घोसी विधानसभा उपचुनाव से पहले जनता का मिजाज, विधायक सुधाकर सिंह के निधन के बाद क्या हैं स्थानीय मुद्दे घोसी विधानसभा सीट पर विधायक सुधाकर सिंह के निधन के बाद चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है। स्थानीय मतदाता बिजली बिल, स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, सड़क और रोजगार जैसे बुनियादी मुद्दों पर वोट करने का मन बना रहे हैं। उत्तर प्रदेश की घोसी विधानसभा सीट पर उपचुनाव से पहले राजनीतिक हलचल के साथ-साथ आम मतदाताओं के बीच भी चुनावी चर्चाएं जोर पकड़ चुकी हैं। घोसी विधानसभा संख्या 354 के विधायक सुधाकर सिंह के निधन के कारण यह सीट फिलहाल खाली पड़ी है, जिसके चलते आगामी चुनावों को लेकर जनता के बीच कई तरह के सवाल तैर रहे हैं। पिछले कार्यकाल के दौरान क्षेत्र के विकास को लेकर लोगों में कितनी संतुष्टि है और क्या बिजली, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा बेरोजगारी जैसी पुरानी समस्याएं आज भी जस की तस बनी हुई हैं, इन सभी मुद्दों पर जनता खुलकर अपनी राय रख रही है। मतदाता इस बात पर भी मंथन कर रहे हैं कि इस बार किसी बाहरी बड़े राजनीतिक नाम पर भरोसा जताया जाए या फिर किसी स्थानीय चेहरे को प्राथमिकता दी जाए। इन तमाम जमीनी सवालों की टोह लेने के लिए मतदाताओं से सीधी बातचीत की गई, जिसमें यह बात प्रमुखता से सामने आई कि जनता को अब सिर्फ बड़े-बड़े वादे नहीं चाहिए, बल्कि ऐसा जनप्रतिनिधि चाहिए जो चुनाव जीतने के बाद भी क्षेत्र में सक्रिय रहे और आम लोगों की समस्याओं को सुने। गायब रहने वाले नेताओं से जनता में नाराजगी क्षेत्र के मतदाताओं का कहना है कि हर बार चुनाव के समय विभिन्न दलों के प्रत्याशी मैदान में उतरते हैं और लुभावने वादे करते हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद वे क्षेत्र से गायब हो जाते हैं। घोसी के विधायक का निधन 20 नवंबर को हुआ था, लेकिन लोगों का यह भी कहना है कि जब वे जीवित थे और चुनाव जीतकर आए थे, तब भी वे कभी क्षेत्र में नजर नहीं आए। जनता को उम्मीद रहती है कि उनका चुना हुआ प्रतिनिधि आम गरीबों की सुनेगा, उनके सुख-दुख में साथ खड़ा होगा और हर समस्या का समाधान करेगा, लेकिन चुनाव जीतने के बाद जनप्रतिनिधियों का रुख बदल जाता है और वे आम जनता की पहुंच से दूर हो जाते हैं। बिजली और बुनियादी सुविधाओं का गंभीर संकट घोसी विधानसभा क्षेत्र की बात करें तो यहां बिजली का भारी बिल आना और बिजली विभाग की कार्यप्रणाली सबसे बड़ी समस्याओं में शुमार है। हैरानी की बात यह है कि इसी जनपद से उत्तर प्रदेश के ऊर्जा एवं नगर विकास मंत्री एके शर्मा का नाता है, इसके बावजूद उनके गृह जिले के इस हिस्से में बिजली से जुड़ी दिक्कतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। बिजली विभाग के कर्मचारियों द्वारा अक्सर गलत या बढ़े हुए बिल भेजे जाते हैं, जिससे ग्रामीण और आम लोग खासे परेशान हैं। इस बार के चुनावों में वोट डालते वक्त मतदाता बिजली, सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति को सबसे बड़ा पैमाना बनाने का मूड बना चुके हैं। विकास कार्यों की अनदेखी और आवास योजना में धांधली स्थानीय निवासी चंद्रिका चौहान के अनुसार, स्वर्गीय सुधाकर सिंह इस विधानसभा क्षेत्र से कई बार विधायक रह चुके हैं, लेकिन जितनी बार भी उन्हें जीत मिली, उन्होंने इस क्षेत्र में अपेक्षित विकास कार्य नहीं किए। हालांकि उन्होंने अपने घर के आसपास के हिस्से में विकास जरूर कराया, लेकिन घोसी विधानसभा के इंद्रा क्षेत्र जैसे कई इलाकों में कोई विकास कार्य नजर नहीं आया। लोगों का आरोप है कि आवास योजनाओं के नाम पर उनसे पैसे लिए जाते हैं और इसके खिलाफ शिकायत करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती है। जनता का मानना है कि विधायक ऐसा होना चाहिए जो लोगों की शिकायतों को गंभीरता से ले और उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान करे। भोले-भाले ग्रामीणों को ठगने का आरोप रंगलाल बताते हैं कि इस विधानसभा क्षेत्र में जो भी विधायक बनते हैं, वे चुनाव के दिनों में तो गांवों का रुख करते हैं, लेकिन जीतने के बाद उनका कोई अता-पता नहीं रहता। विभिन्न दलों के नेता भोले-भाले ग्रामीणों के पास आकर उन्हें अपने जाल में फंसाते हैं और वोट हासिल करने के बाद जब विकास कार्यों की बारी आती है तो वे पूरी तरह नदारद हो जाते हैं। पिछले पांच वर्षों में इस विधानसभा क्षेत्र में कोई उल्लेखनीय विकास कार्य नहीं हुआ है और न ही क्षेत्रीय विधायक कभी जनता के बीच दिखाई दिए। इस बार मतदाता यह तय कर चुके हैं कि जो नेता इस जिले और क्षेत्र का स्थानीय होगा तथा जनता के बीच रहकर उनके कामों को समझेगा, उसी को इस बार घोसी का विधायक चुना जाएगा ताकि वह जीत के बाद गायब न हो। स्थानीय प्रत्याशी और रोजगार को प्राथमिकता श्रवण कुमार और डॉ. अरविंद कुमार का कहना है कि चाहे किसी भी राजनीतिक दल का उम्मीदवार हो, लेकिन प्रत्याशी इस क्षेत्र का स्थानीय होना चाहिए। जो नेता यहीं का रहने वाला होगा, उसी को इस बार चुनाव में समर्थन दिया जाएगा। जनता ऐसा प्रतिनिधि चाहती है जो पूरी तरह से जनहित में काम करे और विकास कार्यों पर पूरा ध्यान दे। अब तक यह आम अनुभव रहा है कि चुनाव के दौरान प्रत्याशी लगातार क्षेत्र में आते हैं, लेकिन जीत के बाद गायब हो जाते हैं। मौजूदा सीट के विधायक का रवैया भी ऐसा ही रहा है, जो कभी-कभार क्षेत्र में आते भी थे तो केवल बड़े लोगों से मिलकर चले जाते थे और छोटे तबके के लोगों के पास कभी नहीं पहुंचते थे। इस बार जनता की यह पुरजोर मांग है कि नया विधायक क्षेत्र की बेरोजगारी को दूर करे, रोजगार के नए अवसर पैदा करे और पूरे विधानसभा क्षेत्र का समग्र विकास सुनिश्चित करे। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली पंकज कुमार का कहना है कि इस बार का प्रत्याशी ऐसा होना चाहिए जो शिक्षा, सड़क, पेयजल और स्वास्थ्य व्यवस्था पर विशेष रूप से ध्यान दे। वर्तमान में इस विधानसभा क्षेत्र का शैक्षणिक स्तर लगातार गिरता जा रहा है, वहीं स्वास्थ्य सेवाओं का हाल यह है कि पूरे इलाके में कोई ऐसा बड़ा अस्पताल नहीं है जहां किसी गंभीर बीमारी की स्थिति में सही इलाज मिल सके। जनता चाहती है कि एक ऐसा अस्पताल बनवाया जाए जो लोगों की जरूरत के वक्त काम आ सके। इसके अलावा, लोगों की यह भी मांग है कि चुना हुआ प्रतिनिधि अपने विधानसभा क्षेत्र में ही रहकर आम जनता की बात सुने, न कि चुनाव जीतने के बाद पूरी तरह से गायब हो जाए। इसका आप पर असर भारत में: घोसी विधानसभा उपचुनाव से जुड़े मुद्दे दिखाते हैं कि ग्रामीण इलाकों में मतदाता अब बुनियादी सुविधाओं और नेताओं की जवाबदेही को सबसे ऊपर रख रहे हैं। घोसी में: स्थानीय निवासियों के लिए बिजली बिल की गड़बड़ियों, स्वास्थ्य सेवाओं की कमी और रोजगार के अभाव का सीधा असर उनके दैनिक जीवन पर पड़ रहा है। सवाल-जवाब 1. घोसी विधानसभा सीट क्यों खाली हुई है? घोसी विधानसभा सीट के विधायक सुधाकर सिंह के 20 नवंबर को हुए निधन के कारण यह सीट खाली हुई है। 2. घोसी क्षेत्र के मतदाताओं की मुख्य समस्याएं क्या हैं? मतदाताओं के अनुसार बिजली के गलत बिल, सड़कों की बदहाली, शिक्षा का गिरता स्तर और स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव यहां की प्रमुख समस्याएं हैं। 3. जनता इस बार किस तरह के प्रत्याशी की मांग कर रही है? जनता ऐसे स्थानीय प्रत्याशी की मांग कर रही है जो चुनाव जीतने के बाद क्षेत्र में रहे और लोगों की समस्याओं का समाधान करे। 4. स्थानीय लोगों ने किस नेता के गृह क्षेत्र का जिक्र किया है? स्थानीय लोगों ने बताया कि इसी जनपद से ऊर्जा एवं नगर विकास मंत्री एके शर्मा का नाता है, फिर भी बिजली की बड़ी समस्या बनी हुई है। https://trendkia.com/politics/ghoshi-assembly-bypoll-voter-mood-local-issues-and-absentee-mlas-21253 TrendKia — Har trend, sabse pehle.