# झारखंड राज्यसभा की दूसरी सीट पर घमासान: 24 विधायकों वाला एनडीए कैसे जुटाएगा 4 वोट, सरयू राय के दावे ने बढ़ाई बेचैनी

> झारखंड में 18 जून को दो राज्यसभा सीटों के लिए तीन उम्मीदवार मैदान में हैं। एनडीए के पास 24 विधायक हैं और जीत के लिए चार वोट कम पड़ रहे हैं, जबकि वरिष्ठ विधायक सरयू राय के क्रॉस वोटिंग वाले बयान ने इंडिया गठबंधन की धड़कनें तेज कर दी हैं।

**Category:** राजनीति · **Published:** 2026-06-13 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/politics/jharkhand-rajyasabha-ki-dusari-sita-para-ghamasana-24-vidhayakon-vala-enadie-kai-380

झारखंड की राजनीति इन दिनों एक ऐसे अंकगणित में उलझी है, जहां जीत और हार का फैसला महज चार वोटों पर टिका दिख रहा है। राजधानी रांची में 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले सियासी पारा अपने उच्चतम स्तर पर है। वजह साफ है — सीटें केवल दो हैं, लेकिन ताल ठोकने वाले उम्मीदवार तीन हैं। यही असंतुलन पूरे मुकाबले को त्रिकोणीय और बेहद रोचक बना रहा है।

## दो सीट, तीन दावेदार — कौन कहां खड़ा है
इंडिया ब्लॉक ने इस चुनाव में दो चेहरे उतारे हैं। झारखंड मुक्ति मोर्चा की ओर से बैद्यनाथ राम और कांग्रेस की ओर से प्रणव झा मैदान में हैं। दूसरी तरफ भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए ने अपनी पार्टी से कोई प्रत्याशी आगे नहीं बढ़ाया। इसके बजाय गठबंधन ने निर्दलीय उम्मीदवार और जाने-माने उद्योगपति परिमल नाथवानी को खुला समर्थन देने का ऐलान किया है। संख्या बल को देखते हुए झामुमो की एक सीट तो लगभग पक्की मानी जा रही है, पर असली रस्साकशी दूसरी सीट को लेकर है, जहां एनडीए और कांग्रेस आमने-सामने हैं।

## 24 का आंकड़ा और चार वोट की दूरी
इस पूरे खेल की धुरी संख्या बल है। फिलहाल एनडीए खेमे के पास 24 विधायक हैं और अपने समर्थित उम्मीदवार को राज्यसभा भेजने के लिए उसे सिर्फ चार अतिरिक्त वोट जुटाने हैं। यही चार वोटों की कमी पार्टी को संभावित क्रॉस वोटिंग और सहयोगी दलों की ओर टकटकी लगाए रहने पर मजबूर कर रही है। भीतरखाने रणनीति इस बात पर बन रही है कि विपक्षी गठबंधन के कुछ विधायकों को 'अंतरात्मा की आवाज' पर एनडीए प्रत्याशी के पक्ष में वोट डालने के लिए राजी कर लिया जाए, ताकि जीत का गणित पलट जाए।

## सरयू राय के बयान से क्यों मची हलचल
राज्य के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री सरयू राय ने इसी समीकरण की ओर इशारा करते हुए कहा कि एनडीए के पास इस वक्त 24 विधायक हैं और बहुमत के लिए महज चार विधायकों की कमी है। उन्होंने यह संभावना भी जताई कि विपक्षी खेमे के छह से सात विधायक अपनी शर्तों पर, अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनते हुए, एनडीए उम्मीदवार के पक्ष में मतदान कर सकते हैं। उनके इस इशारे के बाद दोनों राज्यसभा सीटों का मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। हालत यह है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष — दोनों ही अपने-अपने विधायकों को एकजुट बनाए रखने में जुट गए हैं। एनडीए की निगाहें खासकर उन विधायकों पर टिकी हैं जो किसी बात से नाराज चल रहे हैं या अपनी शर्तें मनवाना चाहते हैं।

## नाथवानी का नामांकन वैध, मजबूत हुई एनडीए की पकड़
निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी का नामांकन वैध घोषित होते ही चुनावी मैदान पूरी तरह सज गया है। नाथवानी को भाजपा, आजसू और एनडीए के बाकी घटक दलों का पूरा साथ हासिल है। राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि नाथवानी की मजबूत पकड़ और एनडीए की सधी रणनीति के चलते दूसरी सीट पर कांग्रेस के प्रणव झा की राह आसान नहीं रहने वाली। जानकारों के मुताबिक बीजेपी को केवल तीन से चार अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की दरकार है, और इसे जुटाने के लिए परदे के पीछे जोरदार गोटियां बिछाई जा रही हैं।

## क्रॉस वोटिंग का डर और 'रिजॉर्ट पॉलिटिक्स' की आहट
सरयू राय ने जब साफ संकेत दिए कि इंडिया गठबंधन के विधायक एनडीए उम्मीदवार के पक्ष में जा सकते हैं, तो कांग्रेस और झामुमो के भीतर बेचैनी और गहरा गई। क्रॉस वोटिंग का यह डर इस कदर बढ़ चुका है कि गठबंधन अब अपने विधायकों को बिखरने से रोकने की जुगत में लग गया है। चर्चा है कि इसके लिए 'रिजॉर्ट पॉलिटिक्स' तक का सहारा लिया जा सकता है और विधायकों को राज्य से बाहर सुरक्षित ठिकानों पर शिफ्ट करने की तैयारी हो रही है।

## बैलेट पेपर का पेच और पोलिंग एजेंट की निर्णायक भूमिका
राज्यसभा का चुनाव बैलेट पेपर से होता है और इसमें दलीय व्हिप घोषित रूप से लागू नहीं होता। यही वजह है कि यहां क्रॉस वोटिंग की गुंजाइश हमेशा बनी रहती है, और इस बार पोलिंग एजेंटों की भूमिका निर्णायक साबित होने वाली है। नियम कहते हैं कि कोई भी विधायक अपना मतपत्र पेटी में डालने से पहले अपनी पार्टी के अधिकृत पोलिंग एजेंट को दिखाने के लिए बाध्य है। ऐसे में अगर कोई विधायक बगावत कर पार्टी लाइन से हटकर वोट करता है, तो उसकी विधानसभा सदस्यता पर भी खतरा मंडरा सकता है।

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