फैसल लाला द्वारा दाखिल अपील पर रामपुर कोर्ट का बड़ा फैसला, आज़म खान की बरी होने की राहत बरकरार रामपुर की स्पेशल एमपी-एमएलए अदालत ने फैसल लाला की क्रिमिनल अपील खारिज कर दी है, जिससे सपा नेता मोहम्मद आज़म खान को बरी करने वाला ट्रायल कोर्ट का फैसला बरकरार रहेगा। रामपुर की स्पेशल एमपी-एमएलए अदालत से समाजवादी पार्टी के नेता मोहम्मद आज़म खान को राहत मिली है, जो पूर्व में कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं। अदालत ने फैसल लाला की ओर से दाखिल क्रिमिनल अपील खारिज कर दी, जिससे आज़म खान को बरी करने वाला ट्रायल कोर्ट का आदेश पूरी तरह बरकरार रहेगा। पांच साल पुराना है यह विवाद यह पूरा मामला 29 मार्च 2019 का है, जब आज़म खान पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने अपने कार्यालय में चार अधिकारियों को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इसी आरोप के आधार पर फैसल लाला ने 2 अप्रैल 2019 को रामपुर के कोतवाली थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसके बाद यह मामला वर्षों तक अदालत में चलता रहा और दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं। ट्रायल कोर्ट ने पहले ही किया था बरी 18 दिसंबर 2025 को इसी मामले में ट्रायल कोर्ट पहले ही आज़म खान को दोषमुक्त करार दे चुका था। ट्रायल कोर्ट के इस आदेश से असंतुष्ट फैसल लाला ने इसे ऊपरी अदालत में चुनौती देते हुए क्रिमिनल अपील दाखिल की। इसी अपील पर स्पेशल एमपी-एमएलए कोर्ट ने विस्तार से सुनवाई की और अंततः इसे खारिज कर दिया, जिससे निचली अदालत की बरी करने वाली व्यवस्था कायम रहेगी। वकील बोले, मुवक्किल को मिली राहत आज़म खान की पैरवी कर रहे अधिवक्ता नासिर सुल्तान के मुताबिक, अपील खारिज होने से ट्रायल कोर्ट का पुराना फैसला बना रहेगा और उनके मुवक्किल को इससे कानूनी राहत मिली है। उनका कहना है कि यह फैसला आज़म खान के पक्ष में एक अहम जीत माना जा सकता है, क्योंकि इससे मामला अब उनके पक्ष में सुलझता दिख रहा है। इसका आप पर असर • राजनीति में: आज़म खान से जुड़े मामलों में मिल रही कानूनी राहत उनकी राजनीतिक स्थिति और सार्वजनिक छवि के लिए अहम मानी जा रही है। • रामपुर में: स्थानीय स्तर पर इस फैसले से साफ हो गया है कि 2019 के इस मामले में आज़म खान के खिलाफ फिलहाल कोई नई कानूनी कार्यवाही नहीं होगी। सवाल-जवाब 1. फैसल लाला की अपील क्यों खारिज हुई? क्योंकि ट्रायल कोर्ट ने पहले ही 18 दिसंबर 2025 को आज़म खान को इस मामले में बरी कर दिया था, और स्पेशल एमपी-एमएलए कोर्ट ने उस फैसले को सही ठहराया। 2. यह मामला कब का है? यह मामला 29 मार्च 2019 का है, जब आज़म खान पर अपने कार्यालय में चार अधिकारियों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप लगा था। 3. एफआईआर किसने और कब दर्ज कराई थी? फैसल लाला ने 2 अप्रैल 2019 को रामपुर के कोतवाली थाने में यह एफआईआर दर्ज कराई थी। 4. अब इस मामले में आगे क्या होगा? स्पेशल एमपी-एमएलए कोर्ट से अपील खारिज होने के बाद ट्रायल कोर्ट का आज़म खान को बरी करने वाला फैसला बरकरार रहेगा। 5. आज़म खान की तरफ से कौन पैरवी कर रहा था? आज़म खान के अधिवक्ता नासिर सुल्तान इस मामले में उनकी पैरवी कर रहे थे। https://trendkia.com/politics/faisal-lala-dvara-dakhila-apila-para-rampur-korta-ka-bara-phaisala-azam-khan-ki-bari-hone-ki-rahata-barakarara-8529 TrendKia — Har trend, sabse pehle.