मध्यावधि चुनावों में करारी शिकस्त के बाद भड़का मागा गुट, ट्रंप की नीतियों पर खड़े हुए तीखे सवाल अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी की भारी हार के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अपने ही कोर समर्थक खुलकर विरोध में उतर आए हैं। दक्षिणपंथी कमेंटेटर्स और इन्फ्लुएंसर्स ईरान युद्ध और शीर्ष नेतृत्व की प्राथमिकताओं को इस ऐतिहासिक पराजय की मुख्य वजह बता रहे हैं। अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी को मिले जोरदार झटके के तुरंत बाद राजनीतिक गलियारों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर भड़क उठा है। कई प्रमुख मागा समर्थक और दक्षिणपंथी हस्तियां इस चुनावी विफलता का सीधा ठीकरा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी प्रशासनिक नीतियों के सिर फोड़ रही हैं। चुनावी नतीजों में डेमोक्रेट्स ने कई पारंपरिक रिपब्लिकन गढ़ों में जीत हासिल करते हुए प्रतिनिधि सभा और सीनेट दोनों पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित कर लिया है, जिससे वॉशिंगटन की पूरी सियासी दिशा ही बदल गई है। ट्रंप ने मीडिया पर निकाला गुस्सा, खुद को बताया बेदाग मंगलवार की रात जैसे ही चुनावी रुझान साफ होने लगे, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फॉक्स न्यूज को निशाने पर लिया। उन्होंने ट्रुथ सोशल पर अपनी भड़ास निकालते हुए लिखा कि चैनल विपक्षी डेमोक्रेट्स को लगातार मंच देकर पार्टी की हार के लिए जिम्मेदार बना है। ट्रंप का तर्क था कि विरोधी पक्ष को अनुचित प्रचार मिलने से जमीन पर माहौल बिगड़ा। हालांकि, बाद में उन्होंने उसी चैनल पर फोन कॉल के जरिए डेमोक्रेट्स को उनके प्रदर्शन के लिए बधाई भी दी। अपनी खुद की लोकप्रियता को चुनावी झटके से अलग करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि वे खुद इस चुनाव में बैलेट पर नहीं थे, अन्यथा भारी बहुमत से ऐतिहासिक जीत दर्ज होती। इसके साथ ही उन्होंने एक लाल बेसबॉल टोपी की तस्वीर भी साझा की, जिस पर 'वीटो' शब्द उभरा हुआ था, जिससे यह संकेत मिला कि वे आने वाले समय में विधायी फैसलों पर कड़ा रुख अख्तियार करेंगे। मागा समर्थकों का सीधा हमला और तीखी नाराजगी राष्ट्रपति के इन बयानों के कुछ ही घंटों के भीतर उनके अपने खेमे में गहरा असंतोष फूट पड़ा। दक्षिणपंथी पॉडकास्टर मैट वॉल्श ने नतीजों को ऐतिहासिक पैमाने की राजनीतिक तबाही करार दिया। उन्होंने ट्रंप की उम्र और उनकी कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए ईरान के साथ युद्ध छेड़ने के फैसले को हार की सबसे बड़ी वजह ठहराया। वॉल्श ने यह भी जोड़ा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता को सुपर इंटेलिजेंस का नाम देने या व्हाइट हाउस के बॉलरूम जैसी गैर-जरूरी बहसों में समय गंवाने की कीमत पार्टी को चुकानी पड़ी है। राजनीतिक टिप्पणीकार माइक सेर्नोविच ने लिबर्टेरियन मतदाताओं को अलग-थलग करने के प्रशासनिक रवैये को वोटों के नुकसान का कारण बताया। वहीं पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइक फ्लिन, जिन्होंने अतीत में 2020 के चुनाव को लेकर कई दावे किए थे, ने ट्रंप को आत्ममंथन करने की नसीहत दी। उन्होंने एक्स पर लिखा कि किसी को अब आईना देखने की जरूरत है। साथ ही, फ्लिन ने इस बात पर भी निराशा जताई कि ईसाई मतदाता अपेक्षित संख्या में मतदान केंद्रों तक नहीं पहुंचे। षड्यंत्र सिद्धांतकारों की अजीबोगरीब दलीलें षड्यंत्र के सिद्धांतों के लिए पहचाने जाने वाले एलेक्स जोन्स ने अपने शो पर अप्रत्याशित रुख अपनाते हुए ट्रंप के खिलाफ खुली बगावत का ऐलान कर दिया। जोन्स ने ट्रंप को विपक्षी डेमोक्रेट्स का स्लीपर सेल बताते हुए कहा कि वे अब ट्रंप के खिलाफ शत-प्रतिशत युद्ध की स्थिति में हैं। उनका दावा था कि उन्होंने राष्ट्रपति के राजनीतिक बचाव की हर मुमकिन कोशिश की, लेकिन अब वे इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि नीतियां जानबूझकर पार्टी के नुकसान के लिए बनाई जा रही थीं। अन्य दक्षिणपंथी टिप्पणीकारों, जिनमें जैक पोसोबिएक और निक सॉर्टर शामिल हैं, ने भी ईरान संघर्ष को चुनावी जमीन खिसकने का मुख्य कारक बताया, हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर ट्रंप का नाम लेने से परहेज किया। इस बीच, पूर्व सांसद मार्जोरी टेलर ग्रीन, जिन्होंने पहले ही राष्ट्रपति से अपने रास्ते अलग कर लिए थे, ने कहा कि यह पूरी चुनावी रात दरअसल ट्रंप की नीतियों पर एक जनमत संग्रह थी, जिसमें मतदाताओं ने साफ संदेश दे दिया है। अहम दिग्गजों की चुप्पी और निष्ठावान समर्थकों का बचाव पार्टी की इस जबर्दस्त शिकस्त के बाद ट्रंप के सबसे रसूखदार समर्थकों की ओर से रहस्यमयी खामोशी भी देखी गई। चुनाव प्रचार में करोड़ों डॉलर झोंकने वाले एलन मस्क ने हार का कोई सीधा जिम्मेदार नहीं ठहराया। उन्होंने एक चुटीली टिप्पणी में कहा कि उनके चुनाव को प्रभावित करने वाले स्पेस लेजर्स इस बार काम नहीं आए, हालांकि उन्होंने एक एग्जिट पोल पर गौर करते हुए ईरान युद्ध को सबसे बड़ा नुकसानदेह मुद्दा माना। डीसी ड्रेनो के नाम से मशहूर राजनीतिक इन्फ्लुएंसर रोगन ओहैन्डली ने भी नतीजों पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी। दोबारा चुने गए सदन के स्पीकर माइक जॉनसन ने नतीजों को उम्मीद के विपरीत बताया, लेकिन किसी को दोषी ठहराने से बचते दिखे। उप चीफ ऑफ स्टाफ स्टीफन मिलर की ओर से भी चुप्पी रही, जबकि उनकी पत्नी कैटी मिलर ने मीडिया को निशाना बनाते हुए उसे वामपंथी प्रचार तंत्र कहा। पार्टी के भीतर बंटी राय और आंतरिक खींचतान इन तीखे हमलों के बावजूद कुछ समर्थक राष्ट्रपति के बचाव में डटे रहे। इन्फ्लुएंसर लॉरा लूमर ने ट्रंप को ईरान को परमाणु हथियार से रोकने वाला नायक बताते हुए कहा कि उन्हें अपना मिशन पूरा करना चाहिए। लूमर ने अपनी चिंताओं में साम्यवाद के उभार का हवाला दिया। पूर्व टीवी एंकर लारा लोगन ने हार के पीछे रिपब्लिकन पार्टी के भीतर ही एक गुप्त गुट की साजिश बताई, जो मागा आंदोलन को खत्म करना चाहता था। लिप्स ऑफ टिकटॉक चलाने वाली छाया रायचिक ने पिछले कई वर्षों की आव्रजन नीतियों को जिम्मेदार ठहराया। जमैका के राजदूत पद के लिए नामांकित कारी लेक ने चुनावी निष्पक्षता पर सवाल उठाकर राष्ट्रपति का बचाव किया। उधर स्टीव बैनन के शो के होस्ट हैरिसन स्मिथ ने दक्षिणपंथी सहयोगियों, लॉरा लूमर, बेन शापिरो, मार्क लेविन, विल चेम्बरलेन और लॉबिंग संगठन आईपैक पर निशाना साधा। वहीं पूर्व आंतरिक सुरक्षा मंत्री क्रिस्टी नोएम ने सबसे अलग राय रखते हुए कहा कि प्रशासन अपने पहले साल में कुछ ज्यादा ही सफल रहा, जिसकी वजह से मतदाताओं ने यह रुख अपनाया। इसका आप पर असर अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों पर डेमोक्रेट्स के नियंत्रण और रिपब्लिकन पार्टी के आंतरिक मतभेदों से वैश्विक कूटनीति तथा अमेरिकी नीतियों पर सीधा असर पड़ेगा। • भारत में: अमेरिकी संसद में सत्ता संतुलन बदलने से भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौतों, आव्रजन नियमों और रक्षा सौदों पर नए सिरे से विधायी समीक्षा देखने को मिल सकती है। नई दिल्ली को अब व्हाइट हाउस के साथ-साथ डेमोक्रेटिक नियंत्रण वाली कांग्रेस के साथ भी समानांतर संवाद साधना होगा। • वैश्विक नीतियों और युद्ध पर: सीनेट और प्रतिनिधि सभा पर डेमोक्रेट्स का कब्जा होने से ईरान में जारी सैन्य कार्रवाई और युद्ध के बजट पर कड़े सवाल उठेंगे। सांसद प्रशासन के सैन्य खर्चों और वीटो पावर के इस्तेमाल पर सख्त विधायी अंकुश लगा सकते हैं। • आर्थिक व वीजा नियमों पर: वीजा नियमों, व्यापार शुल्कों और आयात नीतियों को लेकर राष्ट्रपति के एकतरफा फैसलों को रोकने के लिए कांग्रेस नए कानून पेश कर सकती है। इससे अंतरराष्ट्रीय छात्रों, प्रवासी पेशेवरों और निर्यातकों को नियमों में संभावित बदलावों के लिए तैयार रहना होगा। • प्रशासनिक नियुक्तियों पर: सीनेट का नियंत्रण डेमोक्रेट्स के हाथों में जाने से राष्ट्रपति द्वारा नामित राजदूतों, न्यायाधीशों और वरिष्ठ अधिकारियों की पुष्टि प्रक्रिया रुक सकती है या उसमें भारी देरी हो सकती है। इसका सीधा असर कई महत्वपूर्ण पदों की नियुक्तियों पर तुरंत दिखाई देगा। ऐसा क्यों हुआ मध्यावधि चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी की इस बड़ी हार के पीछे सैन्य फैसलों को लेकर बढ़ता जनआक्रोश, आंतरिक विभाजन और प्रचार प्राथमिकताओं पर उठे सवाल मुख्य कारण रहे हैं। • सैन्य संघर्ष और जनमत: ईरान के साथ युद्ध शुरू करने के फैसले ने मतदाताओं के बड़े हिस्से को प्रशासन के खिलाफ कर दिया। एग्जिट पोल के आंकड़ों ने भी यह संकेत दिया कि यह संघर्ष चुनाव में पार्टी के लिए सबसे बड़ा नुकसानदेह मुद्दा साबित हुआ। • गठबंधन में दरार और बिखराव: लिबर्टेरियन मतदाताओं की उपेक्षा और ईसाई मतदाताओं के कम मतदान ने पार्टी के पारंपरिक आधार को कमजोर कर दिया। इसके अलावा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के नामकरण जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने से मतदाताओं के बीच जरूरी मुद्दों से भटकाव का संदेश गया। • आंतरिक खींचतान और असंतोष: पार्टी के भीतर विभिन्न धड़ों और प्रमुख राजनीतिक टिप्पणीकारों के बीच लगातार बढ़ते मतभेदों ने चुनावी अभियान की धार को कमजोर कर दिया। पूर्व सहयोगियों के खुले विरोध ने विपक्षी दलों को दोनों सदनों में बढ़त बनाने का सीधा मौका दे दिया। सवाल-जवाब 1. मध्यावधि चुनावों के नतीजों का अमेरिकी संसद पर क्या असर पड़ा है? डेमोक्रेटिक पार्टी ने रिपब्लिकन विरोधियों को हराते हुए प्रतिनिधि सभा और सीनेट दोनों सदनों का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया है। 2. डोनाल्ड ट्रंप ने इन चुनावी नतीजों के लिए किसे जिम्मेदार ठहराया? ट्रंप ने विपक्षी डेमोक्रेट्स को लगातार मंच देने के लिए फॉक्स न्यूज को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि वे खुद बैलेट पर नहीं थे। 3. मैट वॉल्श ने चुनावी हार के लिए किन फैसलों की आलोचना की? मैट वॉल्श ने ईरान के साथ युद्ध शुरू करने और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का नाम बदलने जैसे गैर-जरूरी मुद्दों पर ध्यान देने को मुख्य वजह बताया। 4. एलेक्स जोन्स ने ट्रंप को लेकर क्या दावा किया? एलेक्स जोन्स ने ट्रंप को डेमोक्रेट्स का गुप्त स्लीपर सेल बताते हुए कहा कि वे अब ट्रंप के खिलाफ पूरी तरह युद्ध की स्थिति में हैं। 5. एलन मस्क ने चुनावी नतीजों और एग्जिट पोल पर क्या कहा? मस्क ने किसी को सीधा जिम्मेदार नहीं ठहराया, लेकिन मजाक करते हुए एग्जिट पोल के आधार पर ईरान युद्ध को एक बड़ा नुकसानदेह मुद्दा माना। 6. माइक जॉनसन और मार्जोरी टेलर ग्रीन की क्या प्रतिक्रिया रही? मार्जोरी टेलर ग्रीन ने इसे ट्रंप पर जनमत संग्रह बताया, जबकि फिर से चुने गए स्पीकर माइक जॉनसन ने नतीजों को उम्मीद के विपरीत बताया। https://trendkia.com/politics/madhyavadhi-chunavon-men-karari-shikasta-ke-bada-bharaka-maga-guta-donald-trump-ki-nitiyon-para-khare-hue-tikhe-savala-56541 TrendKia — Har trend, sabse pehle.