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  "type": "article",
  "title": "गुलबर्गा से BA और LLB की पढ़ाई करने वाले मल्लिकार्जुन खरगे की पारिवारिक त्रासदी से कांग्रेस अध्यक्ष बनने की कहानी",
  "summary": "कर्नाटक के बीदर जिले में जन्मे मल्लिकार्जुन खरगे ने बचपन में रजाकारों के हमले में अपनी मां और बहन को खो दिया था। इस त्रासदी के बावजूद उन्होंने BA और LLB की डिग्री हासिल की और लगातार 10 चुनाव जीतने का रिकॉर्ड बनाया।",
  "content": "भारतीय राजनीति के शीर्ष फलक पर विराजमान कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का जीवन संघर्ष, कठिन परिस्थितियों और शैक्षणिक दृढ़ता की एक अनूठी मिसाल है। बेहद कम उम्र में एक भयंकर पारिवारिक त्रासदी झेलने के बाद भी उन्होंने अपनी पढ़ाई नहीं रोकी। उन्होंने कला विषय में स्नातक यानी BA की डिग्री ली और उसके बाद कानून की पढ़ाई पूरी कर LLB स्नातक बने। कानूनी वकालत से अपने करियर की शुरुआत करने वाले खरगे ने मजदूर यूनियनों के हक के लिए आवाज उठाई और फिर राजनीति में कदम रखकर लगातार 10 चुनावों में जीत दर्ज करने का कीर्तिमान स्थापित किया।\n\n1948 का भीषण हादसा और रजाकारों का हमला\nमल्लिकार्जुन खरगे का जन्म 21 जुलाई 1942 को कर्नाटक राज्य के बीदर जिले के अंतर्गत आने वाले वरावट्टी गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम मपन्ना खरगे और माता का नाम सबव्वा था। जब खरगे केवल सात वर्ष के थे, तब वर्ष 1948 में उनके जीवन में एक अत्यंत दुखद मोड़ आया। उस समय हैदराबाद रियासत के दौर में निजाम का समर्थन करने वाली अर्धसैनिक टुकड़ी यानी रजाकारों ने उनके गांव में हमला कर दिया था।\n\nउपद्रवी रजाकारों ने खरगे के घर को आग के हवाले कर दिया। इस भीषण अग्निकांड में उनकी मां सबव्वा और उनकी बहन जिंदा जल गईं और उनकी आंखों के सामने ही उनकी दर्दनाक मौत हो गई। घटना के वक्त उनके पिता मपन्ना खरगे खेत पर काम कर रहे थे, जिसके कारण वे किसी तरह अपने मासूम बेटे मल्लिकार्जुन को सुरक्षित बचाने में सफल रहे। इस त्रासदी के बाद उनका परिवार गुलबर्गा चला गया और वहां से एक नए जीवन की नींव रखी। वर्ष 1948 में ही भारत सरकार की सैन्य कार्रवाई ऑपरेशन पोलो के जरिए हैदराबाद रियासत का भारतीय संघ में विलय पूरा हुआ था।\n\nस्कूली शिक्षा और कानून की डिग्री का सफर\nपारिवारिक त्रासदी और आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद मल्लिकार्जुन खरगे ने अपनी शिक्षा जारी रखी। उन्होंने अपनी शुरुआती स्कूली पढ़ाई कर्नाटक के गुलबर्गा (जिसे अब कलबुर्गी के नाम से जाना जाता है) में स्थित नूतन विद्यालय से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज गुलबर्गा में दाखिला लिया और बैचलर ऑफ आर्ट्स यानी BA की डिग्री हासिल की। उस दौरान यह महाविद्यालय कर्नाटक यूनिवर्सिटी धारवाड़ से संबद्ध था।\n\nस्नातक की पढ़ाई पूरी करने के पश्चात खरगे ने वकालत के क्षेत्र में आगे बढ़ने का मन बनाया। उन्होंने सेठ शंकरलाल लाहोटी लॉ कॉलेज गुलबर्गा में प्रवेश लिया और वहां से कानून की डिग्री यानी LLB की परीक्षा सफलतापूर्वक उत्तीर्ण की। इस तरह शैक्षणिक रूप से वे एक ग्रेजुएट प्रोफेशनल (BA, LLB) बने।\n\nवकालत, श्रमिक संगठन और छात्र राजनीति से शुरुआत\nकानून की डिग्री प्राप्त करने के बाद मल्लिकार्जुन खरगे ने कोर्ट में वकालत की प्रैक्टिस शुरू की। उन्होंने अपने शुरुआती दिनों में प्रसिद्ध और वरिष्ठ न्यायविद जस्टिस शिवराज पाटिल के साथ एक जूनियर वकील के रूप में काम सीखा। वकालत के दौरान खरगे का झुकाव मजदूर वर्ग और श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा की ओर रहा। उन्होंने कई ट्रेड यूनियनों और श्रमिक संगठनों के लिए अदालत में कानूनी लड़ाइयां लड़ीं। वे एमएसके मिल एम्प्लॉइज यूनियन के कानूनी सलाहकार पद पर भी कार्यरत रहे। मजदूरों के अधिकारों के लिए किए गए इस कानूनी कार्य ने उनके भावी राजनीतिक जीवन के लिए एक मजबूत आधार तैयार किया।\n\nराजनीति के प्रति उनका लगाव कॉलेज के दिनों से ही दिखने लगा था। गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज गुलबर्गा में पढ़ाई के दौरान वे विद्यार्थियों के बीच काफी लोकप्रिय थे और छात्र संघ के जनरल सेक्रेटरी चुने गए थे। वर्ष 1969 में उन्होंने औपचारिक रूप से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। उनकी कार्यकुशलता को देखते हुए उन्हें जल्द ही गुलबर्गा सिटी कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त कर दिया गया। व्यक्तिगत जीवन की बात करें तो खरगे का विवाह 13 मई 1968 को राधाबाई के साथ हुआ था। उनके परिवार में दो बेटियां और तीन बेटे हैं। उनके बेटे प्रियंक खरगे भी राजनीति में सक्रिय हैं और कर्नाटक राज्य सरकार में मंत्री रह चुके हैं।\n\nलगातार 10 चुनाव जीतने का अद्वितीय रिकॉर्ड\nमल्लिकार्जुन खरगे ने वर्ष 1972 में पहली बार चुनावी मैदान में कदम रखा और कर्नाटक विधानसभा चुनाव में गुरमिटकल सीट से प्रत्याशी बनकर विजय हासिल की। इसके बाद से उनका चुनावी सफर अजेय रहा। उन्होंने गुरमिटकल और अन्य क्षेत्रों से लगातार नौ विधानसभा चुनावों में जीत हासिल की। वर्ष 2009 में वे पहली बार लोकसभा के सदस्य चुने गए और संसद पहुंचे। इस प्रकार उन्होंने अपने करियर में लगातार 10 चुनाव जीतने का एक दुर्लभ रिकॉर्ड कायम किया।\n\nअपने लंबे सार्वजनिक जीवन में उन्होंने राज्य और केंद्र सरकार में कई महत्वपूर्ण विभागों का दायित्व संभाला। कर्नाटक सरकार में वे शिक्षा, गृह, राजस्व, ग्रामीण विकास, पंचायत राज, परिवहन और जल संसाधन जैसे विभागों के मंत्री रहे। केंद्र सरकार में उन्होंने रेल मंत्री और श्रम एवं रोजगार मंत्री के रूप में सेवाएं दीं। वर्ष 2014 से 2019 के दौरान वे लोकसभा में कांग्रेस दल के नेता रहे। वर्ष 2021 में वे उच्च सदन यानी राज्यसभा के सदस्य बने और वहां विपक्ष के नेता की जिम्मेदारी संभाली।\n\nकांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष पद\nअक्टूबर 2022 में मल्लिकार्जुन खरगे को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया। सीताराम केसरी के बाद, लगभग 24 वर्षों के लंबे अंतराल में वे कांग्रेस पार्टी के पहले ऐसे अध्यक्ष बने जो गांधी परिवार से बाहर के हैं। बचपन के भयंकर हादसे, बेघर होने और संसाधनों की कमी से जूझने के बाद भी शिक्षा हासिल कर देश की सबसे पुरानी पार्टी के शीर्ष पद तक पहुंचने की खरगे की यह यात्रा बेहद उल्लेखनीय है।\n\nइसका आप पर असर\nभारत में: यह कहानी यह दर्शाती है कि उच्च शिक्षा और दृढ़ संकल्प के बल पर व्यक्ति कठिनतम परिस्थितियों से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर योगदान दे सकता है।\n\nराजनीतिक व्यवस्था में: एक कानून स्नातक और अनुभवी जनप्रतिनिधि के नेतृत्व से विधायी कार्यों और सार्वजनिक नीतियों के निर्धारण में व्यावहारिक समझ का विस्तार होता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. मल्लिकार्जुन खरगे की शैक्षणिक योग्यता क्या है?\nमल्लिकार्जुन खरगे ने गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज गुलबर्गा से BA और सेठ शंकरलाल लाहोटी लॉ कॉलेज से LLB की डिग्री हासिल की है।\n\n2. 1948 में मल्लिकार्जुन खरगे के परिवार के साथ क्या घटना घटी थी?\nवर्ष 1948 में रजाकारों के हमले के दौरान उनके घर में आग लगा दी गई थी, जिसमें उनकी मां और बहन की मौत हो गई थी।\n\n3. मल्लिकार्जुन खरगे ने लगातार कितने चुनाव जीते हैं?\nमल्लिकार्जुन खरगे ने अपने राजनीतिक करियर में लगातार 10 चुनाव (9 विधानसभा और 1 लोकसभा) जीतने का रिकॉर्ड बनाया है।\n\n4. मल्लिकार्जुन खरगे कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष कब बने?\nअक्टूबर 2022 में मल्लिकार्जुन खरगे को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया।\n\nप्रेरणा और सबक\n• विपरीत परिस्थितियों में साहस: बचपन में भारी व्यक्तिगत क्षति झेलने के बाद भी जीवन में निराश न होकर आगे बढ़ने का जज्बा दिखाया।\n• शिक्षा को प्राथमिकता: कठिन आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों के बीच भी पढ़ाई जारी रखी और BA व LLB जैसी पेशेवर डिग्रियां हासिल कीं।\n• जमीनी जुड़ाव: मजदूर यूनियनों और आम श्रमिकों के अधिकारों के लिए वकालत कर अपने करियर की मजबूत आधारशिला रखी।\n• सतत निरंतरता: लगातार 10 चुनावों में जीत दर्ज कर सार्वजनिक सेवा में अपनी लगन और कार्यकुशलता को साबित किया।",
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  "category": "राजनीति",
  "publishedAt": "2026-07-30",
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    "मल्लिकार्जुन खरगे",
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