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  "type": "article",
  "title": "संसद परिसर में सपा के अनोखे प्रदर्शन से जुटाए गए 1.57 लाख रुपये अब दिल्ली के कनॉट प्लेस हनुमान मंदिर में होंगे जमा",
  "summary": "मानसून सत्र के दौरान संसद में कथित चढ़ावा हेराफेरी के खिलाफ समाजवादी पार्टी का अनोखा प्रदर्शन समाप्त हो गया है। मकर द्वार पर दानपेटी में एकत्रित 1.57 लाख रुपये की राशि अब कनॉट प्लेस के हनुमान मंदिर में दान की जाएगी।",
  "content": "संसद का मानसून सत्र औपचारिक रूप से समाप्त हो चुका है, लेकिन संसद भवन के प्रांगण में पिछले दो हफ्तों से चल रही एक अनोखी दानपेटी की चर्चा राजनीतिक गलियारों में थमने का नाम नहीं ले रही है। समाजवादी पार्टी के सांसदों ने अयोध्या स्थित राम मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं और गड़बड़ी के विरोध में संसद परिसर में एक प्रतीकात्मक प्रदर्शन की शुरुआत की थी। इस विरोध प्रदर्शन के केंद्र में संसद के प्रमुख मकर द्वार के पास रखी गई एक लकड़ी की दानपेटी थी। सपा सांसदों ने खुद इस दानपेटी में नकद राशि डालकर शुरुआत की और फिर परिसर में आने-जाने वाले अन्य सांसदों तथा लोगों से भी इसमें स्वेच्छा से योगदान देने का आग्रह किया। दो सप्ताह तक चले इस लगातार अभियान के बाद दानपेटी में जमा राशि बढ़कर 1 लाख 57 हजार रुपये तक पहुंच गई। सत्र के समापन के बाद अब इस बात को लेकर बनी अनिश्चितता दूर हो गई है कि संसद में एकत्र हुए इस धन का क्या होगा। समाजवादी पार्टी के सांसदों ने स्पष्ट रूप से घोषणा कर दी है कि यह राशि अयोध्या के राम मंदिर ट्रस्ट को नहीं सौंपी जाएगी, बल्कि इसे दिल्ली के मशहूर कनॉट प्लेस स्थित हनुमान मंदिर में समर्पित किया जाएगा। इसके साथ ही संसद के द्वार से शुरू हुई यह अनोखी राजनीतिक मुहिम मंदिर के प्रांगण में जाकर अपने अंतिम पड़ाव को प्राप्त करेगी।\n\nमकर द्वार पर अनोखा प्रदर्शन और विपक्ष की एकजुटता\nमानसून सत्र के शुरुआती दिनों से ही विपक्षी दलों ने अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे और दान प्रबंधन में कथित हेराफेरी के आरोपों को लेकर केंद्र सरकार को घेरना शुरू कर दिया था। इस विरोध को सामान्य नारेबाजी से अलग और आकर्षक रूप देने के लिए समाजवादी पार्टी के सांसदों ने संसद भवन परिसर के मकर द्वार पर एक दानपेटी स्थापित कर दी थी। लगभग दो हफ्तों तक चले इस प्रदर्शन में विपक्षी खेमे के कई प्रमुख चेहरों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। प्रदर्शन के दौरान निर्दलीय सांसद पप्पू यादव पारंपरिक पुजारी के वेशभूषा में नजर आए, जिससे यह पूरा वाकया संसद परिसर में कौतूहल का विषय बन गया। वहीं लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी समेत कई अन्य विपक्षी सांसदों ने दानपेटी में अपनी तरफ से नकद रुपये डालकर चढ़ावे की कथित चोरी के खिलाफ अपना प्रतीकात्मक विरोध दर्ज कराया। सपा सांसदों का कहना था कि यह कदम श्रद्धालुओं की आस्था की रक्षा करने और धार्मिक स्थलों के प्रबंधन में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग के तहत उठाया गया था।\n\n47 हजार रुपये से 1.57 लाख रुपये तक पहुंचने का सफर\nसंसद परिसर में रखी गई इस दानपेटी में हर बीतते दिन के साथ जमा रकम का दायरा बढ़ता चला गया। समाजवादी पार्टी के सांसदों द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, अगस्त महीने की 3 तारीख के आसपास दानपेटी में जमा कुल राशि लगभग 47 हजार रुपये दर्ज की गई थी। इसके बाद भी सांसदों का प्रदर्शन थमा नहीं और मकर द्वार पर आवाजाही करने वाले विभिन्न नेताओं और समर्थकों का इसमें योगदान जारी रहा। सत्र के अंतिम सप्ताह में बुधवार के दिन जब दानपेटी को खोला गया और रकम की गिनती की गई, तो कुल आंकड़ा 1 लाख 57 हजार रुपये तक पहुंच चुका था। सपा सांसदों ने इस पूरी जमा राशि को एक बोरी में भरकर संसद परिसर में संवाददाताओं और मीडिया के सामने पेश किया। सांसदों ने जोर देकर कहा कि यह धन देश के सामान्य रामभक्तों की भावनाओं और उनकी गाढ़ी कमाई से जुड़ा है, इसलिए इसका उपयोग पूरी तरह से पवित्र और जवाबदेह तरीके से किया जाना अत्यंत आवश्यक है।\n\nअयोध्या के बजाय दिल्ली के हनुमान मंदिर को चुनने की वजह\nदानपेटी में 1.57 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि एकत्र होने के बाद सपा सांसदों के सामने यह सवाल खड़ा हुआ कि इसे किस संस्थान को सौंपा जाए। सांसदों ने इस संदर्भ में तर्क दिया कि यदि वे इस पैसे को अयोध्या स्थित राम मंदिर के खाते में भेजते हैं, तो वहां पहले से जारी कथित अव्यवस्था के कारण इस राशि के भी गायब या चोरी होने का खतरा बना रहेगा। इसी आशंका को देखते हुए समाजवादी पार्टी के संसदीय दल ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि इस धन को अयोध्या भेजने के स्थान पर देश की राजधानी दिल्ली के केंद्र में स्थित कनॉट प्लेस के प्राचीन हनुमान मंदिर में दान किया जाएगा। सपा सांसदों ने यह भी स्पष्ट किया कि वे मंदिर प्रबंधन को यह राशि सौंपने के बाद वहां से एक आधिकारिक रसीद भी प्राप्त करेंगे। सांसदों का मानना है कि इस कदम से श्रद्धालुओं के चढ़ावे का अपमान भी नहीं होगा और उनके द्वारा उठाए गए राजनीतिक सवाल भी देश के सामने मजबूती से टिके रहेंगे।\n\n18 दिनों में केवल 15 घंटे काम: मानसून सत्र का लेखा-जोखा\nसंसद में दानपेटी का यह प्रदर्शन केवल एक अलग घटनाक्रम नहीं था, बल्कि यह उस भारी हंगामे और गतिरोध का हिस्सा था जिसने पूरे मानसून सत्र को प्रभावित किया। राम मंदिर के चढ़ावे में कथित धांधली के साथ-साथ देश के विभिन्न हिस्सों में छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई और प्रतियोगी परीक्षाओं के मुद्दों को लेकर विपक्ष ने दोनों सदनों में जोरदार हंगामा किया। इस लगातार जारी गतिरोध का असर विधायी कामकाज पर काफी गंभीर पड़ा। पूरे 18 दिनों के निर्धारित सत्र के दौरान निचला सदन यानी लोकसभा महज 15 घंटे ही सुचारू रूप से चल सका। लगातार होते शोर-शराबे और कार्य स्थगन के बीच कई महत्वपूर्ण विधेयक बिना किसी विस्तृत चर्चा के पारित करा लिए गए, जिनमें एंटी-पेपर लीक विधेयक से लेकर 'केरलम' नाम परिवर्तन से जुड़ा प्रस्ताव भी शामिल था। सत्र के अंतिम दिन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के गायन के बाद सदन की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी। इस समापन के समय सदन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह समेत सत्ता पक्ष के तमाम शीर्ष नेता मौजूद थे।\n\nसंसद से बाहर भी जारी रहेगी चढ़ावे पर राजनीतिक बहस\nसंसद परिसर से दानपेटी को हटाकर कनॉट प्लेस के हनुमान मंदिर ले जाने की तैयारी के साथ ही संसद के भीतर का यह अध्याय भले ही बंद हो रहा हो, लेकिन इससे जुड़ा राजनीतिक विवाद शांत होता दिखाई नहीं दे रहा है। समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों के नेताओं का कहना है कि संसद सत्र समाप्त होने के बावजूद वे धार्मिक ट्रस्टों में वित्तीय पारदर्शिता और श्रद्धालुओं के चढ़ावे के सही रखरखाव के मुद्दे को जनता के बीच उठाते रहेंगे। 1.57 लाख रुपये की राशि को हनुमान मंदिर की दानपेटी में जमा कराकर रसीद हासिल करना विपक्ष के लिए एक बड़ा प्रतीकात्मक कदम माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा सिर्फ दिल्ली या संसद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आगामी राज्य विधानसभा चुनावों और सार्वजनिक मंचों पर भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बहस का एक मुख्य जरिया बना रहेगा।\n\nइसका आप पर असर\nयह खबर देश के नागरिकों और राजनीतिक घटनाक्रम में रुचि रखने वालों को इस तरह प्रभावित करती है:\n\n• भारत में: संसद सत्र के दौरान जनता से जुड़े मुद्दों और धार्मिक ट्रस्टों की पारदर्शिता को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो सकती है।\n• दिल्ली और अयोध्या में: राजधानी के कनॉट प्लेस हनुमान मंदिर में दान की गई इस राशि के बाद मंदिर परिसरों में मिलने वाले चढ़ावे और प्रबंधन पर आम श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित होगा।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. संसद परिसर में दानपेटी क्यों रखी गई थी?\nसमाजवादी पार्टी के सांसदों ने अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी और हेराफेरी के विरोध में संसद के मकर द्वार के पास यह दानपेटी रखी थी।\n\n2. दानपेटी में कुल कितने रुपये जमा हुए?\nदो हफ्ते चले इस प्रदर्शन के दौरान दानपेटी में कुल 1.57 लाख रुपये जमा हुए।\n\n3. इस जमा राशि का क्या किया गया?\nसपा सांसदों ने इस राशि को अयोध्या राम मंदिर न भेजकर दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित प्रसिद्ध हनुमान मंदिर में दान करने का फैसला किया है।\n\n4. राम मंदिर में पैसा न भेजने के पीछे क्या तर्क दिया गया?\nसपा सांसदों का तर्क था कि यदि यह राशि राम मंदिर भेजी गई तो वहां भी इसके चोरी होने का खतरा बना रहेगा, इसलिए इसे हनुमान मंदिर में दिया गया।\n\n5. मानसून सत्र के दौरान लोकसभा का कामकाज कितना चला?\n18 दिनों के इस सत्र के दौरान लोकसभा केवल 15 घंटे ही चल सकी, क्योंकि विरोध प्रदर्शनों के कारण कार्यवाही बार-बार बाधित हुई।\n\n6. प्रदर्शन में कौन-कौन से प्रमुख नेता शामिल दिखे?\nप्रदर्शन के दौरान पप्पू यादव पुजारी के वेश में नजर आए, जबकि राहुल गांधी सहित कई विपक्षी सांसदों ने दानपेटी में सांकेतिक रूप से पैसे डाले।",
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  "category": "राजनीति",
  "publishedAt": "2026-08-13",
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