दिल्ली में एनडीए बैठक से दूर रहे यूसुफ पठान समेत तीन सांसद, बहरामपुर और मुर्शिदाबाद के सियासी समीकरणों पर बढ़ा सस्पेंस दिल्ली में हुई एनडीए की महत्वपूर्ण बैठक से मुर्शिदाबाद और बहरामपुर के तीन सांसदों ने दूरी बनाकर राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। इन नेताओं ने स्पष्ट किया है कि टीएमसी छोड़कर एनसीपीआई में शामिल होने का अर्थ बीजेपी को समर्थन देना बिल्कुल नहीं है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मंगलवार को आयोजित राजनीतिक बैठकों के दौरान पश्चिम बंगाल के सियासी गलियारों में एक नया मोड़ देखने को मिला। तृणमूल कांग्रेस (TMC) का दामन छोड़कर नेशनल कांग्रेस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल हुए मुर्शिदाबाद और बहरामपुर के तीन प्रमुख मुस्लिम सांसदों ने सत्तारूढ़ गठबंधन की एक अहम बैठक से पूरी तरह दूरी बना ली। सुबह आयोजित एनडीए की इस बैठक में तीनों सांसदों की अनुपस्थिति ने राजनीतिक विश्लेषकों और पार्टी कैडर के बीच कई तरह के सवालों को जन्म दे दिया है। हालांकि इसके कुछ ही घंटों बाद इन नेताओं की उपस्थिति एक अलग बैठक में दर्ज की गई, जिसने राज्य के विकास और राजनीतिक प्राथमिकताओं को लेकर एक नई बहस शुरू कर दी है। एनडीए बैठक का बहिष्कार और सांसदों का रुख मुर्शिदाबाद संसदीय क्षेत्र के प्रतिनिधि अबू ताहेर और खलीलुर रहमान के साथ बहरामपुर से सांसद यूसुफ पठान ने दिल्ली में हुई एनडीए की बैठक में भाग नहीं लिया। हाल के दिनों में इन तीनों नेताओं ने टीएमसी छोड़कर एनसीपीआई का रुख किया था। बैठक में अनुपस्थित रहने के बाद तीनों सांसदों ने अपनी राजनीतिक स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट किया। नेताओं ने कहा कि किसी नई राजनीतिक पार्टी में शामिल होने का यह अर्थ कदापि नहीं है कि वे एनडीए गठबंधन का हिस्सा बन चुके हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) को समर्थन देने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता है। अबू ताहेर और खलीलुर रहमान ने संयुक्त रूप से कहा कि वे एनसीपीआई के सदस्य जरूर हैं, लेकिन एनडीए के साथ उनका कोई राजनीतिक समझौता नहीं हुआ है। पूर्व क्रिकेटर और सांसद यूसुफ पठान ने भी इसी बात को दोहराते हुए कहा कि उनकी राजनीतिक लाइन एनडीए से पूरी तरह अलग है। सांसदों के इस स्पष्ट और सख्त रुख ने दिल्ली से लेकर कोलकाता तक की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। बंग भवन में सुवेंदु अधिकारी के साथ हुई बैठक एनडीए की बैठक से अलग रहने के महज कुछ ही घंटे बाद तीनों सांसद दिल्ली स्थित बंग भवन पहुंचे। वहां उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी द्वारा बुलाई गई एक विशेष बैठक में हिस्सा लिया। लगभग 1 घंटे तक चली इस बैठक में एनसीपीआई से जुड़े करीब 20 सांसद मौजूद रहे। इस दौरान सभी जनप्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं और प्रशासनिक मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की। बैठक में सांसदों ने अपने क्षेत्रों के बुनियादी ढांचे और विकासात्मक परियोजनाओं से जुड़े ज्ञापन भी सौंपे। इसी क्रम में बहरामपुर के सांसद यूसुफ पठान ने अपने संसदीय क्षेत्र में 27 लाख रुपये के एक प्रशासनिक मामले से जुड़ी समस्या को प्रमुखता से उठाया। इसके साथ ही कई सांसदों ने शिकायत दर्ज कराई कि हालिया विधानसभा चुनावों के बाद विभिन्न इलाकों में उनके समर्थकों को सामाजिक और राजनीतिक कार्यों में बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सभी सांसदों को उचित सहयोग देने का भरोसा दिया। विकास कार्यों और राजनीतिक निष्ठा पर सफाई एनडीए बैठक से दूरी बनाने और मुख्यमंत्री की बैठक में शामिल होने के दोहरे फैसले पर उठ रहे सवालों का जवाब अबू ताहेर ने दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुवेंदु अधिकारी राज्य के मुख्यमंत्री हैं और उन्होंने केवल राज्य के विकास से संबंधित विषयों पर विचार-विमर्श के लिए सभी सांसदों को आमंत्रित किया था। अबू ताहेर ने कहा कि राज्य के विकास के लिए मुख्यमंत्री से मिलना और किसी राजनीतिक गठबंधन का हिस्सा बनना दो बिल्कुल अलग बातें हैं। उनका तर्क था कि जनप्रतिनिधि होने के नाते अपने क्षेत्र की जनता के अधिकारों और विकास के लिए प्रशासनिक बैठकों में हिस्सा लेना उनका कर्तव्य है, लेकिन इसे किसी राजनीतिक समझौते के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। एनसीपीआई के भीतर सुगबुगाहट और नेताओं की बयानबाजी मीडिया में चल रही खबरों के अनुसार, इन तीनों सांसदों के इस कदम से एनसीपीआई के शीर्ष नेतृत्व में थोड़ी असहजता देखी गई है। यह संदेश गठबंधन के केंद्रीय नेतृत्व तक भी पहुंचा है। हालांकि आधिकारिक तौर पर पार्टी ने किसी भी तरह की गुटबाजी या मतभेद की बात को खारिज किया है और दावा किया है कि पार्टी के सभी 20 सांसद पूरी तरह एकजुट हैं। पार्टी की वरिष्ठ सांसद शताब्दी रॉय ने इस घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए कहा कि मुर्शिदाबाद के इन तीनों सांसदों की अपनी कुछ क्षेत्रीय और राजनीतिक मजबूरियां हो सकती हैं, जिन्हें मुख्यमंत्री भी बेहतर समझते हैं। वहीं दूसरी ओर पार्टी सांसद रचना बनर्जी ने जोर देकर कहा कि संगठन में कोई दरार नहीं है और सभी जनप्रतिनिधि एकजुट होकर काम कर रहे हैं। शताब्दी रॉय के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में कयासबाजियों का दौर और तेज हो गया है। पश्चिम बंगाल के राजनीतिक समीकरणों पर संभावित असर मुर्शिदाबाद और बहरामपुर के सांसदों का यह फैसला आने वाले समय में पश्चिम बंगाल के चुनावी और सामाजिक समीकरणों पर गहरा असर डाल सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि टीएमसी से अलग हुए मुस्लिम नेता बीजेपी से एक निश्चित दूरी बनाए रखते हैं, तो इससे राज्य के मुस्लिम मतदाताओं को एक स्पष्ट संदेश जाएगा। हालांकि जानकारों का यह भी मानना है कि इस राजनीतिक घटनाक्रम से तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी को सीधा फायदा होगा या नहीं, यह कहना फिलहाल जल्दबाजी होगी। लेकिन इतना तय है कि तीनों सांसदों के इस स्वतंत्र रुख ने बंगाल की भावी राजनीति को एक नया मोड़ दे दिया है और आने वाले दिनों में उनके अगले कदमों पर सभी राजनीतिक दलों की पैनी नजर बनी रहेगी। इसका आप पर असर • भारत में: संसद और गठबंधन राजनीति में क्षेत्रीय सांसदों के स्वतंत्र रुख से राष्ट्रीय स्तर पर एनडीए के कुल आंकड़े और रणनीतिक संतुलन पर नजर बनी रहेगी। • पश्चिम बंगाल में: मुर्शिदाबाद और बहरामपुर के नागरिकों के लिए स्थानीय विकास कार्य और ₹27 लाख से जुड़े मुद्दे राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल हो सकते हैं। सवाल-जवाब 1. किन तीन मुस्लिम सांसदों ने दिल्ली में एनडीए बैठक से दूरी बनाई? बहरामपुर से सांसद यूसुफ पठान तथा मुर्शिदाबाद क्षेत्र के सांसद अबू ताहेर और खलीलुर रहमान ने एनडीए की बैठक से दूरी बनाई। 2. एनडीए बैठक में शामिल न होने पर सांसदों का क्या कहना था? सांसदों ने कहा कि टीएमसी छोड़कर एनसीपीआई में शामिल होने का मतलब बीजेपी या एनडीए का समर्थन करना नहीं है। 3. सुवेंदु अधिकारी के साथ हुई बैठक में क्या मुद्दे उठाए गए? बंग भवन में हुई बैठक में लगभग 20 सांसदों ने क्षेत्रीय विकास और विधानसभा चुनाव के बाद समर्थकों की समस्याओं पर बात की, जिसमें यूसुफ पठान ने ₹27 लाख का मुद्दा उठाया। 4. अबू ताहेर ने मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की बैठक में जाने की क्या वजह बताई? अबू ताहेर ने कहा कि विकास कार्यों के लिए राज्य के मुख्यमंत्री से मिलना और किसी राजनीतिक गठबंधन का हिस्सा बनना दो अलग बातें हैं। 5. इस घटनाक्रम पर पार्टी नेता शताब्दी रॉय की क्या प्रतिक्रिया थी? शताब्दी रॉय ने कहा कि मुर्शिदाबाद के इन तीन सांसदों की कुछ क्षेत्रीय या राजनीतिक मजबूरियां हो सकती हैं, जिन्हें मुख्यमंत्री भी समझते हैं। https://trendkia.com/politics/delhi-men-nda-baithaka-se-dura-rahe-yusuf-pathan-sameta-tina-sansada-baharampur-aura-murshidabad-ke-siyasi-samikaranon-para-barha--13833 TrendKia — Har trend, sabse pehle.