धर्मेंद्र प्रधान का बड़ा बयान, नीट विरोध और जेन जी को लेकर तोड़ी चुप्पी; कहा- पद से बढ़कर देश पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भुवनेश्वर के जीएम विश्वविद्यालय में छात्रों को संबोधित करते हुए अपने इस्तीफे पर पहली बार खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि नीट विरोध प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने जेन जी को गुमराह करने की कोशिश की थी, और उनके लिए कोई भी पद देश से बड़ा नहीं है। भुवनेश्वर के जीएम विश्वविद्यालय में एक कार्यक्रम के दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे के पीछे की असली वजहों पर विस्तार से रोशनी डाली। उन्होंने छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए साफ किया कि उनके लिए मंत्री पद से ज्यादा देश और युवा पीढ़ी का भविष्य हमेशा सर्वोपरि रहा है। यह पहला मौका था जब उन्होंने सार्वजनिक रूप से इस संवेदनशील विषय पर खुलकर अपनी बात रखी। जेन जी और नीट विरोध पर क्या बोले प्रधान धर्मेंद्र प्रधान ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि नीट पेपर लीक के दौरान हुए विरोध प्रदर्शनों के समय युवा पीढ़ी यानी जेन जी को जानबूझकर भ्रमित करने का प्रयास किया गया था। उन्होंने युवाओं का बचाव करते हुए उन्हें देश का भविष्य बताया और कहा कि इन बच्चों की अपनी बड़ी उम्मीदें और आकांक्षाएं हैं जो भारत को आने वाले समय में विश्व गुरु के रूप में स्थापित करेंगी। प्रधान के अनुसार, पिछले एक दशक में देश में करोड़ों बच्चों का जन्म हुआ है और उनकी ऊर्जा को सही दिशा देना बेहद जरूरी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात और इस्तीफा अपने इस्तीफे के घटनाक्रम को याद करते हुए वरिष्ठ नेता ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की थी और केंद्रीय मंत्रिपरिषद से खुद को अलग करने की पेशकश रखी थी। इसके बाद उन्होंने 25 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से आधिकारिक तौर पर इस्तीफा दे दिया था। दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए बड़े प्रदर्शनों के दो सप्ताह बाद आए इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर चर्चाओं को गर्म कर दिया है। अमित शाह और पार्टी नेताओं की प्रतिक्रियाएं धर्मेंद्र प्रधान के इस फैसले पर गृह मंत्री अमित शाह का भी रिएक्शन सामने आया था। अमित शाह ने इस कदम की सराहना करते हुए कहा था कि भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं के लिए हमेशा से ही देश का हित किसी भी पद या कुर्सी से कहीं ज्यादा ऊपर रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस इस्तीफे ने सरकार के भीतर जवाबदेही और नैतिक मूल्यों की मिसाल पेश की है, जिस पर लगातार देश भर में मंथन जारी है। इसका आप पर असर भारत में: यह घटना देश की शिक्षा प्रणाली, परीक्षा सुरक्षा और छात्र राजनीति से जुड़े मुद्दों पर राष्ट्रीय बहस को प्रभावित करती है। भुवनेश्वर में: स्थानीय छात्रों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच युवा नेतृत्व और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर नए संवाद शुरू हुए हैं। सवाल-जवाब 1. धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा क्यों दिया? उन्होंने नीट पेपर लीक विवाद और उसके बाद हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान उपजे हालातों और जेन जी को गुमराह किए जाने की कोशिशों के बाद नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दिया। 2. धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे पर पहली बार सार्वजनिक रूप से कहां बयान दिया? उन्होंने भुवनेश्वर के जीएम विश्वविद्यालय में छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए अपने इस्तीफे पर पहली बार प्रतिक्रिया दी। 3. धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री से कब मुलाकात की थी? उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात कर अपना इस्तीफा सौंपा था, और उनका यह इस्तीफा 25 जुलाई को प्रभावी हुआ था। 4. इस इस्तीफे पर गृह मंत्री अमित शाह की क्या प्रतिक्रिया थी? अमित शाह ने कहा था कि भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए देश सबसे पहले आता है और पद से ज्यादा देश का हित महत्वपूर्ण है। https://trendkia.com/politics/dharmendra-pradhan-breaks-silence-on-resignation-gen-z-misled-during-neet-protests-15230 TrendKia — Har trend, sabse pehle.