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  "type": "article",
  "title": "महिला सांसदों से विवाद के बाद तृणमूल नेता कल्याण बनर्जी मानसून सत्र से बाहर",
  "summary": "लोकसभा में बागी महिला नेताओं के साथ तीखी नोकझोंक और असंसदीय भाषा के इस्तेमाल के आरोप में टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी को वर्तमान सत्र की शेष कार्यवाही से निलंबित कर दिया गया है।",
  "content": "लोकसभा की कार्यवाही के दौरान बुधवार को एक बड़ा हंगामा देखने को मिला जिसके परिणामस्वरूप तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कल्याण बनर्जी पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। महिला राजनेताओं के प्रति अनुचित व्यवहार और अमर्यादित भाषा के प्रयोग के गंभीर आरोपों के चलते उन्हें मौजूदा मानसून सत्र की शेष अवधि के लिए सदन से पूरी तरह से निलंबित कर दिया गया है।\n\nनिलंबन की यह सख्त कार्रवाई निचले सदन के भीतर हुए एक भारी हंगामे के बाद की गई। विपक्ष के भारी शोरगुल के कारण जब सदन की कार्यवाही को कुछ समय के लिए रोका गया था, तभी अंदर एक तीखी बहस छिड़ गई। इस विवाद के केंद्र में बनर्जी और वे तीन महिला सांसद थीं जिन्होंने हाल ही में अपना राजनीतिक पाला बदल लिया था।\n\nबागी सांसदों के साथ तीखी नोकझोंक\nइस गंभीर विवाद में मुख्य रूप से मिताली बाग, शताब्दी रॉय और काकोली घोष दस्तीदार शामिल थीं। ये तीनों नेता पहले तृणमूल कांग्रेस का ही हिस्सा हुआ करती थीं, लेकिन हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच वे नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया में शामिल हो गई हैं। सदन की कार्यवाही रुकने के ठीक बाद हालात बेकाबू हो गए और पुरानी राजनीतिक दुश्मनी सतह पर आ गई।\n\nटीएमसी के दिग्गज नेता इन बागी सांसदों के साथ बुरी तरह उलझ गए। शिकायतों के अनुसार यह जुबानी जंग बेहद व्यक्तिगत स्तर पर पहुंच गई थी, जिसमें बनर्जी ने कथित तौर पर एक विद्रोही नेता को \"चोर\" तक कह डाला। इस अचानक हुए विवाद की असली जड़ क्या थी, यह तुरंत स्पष्ट नहीं हो सका। हालांकि स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई थी कि विपक्ष के कई अन्य नेताओं को बीच में आकर मामला शांत कराना पड़ा।\n\nजब कुछ साथी सदस्यों ने बनर्जी से घटना के बारे में पूछा कि आखिर वहां क्या हुआ था, तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया और वे बिना कुछ कहे सीधे लोकसभा कक्ष से बाहर निकल गए।\n\nशिकायत के बाद स्पीकर का सख्त एक्शन\nघटना के बाद नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया की महिला सांसदों ने मामले को गंभीरता से लिया। मिताली बाग, काकोली घोष दस्तीदार और उनके दल के अन्य सदस्य सीधे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के कक्ष में पहुंचे और इस दुर्व्यवहार की कड़ी शिकायत की। अध्यक्ष ने सभी पीड़ित सदस्यों की बात सुनी और उनसे पूरी घटना का लिखित ब्योरा जमा करने को कहा।\n\nदो बार के स्थगन के बाद जब दोपहर दो बजे सदन का कामकाज दोबारा शुरू हुआ तो सबसे पहले इसी मुद्दे को उठाया गया। पीठासीन सभापति कृष्ण प्रसाद तेन्नेटी ने सभी सदस्यों को सूचित किया कि अध्यक्ष के कार्यालय को महिला सांसदों के खिलाफ इस्तेमाल की गई असंसदीय टिप्पणियों की आधिकारिक लिखित शिकायत मिल चुकी है।\n\nपीठासीन अधिकारी ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा, \"यह सदन की गरिमा के विरुद्ध है। सांसद का यह व्यवहार बहुत आपत्तिजनक है।\" इसके तुरंत बाद संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने एक औपचारिक प्रस्ताव पेश किया। इस प्रस्ताव में अमर्यादित आचरण करने वाले सांसद को वर्तमान सत्र के बचे हुए पूरे समय के लिए निलंबित करने की मांग की गई थी।\n\nसदन में मौजूद सदस्यों ने ध्वनिमत से इस प्रस्ताव का भरपूर समर्थन किया। प्रस्ताव पारित होते ही सभापति तेन्नेटी ने निलंबित नेता को तुरंत सदन के बाहर जाने का स्पष्ट आदेश दे दिया।\n\nबंगाल की राजनीति में बढ़ती दरार\nसंसद के भीतर हुआ यह हाई वोल्टेज ड्रामा पश्चिम बंगाल में चल रही भारी राजनीतिक खींचतान का सीधा नतीजा माना जा रहा है। राज्य के हालिया विधानसभा चुनावों में मिली हार के बाद से ही तृणमूल कांग्रेस गहरे आतंरिक संकट से गुजर रही है। पार्टी नेतृत्व से नाराज होकर लगभग बीस सांसदों ने बगावत का झंडा बुलंद कर दिया था और वे सभी औपचारिक रूप से नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया का हिस्सा बन गए थे।\n\nये सभी बागी नेता अब लोकसभा में अपनी पुरानी पार्टी से बिल्कुल अलग बैठते हैं। उन्होंने खुले मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार को अपना पूर्ण समर्थन देने का भी ऐलान किया है।\n\nदूसरी तरफ कल्याण बनर्जी अब भी ममता बनर्जी और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के सबसे वफादार तथा मुखर नेताओं में गिने जाते हैं। यही वजह है कि पुराने साथियों और पार्टी के वफादारों के बीच इस तरह की राजनीतिक कड़वाहट अब संसद के गलियारों में भी साफ नजर आने लगी है।\n\nइसका आप पर असर\n• राजनीतिक प्रभाव: इस निलंबन से मौजूदा मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस की ताकत और विपक्ष की आवाज कमजोर होगी।\n• संसदीय मर्यादा: यह कार्रवाई स्पष्ट करती है कि सदन के भीतर साथी सदस्यों के साथ अभद्र भाषा या व्यक्तिगत हमलों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. कल्याण बनर्जी को लोकसभा से क्यों निलंबित किया गया?\nउन्हें लोकसभा में महिला सांसदों के खिलाफ असंसदीय भाषा का उपयोग करने और उनके साथ दुर्व्यवहार करने के आरोप में निलंबित किया गया है।\n\n2. उनका किन नेताओं के साथ विवाद हुआ था?\nउनका विवाद एनसीपीआई की महिला सांसदों मिताली बाग, शताब्दी रॉय और काकोली घोष दस्तीदार के साथ हुआ था, जो पहले टीएमसी में थीं।\n\n3. कल्याण बनर्जी को कितने समय के लिए निलंबित किया गया है?\nउन्हें मौजूदा मानसून सत्र की शेष अवधि तक के लिए लोकसभा की कार्यवाही से बाहर कर दिया गया है।\n\n4. एनसीपीआई की महिला सांसदों ने किससे शिकायत की?\nउन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के कक्ष में जाकर घटना की शिकायत की, जिसके बाद अध्यक्ष ने उनसे पूरी घटना का लिखित ब्योरा मांगा।",
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  "category": "राजनीति",
  "publishedAt": "2026-07-22",
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    "लोकसभा मानसून सत्र",
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    "पश्चिम बंगाल राजनीति"
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