दिल्ली के जंतर-मंतर पर रोक के बाद सीजेपी प्रमुख अभिजीत दिपके का बड़ा हमला, राहुल गांधी की तारीफ कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने दिल्ली के जंतर-मंतर को धरना-प्रदर्शन की सूची से हटाने के केंद्र सरकार के फैसले की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि सरकार के इस कदम से डर साफ झलकता है और अब पूरा देश ही जंतर-मंतर बन जाएगा। दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन के लिए तय जगहों की सूची से हटाए जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है। कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दिपके ने इस कदम को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के विरोध प्रदर्शन की खुलकर सराहना की और सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए। हिंगोली में दिया गया बयान महाराष्ट्र के हिंगोली में 13 अक्टूबर को एक कार्यक्रम के दौरान अभिजीत दिपके ने कहा कि सरकार की कार्रवाई से उसकी घबराहट साफ नजर आती है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को लगता है कि जंतर-मंतर को बंद करने से आवाजें दबाई जा सकेंगी, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं होगा। उनके मुताबिक आने वाले समय में देश के कोने-कोने में जंतर-मंतर जैसी अनगिनत जगहें तैयार हो जाएंगी और विरोध के सुर थमने वाले नहीं हैं। विरोध प्रदर्शन के अधिकार पर बहस अभिजीत दिपके का यह तीखा बयान ऐसे वक्त में आया है जब विपक्षी दलों के गठबंधन और प्रदर्शन स्थलों के नियमों को लेकर देश भर में गहमागहमी बनी हुई है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि प्रशासन को मूल समस्या जंतर-मंतर की लोकेशन से नहीं, बल्कि आम जनता और विपक्षी दलों द्वारा उठाए जाने वाले विरोध के स्वरों से है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच जंतर-मंतर को प्रतिबंधित करने के प्रशासनिक फैसलों और दावों को लेकर अभी आधिकारिक और विस्तृत पुष्टि की प्रतीक्षा है, जबकि विभिन्न राजनीतिक दलों और संगठनों की ओर से इस पर लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इसका आप पर असर दिल्ली और देश भर में विरोध प्रदर्शन के नियमों और तय स्थलों में बदलाव का सीधा असर आम नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनीतिक संगठनों की स्वतंत्रता पर पड़ेगा। • राजधानी में प्रभाव: दिल्ली में जंतर-मंतर जैसे पारंपरिक और सुलभ धरना स्थल के हटने से अब प्रदर्शनकारियों को रामलीला मैदान या बुराड़ी जैसे दूरदराज के इलाकों का रुख करना होगा, जिससे आयोजनों में मुश्किलें बढ़ेंगी। • देश भर में असर: राष्ट्रीय स्तर पर इस फैसले के बाद अन्य राज्यों में भी स्थानीय प्रशासन सार्वजनिक प्रदर्शनों की अनुमति और नियमों को लेकर सख्त कदम उठा सकता है। • राजनीतिक गतिविधियां: विपक्षी दलों और कार्यकर्ताओं को सरकार के खिलाफ अपनी आवाज उठाने के लिए नए और वैकल्पिक मंच तलाशने होंगे, जिससे विरोध प्रदर्शनों के तौर-तरीके बदलेंगे। • बुकिंग और लागत: नए तय किए गए स्थानों पर प्रदर्शन आयोजित करने के लिए आयोजकों को तय शुल्क और प्रशासनिक अनुमतियों की जटिल प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ेगा। • कानूनी और नागरिक अधिकार: प्रदर्शन के अधिकार को लेकर छिड़ी इस बहस से आने वाले समय में नागरिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर नए कानूनी संघर्ष देखने को मिल सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ दिल्ली के जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन की सूची से हटाने और उस पर रोक लगाने का यह पूरा विवाद प्रशासनिक नियमों में बदलाव और राजनीतिक तनातनी के कारण सामने आया है। • प्रशासनिक निर्णय: दिल्ली पुलिस और संबंधित प्राधिकरणों द्वारा सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और यातायात प्रबंधन का हवाला देते हुए जंतर-मंतर को अधिकृत धरना स्थलों की सूची से बाहर कर दिया गया है। • राजनीतिक टकराव: चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष और गठबंधन दलों द्वारा लगातार किए जा रहे प्रदर्शनों के बाद सरकार और प्रशासन ने ये कड़े कदम उठाए हैं। • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: दशकों से जंतर-मंतर देश भर के आंदोलनों, किसानों,労働者 और राजनीतिक दलों के लिए विरोध प्रदर्शन का मुख्य केंद्र रहा है, जिसके हटने से तीखी प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं। • विपक्षी प्रतिक्रिया: सीजेपी प्रमुख अभिजीत दिपके और अन्य नेताओं का मानना है कि इस तरह के प्रतिबंधों का उद्देश्य बढ़ती राजनीतिक असहमति और विरोध के स्वरों को दबाना है। सवाल-जवाब 1. जंतर-मंतर को लेकर हाल ही में क्या फैसला लिया गया है? केंद्र सरकार और प्रशासन ने दिल्ली के जंतर-मंतर को धरना-प्रदर्शन के लिए तय की गई जगहों की सूची से हटा दिया है। 2. अभिजीत दिपके कौन हैं और उन्होंने क्या बयान दिया है? अभिजीत दिपके कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक हैं और उन्होंने कहा है कि जंतर-मंतर पर रोक लगाने से विरोध नहीं रुकेंगे बल्कि पूरा देश जंतर-मंतर बन जाएगा। 3. यह बयान कब और कहाँ दिया गया? अभिजीत दिपके ने यह बयान 13 अक्टूबर को महाराष्ट्र के हिंगोली में दिया। 4. दिपके ने किस राजनीतिक विरोध प्रदर्शन की तारीफ की है? उन्होंने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA गठबंधन द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन की सराहना की है। 5. सरकार के इस कदम के पीछे क्या कारण माना जा रहा है? नेताओं और आलोचकों का मानना है कि सरकार बढ़ते विरोध प्रदर्शनों और राजनीतिक असहमति से घबराई हुई है। https://trendkia.com/politics/delhi-ke-jantar-mantar-par-rok-ke-baad-cjp-pramukha-abhijit-dipke-ka-bada-hamla-rahul-gandhi-ki-tareef-47256 TrendKia — Har trend, sabse pehle.