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  "title": "ज्ञानेश कुमार के मुद्दे पर बिखरा इंडी गठबंधन, ममता बनर्जी और राहुल गांधी की उम्मीदों को झटका",
  "summary": "मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी दलों में फूट साफ नजर आ रही है। राहुल गांधी और ममता बनर्जी के तमाम प्रयासों के बावजूद इंडी गठबंधन के घटक दल अलग-अलग विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।",
  "content": "संसद के मॉनसून सत्र के दौरान राहुल गांधी के नेतृत्व में तमाम विपक्षी दल एकजुट नजर आने की कोशिश कर रहे थे। छात्रों के भविष्य से जुड़े विषयों से लेकर अयोध्या के राम मंदिर में दान चोरी जैसे मामलों तक, बचा-कुचा विपक्ष हर मंच पर एक साथ खड़ा दिखाई दिया। पैंतीस से ज्यादा सांसदों की ताकत रखने वाली समाजवादी पार्टी और उसके मुखिया अखिलेश यादव भी हर मौके पर राहुल गांधी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलते दिखे। सदन की कार्यवाही को बाधित करने की बात हो या फिर संसद परिसर के भीतर किसी मुद्दे पर विरोध जताने की, पूरा विपक्ष एक ही दिशा में आगे बढ़ता हुआ प्रतीत हो रहा था। हालांकि, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर खड़े हुए विवाद पर पूरा विपक्षी खेमा बुरी तरह बिखरा हुआ नजर आ रहा है।\n\nज्ञानेश कुमार के इस्तीफे पर अलग-थलग पड़े दल\nएक अंग्रेजी समाचार पत्र में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू के हवाले से एक रिपोर्ट सामने आई थी, जिसमें कहा गया कि मुख्य चुनाव आयुक्त कई मामलों में अपनी मर्जी से फैसले लेते रहे हैं। इस खुलासे के सामने आने के बाद कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, वामपंथी दलों के विभिन्न घटक, तृणमूल कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम समेत कई विपक्षी दल सड़कों पर उतर आए। ये सभी लगातार ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने की मांग कर रहे हैं। इन तमाम विरोध प्रदर्शनों को देखकर पहली नजर में ऐसा ही प्रतीत होता है कि इस मसले पर पूरा विपक्ष एक मंच पर है। लेकिन यदि इन प्रदर्शनों की गहराई से समीक्षा की जाए, तो एक बिल्कुल अलग ही तस्वीर सामने आती है।\n\nविपक्षी दलों की अलग-अलग राहें और चुनावी राज्यों की स्थिति\nयह बात तो सही है कि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी पाले में शामिल दल विरोध-प्रदर्शनी कर रहे हैं, लेकिन ये सभी अपने-अपने स्तर पर अकेले ही यह लड़ाई लड़ रहे हैं। गौर करने वाली बात यह है कि आगामी चुनावी राज्यों में भी विभिन्न विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शन पूरी तरह अलग-अलग आयोजित हो रहे हैं। उदाहरण के लिए, उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के नेता लगातार यह स्पष्ट कर रहे हैं कि दोनों दल गठबंधन के तहत ही चुनावी मैदान में उतरेंगे। इसके बावजूद, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के विरोध में दोनों पार्टियां अपने-अपने बैनर तले अलग प्रदर्शन कर रही हैं। कमोबेश यही स्थिति बिहार में भी बनी हुई है, जहां कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल, माले और विकासशील इंसान पार्टी चारों दल अलग-अलग विरोध जताते नजर आ रहे हैं। महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में भी ठीक यही हाल देखने को मिल रहा है।\n\nपश्चिम बंगाल और ममता बनर्जी की कोशिशें\nपश्चिम बंगाल का विधानसभा चुनाव हारने के बाद इंडी गठबंधन को लेकर गंभीर रुख अपनाने वाली ममता बनर्जी की पार्टी का रवैया भी कुछ अलग नहीं है। एक तरफ नंदीग्राम उपचुनाव में ममता बनर्जी ने कांग्रेस के उम्मीदवार को समर्थन देने का ऐलान किया है, तो दूसरी तरफ ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन आयोजित करने के मामले में तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस दोनों अलग-अलग कार्यक्रम कर रही हैं। इंडी गठबंधन में साफ तौर पर दिख रहे इस बिखराव को पाटने के लिए अब ममता बनर्जी ने खुद कमान संभाल ली है और वे इसमें सुधार करने के प्रयासों में जुट गई हैं। इसी कड़ी में दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में आगामी 30 सितंबर को इंडी गठबंधन की एक अहम बैठक बुलाई गई है। ममता बनर्जी का कहना है कि उन्होंने इस संबंध में राहुल गांधी से बातचीत की है और वे इस कोशिश में हैं कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा उनके कार्यकाल में हुए विशेष गहन पुनरीक्षण के खिलाफ संयुक्त रूप से एकजुटता प्रदर्शित की जाए, ताकि सरकार पर चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की विश्वसनीयता को बचाने का दबाव बनाया जा सके।\n\nअखिलेश यादव का किनारा और भविष्य की चुनौतियां\nइंडी गठबंधन की इस आगामी बैठक में किन-किन दलों के शीर्ष नेता शामिल होंगे, इसे लेकर अब तक कोई पुख्ता जानकारी सामने नहीं आई है। हालांकि, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया है कि वे इस बैठक में हिस्सा लेने नहीं जा रहे हैं। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा है कि जिन मुद्दों पर गठबंधन के मंच पर चर्चा होनी है, उन पर उनकी पार्टी की तरफ से अन्य नेता भाग लेंगे। अखिलेश यादव ने यह भी दोहराया कि निर्धारित दिन उनका कोई अन्य पूर्व-नियोजित कार्यक्रम है। अंत में सवाल यही खड़ा होता है कि जिन कांग्रेस और अखिलेश यादव जैसे नेताओं को कुछ ही महीनों के बाद एक साथ मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ना है, वे ज्ञानेश कुमार जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर बात करने के लिए भी समय नहीं निकाल पा रहे हैं। वर्ष 2029 का लोकसभा चुनाव आने में अभी वक्त है, लेकिन उससे ठीक पहले उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में विपक्षी दलों के बीच इस तरह की आपसी खींचतान देखकर हर कोई हैरान है। अगर तमाम विपक्षी दल एक ही बैनर तले आकर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मुखर विरोध दर्ज कराते, तो केंद्र सरकार पर उसका प्रभाव निश्चित रूप से काफी बड़ा होता।\n\nइसका आप पर असर\nज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्षी दलों के बीच चल रहे इस बिखराव का असर आगामी विधानसभा चुनावों की रणनीतियों पर सीधा पड़ सकता है।\n\n• राष्ट्रीय स्तर पर: विपक्षी दलों के अलग-अलग विरोध प्रदर्शन करने से केंद्र सरकार पर दबाव बनाने की उनकी सामूहिक ताकत कमजोर पड़ रही है। जनता के बीच एकजुटता का संदेश न पहुंच पाने के कारण राजनीतिक रूप से इसका नुकसान गठबंधन को उठाना पड़ सकता है।\n• उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में: उत्तर प्रदेश, बिहार और महाराष्ट्र जैसे अहम चुनावी राज्यों में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी समेत अन्य दलों के अलग-अलग चुनाव लड़ने और प्रदर्शन करने से जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं में भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है। इससे आगामी चुनावों में विरोधी दलों को फायदा मिल सकता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nइंडी गठबंधन के भीतर यह बिखराव मुख्य रूप से क्षेत्रीय दलों की अपनी राजनीतिक प्राथमिकताओं और आपसी समन्वय की कमी के कारण सामने आया है।\n\n• प्रादेशिक महत्वाकांक्षाएं: उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में दलगत स्वार्थ और भविष्य के चुनावी समीकरणों को लेकर स्थानीय नेताओं में तालमेल का अभाव देखा जा रहा है।\n• अलग-अलग प्रदर्शन: एक साझा मंच के बजाय व्यक्तिगत तौर पर विरोध जताने की रणनीति से गठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।\n• नेतृत्व का असमंजस: विपक्षी खेमे में केंद्रीय नेतृत्व और क्षेत्रीय क्षत्रपों के बीच कई मुद्दों पर स्पष्ट दिशा का अभाव इस बिखराव को और हवा दे रहा है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. ज्ञानेश कुमार को लेकर विवाद क्यों खड़ा हुआ है?\nएक अंग्रेजी अखबार में छपी रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू ने कहा था कि मुख्य चुनाव आयुक्त कई मामलों में अपनी मर्जी से फैसले लेते रहे हैं।\n\n2. विपक्षी दल ज्ञानेश कुमार से क्या मांग कर रहे हैं?\nकांग्रेस, समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।\n\n3. इंडी गठबंधन की बैठक कब और कहां बुलाई गई है?\nममता बनर्जी की पहल पर इंडी गठबंधन की यह बैठक 30 सितंबर को दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में बुलाई गई है।\n\n4. क्या अखिलेश यादव इस बैठक में शामिल हो रहे हैं?\nसमाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने स्पष्ट किया है कि वे इस बैठक में हिस्सा नहीं लेंगे और उनकी पार्टी से दूसरे नेता शामिल होंगे।",
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  "category": "राजनीति",
  "publishedAt": "2026-09-28",
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