दतिया उपचुनाव में राजघरानों की सीधी भिड़ंत, ज्योतिरादित्य सिंधिया और मोहन यादव की साख दांव पर मध्य प्रदेश के दतिया उपचुनाव में मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है, जहां भाजपा ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को कमान सौंपी है, वहीं कांग्रेस ने दतिया राजघराने के मुखिया घनश्याम सिंह को मैदान में उतारा है। मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने जा रहा आगामी उपचुनाव इन दिनों राज्य के राजनैतिक हलकों में चर्चा का मुख्य केंद्र बन चुका है। चुनाव की तारीखों के नजदीक आते ही चुनावी रण सज चुका है और दोनों ही प्रमुख दलों, भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस ने अपने-अपने उम्मीदवारों के नामों की घोषणा करके मुकाबले को बेहद रोमांचक बना दिया है। भाजपा ने इस बार पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी को अपना प्रत्याशी बनाकर चुनावी मैदान में उतारा है। दूसरी ओर, कांग्रेस ने दतिया के प्रतिष्ठित राजघराने से संबंध रखने वाले और अत्यंत अनुभवी राजनेता घनश्याम सिंह पर अपना दांव खेला है। यह चुनावी मुकाबला केवल एक विधानसभा सीट पर जीत हासिल करने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह दो बड़े राजघरानों के प्रभाव, क्षेत्रीय वर्चस्व और बड़े नेताओं की व्यक्तिगत प्रतिष्ठा की लड़ाई बन चुका है। आगामी 30 जुलाई को होने वाले मतदान में क्षेत्र की जनता ही इस कड़े मुकाबले में रेफरी की भूमिका निभाएगी। ज्योतिरादित्य सिंधिया संभालेंगे भाजपा की कमान इस उपचुनाव को हर हाल में जीतने के लिए भाजपा ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है और चुनाव प्रचार का नेतृत्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को सौंपा है। सिंधिया को दतिया उपचुनाव के लिए पार्टी का विशेष प्रभारी नियुक्त किया गया है। वर्तमान में गुना संसदीय क्षेत्र से लोकसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया की पूरे ग्वालियर-चंबल अंचल में अत्यंत मजबूत और गहरी राजनैतिक पकड़ मानी जाती है। वह अपने ओजस्वी भाषणों और कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने की क्षमता के लिए जाने जाते हैं। भाजपा ने उन्हें इस क्षेत्र का प्रभारी बनाकर यह साफ कर दिया है कि वह चुनाव को लेकर किसी भी प्रकार का कोई राजनैतिक जोखिम उठाने के मूड में नहीं है। सिंधिया की नियुक्ति से जमीनी स्तर पर बूथ प्रबंधन को काफी मजबूती मिलने की उम्मीद है, जिससे कार्यकर्ताओं को एकजुट कर चुनावी रणनीति को बेहतर ढंग से लागू किया जा सके। ग्वालियर के सिंधिया राजवंश का प्रभाव केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया देश के सबसे रसूखदार और ऐतिहासिक परिवारों में से एक ग्वालियर के सिंधिया राजवंश से संबंध रखते हैं। उनका राजपरिवार अपनी भव्य ऐतिहासिक विरासत, आलीशान महलों और भारतीय राजनीति में दशकों से निभाई जा रही सक्रिय भूमिका के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। इस परिवार ने गुना और ग्वालियर क्षेत्र पर लंबे समय तक शासन किया है और लोकतंत्र की स्थापना के बाद भी राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखी है। ज्योतिरादित्य के पिता माधवराव सिंधिया कांग्रेस के सबसे कद्दावर और लोकप्रिय नेताओं में गिने जाते थे, जबकि उनकी दादी राजमाता सिंधिया भाजपा की संस्थापक सदस्यों और दिग्गज नेताओं में से एक थीं। स्वयं ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने राजनैतिक जीवन की शुरुआत कांग्रेस के साथ की थी, लेकिन वर्ष 2020 में एक बड़े घटनाक्रम के तहत वे भाजपा में शामिल हो गए थे। उनके इस कदम के कारण मध्य प्रदेश में तत्कालीन कांग्रेस सरकार गिर गई थी। तभी से कांग्रेस के साथ उनकी पुरानी राजनैतिक प्रतिद्वंद्विता बनी हुई है और अब दतिया में भाजपा को जीत दिलाकर वह अपने विरोधियों को एक और करारा जवाब देना चाहेंगे। दतिया राजघराने के प्रमुख घनश्याम सिंह पर कांग्रेस का दांव दूसरी तरफ, कांग्रेस ने इस उपचुनाव में दतिया राजघराने के मुखिया घनश्याम सिंह को मैदान में उतारकर मुकाबले को राजघरानों की सीधी जंग में बदल दिया है। घनश्याम सिंह के पिता महाराज कृष्ण सिंह जू देव भी कांग्रेस के एक सम्मानित और कद्दावर नेता रहे थे, जिससे उनका परिवार लंबे समय से स्थानीय स्तर पर राजनैतिक रूप से सक्रिय रहा है। घनश्याम सिंह जमीनी स्तर पर काफी सक्रिय रहते हैं और जनसभाओं के माध्यम से मतदाताओं के बीच अपनी मजबूत पैठ बनाए हुए हैं। उन्हें विधायी और क्षेत्रीय राजनीति का लंबा अनुभव है। वह दतिया और उसकी पड़ोसी विधानसभा सीट सेवढ़ा से कई बार विधायक चुने जा चुके हैं। हालांकि, वर्ष 2023 के पिछले विधानसभा चुनाव में उन्होंने सेवढ़ा सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन वहां उन्हें भाजपा के उम्मीदवार प्रदीप अग्रवाल के हाथों पराजय का सामना करना पड़ा था। इसके बावजूद, वर्तमान राजनैतिक परिस्थितियों के बीच उपचुनाव में कांग्रेस ने उन पर भरोसा जताया है, जो उनके लिए अपनी खोई हुई राजनैतिक जमीन वापस पाने का एक बड़ा अवसर है। राजेंद्र भारती की अयोग्यता के कारण खाली हुई सीट दतिया विधानसभा सीट पर इस उपचुनाव की नौबत वर्ष 2023 के मुख्य विधानसभा चुनाव के बाद आए एक कानूनी मोड़ के कारण आई है। उस चुनाव में कांग्रेस के राजेंद्र भारती ने इस सीट पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी और भाजपा के कद्दावर नेता नरोत्तम मिश्रा को पराजित किया था। इस बड़ी जीत की वजह से कांग्रेस किसी भी कीमत पर इस सीट पर अपना नियंत्रण खोना नहीं चाहती है। हालांकि, बाद में एक बड़े कानूनी विवाद के चलते राजेंद्र भारती को अपनी विधायकी गंवानी पड़ी। दरअसल, राजेंद्र भारती को बैंक FD से जुड़े एक धोखाधड़ी के मामले में दिल्ली की एक विशेष MP-MLA कोर्ट ने दोषी करार देते हुए तीन साल के कारावास की सजा सुनाई थी। कानूनी नियमों के तहत तीन साल की सजा होने के कारण उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द कर दी गई, जिसके परिणामस्वरूप यह सीट खाली हो गई और चुनाव आयोग को यहां उपचुनाव कराने की घोषणा करनी पड़ी। भाजपा के भीतर का घटनाक्रम और मोहन यादव की साख जैसे ही इस उपचुनाव की घोषणा हुई, भाजपा के वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा को लगा कि उनके लिए अपनी पुरानी हार का बदला लेने और दोबारा विधानसभा में प्रवेश करने का यह सबसे उपयुक्त अवसर है। उन्होंने तुरंत ही क्षेत्र में अपनी सक्रियता बढ़ा दी, जनसभाएं कीं और नामांकन पत्र भी खरीद लिया। लेकिन अंतिम समय में भाजपा आलाकमान ने सभी को चौंकाते हुए नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार घोषित कर दिया। टिकट न मिलने से नाराज नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने स्थानीय स्तर पर कड़ा विरोध प्रदर्शन किया और असंतोष व्यक्त किया। इस आंतरिक मतभेद को सुलझाने के लिए नरोत्तम मिश्रा को तत्काल प्रभाव से प्रदेश की राजधानी भोपाल तलब किया गया। भोपाल में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से लंबी चर्चा के बाद नरोत्तम मिश्रा के सुर बदले हुए नजर आए। उन्होंने सार्वजनिक रूप से बयान दिया कि पार्टी का निर्णय उनके लिए सर्वोपरि है और वे आशुतोष तिवारी को भारी मतों से विजयी बनाने के लिए पूरी ताकत से जुटेंगे। इस चुनाव में केवल प्रत्याशियों की ही परीक्षा नहीं है, बल्कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव की साख भी सीधे तौर पर दांव पर लगी हुई है। उनके नेतृत्व में इस उपचुनाव का परिणाम सरकार की छवि और कार्यशैली का पैमाना माना जाएगा। अब सभी की निगाहें 30 जुलाई की तारीख पर टिकी हैं, जब दतिया की जनता अपने वोट के जरिए आशुतोष तिवारी और घनश्याम सिंह के राजनैतिक भविष्य का फैसला करेगी। इसका आप पर असर • मध्य प्रदेश में: दतिया के मतदाताओं को एक नया विधायक चुनने का अवसर मिलेगा, जिससे स्थानीय प्रशासन और क्षेत्र के विकास कार्यों की दिशा तय होगी। • राजनैतिक स्तर पर: इस उपचुनाव के परिणाम से राज्य में भाजपा और कांग्रेस के बीच शक्ति संतुलन प्रभावित होगा और यह मुख्यमंत्री मोहन यादव की लोकप्रियता की परीक्षा भी होगी। सवाल-जवाब 1. दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव क्यों हो रहा है? कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को बैंक FD धोखाधड़ी के मामले में दिल्ली की एक विशेष MP-MLA कोर्ट द्वारा तीन साल की सजा सुनाए जाने के बाद अयोग्य घोषित कर दिया गया था, जिससे यह सीट खाली हो गई। 2. इस उपचुनाव में मुख्य उम्मीदवार कौन हैं? भाजपा ने आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारा है, जबकि कांग्रेस ने दतिया राजघराने के प्रमुख घनश्याम सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया है। 3. इस चुनाव में ज्योतिरादित्य सिंधिया की क्या भूमिका है? भाजपा ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को दतिया उपचुनाव के लिए पार्टी का प्रभारी नियुक्त किया है ताकि वे चुनाव प्रचार और बूथ स्तर के प्रबंधन का नेतृत्व कर सकें। 4. नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन क्यों किया? नरोत्तम मिश्रा खुद सक्रिय रूप से चुनाव प्रचार कर रहे थे, लेकिन जब भाजपा ने उन्हें छोड़ आशुतोष तिवारी को टिकट दे दिया, तो उनके समर्थकों ने कड़ा विरोध जताया। 5. दतिया उपचुनाव के लिए मतदान कब होगा? दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए मतदान 30 जुलाई को होना निर्धारित किया गया है। https://trendkia.com/politics/datiya-upachunava-men-rajagharanon-ki-sidhi-bhirnta-jyotiraditya-scindia-aura-mohan-yadav-ki-sakha-danva-para-6900 TrendKia — Har trend, sabse pehle.