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  "title": "फिल्म जगत के पाकिस्तान प्रेम से राहुल गांधी पर प्रहार तक, कंगना रनौत ने कई मुद्दों पर साधा निशाना",
  "summary": "बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने बॉलीवुड में पाकिस्तान के प्रति कथित झुकाव, विपक्ष के नेता राहुल गांधी के संसदीय आचरण और हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार द्वारा लगाए गए नए ईंधन सेस को लेकर तीखा हमला बोला है।",
  "content": "भारतीय जनता पार्टी की मंडी से सांसद और प्रसिद्ध फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में दिए अपने ताजा बयानों से राजनीतिक और सिनेमा जगत के गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने कला क्षेत्र से जुड़े वरिष्ठ अभिनेताओं के रुख, संसद भवन में विपक्षी दल के रवैये तथा राज्य सरकारों की आर्थिक नीतियों पर विस्तार से अपनी बात रखी। अपने वक्तव्य में कंगना रनौत ने फिल्म उद्योग के एक वर्ग पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया और साथ ही लोकसभा में विपक्ष के नेता की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्न खड़े किए।\n\nफिल्म उद्योग की चुप्पी और पाकिस्तान के प्रति रुख पर उठाए सवाल\nदिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह द्वारा छात्र आंदोलनों के संदर्भ में दी गई टिप्पणियों का जवाब देते हुए कंगना रनौत ने कहा कि मनोरंजन उद्योग का रवैया लंबे समय से पक्षपातपूर्ण रहा है। उन्होंने स्मरण कराया कि जब संसद भवन के निकट अशांति की स्थितियां बनी थीं अथवा जनप्रतिनिधियों के आवासों का घेराव हुआ था, उस समय उद्योग के बड़े नाम पूरी तरह मौन रहे थे। उनका तर्क था कि राजधानी के जंतर मंतर पर होने वाले धरना-प्रदर्शनों के प्रति सहानुभूति जताने वाले लोग झारखंड राज्य में मासूम बच्चों पर होने वाले कथित अत्याचारों के समय खामोशी क्यों साध्य रहते हैं। उन्होंने प्रश्न किया कि क्या वे पीड़ित बच्चे युवा पीढ़ी का हिस्सा नहीं हैं।\n\n \nइसी क्रम में कंगना रनौत ने स्वतंत्रता के बाद भी फिल्म उद्योग के एक वर्ग में पड़ोसी देश पाकिस्तान के प्रति दिखने वाले विशेष लगाव पर गहरा आश्चर्य प्रकट किया। उनका कहना था कि अनेक फिल्मों, सार्वजनिक साक्षात्कारों और बयानों में ऐसा दृष्टिकोण बार-बार उजागर होता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश की जनता के समक्ष इस प्रकार की मानसिकता का औचित्य स्पष्ट किया जाना चाहिए और इस पाखंड को अब स्वीकार नहीं किया जा सकता।\n\nसंसदीय गरिमा और विपक्ष के नेता पर तीखे बाण\nलोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बयानों और आचरण की आलोचना करते हुए बीजेपी सांसद ने कहा कि देश के सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच की गरिमा को ठेस पहुंचाई जा रही है। उन्होंने कहा कि संसदीय इतिहास में इस प्रकार का माहौल पहले कभी नहीं देखा गया जहां लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का उपहास उड़ाया जाए। कंगना रनौत ने ध्यान दिलाया कि एक तरफ विपक्ष गृह मंत्री अमित शाह से जटिल विषयों पर विस्तृत उत्तर की मांग करता है, वहीं दूसरी ओर जब गृह मंत्री जवाब देने खड़े होते हैं तो विपक्ष के नेता सदन में उपस्थित रहने से बचते हैं।\n\nकंगना रनौत ने दावा किया कि लोकतांत्रिक संस्थाओं में इस प्रकार का गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार विपक्ष के नेता के रूप में उनके वर्तमान कार्यकाल को अंतिम साबित कर सकता है। उन्होंने उल्लेख किया कि देश के मतदाताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लगातार तीसरी बार स्पष्ट और प्रचंड जनादेश दिया है। इसके बावजूद विपक्षी नेतृत्व अविश्वास का माहौल बनाने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय जॉर्ज सोरोस जैसी ताकतों के प्रभाव में देश की स्थिरता को प्रभावित करने की कोशिशें की जा रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि निरंतर चुनावी विफलताओं के बाद भी केवल पारिवारिक पृष्ठभूमि के आधार पर नेतृत्व पद पर बने रहना राजनीतिक विश्वसनीयता को कमजोर करता है।\n\nकॉकरोच और गटर संबंधी बयान पर दी गई सफाई\nयुवा वर्ग को लेकर पूर्व में सामने आई अपनी एक टिप्पणी पर उपजे विवाद को खारिज करते हुए मंडी की सांसद ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि उनके वक्तव्य को गलत संदर्भ में प्रस्तुत किया गया था और उन्होंने देश के समस्त युवाओं के विषय में कोई प्रतिकूल बात नहीं कही थी। कंगना रनौत के अनुसार यदि कोई व्यक्ति स्वयं के लिए आपत्तिजनक शब्दावली का प्रयोग करता है और उस पर कोई प्रतिक्रिया दी जाती है तो उसे संपूर्ण युवा समाज से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।\n\n \nउन्होंने स्पष्ट किया कि उनका संकेत केवल उस सीमित वर्ग की ओर था जो नशीले पदार्थों के सेवन, अवैध सट्टेबाजी, जुए और इंटरनेट के डार्क वेब जैसे अपराधों में संलिप्त होकर अपना जीवन गुमराह कर रहा है। उन्होंने कहा कि समाज के एक भटके हुए छोटे हिस्से की समस्याओं पर चर्चा करना पूरे देश के होनहार युवाओं का अपमान करना नहीं है, बल्कि उस सामाजिक बुराई की ओर ध्यान आकर्षित करना है।\n\nहिमाचल प्रदेश की आर्थिक स्थिति और सेस का विरोध\nअपने गृह राज्य हिमाचल प्रदेश के संदर्भ में बात करते हुए कंगना रनौत ने सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली राज्य सरकार पर तीखा प्रहार किया। राज्य सरकार द्वारा पेट्रोल और डीजल पर अनाथ बच्चों तथा असहाय माताओं के कल्याण के नाम पर लगाए गए 60 पैसे प्रति लीटर के अतिरिक्त सेस पर उन्होंने कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य इस समय गंभीर आर्थिक तंगी से गुजर रहा है और प्रशासनिक विफलता को छुपाने के लिए आम जनता पर नए-नए कर थोपे जा रहे हैं।\n\nबीजेपी सांसद ने कहा कि जनकल्याण और सामाजिक सहायता के नाम पर लिए जा रहे इस राजस्व का सही उपयोग नहीं हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे पूर्व राज्य सरकार देवदार के बहुमूल्य वृक्षों की नीलामी की योजनाओं पर विचार कर रही थी और अब ईंधन पर सेस लगाकर नागरिकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य की जनता इस प्रशासनिक व्यवस्था से ऊब चुकी है और आने वाले समय में प्रदेश में पुन: बीजेपी की डबल इंजन सरकार की वापसी होगी।\n\nइसका आप पर असर\nभारत में: संसद की कार्यवाही, विपक्षी रणनीति और बॉलीवुड अभिनेताओं की बयानबाजी से जुड़े इस राजनीतिक घटनाक्रम का देश भर के राजनीतिक विमर्श पर सीधा असर पड़ता है।\n\nहिमाचल प्रदेश में: पेट्रोल और डीजल पर 60 पैसे प्रति लीटर का नया सेस लागू होने से राज्य के वाहन चालकों और आम जनता पर सीधा जेब खर्च बढ़ेगा।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. कंगना रनौत ने नसीरुद्दीन शाह और बॉलीवुड पर क्या सवाल उठाए?\nकंगना रनौत ने नसीरुद्दीन शाह के बयानों को नफरत भरा बताते हुए फिल्म इंडस्ट्री पर दोहरे रवैये का आरोप लगाया और पूछा कि बंटवारे के इतने सालों बाद भी बॉलीवुड में पाकिस्तान के प्रति मोह क्यों नजर आता है।\n\n2. राहुल गांधी के संसदीय रवैये पर कंगना ने क्या कहा?\nकंगना रनौत ने कहा कि राहुल गांधी संसद का मजाक बना रहे हैं, जहां वे गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांगते हैं लेकिन खुद जवाब सुनने के वक्त मौजूद नहीं रहते।\n\n3. कंगना रनौत ने अपने कॉकरोच और गटर वाले बयान पर क्या सफाई दी?\nकंगना ने स्पष्ट किया कि उन्होंने सभी युवाओं को गलत नहीं कहा था, बल्कि केवल नशे, जुए और डार्क वेब की लत में डूबे भटके हुए वर्ग के संदर्भ में बात की थी।\n\n4. हिमाचल प्रदेश सरकार पर कंगना ने किस बात का विरोध किया?\nउन्होंने हिमाचल की सुक्खू सरकार द्वारा पेट्रोल-डीजल पर अनाथों और विधवाओं के नाम पर लगाए गए 60 पैसे के अतिरिक्त सेस का विरोध करते हुए इसे जनता पर टैक्स का बोझ बताया।",
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  "category": "राजनीति",
  "publishedAt": "2026-08-12",
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