मानसून सत्र का आखिरी दौर: चार विधेयकों पर टिकी नजरें, बड़े सुधारों पर सस्पेंस संसद के मानसून सत्र के अब केवल चार दिन शेष हैं, लेकिन गतिरोध के चलते महिला आरक्षण, परिसीमन और एफसीआरए जैसे अहम विधेयकों की स्थिति पर अनिश्चितता बनी हुई है। संसद के मौजूदा मानसून सत्र के समापन में अब चंद कार्य दिवस ही बाकी बचे हैं, लेकिन संसद के भीतर चल रहे गतिरोध के कारण कई अहम विधायी प्रस्तावों पर धुंध छाई हुई है। महिला आरक्षण, परिसीमन और विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम यानी एफसीआरए से जुड़े प्रावधानों को लेकर अभी भी स्पष्टता का अभाव है। हालांकि इस बीच सरकार ने सत्र के अंतिम चरण में कुछ अन्य विधेयकों को सदन की कार्यसूची में जगह दी है, जिन पर चर्चा और पारित कराने की प्रक्रिया पूरी की जानी है। लोकसभा की कार्यसूची में शामिल नए विधेयक संसदीय गतिविधियों के तहत जारी एजेंडे के अनुसार, आगामी बैठकों में जिन चार मुख्य विधेयकों को पटल पर रखा जाना है, उनमें न्यायाधिकरण सुधार विधेयक, 2026 और खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 प्रमुख रूप से शामिल हैं। इसके अलावा केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 को भी सूचीबद्ध किया गया है। इन प्रस्तावों को लेकर सदन के भीतर और बाहर दोनों जगह राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है क्योंकि सत्र समाप्ति की समय सीमा नजदीक आ रही है। प्रमुख विधायी सुधारों पर असमंजस सत्र के शुरुआती दिनों से ही कई बड़े सुधारों और नीतिगत बदलावों को लेकर चर्चाएं गर्म थीं। राजनीतिक हलकों में इस बात की लगातार अटकलें लगाई जा रही थीं कि क्या इस अवधि में परिसीमन प्रक्रिया और महिला आरक्षण जैसे संवेदनशील विषयों पर कोई ठोस कदम उठाया जाएगा। साथ ही एफसीआरए संशोधन से जुड़ी चर्चाओं ने भी सियासी गलियारों में सुगबुगाहट बढ़ा दी थी। हालांकि मौजूदा विधायी एजेंडे में सीधे तौर पर इन बड़े मुद्दों के शामिल न होने से कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। संसदीय कामकाज और गतिरोध की स्थिति सत्र के दौरान विभिन्न मुद्दों पर पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोक देखने को मिली है, जिसके चलते निर्धारित कामकाज कई बार बाधित हुआ है। समय की कमी और बचे हुए सीमित दिनों को देखते हुए विधायी कार्यों को तेजी से निपटाने का दबाव सरकार पर है। राजनीतिक दलों द्वारा अपने सदस्यों की सदन में उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए पहले ही व्हिप जारी किए जा चुके हैं ताकि अंतिम क्षणों में संख्या बल को लेकर किसी प्रकार की परेशानी न हो। इसका आप पर असर भारत में: संसद में अटके विधेयकों और नीतिगत बदलावों का असर देश के विधायी ढांचे, सहकारी विकास और प्रशासनिक सुधारों पर सीधा पड़ता है। सवाल-जवाब 1. मानसून सत्र में कितने कार्य दिवस बचे हैं? संसद के मानसून सत्र के अब केवल चार कार्य दिवस शेष बचे हैं। 2. लोकसभा की कार्यसूची में कौन से नए विधेयक शामिल हैं? कार्यसूची में न्यायाधिकरण सुधार विधेयक 2026, खान एवं खनिज संशोधन विधेयक 2026, केरल नाम परिवर्तन विधेयक 2026 और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम संशोधन विधेयक 2026 शामिल हैं। 3. किन प्रमुख मुद्दों पर अनिश्चितता बनी हुई है? महिला आरक्षण, परिसीमन और विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम यानी एफसीआरए से जुड़े विधेयकों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। 4. सत्र के दौरान किस प्रकार की स्थिति देखने को मिली है? सत्र के दौरान विभिन्न मुद्दों पर गतिरोध और राजनीतिक दलों के बीच तीखी बहस देखने को मिली है। https://trendkia.com/politics/manasuna-satra-ka-akhiri-daura-chara-vidheyakon-para-tiki-najaren-bare-sudharon-para-saspensa-15515 TrendKia — Har trend, sabse pehle.