झारखंड में खनिज अधिकारों को लेकर गरमाई सियासत, राधाकृष्ण किशोर ने बाबूलाल मरांडी को लिखा पत्र झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने केंद्र के MMDR कानून संशोधन पर चिंता जताते हुए नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी को पत्र लिखा है। इससे राज्य को करीब 14,000 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान की आशंका है। रांची में खनिज संपदा और आर्थिक अधिकारों के मुद्दों पर राजनीति गर्मा गई है। झारखंड सरकार के वित्त, योजना एवं विकास मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने राज्य के हकों की सुरक्षा के लिए नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी को एक पत्र प्रेषित किया है। इस खत के जरिए उन्होंने केंद्र सरकार की ओर से खान खनिज विकास विनियमन यानी MMDR कानून में लाए जा रहे संशोधनों को लेकर गहरी आपत्ति और चिंता प्रकट की है। राजस्व को भारी चूना लगने का अनुमान पत्र में इस बात का विशेष तौर पर जिक्र किया गया है कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार झारखंड सरकार ने विधानसभा के माध्यम से एक विधेयक पारित करवाया था, जिसके तहत खनन क्षेत्रों पर सेस लगाने का प्रावधान किया गया था। इस व्यवस्था के जरिए वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान लगभग 14,000 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाए जाने का अनुमान लगाया गया था। मंत्री का मानना है कि केंद्र द्वारा MMDR कानून में धारा-9D जोड़े जाने के कारण झारखंड इस विशाल राजस्व से पूरी तरह महरूम हो जाएगा। इसके अतिरिक्त, अलग-अलग कोयला कंपनियों की तरफ राज्य के पास बकाया चल रही 1,36,042 करोड़ रुपये की राशि की वसूली पर भी बुरा प्रभाव पड़ने की आशंका जताई गई है। विस्थापन का दर्द और जनता की समस्याएं मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने प्रदेश के आदिवासी समाज और जमीनी हालातों का हवाला देते हुए लिखा है कि खनन गतिविधियों से होने वाला सारा आर्थिक फायदा केंद्र सरकार के हिस्से में जाता है, जबकि झारखंड के आम नागरिकों को विस्थापन का दर्द, अपनी ही जमीन से बेदखल होने की मजबूरी, गंभीर पर्यावरण प्रदूषण, टूटी-फूटी जर्जर सड़कें और स्वास्थ्य संबंधी विकट समस्याओं का सामना करना पड़ता है। उन्होंने बाबूलाल मरांडी से अनुरोध किया कि वे राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री और आदिवासी समुदाय के एक जागरूक प्रतिनिधि होने के नाते इन समस्याओं और यहां के लोगों के दर्द को अच्छी तरह महसूस कर सकते हैं। दलीय सीमाओं से ऊपर उठकर राज्य हित सर्वोपरि इस पत्र में इस बात पर भी खास जोर डाला गया है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक प्रतिद्वंदिता और मतभेद होना स्वाभाविक है, परंतु किसी भी दल या विचारधारा के हितों से ऊपर उठकर हमेशा राज्य का हित ही सर्वोपरि होना चाहिए। वित्त मंत्री ने अपने संदेश में स्पष्ट तौर पर कहा कि सरकारें आती और जाती रहती हैं, लेकिन राज्य हमेशा रहने वाला एक स्थायी तत्व है। केंद्र के समक्ष मजबूती से पक्ष रखेगी सरकार मंत्री ने भरोसा जताया है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में राज्य सरकार इस गंभीर विषय को पूरी ताकत के साथ केंद्र सरकार के समक्ष उठाएगी और जरूरत पड़ने पर विभिन्न संवैधानिक मंचों का भी सहारा लिया जाएगा। अंत में उन्होंने नेता प्रतिपक्ष से अपील की है कि राजनीतिक वफादारी से ऊपर उठकर प्रदेश के प्रति निष्ठा का परिचय दें। उन्होंने आग्रह किया कि वे अपने प्रभाव और प्रदेश भाजपा के माध्यम से केंद्र के सामने झारखंड के इन महत्वपूर्ण वित्तीय और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए जोरदार पैरवी करें। इसका आप पर असर • भारत में: खनिज समृद्ध राज्यों और केंद्र के बीच रॉयल्टी और सेस के वित्तीय अधिकारों को लेकर नीतिगत बहस तेज हो सकती है। • झारखंड में: राज्य सरकार के राजस्व में संभावित कमी और कोयला कंपनियों के बकाये से विकास कार्यों तथा स्थानीय आर्थिक नीतियों पर असर पड़ सकता है। सवाल-जवाब 1. राधाकृष्ण किशोर कौन हैं? राधाकृष्ण किशोर झारखंड सरकार के वित्त, योजना एवं विकास मंत्री हैं। 2. उन्होंने पत्र किसे लिखा है? उन्होंने यह पत्र राज्य के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी को लिखा है। 3. कितने राजस्व के नुकसान का अनुमान है? एमएमडीआर कानून में संशोधन के कारण झारखंड को वित्तीय वर्ष 2026-27 में लगभग 14,000 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान होने का अनुमान है। 4. कोयला कंपनियों पर कितनी बकाया राशि है? विभिन्न कोयला कंपनियों के पास झारखंड की 1,36,042 करोड़ रुपये की बकाया राशि फंसी हुई है। https://trendkia.com/politics/jharkhand-men-khanija-adhikaron-ko-lekara-garamai-siyasata-radhakrishna-kishore-ne-babulal-marandi-ko-likha-patra-21447 TrendKia — Har trend, sabse pehle.