दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम पर गहराया राजनीतिक विवाद, बीजेपी के हमलों के बीच कानूनी कार्रवाई पर बहस तेज स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में राष्ट्रगीत के दौरान वरिष्ठ नेताओं के हावभाव को लेकर बीजेपी और कांग्रेस आमने-सामने हैं, जबकि नए कानून के तहत 3 साल तक की सजा का प्रावधान चर्चा में आ गया है। नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान राष्ट्रगीत वंदे मातरम के गायन से जुड़ा एक घटनाक्रम देश की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। झंडोत्तोलन कार्यक्रम के दौरान मंच पर मौजूद वरिष्ठ नेताओं की गतिविधियों और संवाद का वीडियो सार्वजनिक होने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने इसे राष्ट्रगीत के प्रति अनादर करार देते हुए तीखा हमला बोला है। इसके जवाब में कांग्रेस पार्टी ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि यह मामला केवल स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों और बुनियादी शिष्टाचार से जुड़ा था। हालांकि, राष्ट्रगीत से जुड़े हालिया कानूनी संशोधनों के लागू होने के कारण अब इस विवाद के न्यायिक मोड़ लेने की संभावनाएं भी जताई जा रही हैं। कांग्रेस मुख्यालय में झंडोत्तोलन के दौरान क्या हुआ? स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित आधिकारिक समारोह में कांग्रेस पार्टी के कई प्रमुख नेता मंच पर उपस्थित थे। ध्वजारोहण के उपरांत जब राष्ट्रगीत वंदे मातरम का सस्वर गायन प्रारंभ हुआ, तब मंच पर सोनिया गांधी, राहुल गांधी और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बीच कुछ संवाद और स्थान परिवर्तन देखा गया। वीडियो में सोनिया गांधी बातचीत करती हुई और अपनी जगह बदलती हुई दिखाई दीं। इस दृश्य के सोशल मीडिया पर प्रसारित होते ही राजनीतिक बहस छिड़ गई। विरोधी दल के नेताओं ने आरोप लगाया कि राष्ट्रगीत के दौरान निर्धारित मर्यादा और सावधान की मुद्रा का पालन नहीं किया गया। इस घटनाक्रम ने देखते ही देखते एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया, जिसके बाद कांग्रेस पार्टी को सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखनी पड़ी। खड़गे के स्वास्थ्य और धूप का हवाला देकर कांग्रेस की सफाई विवाद के बढ़ता देख कांग्रेस पार्टी की ओर से सांसद तारिक अनवर ने स्थिति को स्पष्ट किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रगीत या उसके सम्मान को लेकर पार्टी के भीतर किसी प्रकार का कोई मतभेद या विवाद नहीं था। उन्होंने बताया कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भीषण गर्मी और तेज धूप में लगभग 15 मिनट से लगातार खड़े थे। तारिक अनवर के अनुसार, मल्लिकार्जुन खड़गे की वरिष्ठ आयु और स्वास्थ्य की स्थिति को ध्यान में रखते हुए सोनिया गांधी केवल यह प्रयास कर रही थीं कि उनके बैठने के लिए तुरंत एक कुर्सी का प्रबंध कराया जा सके। कांग्रेस नेता ने कहा, “वंदे मातरम को लेकर कोई विवाद नहीं था, बस तेज धूप में खड़े मल्लिकार्जुन खड़गे की उम्र का ख्याल रखकर सोनिया गांधी उनके लिए कुर्सी मंगवाना चाहती थीं।” उन्होंने आरोप लगाया कि एक सामान्य प्रशासनिक व्यवस्था और संवेदनशीलता से जुड़े विषय को राजनीतिक लाभ के लिए अनावश्यक रूप से तूल दिया जा रहा है। बीजेपी के तीखे सवाल और विचारधारा पर प्रहार कांग्रेस पार्टी द्वारा दी गई सफाई को भारतीय जनता पार्टी ने पूरी तरह खारिज कर दिया। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कांग्रेस नेताओं के हावभाव और बयानों पर सवाल उठाते हुए पलटवार किया। उन्होंने कांग्रेस सांसद मनोज कुमार के बयानों का भी संदर्भ दिया और आरोप लगाया कि यह मामला केवल कुर्सी का नहीं था। प्रदीप भंडारी ने सवाल खड़े करते हुए कहा, “अगर केवल कुर्सी की बात थी तो सोनिया गांधी और राहुल गांधी के चेहरे पर इतना गुस्सा क्यों दिखाई दे रहा था?” इसके साथ ही बीजेपी प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के कुछ नेता पूरा वंदे मातरम न गाए जाने की बात कर रहे हैं। बीजेपी ने दावा किया कि वर्तमान कांग्रेस पार्टी अपनी मूल विचारधारा से भटक चुकी है और उसमें उग्र मानसिकता का समावेश हो गया है, जिसके कारण राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति ऐसी उपेक्षा देखने को मिल रही है। राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम संशोधन कानून 2026 के प्रावधान यह पूरा विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब संसद द्वारा पारित राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) कानून, 2026 लागू हो चुका है। इस नए कानून के तहत राष्ट्रगीत वंदे मातरम को भी राष्ट्रगान जन गण मन के समान ही पूर्ण कानूनी और वैधानिक संरक्षण प्रदान किया गया है। कानून में स्पष्ट किया गया है कि राष्ट्रगीत के गायन में जानबूझकर बाधा उत्पन्न करना या किसी सभा में विघ्न डालना एक दंडनीय अपराध है। नए वैधानिक प्रावधानों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति या समूह राष्ट्रगीत के आधिकारिक या सार्वजनिक गायन को रोकने का दोषी पाया जाता है, तो उसे अधिकतम 3 साल तक की कैद, आर्थिक जुर्माना या दोनों सजाएं दी जा सकती हैं। इसके अतिरिक्त गृह मंत्रालय द्वारा जारी नए दिशानिर्देशों के तहत यह अनिवार्य किया गया है कि जहां राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान एक साथ गाए जाएं, वहां सबसे पहले वंदे मातरम का गायन होगा और परिसर में उपस्थित सभी व्यक्तियों को सावधान की मुद्रा में स्थिर खड़ा रहना होगा। कानूनी कार्रवाई की संभावनाएं और अदालत की भूमिका राजनीतिक गलियारों में अब इस बात की चर्चा जोरों पर है कि क्या यह मामला पुलिस थाने या अदालत तक पहुंच सकता है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी सार्वजनिक या राजनीतिक मंच पर राष्ट्रगीत के दौरान व्यवधान डाले जाने की स्थिति में विरोधी पक्ष या नागरिक पुलिस में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। यदि इस मामले में कोई एफआईआर या जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की जाती है, तो न्यायपालिका को यह तय करना होगा कि क्या घटनाक्रम के पीछे राष्ट्रगीत का जानबूझकर अनादर करने की नीयत थी अथवा यह केवल एक प्रशासनिक अव्यवस्था थी। चूंकि देश की आजादी के 80वें वर्ष में केंद्र सरकार राष्ट्रीय प्रतीकों की गरिमा को लेकर कड़ा रुख अपनाए हुए है, इसलिए यह राजनीतिक टकराव आने वाले दिनों में कानूनी रूप भी ले सकता है। इसका आप पर असर भारत में: सार्वजनिक या राजनीतिक कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' का गायन करते समय सावधान की मुद्रा में खड़े रहना अनिवार्य है, क्योंकि 2026 के नए कानून के तहत इसमें व्यवधान डालने पर 3 साल तक की जेल या जुर्माना हो सकता है। दिल्ली में: राजधानी दिल्ली में आयोजित होने वाले सभी सरकारी और राजनीतिक समारोहों में राष्ट्रगीत के लिए नए गृह मंत्रालय दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन किया जाएगा। सवाल-जवाब 1. कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम पर विवाद क्यों शुरू हुआ? स्वतंत्रता दिवस पर झंडोत्तोलन के दौरान वंदे मातरम गायन के समय सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के बातचीत और जगह बदलने का वीडियो सामने आने पर यह विवाद शुरू हुआ। 2. कांग्रेस ने इस घटना पर क्या सफाई दी है? कांग्रेस के अनुसार, मल्लिकार्जुन खड़गे तेज धूप में 15 मिनट से खड़े थे, इसलिए उनकी उम्र और स्वास्थ्य का ख्याल रखते हुए सोनिया गांधी उनके लिए कुर्सी मंगवा रही थीं। 3. राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) कानून 2026 क्या है? इस नए कानून के तहत राष्ट्रगीत वंदे मातरम को राष्ट्रगान के समान कानूनी सुरक्षा दी गई है, और इसके गायन में जानबूझकर बाधा डालने पर 3 साल की सजा या जुर्माना हो सकता है। 4. क्या इस मामले में कानूनी एफआईआर या कोर्ट केस हो सकता है? हां, यदि कोई पक्ष शिकायत या जनहित याचिका दर्ज कराता है तो अदालत यह जांच कर सकती है कि क्या यह राष्ट्रगीत का जानबूझकर किया गया अनादर था। https://trendkia.com/politics/delhi-sthita-congress-mukhyalaya-men-vande-mataram-para-gaharaya-rajanitika-vivada-bjp-ke-hamalon-ke-bicha-kanuni-karravai-para-ba-17111 TrendKia — Har trend, sabse pehle.