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  "title": "खटीमा बनाम चंपावत: 2027 में किस सीट से ताल ठोकेंगे सीएम धामी, तीन दिवसीय दौरे ने तेज की अटकलें",
  "summary": "उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के खटीमा दौरे और स्थानीय भाजपा नेताओं की अपीलों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि 2027 का विधानसभा चुनाव वे चंपावत के बजाय खटीमा से लड़ सकते हैं।",
  "content": "उत्तराखंड में अगला विधानसभा चुनाव भले ही 2027 में होना है, लेकिन सियासी सरगर्मी अभी से तेज हो चली है। इसकी वजह बने हैं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, जिनके खटीमा विधानसभा क्षेत्र के तीन दिवसीय दौरे ने प्रदेश की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है। दौरे के दौरान भाजपा के कई नेताओं ने अलग-अलग मंचों से खुलकर मुख्यमंत्री से यह गुजारिश की कि वे 2027 में खटीमा से ही चुनावी मैदान में उतरें।\n\nक्यों उठ रहा है सीट बदलने का सवाल\nधामी ने इन अपीलों पर कोई दो-टूक राजनीतिक ऐलान तो नहीं किया, पर उनके तेवर और मौजूदगी ने राजनीतिक हलकों में कयासों को हवा दे दी है। चर्चा यह है कि आने वाले चुनाव में वे चंपावत के बजाय अपने पुराने गढ़ खटीमा का रुख कर सकते हैं। मुख्यमंत्री का खटीमा में दोबारा सक्रिय होना ही इस अटकल की सबसे बड़ी बुनियाद बन गया है।\n\nखटीमा से धामी का पुराना रिश्ता\nखटीमा मुख्यमंत्री के सियासी सफर की शुरुआती जमीन रही है। वर्ष 2012 में वे पहली बार इसी सीट से विधायक चुने गए और 2017 में दोबारा यहीं से जीतकर विधानसभा पहुंचे। 2022 के चुनाव से ठीक पहले पार्टी ने उन्हें प्रदेश की कमान सौंप दी। इसके बाद सरकारी जिम्मेदारियों के चलते क्षेत्र में उनकी आमद-रफ्त कुछ घट गई।\n\nराजनीतिक जानकार मानते हैं कि यही घटती सक्रियता और साथ में स्थानीय भाजपा नेताओं की आपसी गुटबाजी, दोनों मिलकर 2022 में खटीमा में उनकी हार की बड़ी वजह बनीं। हालांकि सीट हारने के बावजूद पार्टी नेतृत्व ने उन पर भरोसा कायम रखा और एक बार फिर मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंपी। इसके बाद धामी ने चंपावत विधानसभा सीट से उपचुनाव जीतकर अपनी कुर्सी बरकरार रखी और एक नया रिकॉर्ड भी बनाया।\n\nतीन दिनी दौरे ने बढ़ाया सियासी पारा\nहाल ही में मुख्यमंत्री खटीमा क्षेत्र के तीन दिवसीय दौरे पर पहुंचे, जहां उन्होंने कई सरकारी कार्यक्रमों, पार्टी के आयोजनों और गैर-राजनीतिक समारोहों में हिस्सा लिया। इन्हीं मंचों से भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं ने सार्वजनिक तौर पर उनसे 2027 में खटीमा से लड़ने की अपील दोहराई। दौरे के दूसरे दिन मुख्यमंत्री ने खटीमा में एक रोड शो भी किया, जिसकी गूंज खटीमा से लेकर देहरादून तक राजनीतिक गलियारों में सुनाई दे रही है।\n\nनेताओं का न्योता और धामी का भावुक जवाब\nइस दौरे में जिला पंचायत अध्यक्ष अजय मौर्या समेत भाजपा के कई नेताओं ने मुख्यमंत्री को 2027 के चुनाव में खटीमा से उतरने का औपचारिक न्योता दिया। जवाब में धामी ने भावुक होते हुए कहा कि खटीमा उनके लिए महज एक विधानसभा क्षेत्र नहीं, बल्कि उनके दिल में बसी हुई जगह है। मुख्यमंत्री के इस बयान और नेताओं की लगातार अपीलों के बाद यह सवाल और तेज हो गया है कि क्या 2027 में धामी चंपावत छोड़कर खटीमा से चुनाव लड़ेंगे।\n\nइसका आप पर असर\n• उत्तराखंड में: सीट को लेकर मुख्यमंत्री का फैसला 2027 के चुनावी समीकरण तय करेगा, इसलिए राज्य के मतदाताओं के लिए यह सीधे तौर पर मायने रखता है।\n• खटीमा में: मुख्यमंत्री की दोबारा सक्रियता का सीधा असर यहां के विकास कार्यों, सरकारी योजनाओं और स्थानीय राजनीतिक हलचल पर पड़ सकता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. सीएम धामी 2027 में किन दो सीटों के बीच चर्चा में हैं?\nचर्चा खटीमा और चंपावत विधानसभा सीटों को लेकर है, जिनमें से किसी एक से वे 2027 का चुनाव लड़ सकते हैं।\n\n2. धामी का खटीमा से क्या पुराना रिश्ता है?\nवे 2012 और 2017 में खटीमा से विधायक चुने गए थे, हालांकि 2022 में वे यह सीट हार गए थे।\n\n3. धामी फिलहाल किस सीट से विधायक हैं?\n2022 में खटीमा हारने के बाद उन्होंने चंपावत विधानसभा सीट से उपचुनाव जीता था।\n\n4. किस नेता ने उन्हें खटीमा से लड़ने का न्योता दिया?\nजिला पंचायत अध्यक्ष अजय मौर्या समेत भाजपा के कई नेताओं ने उन्हें खटीमा से चुनाव लड़ने का औपचारिक न्योता दिया।",
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  "category": "राजनीति",
  "publishedAt": "2026-06-17",
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    "खटीमा विधानसभा",
    "चंपावत सीट",
    "उत्तराखंड चुनाव 2027",
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