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  "title": "हैदराबाद में अमित शाह का विपक्ष पर जोरदार प्रहार, मतदाता सूची सुधार और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरा",
  "summary": "हैदराबाद में बीजेपी की पदयात्रा के बाद अमित शाह ने कांग्रेस पर चुनावी सूची से फर्जी नाम हटाने का विरोध करने का आरोप लगाया और राज्य में दो-तिहाई बहुमत की अपील की।",
  "content": "तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में एक विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्षी खेमे की नीतियों और बयानों पर तीखे सवाल खड़े किए। सोमवार को शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरी भारतीय जनता पार्टी की एक बड़ी जनयात्रा का नेतृत्व करने के बाद उन्होंने एक सभा में राष्ट्रीय राजनीति से लेकर प्रादेशिक शासन व्यवस्था तक कई गंभीर मुद्दों को उठाया। हाथों में तिरंगा लिए पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ सड़क पर उतरे गृह मंत्री ने साफ किया कि चुनावी सूचियों के शुद्धिकरण को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम पूरी तरह निराधार हैं और देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था केवल वास्तविक नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए संकल्पित है।\n\nऐतिहासिक संदर्भ और हैदराबाद के भारत में विलय की याद\nगृह मंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत इस क्षेत्र के राजनीतिक इतिहास का उल्लेख करते हुए की। उन्होंने स्मरण कराया कि आजादी के तुरंत बाद सरदार वल्लभभाई पटेल के दृढ़ संकल्प और कठोर फैसलों के कारण ही निजाम का शासन समाप्त हुआ और यह भूभाग भारतीय गणराज्य का अभिन्न अंग बन सका। उनके अनुसार यदि तत्कालीन नेतृत्व ने रियासत के शासक के समक्ष कड़ा रुख न अपनाया होता, तो क्षेत्र की वर्तमान स्थिति बिल्कुल भिन्न होती। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय एकता को अक्षुण्ण बनाए रखने की यही परंपरा आज भी उनकी पार्टी के विचारों के केंद्र में स्थित है। इस जनयात्रा का आरंभ बाबू जगजीवन राम की प्रतिमा स्थल से हुआ और शहर के प्रमुख व्यापारिक केंद्र मोजमजाही मार्केट पर जाकर इसका औपचारिक समापन हुआ। केंद्रीय कोयला मंत्री किशन रेड्डी तथा केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार सहित स्थानीय इकाई के कई अन्य प्रमुख पदाधिकारी इस दौरान उनके साथ मौजूद रहे।\n\nमतदाता सूची शुद्धिकरण और तेरह करोड़ नामों का पूरा लेखा-जोखा\nराष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में विपक्षी दलों द्वारा आयोजित विरोध कार्यक्रम पर पलटवार करते हुए अमित शाह ने कहा कि मतदाताओं के अधिकार बचाने के नाम पर दरअसल अवैध घुसपैठियों के संरक्षण की राजनीति की जा रही है। उन्होंने विपक्षी दल के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए तेरह करोड़ वैध नाम काट दिए गए हैं। सभा में उपस्थित जनसमूह के सामने उन्होंने इन सभी आंकड़ों का सिलसिलेवार ब्योरा पेश किया।\n\nउन्होंने विस्तार से समझाया कि जिन तेरह करोड़ प्रविष्टियों पर विवाद खड़ा किया जा रहा है, उनमें से सवा छह करोड़ नागरिक ऐसे हैं जो अपने पुराने पते छोड़कर दूसरी जगहों पर स्थायी रूप से बस चुके हैं। गृह मंत्री ने सवाल उठाया कि क्या किसी भी व्यक्ति को दो अलग-अलग क्षेत्रों में एक साथ वोट डालने का वैधानिक अधिकार मिल सकता है। इसके अलावा दो करोड़ अस्सी लाख नाम ऐसे दर्ज थे जिनकी मृत्यु हो चुकी है और किसी भी पारदर्शी व्यवस्था में दिवंगत व्यक्तियों के नाम सूची से हटाना अनिवार्य प्रशासनिक कर्तव्य है।\n\nगृह मंत्री ने आगे बताया कि करीब एक करोड़ प्रविष्टियां दोहरी थीं, जहां एक ही नागरिक का विवरण दो बार दर्ज पाया गया, जिसे तकनीकी तौर पर निरस्त करना नियमानुकूल है। शेष बचे तीन करोड़ नामों का उल्लेख करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि वे वास्तविक नागरिकों के हैं ही नहीं, बल्कि सीमा पार से आए बांग्लादेशी घुसपैठियों की अवैध प्रविष्टियां हैं। अमित शाह ने घोषणा की कि राजनीतिक विरोध चाहे जितना हो, मतदाता सूचियों से प्रत्येक अवैध प्रविष्टि को हटाने और घुसपैठियों को बाहर करने का कार्य पूरी दृढ़ता के साथ जारी रहेगा क्योंकि मतदान का अधिकार सिर्फ इस देश के प्रामाणिक नागरिकों को ही मिलना चाहिए।\n\nचुनावी सफलताओं का क्रम और संसद सत्र की खुली चुनौती\nविपक्षी आरोपों पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि चुनावी जीत किसी प्रशासनिक सूची संशोधन के कारण नहीं बल्कि आम जनता के भरोसे से मिलती है। उन्होंने रेखांकित किया कि 2014, 2019 और 2024 के तीनों आम चुनावों में मिली सफलता देश के मतदाताओं की निष्ठा का प्रत्यक्ष परिणाम थी, न कि किसी तकनीकी प्रक्रिया का। इसके साथ ही उन्होंने महाराष्ट्र, हरियाणा के विशाल जनादेश, तीन दशक बाद दिल्ली में मिली विजय, बिहार, असम में लगातार तीसरे कार्यकाल और पश्चिम बंगाल के नतीजों का उल्लेख करते हुए दावा किया कि जनता विकास की राजनीति के साथ मजबूती से खड़ी है।\n\nविपक्ष द्वारा हाल ही में आयोजित प्रतीकात्मक समानांतर संसद पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि नकली मंचों पर औपचारिकताएं निभाने से वास्तविक जनादेश प्राप्त नहीं होता। उन्होंने विपक्षी नेताओं को चुनौती दी कि सरकार संसद का विशेष सत्र बुलाने के लिए तैयार है, जहां आकर सभी मुद्दों पर आमने-सामने विस्तृत बहस की जा सकती है। उन्होंने कहा कि चुनावी पराजय के बाद इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों पर दोष मढ़ने की आदत पुरानी हो चुकी है। यदि इन मशीनों में कोई तकनीकी खराबी होती, तो विपक्ष तमिलनाडु, केरल, हिमाचल प्रदेश या स्वयं तेलंगाना में सत्ता में कैसे आता। उन्होंने तर्क दिया कि यदि मशीनें सचमुच अविश्वसनीय थीं, तो उन चुनावों के बाद सरकार बनाने और शपथ लेने का कोई नैतिक आधार नहीं बनता था।\n\nदस साल के घोटालों और मौजूदा राज्य शासन पर कड़ा प्रहार\nकेंद्र में पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल की चर्चा करते हुए अमित शाह ने आरोप लगाया कि उस दशक में बारह लाख करोड़ रुपये के वित्तीय गबन और अनियमितताएं देखने को मिली थीं। इसके विपरीत नरेंद्र मोदी के बारह वर्षों के शासन में शीर्ष नेतृत्व पर वित्तीय अनियमितता का एक भी आरोप सिद्ध नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि जनता अब खोखले नारों और वास्तविकता के बीच के अंतर को भली-भांति समझती है।\n\nसंबोधन के अंतिम चरण में उन्होंने तेलंगाना के स्थानीय प्रशासन और सत्तारूढ़ दल की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि राज्य में आम जनता और व्यापारियों पर अनुचित वित्तीय दबाव बनाया जा रहा है, जिसकी कड़ियां शीर्ष प्रांतीय नेतृत्व से लेकर दिल्ली के राजनीतिक केंद्रों तक जुड़ी हुई हैं। उन्होंने जनता से सवाल किया कि क्या क्षेत्रीय दल जैसे बीआरएस या ओवैसी की पार्टी इस तरह की अव्यवस्था और भ्रष्टाचार को रोकने का सामर्थ्य रखती हैं। गृह मंत्री ने स्थानीय कार्यकर्ताओं का आह्वान किया कि वे प्रत्येक नागरिक के द्वार तक पहुंचकर सभी भ्रांतियों का निवारण करें और आगामी समय में राज्य के सर्वांगीण विकास के लिए दो-तिहाई बहुमत की सरकार बनाने का संकल्प लें।\n\nइसका आप पर असर\nइस राजनीतिक घटनाक्रम का सीधा असर चुनावी सूचियों की पारदर्शिता और स्थानीय राजनीतिक परिदृश्य पर पड़ता है।\n\n• नागरिकों के लिए: मतदाता पहचान पत्र में दोहरे या पुराने पते वाले नामों को प्रशासनिक स्तर पर निरस्त करने का अभियान तेज होगा। नागरिकों को अपने वर्तमान निवास स्थल पर ही मतदाता पंजीकरण दुरुस्त रखना सुनिश्चित करना होगा।\n• तेलंगाना में: राज्य में मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरने के लिए भारतीय जनता पार्टी अपने जमीनी अभियानों को और अधिक आक्रामक बनाएगी। स्थानीय मतदाताओं के बीच भ्रष्टाचार और विकास के मुद्दों पर चुनावी ध्रुवीकरण देखने को मिलेगा।\n• राष्ट्रीय राजनीति में: संसद के आगामी सत्रों में चुनावी सुधारों और मतदाता सूची के सत्यापन को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक बहस होगी। दोनों पक्ष इस विषय को चुनावी अभियानों में प्रमुखता से उठाएंगे।\n• प्रशासनिक तंत्र पर: स्थानीय निर्वाचन कार्यालयों पर फर्जी और मृत मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का दबाव बढ़ेगा। इससे भविष्य के चुनावों में फर्जी मतदान की आशंकाओं पर रोक लगेगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nहैदराबाद में यह पदयात्रा और संबोधन विपक्ष के राष्ट्रव्यापी अभियानों का जवाब देने और चुनावी राज्यों में पार्टी की राजनीतिक जमीन मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया।\n\n• विपक्षी अभियानों का प्रत्युत्तर: विपक्षी गठबंधन द्वारा दिल्ली में मतदाता सूची संशोधन के विरोध में आयोजित प्रदर्शन के जवाब में सत्तापक्ष ने जनसंपर्क अभियान शुरू किया। इसका उद्देश्य हटाए गए नामों के प्रशासनिक एवं तकनीकी कारणों को जनता के सामने रखना था।\n• इतिहास और क्षेत्रीय पहचान का जुड़ाव: सरदार पटेल द्वारा हैदराबाद के ऐतिहासिक विलय की याद दिलाकर पार्टी ने स्थानीय जनभावनाओं को राष्ट्रीय एकता के विमर्श से जोड़ने का प्रयास किया। यह रणनीति क्षेत्रीय दलों के प्रभाव को संतुलित करने के लिए अपनाई गई।\n• दक्षिण भारत में विस्तार की योजना: राष्ट्रीय चुनावों में मिली सफलताओं के बाद भारतीय जनता पार्टी तेलंगाना को दक्षिण में अपने विस्तार का प्रमुख केंद्र मान रही है। इसके तहत राज्य सरकार के खिलाफ स्थानीय वित्तीय मुद्दों को जोर-शोर से उठाया जा रहा है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. हैदराबाद में यह पदयात्रा कहां से शुरू होकर कहां समाप्त हुई?\nयह पदयात्रा बाबू जगजीवन राम की प्रतिमा के निकट से आरंभ होकर शहर के मोजमजाही मार्केट तक आयोजित की गई।\n\n2. गृह मंत्री के अनुसार 13 करोड़ मतदाता नामों में से कितने लोग दूसरी जगह चले गए थे?\nअमित शाह ने बताया कि कुल हटाए गए नामों में सवा छह करोड़ नागरिक ऐसे थे जो नए स्थानों पर जाकर बस चुके हैं।\n\n3. मतदाता सूची में कितने नाम मृत व्यक्तियों और दोहरी प्रविष्टियों के पाए गए?\nआंकड़ों के अनुसार 2.8 करोड़ नाम दिवंगत व्यक्तियों के थे और लगभग 1 करोड़ प्रविष्टियां दोहरी पाई गई थीं।\n\n4. अवैध घुसपैठियों के संदर्भ में कितनी प्रविष्टियों का उल्लेख किया गया?\nअमित शाह के अनुसार सूची में शामिल 3 करोड़ फर्जी प्रविष्टियां अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों की थीं जिन्हें हटाया जा रहा है।\n\n5. ईवीएम को लेकर गृह मंत्री ने विपक्षी दलों पर क्या सवाल उठाया?\nउन्होंने सवाल किया कि यदि मशीनें खराब थीं, तो विपक्ष केरल, तमिलनाडु, हिमाचल और तेलंगाना में सत्ता में कैसे आ सका।\n\n6. पूर्ववर्ती सरकार के दस वर्षों के शासन पर कितने रुपये के घपलों का आरोप लगाया गया?\nअमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि पूर्ववर्ती दस वर्षों के शासनकाल में बारह लाख करोड़ रुपये के वित्तीय घपले हुए थे।",
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