इंडी गठबंधन ने राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर खोला मोर्चा, नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ के पारंपरिक वोट बैंक पर साधा निशाना संसद से लेकर उत्तर प्रदेश विधानसभा तक विपक्ष राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मुद्दों को लेकर हमलावर है। इसके जरिए विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी के पारंपरिक और सवर्ण वोट बैंक में सेंध लगाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। देश का राजनीतिक परिदृश्य इस समय चार प्रमुख ज्वलंत मुद्दों के इर्द-गिर्द घूम रहा है, जिनके माध्यम से विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पारंपरिक वोट बैंक को साधने की कोशिश में जुटे हैं। इन मुद्दों में अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला सबसे ऊपर है, जिसे लेकर संसद के दोनों सदनों से लेकर उत्तर प्रदेश की विधानसभा तक भारी हंगामा देखा जा रहा है। इसके अलावा युवाओं और छात्रों से जुड़े मुद्दे के जरिये युवा मतदाताओं में पैठ बनाने का प्रयास हो रहा है। उत्तर भारत के शहरी मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए ई-20 ईंधन नीति पर सवाल उठाए जा रहे हैं, जबकि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी यूजीसी से जुड़े मामलों को लेकर सवर्ण समुदाय की नाराजगी को भुनाने के लिए विपक्षी गठबंधन सक्रिय हो गया है। इन चारों मोर्चों की राजनीति ने देश के सियासी तापमान को काफी बढ़ा दिया है। संसद और विधानसभाओं में राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर घमासान राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले ने देश की राजनीति में एक नया मोड़ ले लिया है। हालांकि कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर इस मामले में त्वरित कार्रवाई की गई है। पूरा मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के विचाराधीन है, जांच के लिए विशेष जांच टीम यानी एसआईटी गठित की जा चुकी है, मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और मंदिर प्रबंधन प्रणाली में आवश्यक सुधार भी लागू कर दिए गए हैं। इसके बावजूद विपक्षी दलों का रुख इस मुद्दे पर लगातार आक्रामक बना हुआ है। इंडी गठबंधन के घटक दल संसद से लेकर उत्तर प्रदेश विधानसभा तक इस विषय पर जोरदार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्षी दलों के इस नए रुख में एक बड़ा रणनीतिक बदलाव देखने को मिल रहा है। अतीत में जब राम मंदिर का निर्माण कार्य चल रहा था या जब मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा का ऐतिहासिक आयोजन हुआ था, तब यही विपक्षी दल इस पूरे घटनाक्रम से दूरी बनाए रखते थे। उस समय विपक्षी नेताओं द्वारा इसे भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का राजनीतिक कार्यक्रम करार दिया गया था। उस दौर में कई नेताओं ने मंदिर निर्माण की उपयोगिता पर सवाल उठाए थे और कहा था कि मंदिर से आम जनता का पेट नहीं भरता। कुछ नेताओं ने निर्माण कार्य में जल्दबाजी का आरोप लगाते हुए मुहूर्त और वास्तु पर सवाल खड़े किए थे, तो कुछ ने इस पर करोड़ों रुपये खर्च करने की जरूरत को खारिज किया था। हालांकि वर्तमान में स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है और विपक्षी दल स्वयं को सबसे बड़ा रामभक्त प्रदर्शित करने की होड़ में शामिल हो गए हैं। राज्यसभा में तीखा टकराव: मल्लिकार्जुन खरगे और किरण रिजिजू राम मंदिर चढ़ावा विवाद की गूंज देश की सर्वोच्च पंचायत यानी संसद में भी साफ तौर पर सुनाई दे रही है। राज्यसभा में इस मुद्दे पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी झड़प देखने को मिली। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने चढ़ावा चोरी के आरोपों को लेकर सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर हमला बोला। उन्होंने मंदिर ट्रस्ट के कामकाज और सरकार की निगरानी पर कई गंभीर सवाल खड़े किए। मल्लिकार्जुन खरगे के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने बेहद सख्त रुख अपनाया। उन्होंने सदन में पलटवार करते हुए कहा कि सरकार से सवाल पूछने और जवाब मांगने से पहले विपक्ष को अपने पुराने आचरण पर ध्यान देना चाहिए। किरण रिजिजू ने कहा, "पहले विपक्ष भगवान राम का अपमान करने के लिए देश से माफी मांगे, उसके बाद सरकार से जवाब मांगिए।" इस तीखी नोकझोंक के कारण उच्च सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई। उत्तर प्रदेश विधानसभा में भारी हंगामा और विधायक का निष्कासन उत्तर प्रदेश की विधानसभा में भी राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मुद्दे को लेकर अभूतपूर्व राजनीतिक ड्रामा देखने को मिला। समाजवादी पार्टी के विधायकों ने सदन के भीतर और बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। सदन की कार्यवाही के दौरान माहौल उस समय बेहद तनावपूर्ण हो गया जब समाजवादी पार्टी के सदस्यों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राम मंदिर से जुड़े विवादित पोस्टर लहराना शुरू कर दिया। इस दौरान मुख्यमंत्री के संबोधन के बीच समाजवादी पार्टी के विधायक सचिन यादव ने कथित तौर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की एक एडिटेड फोटो सदन में प्रदर्शित की। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने इस आचरण पर अत्यंत कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने पहले विधायक को चेतावनी दी और फिर अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए सचिन यादव को पूरे सत्र के लिए सदन से बाहर निकालने का आदेश दे दिया। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कड़े शब्दों में कहा, "मैं आदेश देता हूं इनको सचिन को बाहर निकाला जाए, सचिन को पूरे सत्र के लिए बाहर निकाला जाता है।" इसके साथ ही उन्होंने रानीगंज से समाजवादी पार्टी के विधायक आरके वर्मा के आचरण पर भी गंभीर नाराजगी व्यक्त की। विधानसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि जिस प्रकार का व्यवहार विधायक आरके वर्मा द्वारा किया गया है, उसके लिए उनके मामले को एथिक्स कमेटी यानी आचार समिति के पास भेजकर उनकी सदस्यता समाप्त करने की वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है। चंदे की रसीद पर स्पीकर सतीश महाना का विपक्षी नेताओं पर तंज उत्तर प्रदेश विधानसभा में हंगामे के बीच अध्यक्ष सतीश महाना ने विपक्षी दल के प्रमुख मुस्लिम नेताओं को निशाने पर लेते हुए एक तीखा तंज कसा। उन्होंने सदन में उपस्थित समाजवादी पार्टी के नेता सुहैब अंसारी, उमर अली और शाहिद मंजूर का नाम लेकर टिप्पणी की। सतीश महाना ने कहा कि यह देखकर अत्यंत संतोष और प्रसन्नता हो रही है कि जो नेता शुरुआत से लेकर अंत तक केवल राम मंदिर का विरोध करते रहे हैं, वे आज सदन के भीतर राम मंदिर के पक्ष में आवाज उठा रहे हैं। स्पीकर सतीश महाना ने विपक्षी विधायकों को चुनौती देते हुए कहा, "आप में से किसी ने चंदा दिया हो, तो रसीद लेकर आ जाएं।" उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि सदन देखना चाहता है कि विपक्षी नेताओं का कौन सा पैसा चोरी हुआ है। इसलिए जितने भी सदस्य इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, उन्हें सबसे पहले अपने चंदे की रसीद सदन के पटल पर प्रस्तुत करनी चाहिए। सदन के बाहर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का करारा प्रहार विधानसभा के भीतर हुए हंगामे के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सदन के बाहर मीडिया के समक्ष विपक्षी दलों पर चौतरफा हमला बोला। मुख्यमंत्री ने संसद और राज्य विधानसभा दोनों जगह समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के नेताओं के व्यवहार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा, "संसद में विपक्षी नेताओं का आचरण सनातन धर्म का सीधा अपमान है।" मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चढ़ावा चोरी के मामले की पारदर्शी जांच का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि इस आपराधिक कृत्य में पकड़े गए व्यक्तियों का भारतीय जनता पार्टी या साधु-संतों से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि पुलिस और जांच एजेंसियां निष्पक्षता से अपना काम कर रही हैं तथा दोषियों को सख्त सजा दिलाई जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष अपनी राजनीतिक जमीन खिसकती देख इस संवेदनशील मुद्दे पर भ्रम फैलाने की साजिश रच रहा है। अखिलेश यादव और राहुल गांधी का सवर्ण वोटरों को साधने का प्लान राम मंदिर, यूजीसी, युवाओं और ई-20 ईंधन नीति जैसे मुद्दों को तूल देने के पीछे विपक्षी गठबंधन की एक सुविचारित चुनावी रणनीति दिखाई दे रही है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता राहुल गांधी को लगता है कि राम मंदिर जैसे भावनात्मक और धार्मिक मुद्दे के जरिये भारतीय जनता पार्टी के उस कैडर और पारंपरिक सवर्ण वोट बैंक में दरार पैदा की जा सकती है, जो राम मंदिर आंदोलन के समय से बीजेपी के साथ मजबूती से खड़ा रहा है। इससे पूर्व 2024 के लोकसभा चुनावों में विपक्षी दलों ने पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक यानी पीडीए गठबंधन का कार्ड खेला था। उस समय संविधान खतरे में है और लोकतंत्र खतरे में है जैसे नैरेटिव बनाकर विपक्ष को चुनावी स्तर पर उल्लेखनीय सफलता मिली थी। अब उसी रणनीति का विस्तार करते हुए सवर्ण और विशेषकर ब्राह्मण मतदाताओं को अपने पाले में लाने की राजनीतिक कवायद तेज कर दी गई है। इसी कड़ी में अखिलेश यादव ने लखनऊ में प्रबुद्ध सम्मेलन का आयोजन किया। यह सम्मेलन समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शामिल रहे दिवंगत नेता जनेश्वर मिश्र की जयंती के अवसर पर आयोजित किया गया। जनेश्वर मिश्र को समाजवादी पार्टी का प्रमुख ब्राह्मण चेहरा माना जाता था और उनके नाम के सहारे पार्टी सवर्ण समाज के बीच अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने का गंभीर प्रयास कर रही है। इसका आप पर असर भारत में: राजनीतिक तनातनी और बयानों से राष्ट्रीय स्तर पर चुनावी रणनीतियों और जन मुद्दों की दिशा तय होती है। उत्तर प्रदेश में: विधानसभा में गतिरोध और सवर्ण तथा युवा वोटरों को साधने की होड़ से राज्य के प्रशासनिक और विधायी कार्यों पर सीधा असर पड़ता है। सवाल-जवाब 1. संसद और यूपी विधानसभा में राम मंदिर को लेकर क्या विवाद चल रहा है? विपक्षी दल राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के आरोपों को लेकर संसद और उत्तर प्रदेश विधानसभा दोनों जगह जोरदार हंगामा कर रहे हैं। 2. राज्यसभा में बहस के दौरान क्या हुआ? राज्यसभा में मल्लिकार्जुन खरगे ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरा, जिस पर संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने तीखा पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष पहले भगवान राम का अपमान करने के लिए माफी मांगे। 3. यूपी विधानसभा में विधायक को निष्कासित क्यों किया गया? सपा विधायक सचिन यादव द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की एडिटेड फोटो लहराने पर विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने उन्हें पूरे सत्र के लिए निष्कासित कर दिया। 4. अखिलेश यादव की सवर्ण वोटरों को साधने की क्या रणनीति है? अखिलेश यादव ने लखनऊ में जनेश्वर मिश्र की जयंती पर प्रबुद्ध सम्मेलन आयोजित किया है, ताकि सवर्ण और ब्राह्मण वोटरों को सपा के पाले में लाया जा सके। https://trendkia.com/politics/indi-gathabndhana-ne-ram-mandir-charhava-vivada-para-khola-morcha-narendra-modi-aura-yogi-adityanath-ke-parnparika-vota-bainka-par-13737 TrendKia — Har trend, sabse pehle.