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  "title": "झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं पर मचा घमासान, हेमंत सोरेन सरकार के खिलाफ छात्रों के प्रदर्शन से दुविधा में फंसी कांग्रेस",
  "summary": "झारखंड लोक सेवा आयोग और कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षाओं में गड़बड़ियों के आरोपों को लेकर छात्रों का प्रदर्शन तेज हो गया है, जिससे गठबंधन सहयोगी कांग्रेस के सामने अपनी राष्ट्रीय साख और राज्य सरकार के बीच संतुलन बनाने की चुनौती खड़ी हो गई है।",
  "content": "राष्ट्रीय स्तर पर नीट विवाद से लेकर 'छात्रों की गूंज' अभियान तक प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता को बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाने वाली कांग्रेस अब खुद एक मुश्किल मोड़ पर खड़ी है। झारखंड में राज्य लोक सेवा आयोग और कर्मचारी चयन आयोग की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ छात्रों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा है। विरोध जताते हुए प्रदर्शनकारी छात्रों ने राज्य विधानसभा की तरफ मार्च किया, जिसका सीधा असर राज्य की हेमंत सोरेन सरकार पर पड़ रहा है। इस सरकार में कांग्रेस खुद एक अहम गठबंधन सहयोगी है, जिससे पार्टी के सामने एक बड़ी राजनीतिक दुविधा पैदा हो गई है।\n\nझारखंड भर्ती विवाद और छात्रों की प्रमुख मांगें\nछात्रों के इस ताजा आक्रोश की मुख्य वजह 14वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा से जुड़ी अनियमितताएं हैं। जब इस परीक्षा के शुरुआती परिणाम सामने आए, तो उम्मीदवारों ने श्रेणीवार कट ऑफ अंक जारी न किए जाने और मेधा सूची में विसंगतियों को लेकर गंभीर सवाल उठाए। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब सीआईडी जांच की खबरों के बीच जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांगते ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस मामले में जांच एजेंसियों की छापेमारी और कुछ गिरफ्तारियां भी दर्ज की गई हैं।\n\nइसके अलावा जेएसएससी द्वारा आयोजित कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल भर्ती परीक्षा को लेकर भी अभ्यर्थियों के मन में काफी असंतोष है। अब यह आंदोलन सिर्फ कट ऑफ या पुनर्मूल्यांकन तक सीमित नहीं रह गया है। छात्र संगठन पूरी भर्ती प्रक्रिया में व्यापक पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। इस स्थिति का फायदा उठाते हुए मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने सोरेन सरकार को घेरना शुरू कर दिया है और पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग रखी है।\n\nगठबंधन सरकार में कांग्रेस का रुख और नेतृत्व का कदम\nअपनी ही सहयोगी सरकार पर उठे सवालों के बीच कांग्रेस ने छात्रों के आंदोलन से दूरी बनाने की बजाय उनके साथ खड़े होने का रास्ता चुना है। झारखंड कांग्रेस के प्रभारी के. राजू ने स्पष्ट किया कि पार्टी और राहुल गांधी अपने अधिकारों तथा न्याय के लिए संघर्ष कर रहे युवाओं के साथ मजबूती से खड़े हैं। कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात करके यह अनुरोध किया कि वे प्रदर्शनकारी छात्रों से बातचीत के लिए मंत्रियों की एक विशेष समिति का गठन करें।\n\nइस मुद्दे पर राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर बातचीत के दौरान कहा कि मौजूदा शिक्षा और परीक्षा प्रणाली अत्यधिक दबाव वाली और दमनकारी बनती जा रही है। उन्होंने किसी एक राज्य का सीधा नाम लिए बिना कहा कि चाहे केंद्र सरकार हो, कांग्रेस शासित राज्य हों या झारखंड सरकार, सभी को छात्रों की आवाज सुननी होगी। राहुल गांधी ने जोर देकर कहा कि देश भर में शिक्षा ढांचे में बड़े सुधारों की तत्काल आवश्यकता है।\n\nइससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी सार्वजनिक रूप से छात्रों का समर्थन किया था। उन्होंने कहा कि युवाओं का भविष्य सुरक्षित करना पार्टी की प्राथमिकता है, फिर चाहे बात झारखंड की हो, पंजाब की हो, दिल्ली की हो या किसी अन्य राज्य की।\n\nदोहरे मापदंड का जोखिम और राजनीतिक साख की चुनौती\nकांग्रेस के लिए यह स्थिति बेहद नाजुक मानी जा रही है। एक तरफ पार्टी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की थी और नीट परीक्षा के मुद्दे पर केंद्र सरकार की जवाबदेही तय करने का अभियान चलाया था। ऐसे में अगर कांग्रेस झारखंड में प्रदर्शनकारी छात्रों की अनदेखी करती है, तो उस पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगेगा।\n\nदूसरी ओर, यदि कांग्रेस राज्य सरकार के खिलाफ अत्यधिक आक्रामक रुख अपनाती है, तो इससे इंडिया गठबंधन की साझीदार सरकार के लिए संकट खड़ा हो सकता है। फिलहाल पार्टी छात्रों की आवाज बनने के अपने राष्ट्रीय एजेंडे को बनाए रखते हुए राज्य सरकार पर सुधारात्मक कदम उठाने का दबाव बना रही है।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की मांग राष्ट्रीय स्तर पर छात्रों के अधिकारों के लिए एक मिसाल बन सकती है।\n• झारखंड में: जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं में शामिल लाखों अभ्यर्थियों के लिए भर्ती प्रक्रिया में सुधार और पारदर्शी परिणाम का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. झारखंड में छात्र किस बात को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं?\nछात्र जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में श्रेणीवार कट ऑफ और मेधा सूची से जुड़ी कथित गड़बड़ियों और पारदर्शिता की कमी का विरोध कर रहे हैं।\n\n2. इस विवाद में कांग्रेस किस राजनीतिक दुविधा का सामना कर रही है?\nकांग्रेस केंद्र के खिलाफ छात्रों के मुद्दों पर आक्रामक रही है, लेकिन झारखंड में वह खुद हेमंत सोरेन सरकार की गठबंधन सहयोगी है, जिससे साख और सरकार दोनों को संभालने की चुनौती पैदा हो गई है।\n\n3. राहुल गांधी ने छात्रों के प्रदर्शन पर क्या प्रतिक्रिया दी?\nराहुल गांधी ने कहा कि परीक्षा और शिक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की जरूरत है और हर सरकार को छात्रों की बात सुननी चाहिए।\n\n4. विपक्षी दल भाजपा की इस मामले में क्या मांग है?\nभाजपा ने सोरेन सरकार पर निशाना साधते हुए परीक्षा में हुई गड़बड़ियों की सीबीआई से स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।",
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  "category": "राजनीति",
  "publishedAt": "2026-08-10",
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