एफबीआई ने भर्ती नियमों में ढील का किया बचाव, पशु क्रूरता और अन्य मामलों पर दी सफाई एफबीआई की भर्ती नीतियों में किए गए बदलावों को लेकर अमेरिकी सीनेट में तीखी बहस हुई। एजेंसी के निदेशक ने स्पष्ट किया कि ये बदलाव नियमों को लचीला बनाने के बजाय अतीत में शोषण का शिकार हुए पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए हैं। अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई यानी फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन के भर्ती नियमों को लेकर वाशिंगटन में राजनीतिक गलियारों से लेकर सुरक्षा महकमों तक सुगबुगाहट तेज हो गई है। मौजूदा प्रशासन के आने से पहले इस एजेंसी के नियम बेहद कड़े थे। उस दौर में उन सभी उम्मीदवारों को सीधे तौर पर खारिज कर दिया जाता था, जिनका इतिहास सेक्स वर्कर को काम पर रखने, अपने नियोक्ता से चोरी करने या फिर पशुओं के साथ अमानवीय कृत्य यानी बेस्टिएलिटी जैसी हरकतों में संलिप्त रहने का रहा हो। लेकिन इस साल अगस्त में सामने आई एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इन सख्त मानदंडों को चुपचाप तरीके से हल्का कर दिया गया था। कई सूत्रों ने दावा किया था कि एजेंसी ने कुछ खास मामलों में नियुक्तियों को सुगम बनाने के लिए यह कदम उठाया है। इस पूरे मामले पर डेमोक्रेट सीनेटरों की ओर से एफबीआई को एक पत्र भेजा गया, जिससे यह बात सामने आई कि ये नए मानदंड संभवतः फरवरी 2025 की शुरुआत में ही बिना किसी बड़े शोरगराबे के लागू कर दिए गए थे। इन अद्यतन नियमों के तहत अब ऐसे उम्मीदवारों को भी नौकरी के लिए हरी झंडी मिल सकती है, जिन्होंने तीन साल से भी अधिक समय पहले अपने संस्थान में चोरी की हो या फिर दस साल पहले तीन से भी कम बार पैसों के बदले शारीरिक संबंध बनाए हों। पहले इस तरह की आदतों को ब्लैकमेल यानी ब्लैकमेलिंग के जोखिम के मद्देनजर पूरी तरह अयोग्य मान लिया जाता था, बशर्ते उम्मीदवार किसी संवेदनशील सार्वजनिक भरोसे के पद पर तैनात न होने वाला हो। हालांकि, इन तमाम बदलावों के बीच एक विशेष प्रावधान ने लोगों और राजनेताओं का सबसे ज्यादा ध्यान खींचा है। सीनेटरों के पत्र के अनुसार, यदि किसी आवेदक के जीवन में अतीत में पशु क्रूरता या बेस्टिएलिटी का कोई इतिहास रहा भी है, तो अब उसे स्वतः अयोग्य नहीं माना जाएगा, बशर्ते वह कृत्य आवेदक के 18 वर्ष की आयु पूरी करने से पहले का हो। इस एक बिंदु पर आकर नीति निर्माताओं और सुरक्षा अधिकारियों के बीच तीखी बहस छिड़ गई, जिसने संसद के गलियारों से लेकर आम जनता तक बहस को जन्म दे दिया है। गुरुवार को आयोजित एक oversight hearing के दौरान इलिनोइस से ताल्लुक रखने वाले डेमोक्रेट सीनेटर डिक डर्बिन ने कड़े शब्दों में सवाल उठाते हुए कहा कि आपने उन आवेदकों के लिए स्वतः अयोग्यता का नियम हटा दिया है जो बेस्टिएलिटी में लिप्त रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि वे पीड़ितों की बात नहीं कर रहे हैं, बल्कि उन लोगों की बात कर रहे हैं जिन्होंने खुद ऐसा किया है। उन्होंने सवाल किया कि क्या आप इस नीति से असहमत हैं। इसके जवाब में अधिकारी ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि बेस्टिएलिटी में शामिल होने वाले वे लोग थे जिन्हें इसके लिए मजबूर किया गया था और वे असल में इसके पीड़ित थे। उन्होंने जोर देकर कहा कि हमारी एफबीआई किसी भी पीड़ित को अपराधी मानकर उसे देश की सेवा करने से वंचित नहीं करेगी। इसी सिलसिले में आगे की बातचीत के दौरान लुईसियाना के रिपब्लिकन सीनेटर जॉन केनेडी के साथ एक और दिलचस्प सवाल-जवाब सामने आया। उन्होंने पूछा कि पहले के नियमों के तहत इस कृत्य के दोनों पक्षों में शामिल किसी भी व्यक्ति पर प्रतिबंध था। इस पर जब केनेडी ने पूछा कि इस मामले में दोनों पक्ष कौन से होते हैं, क्या आप जानवर को भी अयोग्य ठहराते थे, तो जवाब मिला कि हमारे पास बेहतरीन कैनाइन यानी प्रशिक्षित श्वान दस्ते हैं, लेकिन हम उन्हें नौकरी की दौड़ से बाहर नहीं कर रहे हैं। इसके बाद सीनेटर जॉन केनेडी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मानकों में इस तरह के बदलावों ने एफबीआई की छवि को सचमुच भारी नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने सवाल किया कि आप आखिर इस विषय पर बात ही क्यों कर रहे हैं, जिसके जवाब में यह स्पष्ट किया गया कि एजेंसी का इस तरह की हरकतों से कोई लेना-देना नहीं है। इस पूरे विवाद के बीच मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए एफबीआई की राष्ट्रीय प्रेस शाखा ने एक आधिकारिक बयान जारी किया। उस बयान में यह रेखांकित किया गया कि एजेंसी ने अतीत में कई ऐसे आवेदकों को बाहर कर दिया था जो मानव तस्करी से जुड़ी बेस्टिएलिटी या यौन उत्पीड़न का शिकार हुए थे। बयान में कहा गया कि एफबीआई अमेरिकी सरकार के भीतर अपने आवेदकों और कर्मचारियों के लिए हमेशा से उच्चतम उपयुक्तता मानकों को बनाए रखती है और आगे भी रखेगी। वर्तमान में किए गए बदलावों के जरिए एजेंसी को कुछ खास परिस्थितियों में समग्र दृष्टिकोण अपनाने की अनुमति मिलती है। उदाहरण के लिए, पिछले कुछ वर्षों में ऐसे कई आवेदक आए हैं जिन्होंने अपने अतीत में यौन शोषण का दर्द झेला है, जिसके कारण उनके बैकग्राउंड चेक यानी पृष्ठभूमि की जांच के दौरान वेश्यावृत्ति या इसी तरह के अन्य मुद्दों पर सवाल खड़े हो गए थे, जबकि इसमें उन व्यक्तियों की कोई गलती नहीं थी। पहले के कड़े नियमों के तहत ऐसे सभी पीड़ितों को विचार के दायरे से बाहर कर दिया जाता था, लेकिन अब उन पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जा सकता है। एजेंसी ने यह भी साफ किया कि इस बात का सुझाव देना पूरी तरह से गलत है कि आपराधिक व्यवहार अब एफबीआई में अयोग्य नहीं माना जाएगा। बयान में दो टूक कहा गया कि जो भी आवेदक किसी भी तरह के आपराधिक यौन कृत्यों में संलिप्त रहा है, वह नौकरी के लिए कभी पात्र नहीं हो सकता और ऐसा सोचना भी पूरी तरह से बेतुका है। दूसरी ओर, डोनाल्ड ट्रंप के मौजूदा राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान एफबीआई के भीतर बड़े पैमाने पर अनुभवी कर्मचारियों के पलायन या छंटनी की खबरें भी सामने आई हैं। सीनेट के डेमोक्रेट्स द्वारा भेजे गए पत्र में इस बात का भी दावा किया गया है कि डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत से लेकर अब तक एक शुद्धिकरण अभियान चलाया गया है। इसके परिणामस्वरूप 5,000 से अधिक गैर-पक्षपाती और करियर कर्मचारियों को बाहर का रास्ता देखना पड़ा है। इस फेरबदल में एजेंसी के सभी छह पूर्व कार्यकारी सहायक निदेशक, कम से कम 18 स्पेशल एजेंट्स इन चार्ज और एक हजार से अधिक विशेष एजेंट अपनी नौकरियां छोड़ चुके हैं या उन्हें हटाया गया है। इसका आप पर असर एफबीआई की भर्ती नीतियों में किए गए बदलावों का सीधा असर अमेरिकी सुरक्षा व्यवस्था और सरकारी नौकरियों के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों पर पड़ेगा। • संयुक्त राज्य अमेरिका में: नौकरी चाहने वाले ऐसे उम्मीदवारों को राहत मिलेगी जो अतीत में किसी शोषण या परिस्थिति के शिकार रहे हैं, लेकिन अब वे बिना किसी पुरानी बाधा के आवेदन कर सकेंगे। • संघीय एजेंसियों में: सुरक्षा बलों और खुफिया तंत्र के भीतर कर्मचारियों की कार्यप्रणाली और आंतरिक चयन प्रक्रिया पर इसका गहरा प्रभाव पड़ेगा, जिससे व्यापक प्रशासनिक बदलाव देखने को मिल रहे हैं। ऐसा क्यों हुआ एफबीआई द्वारा अपने भर्ती मानकों में बदलाव करने के पीछे मुख्य कारण एजेंसी के भीतर कर्मचारियों की भारी कमी और पिछली नीतियों की कठोरता रही है। • कर्मचारियों का पलायन: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत से लेकर अब तक हजारों अनुभवी करियर कर्मियों और विशेष एजेंटों ने एजेंसी छोड़ी है, जिससे नए कर्मियों की भर्ती की आवश्यकता बढ़ी है। • पीड़ितों के साथ न्याय: एजेंसी का तर्क है कि पुराने कड़े नियमों के कारण कई ऐसे आवेदक स्वतः खारिज हो जाते थे जो अपने अतीत में मानव तस्करी या यौन शोषण के शिकार रहे थे और जिनकी कोई गलती नहीं थी। • मूल्यांकन दृष्टिकोण में बदलाव: एजेंसी ने आवेदकों के बैकग्राउंड चेक की प्रक्रिया को अधिक समग्र बनाने के लिए कुछ पुराने और कठोर स्वचालित प्रतिबंधों को युक्तिसंगत बनाया है। सवाल-जवाब 1. एफबीआई ने अपनी भर्ती नीतियों में किस प्रकार के बदलाव किए हैं? एफबीआई ने अपने भर्ती मानकों में ढील दी है जिसके तहत नियोक्ता से चोरी या अतीत की कुछ निश्चित परिस्थितियों जैसे मामलों में स्वचालित अयोग्यता के नियमों को लचीला बनाया गया है। 2. क्या बेस्टिएलिटी से जुड़े मामलों में कोई नई छूट दी गई है? हाँ, नए दिशा-निर्देशों के अनुसार यदि पशु क्रूरता या बेस्टिएलिटी का इतिहास आवेदक के 18 वर्ष की आयु पूरी होने से पहले का है, तो उसे स्वतः अयोग्य नहीं माना जाएगा। 3. एजेंसी ने इन बदलावों के पीछे क्या तर्क दिया है? एजेंसी का कहना है कि ये बदलाव उन पीड़ितों को ध्यान में रखकर किए गए हैं जो अतीत में मानव तस्करी या शोषण का शिकार हुए थे और जिनके बैकग्राउंड चेक में ऐसी बातें उनके दोष के बिना सामने आती हैं। 4. क्या गंभीर आपराधिक कृत्यों में शामिल लोगों को नौकरी मिल सकती है? नहीं, एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि आपराधिक यौन कृत्यों में सक्रिय रूप से संलिप्त रहे किसी भी आवेदक को नौकरी के लिए योग्य नहीं माना जाएगा। 5. मौजूदा प्रशासन के दौरान एफबीआई से कितने कर्मचारी बाहर हुए हैं? सीनेट के डेमोक्रेट्स के पत्र के अनुसार, वर्तमान कार्यकाल की शुरुआत से अब तक 5,000 से अधिक गैर-पक्षपाती करियर कर्मी और कई शीर्ष अधिकारी एजेंसी छोड़ चुके हैं। https://trendkia.com/politics/fbi-ne-bharti-niyamon-men-dhila-ka-kiya-bachaya-pashu-krurata-aura-anya-mamalon-para-di-saphai-32545 TrendKia — Har trend, sabse pehle.