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  "title": "मराठा आरक्षण आंदोलन: 11वें दिन बिगड़ी जरांगे की सेहत, आधी रात डॉक्टरों ने चढ़ाई सलाइन",
  "summary": "जालना में आमरण अनशन के 11वें दिन मनोज जरांगे पाटील की तबीयत बिगड़ने पर आधी रात डॉक्टरों ने सलाइन चढ़ाई, मंत्री उदय सामंत और विधायक प्रसाद लाड के आश्वासन के बाद वे इलाज के लिए राजी हुए।",
  "content": "महाराष्ट्र के जालना जिले में मराठा आरक्षण की मांग को लेकर अनशन पर बैठे मनोज जरांगे पाटील की तबीयत सोमवार-मंगलवार की दरमियानी रात अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद डॉक्टरों की टीम को आधी रात में उनके पास पहुंचकर इलाज शुरू करना पड़ा। मंगलवार को उनके आमरण अनशन का 11वां दिन है और लगातार भूखे रहने की वजह से उनका शरीर कमजोर पड़ने लगा है।\n\nजांच में सामने आई शुगर लेवल में भारी गिरावट\nदेर रात जब डॉक्टरों ने मनोज जरांगे की जांच की तो पता चला कि लगातार अनशन के चलते उनके शरीर में शुगर का स्तर काफी नीचे गिर चुका है। इसी वजह से उन्हें बार-बार चक्कर आने की शिकायत भी हो रही थी। स्थिति को गंभीर देखते हुए डॉक्टरों ने बिना देर किए उन्हें सलाइन चढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी, ताकि शरीर में जरूरी तरल पदार्थ और पोषण पहुंचाया जा सके।\n\nमंत्री और विधायक के फोन कॉल के बाद माने जरांगे\nतबीयत बिगड़ने की खबर मिलते ही मंत्री उदय सामंत और विधायक प्रसाद लाड ने तुरंत मनोज जरांगे से फोन पर बात की। दोनों नेताओं ने उनसे इलाज कराने की अपील की और भरोसा दिलाया कि 8 सितंबर यानी आज से ही मराठा समाज से जुड़े सभी लंबित मुद्दों पर काम शुरू करके उन्हें सुलझाया जाएगा। इस आश्वासन के बाद मनोज जरांगे रात करीब ढाई बजे सलाइन लेने के लिए राजी हुए, जिसके बाद डॉक्टरों की टीम ने उन्हें सलाइन चढ़ाकर इलाज शुरू किया।\n\nआज अंतरवाली सराटी पहुंच सकता है सरकारी प्रतिनिधिमंडल\nबताया जा रहा है कि मंगलवार को राज्य सरकार का एक प्रतिनिधिमंडल अंतरवाली सराटी पहुंच सकता है, जहां मनोज जरांगे अनशन पर बैठे हैं। सरकार की ओर से मराठा आरक्षण से जुड़े मुद्दों पर बातचीत के जरिए हल निकालने की कोशिश जारी है। पिछले 11 दिनों से बिना अन्न-जल के अनशन करने की वजह से जरांगे की सेहत लगातार कमजोर होती जा रही है, जिसे लेकर उनके समर्थकों में चिंता का माहौल है। वहीं प्रशासन भी पूरी स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है।\n\nमराठा समाज की मांग क्या है\nमराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटील और उनके साथ आंदोलन कर रहे लोगों की मुख्य मांग है कि महाराष्ट्र में रहने वाले पूरे मराठा समुदाय को कुनबी मानते हुए ओबीसी कोटे में शामिल किया जाए। कुनबी महाराष्ट्र का एक कृषि आधारित समुदाय है, जिसे सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ा मानते हुए पहले से ही ओबीसी श्रेणी के तहत आरक्षण का फायदा मिलता है। जरांगे और उनके समर्थकों का तर्क है कि मराठा समाज के भी बड़े हिस्से की सामाजिक-आर्थिक स्थिति कुनबी समुदाय जैसी ही है, इसलिए उन्हें भी वही दर्जा दिया जाना चाहिए।\n\nपुराने फॉर्मूले पर उठ रहे सवाल\nइससे पहले भी जब मराठा आरक्षण को लेकर बड़ा विरोध प्रदर्शन हुआ था, तब सरकार ने हैदराबाद गजेटियर और निजाम कालीन दस्तावेजों के आधार पर एक रास्ता निकाला था। इसके तहत तय हुआ था कि जिन मराठा परिवारों के पास ऐतिहासिक तौर पर कुनबी वंश से जुड़े दस्तावेज या पुराने सबूत मिलेंगे, सिर्फ उन्हीं परिवारों को कुनबी जाति प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा। लेकिन अब मनोज जरांगे और उनके समर्थक बिना ऐसी शर्त के सभी मराठों को सीधे कुनबी मानने की मांग कर रहे हैं। महाराष्ट्र के मौजूदा ओबीसी और कुनबी संगठनों का कहना है कि अगर बिना उचित प्रमाण के सभी मराठों को सरसकट कुनबी दर्जा दे दिया गया, तो इससे उनके मौजूदा कोटे के हक पर सीधा असर पड़ेगा और उनका हिस्सा घट जाएगा।\n\nइसका आप पर असर\nमनोज जरांगे की अनशन के दौरान बिगड़ती तबीयत और सरकार से बातचीत की कोशिशें सीधे तौर पर आम आदमी की जेब पर असर नहीं डालतीं, लेकिन मराठा आरक्षण को लेकर आगे होने वाला कोई भी फैसला नौकरी और शिक्षा में आरक्षण की पूरी तस्वीर बदल सकता है।\n\n• भारत में: मराठा जैसी बड़ी और प्रभावशाली जातियों की आरक्षण मांगें दूसरे राज्यों के आंदोलनों को भी हवा दे सकती हैं। अगर महाराष्ट्र में कोई नया फॉर्मूला बनता है, तो जाट, पटेल जैसे अन्य समुदायों के आंदोलनकारी भी उसे मिसाल के तौर पर पेश कर सकते हैं।\n• महाराष्ट्र में: राज्य में नौकरी और कॉलेज दाखिले के लिए तैयारी कर रहे मराठा युवाओं का भविष्य इसी बातचीत के नतीजे पर टिका है। अगर उन्हें कुनबी दर्जा मिलता है, तो ओबीसी कोटे में प्रतिस्पर्धा और बढ़ेगी।\n• मौजूदा ओबीसी-कुनबी समुदाय पर असर: अगर सभी मराठों को बिना सबूत के कुनबी मान लिया गया, तो पहले से ओबीसी कोटे का लाभ ले रहे परिवारों के लिए सीटों और नौकरियों में हिस्सेदारी घट सकती है। इससे इन समुदायों में भी असंतोष बढ़ सकता है।\n• जालना और आसपास के इलाकों में: बड़ी संख्या में समर्थक अंतरवाली सराटी में जुटे हैं, जिससे स्थानीय यातायात, बाजार और प्रशासनिक कामकाज पर असर पड़ सकता है। स्थानीय लोगों को अगले कुछ दिनों तक प्रदर्शन स्थल के आसपास आवाजाही में सतर्क रहना होगा।\n\nऐसा क्यों हुआ\nमनोज जरांगे की तबीयत बिगड़ने की सीधी वजह उनका बीते 11 दिनों से बिना अन्न-जल के जारी आमरण अनशन है, जिससे शरीर में शुगर का स्तर तेजी से गिरा और उन्हें चक्कर आने लगे। यह मराठा आरक्षण को लेकर लंबे समय से चल रहे टकराव की एक और कड़ी है।\n\n• तत्काल कारण: लगातार भूखे रहने से जरांगे के शरीर में जरूरी शुगर और तरल पदार्थ की भारी कमी हो गई, जिसके चलते डॉक्टरों को आपातकालीन तौर पर सलाइन चढ़ानी पड़ी।\n• पृष्ठभूमि: मराठा समाज लंबे समय से खुद को कुनबी मानकर ओबीसी कोटे में शामिल करने की मांग कर रहा है, जबकि सरकार ने पहले सिर्फ दस्तावेजी सबूत वाले परिवारों को ही कुनबी प्रमाण पत्र देने का रास्ता अपनाया था।\n• पहले भी हो चुका है टकराव: इससे पहले भी मराठा आरक्षण को लेकर बड़े विरोध प्रदर्शन हो चुके हैं, जिसके बाद हैदराबाद गजेटियर और निजाम कालीन दस्तावेजों के आधार पर सीमित फॉर्मूला अपनाया गया था।\n• आगे क्या हो सकता है: मंत्री और विधायक के आश्वासन के बाद सरकार का प्रतिनिधिमंडल बातचीत के लिए पहुंचने वाला है, लेकिन मुद्दे का पूरी तरह हल अभी नहीं निकला है और स्थिति फिलहाल बातचीत के दौर में ही है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. मनोज जरांगे की तबीयत क्यों बिगड़ी?\n11 दिन से जारी आमरण अनशन के कारण उनका शुगर लेवल काफी गिर गया और उन्हें चक्कर आने लगे।\n\n2. उन्हें सलाइन कब चढ़ाई गई?\nसोमवार-मंगलवार की दरमियानी रात करीब ढाई बजे डॉक्टरों ने उन्हें सलाइन चढ़ाई।\n\n3. जरांगे इलाज के लिए क्यों राजी हुए?\nमंत्री उदय सामंत और विधायक प्रसाद लाड के फोन पर आग्रह और 8 सितंबर से मुद्दे सुलझाने के आश्वासन के बाद वे राजी हुए।\n\n4. मराठा समाज की मुख्य मांग क्या है?\nपूरे मराठा समुदाय को कुनबी मानकर ओबीसी कोटे में शामिल किया जाए।\n\n5. कुनबी समुदाय को पहले से क्या लाभ मिलता है?\nकुनबी को सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ा मानकर पहले से ही ओबीसी श्रेणी में आरक्षण मिलता है।\n\n6. सरकार पहले किस आधार पर कुनबी प्रमाण पत्र देती थी?\nहैदराबाद गजेटियर और निजाम कालीन दस्तावेजों के आधार पर, सिर्फ ऐतिहासिक सबूत वाले परिवारों को।\n\n7. आज क्या होने की उम्मीद है?\nसरकार का एक प्रतिनिधिमंडल अंतरवाली सराटी पहुंचकर बातचीत कर सकता है।",
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  "category": "राजनीति",
  "publishedAt": "2026-09-08",
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