे? जस्टिस कौल ने अपनी पत्नी से कहा था कि वह केवल दस मिनट के लिए कार्यक्रम में रुकेंगे और चाय पीकर आगे निकल जाएंगे। 4. सौरव दास ने इस विवाद पर क्या प्रतिक्रिया दी? सौरव दास ने कहा कि तस्वीर एक निजी समारोह की थी और इस पर चर्चा करके मुख्य मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश की जा रही है। https://trendkia.com/politics/dasa-minata-rukane-ki-bata-kahakara-pahunche-the-justice-snjaya-kishana-kaula-saurav-das-snga-vayarala-photo-para-di-saphai-52623 TrendKia — Har trend, sabse pehle.