मध्य प्रदेश से निर्विरोध राज्यसभा पहुंचे हरदीप सिंह पुरी, विपक्षी आपत्तियों के बीच तय हुई जीत केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी मध्य प्रदेश में हुए राज्यसभा उपचुनाव में निर्विरोध निर्वाचित हो गए हैं। उनके विरोधियों के नामांकन खारिज होने के बाद उनकी जीत तय हो गई थी। केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार हरदीप सिंह पुरी मध्य प्रदेश से राज्यसभा उपचुनाव में निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिए गए हैं। उनके मुकाबले में खड़े दो अन्य उम्मीदवारों के नामांकन पत्र मंगलवार को ही खारिज हो गए थे, जिसके बाद इस चुनावी मैदान में केवल हरदीप सिंह पुरी ही शेष बचे थे। उनका राज्यसभा पहुंचना पहले से ही तय माना जा रहा था। नाम वापसी की आखिरी तारीख 05 नवंबर थी, जिसके पूरा होने के बाद रिटर्निंग ऑफिसर ने उन्हें आधिकारिक रूप से निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया। इसके बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल समेत कई प्रमुख नेता मध्य प्रदेश विधानसभा पहुंचे और जीत का प्रमाण पत्र प्राप्त किया। नामांकन पर हुई थी आपत्तियां और निर्वाचन अधिकारी का फैसला हरदीप सिंह पुरी ने 31 अक्तूबर को अपना नामांकन दाखिल किया था। उस दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल समेत पार्टी के कई दिग्गज नेता वहां मौजूद थे। हालांकि, इस प्रक्रिया के दौरान दो निर्दलीय उम्मीदवारों और कांग्रेस नेता हेमंत कटारे ने पुरी के नामांकन पत्रों पर कड़ी आपत्ति जताई थी। उनका दावा था कि हरदीप सिंह पुरी द्वारा दाखिल किए गए फॉर्म-26 में दिया गया हलफनामा अमान्य और अधूरा है। इसके जवाब में निर्वाचन अधिकारी उमेश शर्मा ने सभी आपत्तियों की विस्तार से जांच की और स्पष्ट किया कि पुरी ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के किसी भी प्रावधान का उल्लंघन नहीं किया है। निर्वाचन अधिकारी ने अपने आदेश में कहा कि पुरी के नामांकन पत्रों में किसी भी प्रकार की कोई खामी नहीं पाई गई है, जिसके चलते आपत्तियों को खारिज कर दिया गया। कांग्रेस ने जताया विरोध और उठाए सवाल इस फैसले के बाद कांग्रेस पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। कांग्रेस नेता हेमंत कटारे और विधायक आतिफ अकील ने कहा कि वे निर्वाचन अधिकारी के इस आदेश के खिलाफ अदालत का रुख करेंगे। उन्होंने एक बयान जारी कर आरोप लगाया कि इतनी महत्वपूर्ण कमियां होने के बावजूद नामांकन पत्र खारिज न होना भारतीय लोकतंत्र पर सीधा हमला है। विपक्षी नेताओं का कहना था कि नियमों की अनदेखी की गई है और वे इस मामले को लेकर कानूनी लड़ाई लड़ेंगे। क्यों खाली हुई थी यह सीट और क्या है राजनीतिक सफर राज्यसभा की यह खाली सीट केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन के इस्तीफे के बाद रिक्त हुई थी। मौजूदा समय में हरदीप सिंह पुरी उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सदस्य हैं और उनका वह कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त होने वाला था। मध्य प्रदेश विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी के पास बहुमत और मजबूत स्थिति होने के कारण पार्टी के उम्मीदवार की जीत की संभावना पहले से ही बहुत अधिक थी। राजनीति में आने से पूर्व हरदीप सिंह पुरी का लगभग 39 वर्षों का लंबा राजनयिक करियर रहा है। वह भारतीय विदेश सेवा के 1974 बैच के अधिकारी रह चुके हैं और संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। फरवरी 2013 में अपनी लंबी सेवा पूरी करने के बाद वह विदेश सेवा से सेवानिवृत्त हुए थे और 2 जनवरी 2014 को उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की थी। इसके बाद से वह केंद्र सरकार में अहम जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। इसका आप पर असर यह चुनाव परिणाम राष्ट्रीय स्तर पर सत्ताधारी दल की स्थिति को और मजबूत करता है जबकि स्थानीय स्तर पर इसका सीधा प्रभाव मध्य प्रदेश की राजनीतिक गतिविधियों और प्रशासनिक समीकरणों पर पड़ेगा। • राष्ट्रीय स्तर पर: संसद के उच्च सदन में पार्टी की संख्या और ताकत में स्थिरता बनी रहेगी। इस बदलाव से केंद्र सरकार के विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। • मध्य प्रदेश में: राज्य की राजनीति में सत्तारूढ़ दल का प्रभाव और अधिक सुदृढ़ हुआ है। स्थानीय स्तर पर राजनीतिक दलों के बीच चुनावी प्रक्रिया और नियमों को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। ऐसा क्यों हुआ यह उपचुनाव एल. मुरुगन के इस्तीफे के कारण खाली हुई सीट को भरने के लिए कराया गया था। विपक्षी उम्मीदवारों के नामांकन खारिज होने के पीछे फॉर्म-26 के हलफनामे में तकनीकी कमियां होने का दावा किया गया था, जिसे निर्वाचन अधिकारी ने जांच के बाद नियमों के अनुकूल पाया। • रिक्ति का कारण: केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन द्वारा इस्तीफा दिए जाने के कारण मध्य प्रदेश से राज्यसभा की यह सीट खाली हुई थी। • नामांकन खारिज होना: निर्वाचन अधिकारी द्वारा की गई जांच में विपक्षी आपत्तियों को खारिज कर दिया गया क्योंकि पुरी के कागजात नियमों के दायरे में सही पाए गए। • निर्विरोध निर्वाचन: अन्य सभी प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवारों के मैदान से बाहर होने के कारण केवल एक ही वैध उम्मीदवार शेष बचा, जिसके चलते चुनाव आयोग के नियमों के तहत निर्वाचन तय हुआ। सवाल-जवाब 1. हरदीप सिंह पुरी किस राज्य से राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुने गए हैं? हरदीप सिंह पुरी मध्य प्रदेश से राज्यसभा उपचुनाव में निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं। 2. यह सीट खाली क्यों हुई थी? यह राज्यसभा सीट केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। 3. किन उम्मीदवारों के नामांकन खारिज हुए थे? निर्दलीय उम्मीदवार कांते सयन्ना और कांग्रेस समर्थित राजकुमार लोहानी के नामांकन पत्र खारिज हुए थे। 4. हरदीप सिंह पुरी ने किस वर्ष राजनीति में प्रवेश किया था? उन्होंने 2 जनवरी 2014 को भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ली थी। https://trendkia.com/politics/madhya-pradesh-se-nirodh-rajya-sabha-pahunche-hardeep-singh-puri-56987 TrendKia — Har trend, sabse pehle.