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  "title": "खरगे की टिप्पणी पर गरमाई राजनीति, सर्वे में 72 प्रतिशत लोगों ने माना संस्कारों पर सीधा प्रहार",
  "summary": "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पिता पर की गई मल्लिकार्जुन खरगे की टिप्पणी को लेकर एक सर्वे में बड़ा खुलासा हुआ है। सर्वे के मुताबिक बहुसंख्य जनता ने इसे संस्कारों और पद की गरिमा के खिलाफ बताया है, जिस पर राजनीतिक दलों की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।",
  "content": "बिहार की राजधानी पटना में हुए एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पिता को लेकर दिए गए बयान पर देशभर में सियासी घमासान छिड़ गया है। इस विवादित टिप्पणी के बाद कराए गए एक नए टेलीफोनिक जनमत सर्वेक्षण ने राजनीतिक गलियारों में हलचल और तेज कर दी है। मैट्राइज़ न्यूज कम्युनिकेशंस द्वारा पांच हजार लोगों को शामिल कर किए गए इस सर्वे से सामने आया है कि देश की बड़ी आबादी इस प्रकार की बयानबाजी से बेहद नाराज है और इसे अनुचित मानती है।\n\nसर्वे के चौंकाने वाले आंकड़े और जनता की राय\nबीते पच्चीस से सत्ताईस अक्टूबर के दौरान किए गए इस सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि करीब सड़सठ प्रतिशत लोगों का यह मानना है कि देश के सर्वोच्च पद पर बैठे प्रधानमंत्री के दिवंगत पिता को राजनीतिक बहसों में घसीटना और उनके खिलाफ अभद्र टिप्पणी करना पद की गरिमा को भारी नुकसान पहुंचाता है। इसके अलावा सर्वे में शामिल बहत्तर प्रतिशत उत्तरदाताओं ने दो टूक शब्दों में कहा कि यह बयान भारतीय जीवन मूल्यों और सनातन संस्कृति के एकदम विपरीत है, जहां हमेशा से मृत पूर्वजों और बड़े बुजुर्गों के प्रति सर्वोच्च सम्मान का भाव रखने की परंपरा रही है। वहीं, चौवन प्रतिशत लोगों ने इस तीखे और व्यक्तिगत हमले के पीछे कांग्रेस पार्टी की वैचारिक कमजोरी और चुनावी हार से उपजी निराशा को मुख्य वजह बताया है।\n\nभाजपा नेताओं का आक्रामक रुख और विरोध प्रदर्शन\nमहाराष्ट्र भाजपा महिला प्रदेशाध्यक्ष चित्रा किशोर वाघ ने मैट्राइज़ सर्वे के इन्हीं आंकड़ों का हवाला देते हुए कांग्रेस पार्टी पर करारा हमला बोला और कहा कि यह बयान न केवल प्रधानमंत्री पद बल्कि पूरे देश के सम्मान के खिलाफ है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राजनीतिक नीतियों या फैसलों पर वैचारिक विरोध जताने के बजाय व्यक्तिगत और पारिवारिक स्तर पर हमले करना कांग्रेस नेताओं की हताशा को साफ उजागर करता है और देश की एक सौ चालीस करोड़ जनता इसे कभी सहन नहीं करेगी। इस पूरे घटनाक्रम के बाद से भारतीय जनता पार्टी ने आक्रामक तेवर अपनाते हुए मुख्य विपक्षी दल और उसके शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन छेड़ दिया है।\n\nराजधानी नई दिल्ली में भाजपा कार्यकर्ताओं ने आक्रामक रुख अपनाते हुए मल्लिकार्जुन खरगे के आवास की तरफ मार्च निकाला और कांग्रेस पार्टी से सार्वजनिक रूप से देश की जनता से माफी मांगने की पुरजोर मांग उठाई। उधर बिहार की राजधानी पटना में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी की अगुवाई में पार्टी कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर तीव्र जन आक्रोश मार्च निकाला और खरगे का पुतला फूंककर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया।\n\nविभिन्न शहरों में आक्रोश और निंदा का दौर\nपार्टी नेताओं का यह भी कहना है कि बिहार के महान निर्माता श्रीकृष्ण सिंह की जयंती के पावन मंच का इस तरह राजनीतिक स्वार्थ के लिए इस्तेमाल करना और देश के प्रधानमंत्री के पिता पर ओछी टिप्पणी करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण एवं निंदनीय है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से लेकर महाराष्ट्र की आर्थिक राजधानी मुंबई तक भारतीय जनता पार्टी ने इस पूरे प्रकरण को देश के एक सौ चालीस करोड़ नागरिकों की भावनाओं पर सीधा आघात करार दिया है और आने वाले दिनों में इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शनों को और अधिक तेज करने का ऐलान किया है।\n\nइसका आप पर असर\nयह राजनीतिक विवाद देश की मुख्य राजनीतिक पार्टियों और उनके समर्थकों के बीच वैचारिक तनाव को और अधिक बढ़ा सकता है।\n\n• देशभर में: राजनीतिक बयानबाजी का स्तर गिरने से आम जनता के बीच नकारात्मक संदेश जाता है और नीतिगत मुद्दों से ध्यान भटकता है। मतदाता इस तरह के व्यक्तिगत हमलों को लेकर विभिन्न दलों की कार्यशैली का मूल्यांकन करते हैं।\n• बिहार में: पटना और राज्य के अन्य हिस्सों में राजनीतिक दलों के विरोध प्रदर्शनों और मार्च के कारण यातायात व्यवस्था प्रभावित हो सकती है और आम नागरिकों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह राजनीतिक विवाद कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा प्रधानमंत्री के परिवार पर की गई टिप्पणी के बाद भड़का है। चुनाव और राजनीतिक मंचों पर व्यक्तिगत बयानों के इस्तेमाल के कारण दोनों प्रमुख दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।\n\n• बयान की पृष्ठभूमि: पटना में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा दिए गए बयानों को सत्तारूढ़ दल ने राजनीतिक मर्यादा का उल्लंघन बताया। इसके बाद मैट्राइज़ न्यूज कम्युनिकेशंस द्वारा जनता की राय जानने के लिए टेलीफोनिक सर्वे कराया गया।\n• राजनीतिक प्रतिक्रिया: विपक्षी नेताओं के बयानों पर भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने आक्रामक रणनीति अपनाई ताकि इसे चुनावी और सांस्कृतिक मुद्दों से जोड़कर जनता के बीच उठाया जा सके।\n• सर्वे के निष्कर्ष: सर्वे में शामिल अधिकांश लोगों ने माना कि दिवंगत व्यक्तियों या परिवार को राजनीति में घसीटना उचित नहीं है, जिससे राजनीतिक दलों को अपनी रणनीति पर नए सिरे से सोचने का अवसर मिलता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. मल्लिकार्जुन खरगे ने यह विवादित टिप्पणी कहाँ की थी?\nमल्लिकार्जुन खरगे ने यह टिप्पणी बिहार की राजधानी पटना में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान की थी।\n\n2. मैट्राइज़ सर्वे में कुल कितने लोगों की राय ली गई थी?\nइस टेलीफोनिक सर्वे में कुल 5,000 लोगों को शामिल किया गया था।\n\n3. सर्वे के अनुसार कितने प्रतिशत लोगों ने इसे पद की गरिमा के खिलाफ माना?\nसर्वे में शामिल करीब 68 प्रतिशत लोगों ने इसे प्रधानमंत्री पद की गरिमा के खिलाफ माना।\n\n4. कितने प्रतिशत लोगों ने इसे सनातन संस्कृति के खिलाफ बताया?\nलगभग 72 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने माना कि यह टिप्पणी सनातन संस्कृति और पारंपरिक जीवन मूल्यों के खिलाफ है।\n\n5. बिहार में भाजपा ने विरोध प्रदर्शन के दौरान किसका पुतला फूंका?\nबिहार में भाजपा कार्यकर्ताओं ने प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी के नेतृत्व में मार्च निकालकर मल्लिकार्जुन खरगे का पुतला फूंका।",
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  "category": "राजनीति",
  "publishedAt": "2026-10-27",
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