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  "type": "article",
  "title": "हरिद्वार में पुष्कर सिंह धामी ने विपक्षी टिप्पणी पर साधा निशाना, कहा देश समझ रहा है संस्कार और सोच",
  "summary": "उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के प्रति अभद्र भाषा लोकतंत्र में स्वीकार्य नहीं है और देश की जनता सब देख रही है।",
  "content": "उत्तराखंड के हरिद्वार शहर में आयोजित विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस कार्यक्रम के दौरान राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राजनीतिक बयानों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए विपक्ष पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने विशेष रूप से लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबंध में इस्तेमाल की गई भाषा पर सवाल खड़े किए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया कि एक उच्च संवैधानिक पद पर आसीन जनप्रतिनिधि से देश की जनता मर्यादित आचरण की उम्मीद करती है। उन्होंने कहा कि भारत के 140 करोड़ नागरिक कांग्रेस नेताओं की बयानबाजी, उनके संस्कारों और उनकी सोच का बारीकी से मूल्यांकन कर रहे हैं।\n\nप्रधानमंत्री पद की गरिमा और नेता प्रतिपक्ष के आचरण पर सवाल\nमुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में कहा कि जिस प्रकार से नेता प्रतिपक्ष लगातार आक्रामक और अमर्यादित भाषा शैली अपना रहे हैं, उससे स्पष्ट प्रतीत होता है कि वे भयंकर निराशा तथा कुंठा से ग्रस्त हो चुके हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि प्रधानमंत्री किसी एक व्यक्ति का प्रतिनिधित्व नहीं करते, बल्कि वे पूरे भारतवर्ष की 140 करोड़ जनता के प्रतिनिधि होते हैं और उनके पद की अपनी एक विशिष्ट गरिमा तथा सम्मान होता है। किसी भी परिपक्व और सभ्य लोकतांत्रिक व्यवस्था के भीतर देश के प्रधानमंत्री के विरुद्ध इस प्रकार की अमर्यादित शब्दावली का प्रयोग पूरी तरह से अस्वीकार्य है।\n\n \nभारतीय सांस्कृतिक परंपराओं का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, 'नेता प्रतिपक्ष का पद बेहद सम्मानित और जिम्मेदारी वाला पद है।' उन्होंने आगे समझाया कि इस गरिमापूर्ण स्थान पर विराजमान व्यक्ति से यह अपेक्षा की जाती है कि उसका व्यवहार और वाणी देश की महान परंपराओं तथा नैतिक मूल्यों के अनुरूप हो। भारतीय समाज में अपने से बड़ों का आदर करने और उनका नाम भी पूर्ण सम्मान के साथ लेने की सदियों पुरानी परिपाटी रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी नेताओं को न तो देश के समृद्ध सांस्कृतिक मूल्यों का ज्ञान है और न ही वे देश के सर्वोच्च कार्यकारी पद की मर्यादा को समझ पाते हैं, जिसके कारण वे केवल विवादास्पद बयानबाजी में लिप्त रहते हैं।\n\nमुख्यमंत्री ने आगे कहा कि जब किसी राजनीतिक दल या नेता के पास जनहित की कोई सुदृढ़ नीति नहीं बचती, नियत साफ नहीं होती और जनता से जुड़ा कोई वास्तविक मुद्दा उठाने के लिए नहीं रहता, तो वे बौखलाहट में अभद्र शब्दावली तथा गाली-गलौज का सहारा लेने लगते हैं। जब राजनीतिक धरातल खिसकता हुआ दिखता है और पराजय सामने नजर आने लगती है, तब इस प्रकार का असंतुलित व्यवहार और अधिक बढ़ जाता है। उन्होंने विपक्षी नेताओं को सचेत करते हुए कहा कि देशवासी उनके शब्दों के साथ-साथ उनके राजनीतिक संस्कारों को भी भली-भांति देख रहे हैं। इसी अहंकार और ओछी राजनीति की वजह से आम जनता उन्हें बार-बार खारिज कर रही है।\n\nविभाजन के दर्द का इतिहास और 14 अगस्त के ऐतिहासिक फैसले की सराहना\nविभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के संदर्भ में चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की मुक्तकंठ से सराहना की। उन्होंने कहा कि दशकों तक देश पर शासन करने वाली कांग्रेस पार्टी ने केवल अपनी सत्ता को बनाए रखने की खातिर देश के विभाजन के भयानक दर्द, विस्थापन के संकट और लाखों निर्दोष नागरिकों की मौत से जुड़े वास्तविक इतिहास को दबाकर रखा। इतिहास के उन काले पन्नों को दबाने के कारण देश की युवा पीढ़ियां विभाजन की विभीषिका के सच से अनभिज्ञ रहीं।\n\nउन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 अगस्त की तारीख को प्रतिवर्ष विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में मनाने का अत्यंत दूरदर्शी और ऐतिहासिक निर्णय लिया। इस दिवस को राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित करने का मुख्य उद्देश्य आने वाली भावी पीढ़ियों को भारत के विभाजन से उत्पन्न पीड़ा, जनधन की हानि और उसके भयावह दुष्परिणामों से अवगत कराना है। इससे देश के नागरिकों में राष्ट्रीय एकता, अखंडता और संप्रभुता की रक्षा के प्रति निरंतर जागरूकता बनी रहेगी। इस संबंध में उन्होंने विचार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किया और श्रद्धांजलि अर्पित की।\n\n \n\nएक भारत श्रेष्ठ भारत की दिशा में उठाए गए बड़े राष्ट्रीय कदम\nकार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्र सरकार द्वारा देश की अखंडता और सामाजिक न्याय के लिए लिए गए कई साहसिक निर्णयों का विस्तार से विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को समाप्त करना, मुस्लिम महिलाओं को प्रताड़ना से मुक्ति दिलाने के लिए तीन तलाक की कुप्रथा का अंत करना तथा पीड़ित शरणार्थियों को सम्मान देने के लिए नागरिकता संशोधन कानून लागू करना जैसे कदम इसी सोच का परिणाम हैं।\n\nमुख्यमंत्री ने उल्लेख किया कि वक्फ से संबंधित वैधानिक प्रावधानों में आवश्यक संशोधन करना तथा 1984 के सिख दंगा पीड़ितों को दशकों बाद न्याय दिलाना, यह सिद्ध करता है कि केंद्र सरकार एक भारत श्रेष्ठ भारत के संकल्प को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज का नया और सशक्त भारत अपनी महान सांस्कृतिक विरासत पर गर्व महसूस करता है, साथ ही अपनी सीमाओं की सुरक्षा करने और अपने प्रत्येक नागरिक के अधिकारों की रक्षा करने में पूरी तरह सक्षम है। उन्होंने अपने विचार X पर पोस्ट करके जनता के समक्ष रखे।\n\nहल्द्वानी घटनाक्रम, रामलीला मंच का दुरुपयोग और खरगे पर टिप्पणी\nमुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हल्द्वानी की एक राजनीतिक रैली के पश्चात उत्पन्न हुए विवाद पर भी विपक्ष को आड़े हाथों लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल ने जानबूझकर एक प्रायोजित विवाद तैयार किया ताकि वे राजनीतिक लाभ प्राप्त करने के लिए दलित कार्ड खेल सकें, जो कि अत्यंत निंदनीय और शर्मनाक कृत्य है। उन्होंने स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा कि उस स्थान पर जातिगत विद्वेष से जुड़ा कोई भी नारा नहीं लगाया गया था। वहां केवल कुछ धार्मिक उद्घोष हुए थे, जिसके बाद सामाजिक संगठन आगे आए थे। उन्होंने खेद व्यक्त किया कि रामलीला जैसे अत्यंत पवित्र एवं सांस्कृतिक मंच का राजनीतिक स्वार्थ के लिए दुरुपयोग करने की कोशिश की गई।\n\nइसी क्रम में मुख्यमंत्री ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का नाम लेते हुए कहा कि वे एक अत्यंत वरिष्ठ राजनेता हैं। स्वयं कांग्रेस अध्यक्ष कई अवसरों पर इस बात का उल्लेख कर चुके हैं कि उन्होंने देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी तथा वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी जैसे महान व्यक्तित्वों के साथ दीर्घकाल तक कार्य किया है। ऐसे में उनके जैसे लंबे राजनीतिक अनुभव और गरिमापूर्ण पद पर बैठे व्यक्ति को इस प्रकार की संकीर्ण राजनीति का हिस्सा नहीं बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल चुनाव जीतने के उद्देश्य से समाज में वैमनस्य फैलाना तथा वर्ग विभाजन की राजनीति करना सर्वथा अनुचित है।\n\n \n\nडॉ. आंबेडकर के विचारों पर आधारित सुशासन बनाम वोट बैंक की राजनीति\nउत्तराखंड के सामाजिक माहौल पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया कि देवभूमि उत्तराखंड के शांतिपूर्ण वातावरण और सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ने के किसी भी प्रयास को स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने विपक्षी दल पर बाटो और राज करो की औपनिवेशिक मानसिकता वाली पुरानी नीति पर चलने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष का दलित वर्ग के प्रति प्रेम केवल चुनाव के समय जागता है और उनका एकमात्र ध्येय केवल वोट बैंक की फसल काटना होता है।\n\nइसके विपरीत मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि वर्तमान केंद्र और राज्य सरकारें संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की जनकल्याणकारी सोच और विचारों को धरातल पर उतारने का कार्य कर रही हैं। सरकार समाज के अंतिम पायदान पर खड़े शोषित, पीड़ित और वंचित वर्गों को उनके वास्तविक अधिकार प्रदान करने, उन्हें सामाजिक सम्मान दिलाने तथा उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए पूरी निष्ठा से प्रयासरत है। इस संबंध में मुख्यमंत्री ने विस्तृत विवरण X पर जारी बयान में भी साझा किया और राज्य के विकास के प्रति प्रतिबद्धता जताई।\n\nइसका आप पर असर\nभारत में: राजनीतिक विमर्श में गरिमा, विभाजन के ऐतिहासिक तथ्यों की जागरूकता और राष्ट्रीय एकता से जुड़े कानूनों के प्रभाव को रेखांकित किया गया है।\n\nउत्तराखंड में: हरिद्वार और हल्द्वानी की घटनाओं के संदर्भ में राज्य के सामाजिक सौहार्द को बनाए रखने और राजनीतिक विवादों से दूर रहने का संदेश दिया गया है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. हरिद्वार में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किस कार्यक्रम में भाग लिया?\nमुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार में आयोजित विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस कार्यक्रम में भाग लिया और वहां जनसभा को संबोधित किया।\n\n2. सीएम धामी ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर क्या आरोप लगाए?\nउन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी प्रधानमंत्री के प्रति अमर्यादित भाषा का प्रयोग कर रहे हैं, जो उनकी निराशा और लोकतंत्र में गरिमा की कमी को दर्शाता है।\n\n3. विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस कब मनाया जाता है?\nप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फैसले के अनुसार 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में मनाया जाता है।\n\n4. हल्द्वानी विवाद पर मुख्यमंत्री ने क्या स्पष्टीकरण दिया?\nसीएम धामी ने कहा कि हल्द्वानी में कोई जातिगत नारा नहीं लगा था, केवल धार्मिक नारे लगाए गए थे और कांग्रेस इस मुद्दे पर प्रायोजित दलित कार्ड खेल रही है।\n\n5. मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार के किन प्रमुख फैसलों का उल्लेख किया?\nउन्होंने अनुच्छेद 370 को हटाने, तीन तलाक खत्म करने, CAA लागू करने, वक्फ कानून संशोधन और 1984 सिख दंगा पीड़ितों को न्याय दिलाने का उल्लेख किया।",
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  "category": "राजनीति",
  "publishedAt": "2026-08-14",
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