दिल्ली रैली में अमरजीत कौर के बयान से गरमाई राजनीति, बीजेपी का सीपीआई पर तीखा हमला दिल्ली में आयोजित एक रैली के दौरान सीपीआई की राष्ट्रीय महासचिव अमरजीत कौर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर विवादित टिप्पणी की, जिसके जवाब में बीजेपी ने उन पर दिमागी नक्सली सोच का आरोप लगाते हुए माफी की मांग की है। भारतीय राजनीति में नेताओं की ओर से की जाने वाली बयानबाजी का स्तर लगातार नए विवादों को जन्म दे रहा है। ताजा मामला राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली का है, जहाँ कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (सीपीआई) की राष्ट्रीय महासचिव अमरजीत कौर ने एक जनसभा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बेहद तीखी और विवादास्पद टिप्पणी की। उनके इस बयान के सामने आते ही भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) आक्रामक रुख अपनाते हुए वामपंथी दल और उनके नेताओं पर हमलावर हो गई है। बीजेपी ने इस टिप्पणी को दिमागी नक्सली सोच करार देते हुए अमरजीत कौर से तुरंत माफी मांगने की मांग रखी है, जबकि सीपीआई नेता अपने बयान पर पूरी तरह अडिग हैं। दिल्ली रैली में दिया गया विवादित बयान और वामपंथ की दलील दिल्ली में आयोजित एक रैली को संबोधित करते हुए 74 वर्षीय सीपीआई महासचिव अमरजीत कौर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। अपने भाषण के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी द्वारा अतीत में दिए गए उस बयान का जिक्र किया, जिसमें वामपंथियों और उनके लाल झंडों को देश के लिए खतरनाक बताया गया था। इसी पृष्ठभूमि को आधार बनाते हुए अमरजीत कौर ने रैली के मंच से प्रधानमंत्री को लेकर विवादित बातें कहीं। उन्होंने जनसभा को संबोधित करते हुए साफ तौर पर कहा कि अगर देश के प्रधानमंत्री वामपंथ को समाप्त करने की बात कर सकते हैं, तो उन्हें भी अपनी बात रखने और कड़ा जवाब देने का पूरा अधिकार है। उनके इस वक्तव्य के सार्वजनिक होते ही राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई। बीजेपी का पलटवार: प्रदीप भंडारी ने लगाया नक्सली सोच का आरोप अमरजीत कौर के इस बयान पर प्रतिक्रिया देने में सत्तारूढ़ बीजेपी ने बिल्कुल देर नहीं की। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने सोशल मीडिया मंच X पर लिखा कि सीपीआई की राष्ट्रीय सचिव अमरजीत कौर की भाषा और सोच भारत में कम्युनिस्टों के प्रति जनता की नफरत की असली वजह को उजागर करती है। भंडारी ने अमरजीत कौर के बयान को दिमागी नक्सली सोच की पराकाष्ठा बताया और कहा कि इस तरह के बयानों से देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर हमला करने की कोशिश की जा रही है। बीजेपी की ओर से यह स्पष्ट मांग की गई है कि अमरजीत कौर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर दी गई अपनी विवादित टिप्पणी के लिए पूरे देश से सार्वजनिक माफी मांगनी चाहिए। माफी मांगने से इनकार और बयानों पर अडिग अमरजीत कौर बीजेपी की तीखी प्रतिक्रिया और माफी की चौतरफा मांग के बावजूद सीपीआई महासचिव अमरजीत कौर ने पीछे हटने से साफ मना कर दिया है। उन्होंने मीडिया के सामने स्पष्ट किया कि वह अपने दिए गए हर एक शब्द पर कायम हैं और किसी भी सूरत में बीजेपी या प्रधानमंत्री से माफी नहीं मांगेंगी। अमरजीत कौर ने सवाल उठाते हुए कहा कि जब सत्ता पक्ष और खुद प्रधानमंत्री वामपंथी विचारधारा को खत्म करने की बात सार्वजनिक मंचों से कह सकते हैं, तो वामपंथी नेताओं के रुख पर आपत्ति क्यों जताई जा रही है। दोनों पक्षों की ओर से जारी इस तीखी बयानबाजी के कारण बीजेपी और सीपीआई नेताओं के बीच जुबानी जंग और अधिक तेज हो गई है। लाल किले से पीएम मोदी का भाषण और दिमागी नक्सल का संदर्भ इस पूरे राजनीतिक विवाद के तार 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से दिए गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण से जुड़ते हैं। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने देश में नक्सलवाद और माओवाद के खतरों पर विस्तार से बात की थी। पीएम मोदी ने कहा था कि नक्सलवाद और माओवादी हिंसा ने देश के लाखों युवाओं के भविष्य को पूरी तरह से बर्बाद कर दिया है। इसने अनगिनत माताओं के बेटे छीन लिए और देश भर में हजारों परिवारों के सपनों को पूरी तरह चकनाचूर कर दिया। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा था कि आज के समय में बंदूकों और हथियारों वाले नक्सलियों की तुलना में दिमागी नक्सली सबसे बड़ा खतरा बन चुके हैं। देश को इन दिमागी नक्सलियों से बचाना बेहद जरूरी है, क्योंकि यह सोच समाज को अंदर से खोखला कर रही है। कौन हैं सीपीआई नेता अमरजीत कौर? जानिए उनका लंबा राजनीतिक सफर प्रधानमंत्री मोदी पर बयान देकर चर्चा में आईं अमरजीत कौर वामपंथी राजनीति का एक जाना-माना और पुराना चेहरा हैं। 74 वर्ष की उम्र की अमरजीत कौर ने एमएससी और एलएलबी की उच्च शिक्षा हासिल की है। वह अपने छात्र जीवन से ही वामपंथी छात्र आंदोलनों और सीपीआई की विचारधारा से जुड़ी रही हैं। उनके राजनीतिक और सामाजिक जीवन के प्रमुख पड़ाव निम्नलिखित हैं • छात्र राजनीति: अमरजीत कौर वर्ष 1979 से लगातार सात वर्षों तक अखिल भारतीय छात्र संघ (एआईएसएफ) की दूसरी महिला महासचिव के रूप में अपनी सेवाएं दे चुकी हैं। • महिला संगठन की कमान: उन्होंने वर्ष 1999 से 2002 तक राष्ट्रीय भारतीय महिला संघ (एनएफआईडब्ल्यू) की राष्ट्रीय महासचिव का पद संभाला और महिला अधिकारों के लिए काम किया। • श्रम संगठन में भूमिका: अमरजीत कौर ने वर्ष 1994 से 20187 तक ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एआईटीयूसी) की राष्ट्रीय सचिव के रूप में मजदूर संगठन का नेतृत्व किया। • जेल यात्रा: वर्ष 1972 में देश भर में बढ़ी महंगाई और मूल्य वृद्धि के खिलाफ सीपीआई द्वारा आयोजित विशाल विरोध प्रदर्शन में भाग लेने के कारण उन्हें 10 दिनों तक जेल की सजा भी काटनी पड़ी थी। सवाल-जवाब 1. अमरजीत कौर कौन हैं? अमरजीत कौर कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (सीपीआई) की 74 वर्षीय राष्ट्रीय महासचिव हैं, जो छात्र राजनीति से लेकर वामपंथी संगठनों में लंबे समय से सक्रिय रही हैं। 2. बीजेपी ने अमरजीत कौर के बयान पर क्या प्रतिक्रिया दी? बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने उनके बयान को दिमागी नक्सली सोच करार दिया और उनसे सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की। 3. क्या अमरजीत कौर ने अपने बयान पर माफी मांगी है? नहीं, अमरजीत कौर ने माफी मांगने से साफ इनकार कर दिया है और कहा है कि वह अपने बयान पर कायम हैं। 4. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले से क्या कहा था? पीएम मोदी ने कहा था कि हथियारों वाले नक्सलियों से ज्यादा खतरनाक दिमागी नक्सली हैं, जिनसे देश को बचाने की जरूरत है। 5. अमरजीत कौर का राजनीतिक और शैक्षिक पृष्ठभूमि क्या रहा है? वह एमएससी और एलएलबी शिक्षित हैं, 1979 से 7 वर्षों तक एआईएसएफ की महासचिव रहीं, 1999-2002 तक एनएफआईडब्ल्यू की महासचिव रहीं और 1972 में महंगाई विरोधी प्रदर्शन के कारण 10 दिन जेल में भी रहीं। https://trendkia.com/politics/delhi-rally-men-amarjeet-kaur-ke-bayana-se-garamai-rajaniti-bjp-ka-cpi-para-tikha-hamala-26318 TrendKia — Har trend, sabse pehle.