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  "title": "महाराष्ट्र: विद्यार्थियों पर फर्जी ड्रग्स केस लादने की धमकी देने वाला पुलिसकर्मी निलंबित, कांग्रेस ने बताया 'खाकी में गुंडागर्दी'",
  "summary": "महाराष्ट्र में एक पुलिस ड्राइवर द्वारा छात्रों को झूठे मादक पदार्थ मामलों में फंसाने की धमकी देने का वीडियो वायरल होने के बाद उसे ड्यूटी से हटा दिया गया है। विपक्षी दलों ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे लोकतंत्र पर सीधा हमला करार दिया है।",
  "content": "महाराष्ट्र में विरोध कर रहे विद्यार्थियों को फर्जी मादक पदार्थ मामलों में फंसाने की कथित धमकी देने वाले एक पुलिस ड्राइवर पर कड़ी गाज गिरी है। सोशल मीडिया पर एक विवादित वीडियो तेजी से फैलने के बाद राज्य सरकार ने कड़ा कदम उठाते हुए उस पुलिसकर्मी को तत्काल प्रभाव से ड्यूटी से हटा दिया है। इस फुटेज ने राज्य में पहले से चल रहे तनाव को और बढ़ा दिया है, जिसके चलते सत्ताधारी गठबंधन और विपक्षी दलों के बीच पुलिस के रवैये तथा लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर तीखी राजनीतिक बहस छिड़ गई है।\n\nसरकार ने दिया सख्त कार्रवाई का भरोसा\n\nइस वायरल क्लिप पर बढ़ते विवाद के बीच एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के नेता और गृह राज्य मंत्री योगेश कदम ने स्पष्ट किया कि संबंधित कॉन्स्टेबल का आचरण पूरी तरह से अस्वीकार्य था। हालात को संभालते हुए योगेश कदम ने जनता को आश्वस्त किया कि राज्य प्रशासन छात्रों से जुड़े मुद्दों पर बेहद संवेदनशील है और इसी के तहत दोषी अधिकारी के खिलाफ दंडात्मक कदम उठाए गए हैं। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब राज्य में स्थिति पहले ही तनावपूर्ण बनी हुई है। बुधवार तक पूरे महाराष्ट्र में कम से कम 90 अलग-अलग स्थानों पर विद्यार्थियों द्वारा बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किए गए हैं। इसके अलावा, वंचित बहुजन अघाड़ी (वीबीए) ने भी छात्रों की मांगों के समर्थन में राज्य के कई क्षेत्रों में बंद का आह्वान किया, जिसका जनजीवन पर व्यापक असर देखने को मिला।\n\nनिगरानी के आरोपों का खंडन और सुरक्षा चिंताएं\n\nजैसे-जैसे विरोध प्रदर्शनों का दायरा बढ़ रहा है, प्रशासन ने इन जमावड़ों की प्रकृति को लेकर अपनी चिंताएं भी जाहिर की हैं। मंत्री योगेश कदम ने आशंका जताई कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों की आड़ में कुछ असामाजिक तत्व भी छात्रों के आंदोलन में घुसपैठ कर सकते हैं। इसके परिणामस्वरूप, राज्य सरकार और पुलिस का साइबर सेल सोशल मीडिया की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रख रहा है ताकि कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने न पाए। कार्यकर्ताओं के बीच फैल रही अफवाहों और डर के बीच, योगेश कदम ने उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया जिनमें कहा जा रहा था कि सरकार प्रदर्शनकारियों को डिजिटल नोटिस भेज रही है या उनकी लोकेशन को ट्रैक करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि किसी भी व्यक्ति की कोई अवैध निगरानी नहीं की जा रही है, और कानूनी प्रक्रियाएं केवल उन्हीं लोगों तक सीमित हैं जिनके नाम औपचारिक रूप से एफआईआर में दर्ज हैं।\n\nविपक्ष ने 'खाकी में गुंडागर्दी' को लेकर बोला हमला\n\nविपक्षी दल कांग्रेस ने गुरुवार को इस वीडियो को लेकर सरकार पर जोरदार हमला बोला और इस बेहद चिंताजनक फुटेज की निष्पक्ष व गहन जांच की मांग उठाई। इस वायरल क्लिप में कथित तौर पर मुंबई पुलिस की गाड़ी चलाने वाला एक कर्मी छात्रों को खुलेआम चेतावनी देता दिख रहा है कि यदि उन्होंने चल रहे आंदोलनों में हिस्सा लिया, तो उन पर 50 ग्राम अवैध मादक पदार्थ डालकर केस बना दिया जाएगा, जिससे उन्हें जिंदगी भर जेल की सलाखों के पीछे रहना पड़ेगा। मुंबई कांग्रेस ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पुलिस के इस रवैये की कड़ी आलोचना की। पार्टी ने अपने बयान में कहा, \"यदि यह सच है तो यह केवल छात्रों को डराने की कोशिश नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा हमला है।\" कांग्रेस का कहना है कि जवाबदेही मांगने वालों को कानून के रक्षकों द्वारा इस तरह की गंभीर धमकियां नहीं दी जानी चाहिए।\n\nमादक पदार्थों के स्रोत की जांच की मांग\n\nकांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेताओं ने इस मुद्दे को और भी जोर-शोर से उठाया और विरोध के सुरों को दबाने के लिए अपनाए गए इन कथित हथकंडों पर गहरी हैरानी जताई। महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने एक्स पर पोस्ट करते हुए इन आरोपों की गंभीरता को रेखांकित किया और युवाओं की जेब में 50 ग्राम मादक पदार्थ डालने वाली विशेष धमकी का जिक्र किया। इसी तरह, कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने भी प्रशासन पर तीखा प्रहार किया। इस पूरी घटना को 'खाकी में गुंडागर्दी' का खुला प्रदर्शन बताते हुए विजय वडेट्टीवार ने तर्क दिया कि पुलिस का ऐसा दमनकारी व्यवहार ब्रिटिश औपनिवेशिक काल के दौरान हुए अत्याचारों से भी कहीं अधिक बदतर है। एक कदम और आगे बढ़ते हुए, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ने औपचारिक रूप से एक जांच की मांग की, ताकि यह पता लगाया जा सके कि पुलिसकर्मी प्रदर्शनकारियों पर जो मादक पदार्थ डालने की साजिश रच रहे थे, वे असल में उसे लाते कहां से। उन्होंने राज्य के कानून प्रवर्तन तंत्र की ईमानदारी पर गंभीर सवाल खड़े किए।\n\nइसका आप पर असर\n• पूरे भारत में: यह घटना शांतिपूर्ण नागरिक विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा की जाने वाली ज्यादतियों को लेकर चिंताओं को उजागर करती है।\n• महाराष्ट्र में: राज्य में होने वाले आंदोलनों में हिस्सा लेने वाले छात्रों और नागरिकों को अब अधिक तनावपूर्ण माहौल का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि पुलिस की कार्यप्रणाली पर राजनीतिक निगरानी बढ़ गई है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. महाराष्ट्र के पुलिस ड्राइवर को ड्यूटी से क्यों हटाया गया?\nएक वायरल वीडियो में उसे छात्र प्रदर्शनकारियों को फर्जी ड्रग्स केस में फंसाने की धमकी देते हुए देखा गया था, जिसके बाद सरकार ने उसे तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया।\n\n2. वायरल वीडियो में कथित तौर पर क्या कहा गया था?\nवीडियो में मुंबई पुलिस का एक ड्राइवर छात्रों को यह चेतावनी देता दिख रहा है कि अगर वे प्रदर्शन में गए तो उनकी जेब में 50 ग्राम ड्रग्स डालकर उन्हें उम्रकैद के लिए जेल भेज दिया जाएगा।\n\n3. मंत्री योगेश कदम ने इस घटना पर क्या प्रतिक्रिया दी?\nमंत्री योगेश कदम ने पुलिसकर्मी के व्यवहार को पूरी तरह गलत बताया, उसके निलंबन की पुष्टि की और प्रदर्शनकारियों की लोकेशन ट्रैक करने के आरोपों से इनकार किया।\n\n4. कांग्रेस पार्टी ने इस वीडियो को लेकर क्या मांग की?\nकांग्रेस ने इसे \"खाकी में गुंडागर्दी\" और लोकतंत्र पर हमला बताते हुए इस बात की जांच की मांग की कि पुलिस प्रदर्शनकारियों पर डालने के लिए ड्रग्स कहां से लाने वाली थी।",
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  "category": "राजनीति",
  "publishedAt": "2026-07-23",
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    "महाराष्ट्र",
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