कोंडा सुरेखा की विदाई और तीन महिलाओं की ताजपोशी, रेवंत रेड्डी का मास्टरस्ट्रोक तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने मंत्रिमंडल से कोंडा सुरेखा को बाहर करने के साथ ही पिछड़ा वर्ग की तीन महिलाओं को अहम पदों पर जिम्मेदारी सौंपकर राजनीतिक समीकरण साध लिए हैं। तेलंगाना की राजनीति में उठापटक के बीच मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने एक बड़ा राजनीतिक दांव चला है। मंत्रिमंडल से कोंडा सुरेखा की छुट्टी के बाद उपजे राजनीतिक हालातों से निपटने के लिए सरकार ने बेहद सधी हुई रणनीति अपनाई है। एक तरफ जहां पार्टी अनुशासन को प्राथमिकता दी गई है, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष के किसी भी संभावित हमले की धार को कमजोर करने के लिए खास कदम उठाए गए हैं। इस पूरी कवायद का मकसद यह सुनिश्चित करना था कि किसी भी वर्ग में सरकार के खिलाफ नाराजगी का माहौल न बने। एक साथ तीन महिलाओं को मिली बड़ी कमान कोंडा सुरेखा के मंत्रिमंडल से बाहर होने के बाद सरकार ने तुरंत संतुलन बनाते हुए तीन प्रमुख महिलाओं को अहम जिम्मेदारियों से नवाजा है। गदवाल विजयलक्ष्मी को तेलंगाना प्लानिंग बोर्ड का वाइस चेयरपर्सन नियुक्त किया गया है। इसके अलावा, नरेला शारदा को तेलंगाना स्टेट कमीशन फॉर विमेन की कमान सौंपी गई है और पूर्व राज्यसभा सांसद जी. सुधारानी को काकतीय अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी यानी KUDA का चेयरमैन बनाया गया है। यह नियुक्तियां ऐसे समय पर की गईं जब सुरेखा की विदाई से उपजे बवाव को थामना बेहद जरूरी था। पिछड़ा वर्ग और महिला कार्ड पर सधा निशाना कोंडा सुरेखा लंबे समय से खुद को पिछड़े समुदाय की मजबूत महिला नेत्री के तौर पर पेश करती रही हैं। वह पद्मशाली समुदाय से ताल्लुक रखती हैं, जबकि उनके पति कोंडा मुरली मुन्‍नूरु कापु समुदाय से आते हैं। जब उनके खिलाफ कार्रवाई की चर्चा चली तो राजनीतिक गलियारों में यह कयास लगाए जाने लगे कि पिछड़े वर्ग के संगठन इस फैसले से नाराज हो सकते हैं। सुरेखा ने भी खुद पर कार्रवाई की आहट मिलते ही पिछड़ा कार्ड खेलना शुरू कर दिया था और उनका कहना था कि इससे पार्टी को नुकसान उठाना पड़ सकता है। हालांकि, तीन अन्य महिलाओं को महत्वपूर्ण पदों पर लाकर सरकार ने इस नैरेटिव की काट पहले ही तैयार कर ली थी। परकाला दौरे से शुरू हुआ था पूरा विवाद इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि पिछले दिनों अगस्त में मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के परकाला दौरे के दौरान तैयार हुई थी। मुख्यमंत्री ने उस दौरे पर मौजूदा कांग्रेस विधायक रेवुरी प्रकाश रेड्डी के पक्ष में बयान देते हुए उन्हें आगामी चुनाव में फिर से जिताने की अपील की थी। इस बयान के बाद कोंडा सुरेखा की बेटी कोंडा सुष्मिता पटेल ने मुख्यमंत्री पर तीखा हमला बोल दिया था। सुष्मिता खुद परकाला निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ने की प्रबल इच्छा रखती थीं। परिवार के स्तर से शुरू हुआ यह मतभेद तेजी से पार्टी के भीतर के बड़े अंतर्द्वंद्व में तब्दील हो गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश कांग्रेस की अनुशासन समिति ने कोंडा सुरेखा को कारण बताओ नोटिस थमाया। जवाब में सुरेखा का यही पक्ष था कि उनकी बेटी के बयान पूरी तरह से निजी थे और उनका उनसे कोई लेना-देना नहीं है। इसके बावजूद अनुशासन समिति ने उनके खिलाफ सख्त कदम उठाने की सिफारिश की। आखिरकार पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व की हरी झंडी मिलने के बाद मुख्यमंत्री ने उन्हें मंत्री पद से हटाने का कड़ा निर्णय ले लिया। जी. चिन्ना रेड्डी पर भी गिरी गाज इस पूरी कार्रवाई के दायरे में केवल कोंडा सुरेखा ही नहीं आईं, बल्कि जी. चिन्ना रेड्डी का नाम भी सामने आया। उन्हें तेलंगाना प्लानिंग बोर्ड के वाइस चेयरमैन पद से हटाकर उनकी जगह गदवाल विजयलक्ष्मी को यह जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषक डॉ. सुरवज्जुला रामू का मानना है कि यदि केवल सुरेखा पर ही गाज गिरती और चिन्ना रेड्डी अपने पद पर बने रहते, तो सरकार पर जातीय पक्षपात का गंभीर आरोप लग सकता था। यही कारण है कि इन दोनों ही फैसलों को एक साथ जोड़कर देखा जा रहा है ताकि राजनीतिक संतुलन पूरी तरह बरकरार रहे। विश्लेषकों का यह भी कहना है कि नेतृत्व ने इस मामले पर काफी मंथन करने के बाद ही कदम उठाया है। सुरेखा द्वारा लगातार खुद को पिछड़ों की आवाज बताने के बाद, उसी वर्ग की अन्य महिलाओं को बड़े पदों पर बैठाना एक सोची-समझी कूटनीति का हिस्सा था। अब आलोचकों के लिए यह कहना बहुत आसान नहीं होगा कि मौजूदा सरकार महिलाओं या पिछड़े वर्ग के हितों के प्रति उदासीन है। हालांकि दूसरी तरफ कोंडा सुरेखा ने अपने निष्कासन को लेकर तीखे सवाल खड़े किए हैं और मुख्यमंत्री तथा शीर्ष नेतृत्व से इस कदम के पीछे की ठोस वजह स्पष्ट करने की मांग की है। कैबिनेट में खाली पदों और आगामी फेरबदल की सुगबुगाहट सुरेखा के मंत्रिमंडल से हटने के बाद अब सरकार में तीन पद खाली हो गए हैं। इसके चलते कांग्रेस के भीतर एक बार फिर से संभावित कैबिनेट विस्तार और बड़े फेरबदल की अटकलें जोर पकड़ने लगी हैं। टीपीसीसी अध्यक्ष महेश कुमार गौड़ पहले ही सितंबर के महीने में मंत्रिमंडल के पुनर्गठन की संभावना का संकेत दे चुके हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आने वाले दिनों में नए मंत्रियों के चयन के दौरान किन क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों को प्राथमिकता दी जाएगी। यह घटनाक्रम साफ तौर पर यह संदेश देता है कि रेवंत रेड्डी सरकार के लिए महिलाओं और पिछड़े समुदायों की उपेक्षा करना कतई संभव नहीं है। एक तरफ कड़ा अनुशासन दिखाते हुए पार्टी ने यह साफ कर दिया है कि बगावती तेवर बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे, तो दूसरी तरफ अहम पदों पर नई नियुक्तियां करके यह भी जता दिया गया है कि सामाजिक संतुलन साधना उनकी प्राथमिकता में सबसे ऊपर है। इसका आप पर असर यह राजनीतिक फेरबदल राज्य के प्रशासनिक समीकरणों और क्षेत्रीय संतुलन को सीधे तौर पर प्रभावित करता है। • भारत में: राष्ट्रीय स्तर पर इस कदम को क्षेत्रीय दलों और कांग्रेस के भीतर अंतर्कलह से निपटने के एक मॉडल के तौर पर देखा जा रहा है। इससे यह संदेश गया है कि अनुशासनहीनता पर कार्रवाई के साथ सामाजिक संतुलन साधना भी जरूरी है। • तेलंगाना में: राज्य के राजनीतिक गलियारों और स्थानीय कार्यकर्ताओं के बीच इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि आगामी कैबिनेट विस्तार में किन नए चेहरों को जगह मिलेगी। पिछड़े समुदायों और महिलाओं के बीच राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर नए सिरे से बहस छिड़ गई है। • प्रशासनिक स्तर पर: गदवाल विजयलक्ष्मी, नरेला शारदा और जी. सुधारानी की नियुक्तियों से प्रमुख विकास प्राधिकरणों और आयोगों में कामकाज की गति प्रभावित हो सकती है। • पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए: कांग्रेस कार्यकर्ताओं को शीर्ष नेतृत्व के कड़े अनुशासन के संदेश के साथ काम करना होगा। • भविष्य की राजनीति: आने वाले दिनों में विपक्षी दलों के लिए सरकार को घेरने की रणनीति में बदलाव करना पड़ सकता है क्योंकि सरकार ने पहले ही महिला प्रतिनिधित्व का दांव चल दिया है। ऐसा क्यों हुआ यह राजनीतिक उठापटक अनुशासनहीनता के मामलों और सामाजिक प्रतिनिधित्व के बीच संतुलन बनाने की अनिवार्यता के कारण सामने आई है। • सीधा कारण: परकाला दौरे के दौरान मुख्यमंत्री के बयान के बाद कोंडा सुरेखा की बेटी द्वारा दिए गए बयानों से विवाद भड़का, जिसके चलते पार्टी अनुशासन समिति ने कार्रवाई की सिफारिश की। • सामाजिक समीकरण: सुरेखा के हटने से पिछड़े वर्ग में नाराजगी की आशंका थी, जिसे शांत करने के लिए सरकार ने उसी वर्ग की अन्य तीन महिलाओं को अहम पदों पर नियुक्त किया। • संतुलन बनाने की कवायद: राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, केवल एक नेता पर कार्रवाई करने से जातीय पक्षपात के आरोप लग सकते थे, इसलिए चिन्ना रेड्डी को भी पद से हटाया गया। • अनुशासन का संदेश: पार्टी नेतृत्व ने यह स्पष्ट कर दिया कि आंतरिक कलह या बगावती बयानों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, भले ही नेता किसी भी प्रभावी वर्ग से आता हो। सवाल-जवाब 1. कोंडा सुरेखा को मंत्रिमंडल से क्यों हटाया गया? परकाला दौरे के बाद उनके परिवार द्वारा मुख्यमंत्री के खिलाफ दिए गए बयानों और पार्टी अनुशासन के उल्लंघन के चलते उन्हें हटाया गया। 2. गदवाल विजयलक्ष्मी को कौन सी जिम्मेदारी मिली है? उन्हें तेलंगाना प्लानिंग बोर्ड का वाइस चेयरपर्सन बनाया गया है। 3. नरेला शारदा को किस पद पर नियुक्त किया गया है? उन्हें तेलंगाना स्टेट कमीशन फॉर विमेन का चेयरपर्सन बनाया गया है। 4. जी. सुधारानी को कौन सा नया पद मिला है? उन्हें काकतीय अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी यानी KUDA की चेयरपर्सन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। 5. जी. चिन्ना रेड्डी के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई? उन्हें तेलंगाना प्लानिंग बोर्ड के वाइस चेयरमैन पद से हटा दिया गया। 6. टीपीसीसी अध्यक्ष ने किस बात की संभावना जताई है? उन्होंने सितंबर में कैबिनेट पुनर्गठन की संभावना जताई है। https://trendkia.com/politics/konda-surekha-ki-vidai-aura-tina-mahilaon-ki-tajaposhi-revanth-reddy-ka-mastarastroka-30482 TrendKia — Har trend, sabse pehle.