# मद्रास हाईकोर्ट में डीएमके उम्मीदवार की याचिका पर सीएम सी. जोसेफ विजय का कानूनी पलटवार, चुनाव रद्द करने की मांग को बताया बेबुनियाद

> तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने अपनी चुनावी जीत को चुनौती देने वाली डीएमके की याचिका के खिलाफ मद्रास हाईकोर्ट में 'रिजेक्ट द प्लेंट' आवेदन दाखिल कर मामले को शुरुआती चरण में ही खारिज करने की मांग की है।

**Type:** article · **Category:** राजनीति · **Published:** 2026-08-28 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/politics/madrasa-haikorta-men-dmk-ummidavara-ki-yachika-para-cm-c-joseph-vijay-ka-kanuni-palatavara-31-agasta-ko-sunavai-23540 · **Language:** Hindi
**Tags:** सी जोसेफ विजय, मद्रास हाईकोर्ट, तमिलनाडु राजनीति, डीएमके, तमिलगा वेत्री कझगम, जनप्रतिनिधित्व कानून, एस इनिगो इरुदयराज

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और तमिलगा वेत्री कझगम के अध्यक्ष सी. जोसेफ विजय की चुनावी जीत को लेकर राज्य में कानूनी और राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। डीएमके के पराजित उम्मीदवार एस. इनिगो इरुदयराज ने मुख्यमंत्री विजय के निर्वाचन को चुनौती देते हुए मद्रास हाईकोर्ट में एक चुनाव याचिका दायर की है। इस याचिका में चुनाव प्रचार के दौरान बच्चों के कथित उपयोग, निर्धारित सीमा से अधिक खर्च करने और धार्मिक भावनाओं के इस्तेमाल जैसे आरोप लगाए गए हैं। इन आरोपों का कड़ा संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री विजय ने अदालत में एक मजबूत कानूनी पलटवार किया है। विजय की ओर से उनके वकीलों ने 'रिजेक्ट द प्लेंट' (याचिका खारिज करने) का आवेदन दाखिल किया है, जिसमें अदालत से अनुरोध किया गया है कि इस याचिका को सुनवाई के शुरुआती चरण में ही पूरी तरह खारिज कर दिया जाए, क्योंकि इसमें कानूनी आधार का अभाव है।

## मद्रास हाईकोर्ट में 'रिजेक्ट द प्लेंट' आवेदन और कानूनी लड़ाई
मद्रास हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायणन की एकल पीठ के समक्ष मुख्यमंत्री विजय की ओर से दाखिल इस विशेष आवेदन पर विस्तृत सुनवाई हुई। विजय के कानूनी प्रतिनिधियों ने तर्क दिया कि प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार द्वारा दायर चुनाव याचिका केवल अनुमानों और सामान्य दावों पर टिकी है। उनका कहना था कि याचिका में ऐसे ठोस और प्राथमिक तथ्य पेश नहीं किए गए हैं जो अदालत के समक्ष किसी चुनावी धांधली या गंभीर अनियमितता को साबित कर सकें। इस आवेदन के जरिए विजय ने स्पष्ट किया है कि जब याचिका में दिए गए तथ्य कानून की दृष्टि में मुकदमा चलाने योग्य ही नहीं हैं, तो अदालत को इस पर आगे विस्तृत ट्रायल चलाकर समय नष्ट करने की आवश्यकता नहीं है।

## प्रचार में बच्चों के कथित इस्तेमाल पर जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत दलीलें
चुनाव याचिका में लगाए गए सबसे प्रमुख आरोपों में से एक यह है कि मुख्यमंत्री विजय के चुनाव प्रचार अभियानों में बच्चों की भागीदारी देखी गई थी। विजय की ओर से पेश वकीलों ने इस आरोप को सिरे से खारिज करते हुए जनप्रतिनिधित्व कानून, 1951 (Representation of the People Act, 1951) का हवाला दिया। उन्होंने अदालत को बताया कि जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 100 के तहत किसी भी चुनावी नतीजे को रद्द घोषित करने के लिए विशेष वैधानिक आधार निर्धारित किए गए हैं। वकीलों का तर्क था कि चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों या आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct) में बच्चों की भागीदारी से संबंधित प्रावधान होने का यह अर्थ कदापि नहीं है कि ऐसे किसी उल्लंघन से चुनाव परिणाम अपने आप स्वतः रद्द हो जाएगा।

मुख्यमंत्री के कानूनी दल ने इस बात पर जोर दिया कि याचिकाकर्ता एस. इनिगो इरुदयराज यह दर्शाने में पूरी तरह असमर्थ रहे हैं कि कथित गतिविधियों ने चुनाव परिणाम को वास्तविक रूप से कैसे प्रभावित किया। विजय के वकीलों के अनुसार, केवल यह सामान्य दावा करना कि मतदाताओं की भावनाएं प्रभावित हुई थीं, कानून के समक्ष पर्याप्त नहीं माना जा सकता। इसके लिए याचिकाकर्ता को यह ठोस रूप से साबित करना होता है कि यदि कथित घटना नहीं हुई होती तो चुनाव का नतीजा अलग हो सकता था। ठोस साक्ष्यों के अभाव में इस प्रकार के सामान्य आरोपों के आधार पर चुने हुए जनप्रतिनिधि के नतीजे पर प्रश्नचिह्न नहीं लगाया जा सकता।

## चुनावी खर्च की सीमा और धार्मिक भावनाओं के आरोपों का खंडन
इसके अतिरिक्त, डीएमके उम्मीदवार ने अपनी याचिका में यह भी आरोप लगाया था कि चुनाव के दौरान सी. जोसेफ विजय ने वैधानिक रूप से तय चुनावी खर्च की सीमा का उल्लंघन किया और वोट हासिल करने के लिए धार्मिक भावनाओं का इस्तेमाल किया। मुख्यमंत्री विजय की कानूनी टीम ने इन सभी बिंदुओं को अदालत के समक्ष एक-एक कर खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि याचिका में न तो उन बयानों का सटीक विवरण दिया गया है और न ही उन विशिष्ट घटनाओं या पत्राचार का कोई ब्योरा दिया गया है, जिनके आधार पर धार्मिक भावनाओं के इस्तेमाल का दावा किया जा रहा है।

चुनावी खर्च से जुड़े दावों पर कानूनी टीम ने एक महत्वपूर्ण सिद्धांत रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि तमिलगा वेत्री कझगम के कार्यकर्ताओं, समर्थकों या पदाधिकारियों द्वारा स्वतंत्र रूप से किए गए किसी भी खर्च को बिना किसी ठोस और प्रामाणिक सबूत के सीधे उम्मीदवार के व्यक्तिगत चुनावी खर्च में नहीं जोड़ा जा सकता। जब तक यह साबित न हो कि उम्मीदवार ने स्वयं उस खर्च को अधिकृत किया था, तब तक उसे प्रत्याशी के चुनावी खर्च की सीमा का उल्लंघन नहीं माना जा सकता। ऐसे में याचिका में लगाए गए खर्च संबंधी आरोप भी कानूनी रूप से टिकने योग्य नहीं हैं।

## न्यायाधीश वी. लक्ष्मीनारायणन का निर्देश और 31 अगस्त की तारीख
सभी पक्षों की प्रारंभिक दलीलों को सुनने के बाद जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायणन ने मद्रास हाईकोर्ट की रजिस्ट्री को निर्देश दिया है कि मुख्यमंत्री विजय द्वारा दाखिल किए गए 'रिजेक्ट द प्लेंट' आवेदन को औपचारिक रूप से नंबर आवंटित किया जाए। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 31 अगस्त की तारीख तय की है, जब इस आवेदन को आधिकारिक केस सूची में शामिल किया जाएगा। 31 अगस्त को होने वाली यह सुनवाई इस कानूनी विवाद का भविष्य तय करेगी। यदि मद्रास हाईकोर्ट विजय के आवेदन को स्वीकार कर लेता है, तो डीएमके उम्मीदवार की चुनाव याचिका शुरुआती स्तर पर ही रद्द हो जाएगी। इसके विपरीत, यदि अदालत याचिका खारिज करने से इनकार करती है, तभी इस मामले में आगे गवाही और विस्तृत विचार-विमर्श का चरण शुरू होगा।

## इसका आप पर असर
इस कानूनी लड़ाई का सीधा असर तमिलनाडु के प्रशासनिक माहौल और राजनीतिक जवाबदेही पर पड़ेगा।

- **भारत में:** चुनावी याचिकाओं के निपटारे और जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 100 के दायरे को लेकर देश भर के कानूनी विशेषज्ञों और राजनीतिक दलों की नजर इस फैसले पर रहेगी। यह मामला आचार संहिता उल्लंघन और चुनाव रद्द करने के बीच के अंतर को स्पष्ट करेगा।
- **तमिलनाडु में:** मद्रास हाईकोर्ट का फैसला राज्य सरकार की स्थिरता और मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के राजनीतिक भविष्य की दिशा तय करेगा। यदि याचिका खारिज होती है तो विजय राहत की सांस लेंगे, जबकि सुनवाई आगे बढ़ने पर राज्य में राजनीतिक खींचतान बढ़ सकती है।

## सवाल-जवाब

### 1. मद्रास हाईकोर्ट में मुख्यमंत्री विजय के खिलाफ याचिका किसने दायर की है?
यह याचिका डीएमके के प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार एस. इनिगो इरुदयराज ने दायर की है, जिसमें विजय की चुनावी जीत को चुनौती दी गई है।

### 2. मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने अदालत में क्या आवेदन दाखिल किया है?
विजय की ओर से उनके वकीलों ने 'रिजेक्ट द प्लेंट' का आवेदन दाखिल कर याचिका को शुरुआती स्तर पर ही खारिज करने की मांग की है।

### 3. याचिका में विजय पर क्या-क्या आरोप लगाए गए हैं?
याचिका में चुनाव प्रचार में बच्चों की कथित भागीदारी, निर्धारित सीमा से अधिक चुनावी खर्च और धार्मिक भावनाओं के इस्तेमाल के आरोप शामिल हैं।

### 4. मामले की अगली सुनवाई किस तारीख को तय की गई है?
जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायणन ने इस आवेदन की अगली औपचारिक सुनवाई 31 अगस्त को तय की है।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._