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  "type": "article",
  "title": "मानसून सत्र से पहले शरद पवार के तेवर में बदलाव, परिसीमन बिल पर मिल सकता है मोदी सरकार का साथ",
  "summary": "संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले शरद पवार गुट के तेवर बदलते नजर आ रहे हैं. सुप्रिया सुले ने परिसीमन बिल पर 50 प्रतिशत फॉर्मूले की शर्त के साथ समर्थन के संकेत दिए हैं, जबकि महाराष्ट्र से लेकर दिल्ली तक सियासी मुलाकातों का दौर तेज हो गया है.",
  "content": "संसद का मानसून सत्र नजदीक आते ही देश की सियासत में हलचल तेज हो गई है. पीएम नरेंद्र मोदी अपने विदेशी दौरे पूरे कर लौट चुके हैं, नेता विपक्ष राहुल गांधी भी विदेश यात्रा के बाद वापस आ चुके हैं और 21 जुलाई से मानसून सत्र शुरू होने जा रहा है. इसी बीच बड़ी खबर यह है कि इंडिया गठबंधन का सबसे अनुभवी चेहरा माने जाने वाले शरद पवार का धड़ा राहुल गांधी का साथ छोड़कर नरेंद्र मोदी के दो अहम बिलों का समर्थन करने के मूड में दिख रहा है.\n\nतीन महीने पहले अटके दो बिल फिर संसद में\nपीएम मोदी इस मानसून सत्र के लिए बड़ी तैयारी कर चुके हैं. जिन दो बिलों, महिला आरक्षण बिल और परिसीमन बिल को इंडिया गठबंधन ने मिलकर तीन महीने पहले रोक दिया था, सरकार उन्हें फिर से संसद में लाने की तैयारी में है. 21 जुलाई से शुरू हो रहे मानसून सत्र में यह मुद्दा एक बार फिर टकराव की वजह बन सकता है, क्योंकि इंडिया गठबंधन इन बिलों को रोकने के लिए फिर पूरी ताकत लगाने का इरादा रखता है. लेकिन इस टकराव से पहले ही राहुल गांधी को एक बड़ा झटका लगता दिख रहा है.\n\nशरद पवार का साथ छूटने के आसार\nइंडिया गठबंधन में सबसे अनुभवी नेता माने जाने वाले शरद पवार इस मुद्दे पर राहुल गांधी का साथ छोड़कर नरेंद्र मोदी के बिल को समर्थन दे सकते हैं. यही वजह है कि रातोंरात यह चर्चा शुरू हो गई कि शरद पवार टीम मोदी का हिस्सा बनने को तैयार हो गए हैं. बीते दो साल से जो लोग यह माहौल बनाते रहे कि 2024 के नतीजों के बाद नरेंद्र मोदी कमजोर पड़ गए हैं और उनकी कुर्सी कभी भी जा सकती है, आज उन्हीं की पार्टियों का हाल यह हो गया है कि उनके अपने वजूद पर सवाल खड़े होने लगे हैं, जबकि पीएम मोदी ने अपने मिशन के लिए इतनी ताकत झोंक रखी है कि बड़े बड़े दिग्गज भी हिलते नजर आ रहे हैं.\n\nसुप्रिया सुले का बयान, इंडिया गठबंधन में हड़कंप\nशरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले ने परिसीमन बिल को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिसने पूरे इंडिया गठबंधन में हलचल मचा दी है. सुप्रिया सुले ने परिसीमन बिल का सीधे तौर पर विरोध नहीं किया, बल्कि शर्तों के साथ समर्थन के संकेत दिए. उन्होंने कहा कि अगर सरकार परिसीमन बिल में 50 प्रतिशत वाला फॉर्मूला लेकर आती है, तो उनकी पार्टी इस पर विचार करेगी.\n\nयह बयान इसलिए अहम है क्योंकि शरद पवार की पार्टी ने पिछली बार परिसीमन बिल के विरोध में वोट किया था. अब सुप्रिया सुले का यह कहना कि पार्टी इस पर विचार करेगी, इसे समर्थन की दिशा में बढ़ता कदम माना जा रहा है. दरअसल जिस 50 प्रतिशत फॉर्मूले की बात सुप्रिया सुले कर रही हैं, वही फॉर्मूला पिछली बार मोदी सरकार परिसीमन बिल में लेकर आई थी. इस फॉर्मूले के तहत प्रावधान यह था कि हर राज्य में आबादी के हिसाब से सीटें नहीं बढ़ाई जाएंगी, बल्कि सीधे लोकसभा की सीटों में 50 प्रतिशत का इजाफा किया जाएगा.\n\nसुप्रिया सुले ने यह भी संकेत दिया कि सरकार 50 प्रतिशत वाली बात लिखित में दे. गौर करने वाली बात यह है कि अमित शाह पहले ही संसद में विपक्ष से कह चुके हैं कि सरकार यह बात लिखित में देने को तैयार है. यानी सुप्रिया सुले जिस शर्त की बात कर रही हैं, उसके लिए सरकार पहले से ही तैयार बैठी है. अब फैसला शरद पवार की पार्टी को लेना है.\n\nमुंबई से दिल्ली तक मुलाकातों का दौर\nपरिसीमन बिल पर शरद पवार गुट के नरम पड़ते रुख के पीछे एक रात पहले हुई कई अहम मुलाकातें बताई जा रही हैं. बीती रात शरद पवार गुट के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस से मिले. इसके अलावा सत्ता में शामिल एनसीपी के नेता प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे ने भी सीएम फडणवीस से अलग से मुलाकात की. यानी सीएम आवास पर एनसीपी के दोनों गुटों के नेता पहुंचे और मुख्यमंत्री से बातचीत की.\n\nजिस वक्त मुंबई में यह मुलाकातें चल रही थीं, ठीक उसी समय दिल्ली में महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे अमित शाह से मिल रहे थे. अमित शाह और एकनाथ शिंदे की इस मुलाकात में उद्धव ठाकरे गुट से बागी होकर आए 6 सांसद भी मौजूद रहे. इस मुलाकात में इन बागी सांसदों को उनके राजनीतिक भविष्य, पार्टी बदलने पर मिलने वाली कानूनी मदद और उनकी सीट को लेकर आश्वासन दिया गया.\n\nयानी एक ही समय पर दिल्ली और मुंबई दोनों जगह सियासी मुलाकातों का दौर चल रहा था, और उसी दिन सुप्रिया सुले ने परिसीमन बिल पर बड़ा बयान दे दिया. अमित शाह से मुलाकात के बाद एकनाथ शिंदे ने भी इशारों में यह जता दिया कि मानसून सत्र में कुछ बड़ा होने वाला है.\n\nसुप्रिया सुले की सफाई\nहालांकि अपने बयान पर सुप्रिया सुले ने सफाई भी दी है. उनका कहना है कि मीडिया में परिसीमन बिल को लेकर उनकी पार्टी के स्टैंड को लेकर जो अंदाजे लगाए जा रहे हैं, वे गलत हैं. उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर कोई भी फैसला पार्टी के भीतर गहन चर्चा और गठबंधन के साथियों से बातचीत के बाद ही लिया जाएगा. सुप्रिया सुले ने यह भी कहा कि सरकार ने अभी तक कोई संशोधित परिसीमन बिल संसद में पेश ही नहीं किया है, इसलिए इस पर अभी से अंदाजा लगाना जल्दबाजी होगी.\n\nइंडिया गठबंधन अपनी ही उलझनों में फंसा\nएक तरफ शरद पवार गुट के तेवर बदलते नजर आ रहे हैं, तो दूसरी तरफ इंडिया गठबंधन के भीतर भी कई मोर्चों पर खींचतान चल रही है. राहुल गांधी इन दिनों पंजाब कांग्रेस के भीतर के विवाद को सुलझाने में उलझे हुए हैं. ममता बनर्जी के खिलाफ भी बगावत की एक नई खेप सामने आई है. उद्धव ठाकरे से बागी होकर आए सांसद लगातार अमित शाह से मुलाकात कर रहे हैं. इसके अलावा कांग्रेस को यह डर भी सता रहा है कि कहीं डीएमके भी नरेंद्र मोदी के साथ न चला जाए.\n\nदूसरी ओर इंडिया गठबंधन संसद में चढ़ावा चोरी, पेपर लीक और इथेनॉल जैसे मुद्दों पर मोदी सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है, लेकिन शरद पवार गुट के रुख ने विपक्ष की इस रणनीति के लिए नई चुनौती खड़ी कर दी है.\n\nसंसद के साथ साथ यूपी और पंजाब पर भी नजर\nयह सियासी खेल सिर्फ संसद तक सीमित नहीं है. उत्तर प्रदेश और पंजाब जैसे अहम राज्यों में होने वाले चुनावों को लेकर भी हलचल तेज है. उत्तर प्रदेश को लेकर एक दिन पहले ही अमित शाह और सीएम योगी के बीच मुलाकात हुई है, जबकि पीएम मोदी खुद पंजाब दौरे पर जाने वाले हैं. यानी संसद से लेकर राज्यों तक, हर मोर्चे पर रणनीति बनाई जा रही है, जबकि इंडिया गठबंधन के घटक दल अपने ही आंतरिक झगड़ों में उलझे नजर आ रहे हैं.\n\nकुल मिलाकर मानसून सत्र शुरू होने से पहले ही देश की सियासत में नया अध्याय खुलता दिख रहा है. मुंबई से दिल्ली तक हुई मुलाकातों और सुप्रिया सुले के बयान के बाद यह साफ है कि परिसीमन बिल और महिला आरक्षण बिल को लेकर संसद में इस बार माहौल पहले से अलग रहने वाला है.\n\nसत्र से पहले किन बातों पर रहेगी नजर\nमानसून सत्र नजदीक आने के साथ इस पूरी कहानी के कई पहलुओं पर नजर बनी रहेगी.\n\n• महिला आरक्षण बिल और परिसीमन बिल, दोनों तीन महीने पहले इंडिया गठबंधन द्वारा रोके जाने के बाद अब फिर संसद में लौटने की तैयारी में हैं.\n• सुप्रिया सुले ने अपनी पार्टी के संभावित समर्थन को 50 प्रतिशत वाले सीट बढ़ोतरी फॉर्मूले से जोड़ा है, यही फॉर्मूला मोदी सरकार पहले भी परिसीमन बिल में ला चुकी है.\n• अमित शाह पहले ही संसद में कह चुके हैं कि सरकार 50 प्रतिशत वाली बात लिखित में देने को तैयार है.\n• दिल्ली में अमित शाह और एकनाथ शिंदे की मुलाकात के दौरान उद्धव ठाकरे गुट से बागी हुए 6 सांसद भी मौजूद थे, जिन्हें राजनीतिक भविष्य, कानूनी मदद और सीट को लेकर आश्वासन दिया गया.\n• संसद के अलावा अमित शाह सीएम योगी से मुलाकात कर चुके हैं और पीएम मोदी पंजाब दौरे की तैयारी में हैं, ये दोनों ही राज्य आने वाले चुनावों की दहलीज पर खड़े हैं.\n\nशरद पवार गुट आखिरकार इन बिलों का समर्थन करता है या सुप्रिया सुले की सफाई ही अंतिम स्टैंड बनकर रह जाती है, यह आने वाले दिनों में साफ होगा, लेकिन जिस तरह की सियासी हलचल अभी से शुरू हो चुकी है, उससे साफ है कि मानसून सत्र का माहौल तीन महीने पहले इन बिलों को रोकने वाले माहौल से बिल्कुल अलग रहने वाला है.\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: अगर संसद में महिला आरक्षण बिल और परिसीमन बिल पर सहमति बनती है, तो आने वाले वर्षों में लोकसभा सीटों की संख्या और महिलाओं के प्रतिनिधित्व को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है.\n• महाराष्ट्र में: एनसीपी और शिवसेना गुटों के बीच चल रही मुलाकातों से राज्य की सत्ता समीकरण और आगामी चुनावों में गठबंधन की तस्वीर बदल सकती है.\n\nसवाल-जवाब\n\n1. मानसून सत्र कब शुरू हो रहा है?\nमानसून सत्र 21 जुलाई से शुरू होने जा रहा है.\n\n2. पीएम मोदी के कौन से दो बिल फिर संसद में लाए जा सकते हैं?\nमहिला आरक्षण बिल और परिसीमन बिल, जिन्हें इंडिया गठबंधन ने तीन महीने पहले रोक दिया था.\n\n3. सुप्रिया सुले ने परिसीमन बिल पर क्या कहा है?\nउन्होंने कहा कि अगर सरकार बिल में 50 प्रतिशत वाला फॉर्मूला लाती है, तो पार्टी इस पर विचार करेगी.\n\n4. परिसीमन बिल में 50 प्रतिशत फॉर्मूला क्या है?\nइसके तहत राज्यों में आबादी के आधार पर सीटें नहीं बढ़ेंगी, बल्कि सीधे लोकसभा सीटों में 50 प्रतिशत का इजाफा होगा.\n\n5. अमित शाह और एकनाथ शिंदे की दिल्ली मुलाकात में कौन मौजूद था?\nउद्धव ठाकरे गुट से बागी होकर आए 6 सांसद इस मुलाकात में मौजूद थे.\n\n6. सुप्रिया सुले ने अपने बयान पर बाद में क्या सफाई दी?\nउन्होंने कहा कि मीडिया के अंदाजे गलत हैं और कोई फैसला पार्टी के भीतर चर्चा व गठबंधन से बातचीत के बाद ही लिया जाएगा, क्योंकि सरकार ने अभी संशोधित बिल पेश ही नहीं किया है.\n\n7. कांग्रेस को किस सहयोगी दल के छिटकने की चिंता सता रही है?\nकांग्रेस को डर है कि डीएमके भी नरेंद्र मोदी के साथ जा सकती है.\n\n8. उत्तर प्रदेश और पंजाब का इस पूरे मामले से क्या संबंध है?\nअमित शाह ने यूपी को लेकर सीएम योगी से मुलाकात की है और पीएम मोदी पंजाब दौरे पर जाने वाले हैं, दोनों राज्यों में जल्द चुनाव होने हैं.\n\n9. इंडिया गठबंधन संसद में मोदी सरकार को किन मुद्दों पर घेरने की तैयारी में है?\nचढ़ावा चोरी, पेपर लीक और इथेनॉल जैसे मुद्दों पर घेरने की रणनीति बनाई जा रही है.",
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  "category": "राजनीति",
  "publishedAt": "2026-07-15",
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