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  "title": "लालकृष्ण आडवाणी के शताब्दी वर्ष पर नितिन नवीन ने की सराहना, कहा- कठिन फैसले भी सहजता से लेते थे",
  "summary": "भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने लालकृष्ण आडवाणी के 100वें जन्मदिन पर आयोजित कार्यक्रम में उनके योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर विपक्ष को आडवाणी से एकजुटता की सीख लेनी चाहिए।",
  "content": "भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने 8 नवंबर को पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में उनके राजनीतिक जीवन और देश के प्रति समर्पण को याद किया। पार्टी मुख्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम में नवीन ने विपक्षी दलों को संबोधित करते हुए कहा कि देश के सामने किसी भी प्रकार की चुनौती आने पर सभी राजनीतिक दलों को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर एकजुट होना चाहिए, जो कि आडवाणी के जीवन से सीखा जा सकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जब भी आडवाणी संसद में अपनी बात रखते थे, तो वह इस बात को पूरी दृढ़ता से कहते थे कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मामलों पर भाजपा हमेशा सरकार के साथ मजबूती से खड़ी रहेगी, भले ही वह विपक्ष में ही क्यों न हो। नेता प्रतिपक्ष के रूप में उनकी यह स्पष्ट सोच थी कि जब बात राष्ट्रहित की आती है, तो पूरा विपक्ष सरकार के कंधे से कंधा मिलाकर चलना चाहिए, और आज की राजनीतिक पीढ़ी को इस आदर्श को अपनाने की अत्यधिक आवश्यकता है।\n\nअटल बिहारी वाजपेयी के साथ अनूठी कार्यशैली और वैचारिक सामंजस्य\nनितिन नवीन ने लालकृष्ण आडवाणी और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के व्यक्तित्व के बीच के अंतर और समानता पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं के स्वभाव और कार्य करने के तरीके में काफी भिन्नता थी, लेकिन इसके बावजूद एक साझा लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एक ही दिशा में और एक ही स्वर में मिलकर काम करने की उनकी क्षमता पूरी तरह से अद्वितीय थी। भाजपा के प्रत्येक कार्यकर्ता के लिए यह आपसी तालमेल और वैचारिक प्रतिबद्धता एक बड़ा सबक है। नवीन ने आडवाणी को संगठन से जुड़े हर एक व्यक्ति के लिए एक जीवंत प्रेरणास्रोत बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र प्रथम की विचारधारा के प्रति उनकी अटूट निष्ठा ने भाजपा की उन्नति और उसके देशव्यापी विस्तार को लेकर आलोचना करने वालों की हर धारणा को पूरी तरह से गलत साबित कर दिया, जिससे पार्टी आज इस मुकाम पर पहुंची है।\n\nराजनीतिक शुचिता, गरिमा और संवेदनशीलता के जीवंत प्रतीक\nकार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि जैसे-जैसे भारत एक नई गति के साथ 21वीं सदी की ओर आगे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे भारतीय जनता पार्टी भी अपने सांगठनिक विस्तार और विकास के रथ पर सवार होकर निरंतर आगे बढ़ रही है। भाजपा देश की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत और पार्टी की स्थापित परंपरा, दोनों को साथ लेकर चलने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। नवीन ने वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य पर चर्चा करते हुए कहा कि राजनीति में जिस प्रकार की शालीनता और गरिमा को हमेशा बनाकर रखना चाहिए, जिस पूर्ण ईमानदारी और शुचिता का पालन किया जाना चाहिए तथा जिस गहरी संवेदनशीलता का परिचय दिया जाना चाहिए, यदि आज की पीढ़ी इन सभी मूल्यों को किसी एक जीवंत व्यक्तित्व से सीखना चाहे, तो उसका सबसे बेहतरीन उदाहरण लालकृष्ण आडवाणी ही हैं। उनका पूरा जीवन और व्यक्तित्व ईमानदारी और शुचिता का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है।\n\nकठिन परिस्थितियों में अडिग संकल्प और विभाजन का दर्द\nनितिन नवीन ने स्वीकार किया कि उन्हें सीधे तौर पर आडवाणी के साथ लंबे समय तक काम करने का अवसर तो नहीं मिल पाया, लेकिन जिन लोगों ने उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया था, उनके अनुभवों और संस्मरणों ने उन्हें यह भली-भांति समझने में मदद की कि आडवाणी का जीवन कितना प्रेरणास्पद रहा है। भाजपा अध्यक्ष ने रेखांकित किया कि वह कितने भी दबाव में क्यों न हों, लेकिन कठिन से कठिन फैसले भी बेहद सहजता और शांति के साथ ले सकते थे। देश के विभाजन का भयानक दर्द और विभीषिका झेलने के बावजूद आडवाणी ने कभी अपने मार्ग से विचलित हुए बिना राष्ट्र के प्रति अपना अपार समर्पण और निष्ठा दिखाई, जो देश की नई पीढ़ी के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण है।\n\nनवीन ने भारतीय जनता पार्टी की आज की विशाल विकास यात्रा की मजबूत नींव रखने का पूरा श्रेय लालकृष्ण आडवाणी और अटल बिहारी वाजपेयी की जोड़ी को दिया। उन्होंने याद दिलाया कि इन दोनों दिग्गज नेताओं ने महज दो लोकसभा सदस्यों वाली एक छोटी सी पार्टी को शून्य से शिखर तक पहुंचाने में अपनी निर्णायक भूमिका निभाई थी। नवीन के अनुसार, इन दोनों नेताओं के चट्टान जैसे दृढ़ संकल्प ने पार्टी की स्थापना के बाद शुरुआती दौर में चारों तरफ व्याप्त अनिश्चितता और राजनीतिक चुनौती के माहौल से संगठन को सफलतापूर्वक बाहर निकाला और उसे देश की एक प्रमुख ताकत बनाया।\n\nअपने संबोधन के अंत में, भाजपा अध्यक्ष ने यह स्पष्ट किया कि वह आडवाणी को यह आश्वस्त करना चाहते हैं कि पार्टी का हर एक कार्यकर्ता उनकी दूरदृष्टि, सपनों और विचारों के अनुरूप ही संगठन और देश को आगे ले जाने के लिए पूरी मेहनत से काम कर रहा है। राम जन्मभूमि आंदोलन और लालकृष्ण आडवाणी द्वारा निकाली गई ऐतिहासिक रथयात्रा का जिक्र करते हुए नवीन ने उस गूंज को याद किया जब देश भर में ‘मंदिर वहीं बनाएंगे’ का नारा गूंज उठा था। उन्होंने कहा कि यह नारा केवल कुछ गिने-चुने भाजपा कार्यकर्ताओं तक सीमित नहीं था, बल्कि देश के करोड़ों आम नागरिकों ने इसे अपनी आस्था से जोड़ा था।\n\nपीयूष गोयल ने साझा किए पुराने संस्मरण और अपना जुड़ाव\nइस विशेष कार्यक्रम से पहले, केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के कोषाध्यक्ष पीयूष गोयल ने लालकृष्ण आडवाणी के साथ अपने पुराने और गहरे जुड़ाव को मंच पर याद किया। गोयल ने बताया कि पार्टी के इस वरिष्ठ नेता ने कभी भी अपने किसी भी सहकर्मी या जूनियर को यह अहसास तक नहीं होने दिया कि वह पद और कद के मामले में पार्टी में कितने वरिष्ठ या बेहद प्रभावशाली व्यक्ति हैं। उन्होंने स्नेहपूर्वक यह भी बताया कि पार्टी के सभी कार्यकर्ता उन्हें बेहद आदर के साथ प्यार से ‘दादा’ कहकर पुकारते थे। गोयल ने अपने संस्मरण साझा करते हुए कहा कि आडवाणी हमेशा उनके साथ अपने परिवार के एक सदस्य जैसा ही स्नेहपूर्ण व्यवहार करते थे और उन्हें प्यार से ‘हैप्पी’ उपनाम से पुकारा करते थे। केंद्रीय मंत्री ने अंत में यह भी रेखांकित किया कि आडवाणी जैसे दिग्गज नेताओं की अथक कड़ी मेहनत, जन-संपर्क और वैचारिक प्रतिबद्धता के कारण ही आज भाजपा की लोकसभा सीटों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि इसके विपरीत कांग्रेस पार्टी की सीटों में लगातार गिरावट देखने को मिली है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. लालकृष्ण आडवाणी की कौन सी जयंती मनाई गई?\nलालकृष्ण आडवाणी का 100वां जन्मदिन मनाया गया।\n\n2. इस अवसर पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन कहां किया गया था?\nयह विशेष कार्यक्रम पार्टी मुख्यालय में आयोजित किया गया था।\n\n3. नितिन नवीन कौन हैं?\nनितिन नवीन भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।\n\n4. पार्टी कार्यकर्ता लालकृष्ण आडवाणी को प्यार से क्या कहकर बुलाते थे?\nपार्टी कार्यकर्ता उन्हें प्यार से 'दादा' कहकर बुलाते थे।\n\n5. पीयूष गोयल के अनुसार आडवाणी उन्हें किस उपनाम से जानते थे?\nआडवाणी उन्हें 'हैप्पी' उपनाम से जानते थे।\n\nप्रेरणा और सबक\n• राष्ट्र प्रथम की भावना: व्यक्तिगत या दलीय हितों से ऊपर उठकर हमेशा देश की सुरक्षा और उसके समग्र हितों को सर्वोपरि रखना चाहिए।\n• कठिन फैसलों में अडिगता: जीवन या कार्यक्षेत्र में आने वाली विकट चुनौतियों और दबाव के बीच भी पूरी सहजता और मानसिक स्थिरता के साथ निर्णय लें।\n• साझा लक्ष्यों के लिए समन्वय: अलग-अलग स्वभाव और विचारों के लोगों के साथ मिलकर एक ही दिशा में एकजुट होकर काम करने की कला विकसित करें।\n• ईमानदारी और शुचिता: सार्वजनिक जीवन या पेशेवर सफर में अपनी गरिमा, शुचिता और उच्च नैतिक मूल्यों को कभी न छोड़ें।",
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  "publishedAt": "2026-11-08",
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