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  "title": "मास्को दौरे पर एस जयशंकर के 5 बड़े मास्टरस्ट्रोक, पुतिन की भारत यात्रा से पहले हिल जाएगी वैश्विक राजनीति",
  "summary": "रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे से पहले विदेश मंत्री एस जयशंकर मास्को पहुंच रहे हैं, जहां वे ऊर्जा, रक्षा और व्यापार के मोर्चे पर पांच बड़े कूटनीतिक कदम उठाने वाले हैं।",
  "content": "अमेरिका के तमाम दबावों को दरकिनार करते हुए भारत ने एक बार फिर अपनी स्वतंत्र विदेश नीति का शानदार उदाहरण पेश किया है। पश्चिमी देशों की लाख कोशिशों के बावजूद कि भारत रूस के साथ अपने दशकों पुराने रिश्ते तोड़ ले, नई दिल्ली ने हमेशा अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखा है। इसी कड़ी में विदेश मंत्री एस जयशंकर मास्को के दौरे पर जा रहे हैं, जो रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत आने से ठीक पहले हो रहा है। यह यात्रा महज एक औपचारिक मुलाकात नहीं है, बल्कि यह इस बात का सबूत है कि भारत की प्राथमिकता सिर्फ 'नेशन फर्स्ट' है। मास्को की इस महत्वपूर्ण यात्रा के दौरान एस जयशंकर पांच ऐसे बड़े कदम उठाने की तैयारी में हैं, जो वैश्विक कूटनीति का रुख मोड़ने के साथ-साथ भारत के लिए बहुत बड़ी खुशखबरी लेकर आएंगे।\n\n \n\nIRIGC-TEC की सह-अध्यक्षता और कूटनीतिक बैठकें\n\nविदेश मंत्रालय के आधिकारिक बयानों के अनुसार, एस जयशंकर यह दौरा रूसी प्रथम उप प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव के आधिकारिक आमंत्रण पर कर रहे हैं। मास्को पहुंचने के बाद वे 'भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग' यानी IRIGC-TEC के 27वें सत्र की सह-अध्यक्षता संभालेंगे। इस हाई-प्रोफाइल बैठक में द्विपक्षीय व्यापार, आर्थिकी, विज्ञान, टेक्नोलॉजी और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को लेकर कई बड़े समझौतों को मूर्त रूप दिए जाने की पूरी उम्मीद है। इसके अलावा, एस जयशंकर अपने रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगे, जिसमें दुनिया भर में चल रहे तमाम अहम भू-राजनीतिक मुद्दों पर खुलकर चर्चा होगी।\n\n \n\nव्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे की जमीन तैयार करना\n\nइस कूटनीतिक यात्रा का सबसे पहला और सबसे बड़ा मास्टरस्ट्रोक रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के संभावित भारत दौरे के लिए मजबूत और टिकाऊ आधार तैयार करना है। जहां एक तरफ पश्चिमी देश लगातार पुतिन को कूटनीतिक रूप से अलग-थलग करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं, वहीं भारत द्वारा उनकी मेजबानी करना अमेरिका और उसके तमाम पश्चिमी सहयोगियों के लिए एक बहुत बड़ा झटका साबित होगा। मास्को में होने वाली बैठकों के दौरान पुतिन की भारत यात्रा के पूरे एजेंडे, सुरक्षा इंतजामों और मुख्य संधियों को अंतिम रूप दिया जाएगा। इसके साथ ही, जिस तरह से ब्रिक्स का दायरा लगातार फैल रहा है और वह ग्लोबल साउथ की एक मजबूत आवाज बन रहा है, उसमें भारत और रूस की यह जोड़ी एक नया वैश्विक पावर सेंटर बना रही है। पुतिन का भारत आना इस बात पर आधिकारिक मुहर लगा देगा कि दुनिया अब पूरी तरह मल्टी-पोलर हो चुकी है और भारत उसका केंद्र बिंदु बन चुका है।\n\n \n\nनॉर्दर्न सी रूट से स्वेज नहर के संकट से मुक्ति\n\nभारतीय अर्थव्यवस्था और वैश्विक व्यापार के लिहाज से इस पूरी यात्रा की सबसे बड़ी खुशखबरी 'नॉर्दर्न सी रूट' को लेकर मिलने की उम्मीद है। अभी तक भारत का अधिकांश समुद्री व्यापार स्वेज नहर के रास्ते होता है, लेकिन पश्चिम एशिया में लगातार जारी संघर्ष के कारण लाल सागर में भी भारी उथल-पुथल मची हुई है, जिसकी वजह से भारत को हर साल अरबों डॉलर का वित्तीय नुकसान उठाना पड़ता है। रूस ने अब भारत को आर्कटिक महासागर के ऊपर से गुजरने वाले 'नॉर्दर्न सी रूट' में सीधी हिस्सेदारी का खुला न्योता दिया है। यह नया मार्ग पारंपरिक स्वेज नहर के मुकाबले यात्रा की दूरी और समय दोनों मामलों में लगभग 30 से 40 प्रतिशत की भारी-भरकम बचत कराएगा। एस जयशंकर का यह कदम भारत को तीन प्रमुख और बड़े फायदे दिलाएगा। सबसे पहले, इसके जरिए भारत तक कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस यानी एलएनजी की डिलीवरी बहुत कम लागत और तेज गति से हो सकेगी। दूसरा, आर्कटिक जैसे प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर क्षेत्र में भारत की सीधी उपस्थिति दर्ज होगी, जहां चीन पहले से ही अपनी पैठ बनाने की कोशिशों में जुटा है। तीसरा, भारतीय शिपिंग जहाजों को एक बिल्कुल नया और सुरक्षित मार्ग मिल जाएगा। इस दौरान एस जयशंकर इस रूट को 'चेन्नई-व्लादिवोस्तोक ईस्टर्न मैरीटाइम कॉरिडोर' से आपस में जोड़ने की योजना को भी अंतिम रूप देंगे, जो भारत के लॉजिस्टिक्स सेक्टर के लिए एक बड़ा गेम-चेंजर साबित होगा।\n\n \n\nरुपया-रूस भुगतान और डॉलर पर निर्भरता कम करना\n\nयूक्रेन में चल रहे संघर्ष के बीच भारत ने रूस से रिकॉर्ड स्तर पर रियायती दरों पर कच्चा तेल खरीदा है, जिससे देश को ऊर्जा के मोर्चे पर अरबों डॉलर की भारी बचत हुई है। हालांकि, इसके कारण दोनों देशों के बीच व्यापार असंतुलन की समस्या भी पैदा हो गई, क्योंकि उस अनुपात में भारत का निर्यात रूस को नहीं बढ़ पा रहा था। एस जयशंकर का तीसरा मास्टरस्ट्रोक इसी व्यापारिक असंतुलन को पाटना और अमेरिकी डॉलर पर भारत की निर्भरता को कम करना है। मास्को में होने वाले 27वें सत्र के दौरान दोनों देश रुपया-रूबल भुगतान तंत्र को और अधिक सरल व सहज बनाने पर मुहर लगाएंगे। साथ ही, भारतीय कृषि उत्पादों, फार्मास्यूटिकल्स और ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए रूसी बाजारों के दरवाजे पूरी तरह से खोलने पर सहमति बनेगी, जिससे देश के निर्यातकों को सीधा फायदा पहुंचेगा और भारतीय अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।\n\n \n\nभारतीय सशस्त्र बलों के लिए रक्षा स्पेयर पार्ट्स की गारंटी\n\nभारत की सैन्य ताकत और रक्षा उपकरण बहुत हद तक रूसी टेक्नोलॉजी और स्पेयर पार्ट्स पर ही निर्भर हैं। ऐसे में आज के समय के तनावपूर्ण वैश्विक माहौल और युद्ध जैसे हालातों के बीच भारतीय सेना के लिए हथियारों की निरंतर आपूर्ति और उनका समय पर मेंटेनेंस सुनिश्चित करना हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील और अनिवार्य मुद्दा है। एस जयशंकर का मास्को में रूसी नेतृत्व के साथ आमने-सामने बैठना इस बात की पूरी गारंटी देगा कि भारतीय सशस्त्र बलों के लिए रक्षा स्पेयर पार्ट्स, अत्याधुनिक मिसाइल सिस्टम जैसे एस-400 और अन्य जरूरी सैन्य उपकरणों की सप्लाई में किसी भी तरह की बाधा न आए। यह कूटनीतिक कदम भारत की सीमाओं की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक चाक-चौबंद और शक्तिशाली बनाने के लिए बेहद जरूरी है।\n\n \n\nचीन-रूस संबंधों के बीच कूटनीतिक संतुलन और इंडियन चेकमेट\n\nपश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए कड़े प्रतिबंधों के कारण रूस अपनी आर्थिक और रणनीतिक मजबूरियों के चलते चीन के थोड़ा करीब जाने लगा है। भारत के लिए यह स्थिति किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है, क्योंकि वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी एलएसी पर चीन के इरादे और उसकी चालबाजियां किसी से छिपी नहीं हैं। एस जयशंकर का यह मास्को दौरा चीन को कूटनीतिक रूप से बैकफुट पर धकेलने के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। रूस के साथ अपने पारंपरिक रणनीतिक रिश्तों को और अधिक प्रगाढ़ करके भारत यह सुनिश्चित कर रहा है कि रूस पूरी तरह से चीन के पाले में न चला जाए। एस जयशंकर और सर्गेई लावरोव की यह मुलाकात दुनिया को यह साफ संदेश दे रही है कि रूस के लिए भारत की मित्रता उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी किसी अन्य देश की। इस शानदार कूटनीतिक दांव से भारत ने चीन की उन तमाम चालों पर पानी फेर दिया है, जिनके जरिए वह रूस को मोहरा बनाकर क्षेत्रीय समीकरण साधना चाहता था।\n\nइसका आप पर असर\nभारत में: एस जयशंकर के इस दौरे से कच्चे तेल और एलएनजी की कीमतों में स्थिरता आने के साथ-साथ रक्षा साजो-सामान की आपूर्ति सुनिश्चित होगी, जिससे देश की ऊर्जा सुरक्षा और सरहदों की रक्षा मजबूत होगी।\n\nव्यापार जगत में: रुपया-रूबल भुगतान व्यवस्था आसान होने और नॉर्दर्न सी रूट के खुलने से भारतीय निर्यातकों को बड़ा फायदा मिलेगा और लॉजिस्टिक्स की लागत में उल्लेखनीय कमी आएगी।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. एस जयशंकर का मास्को दौरा क्यों महत्वपूर्ण है?\nयह दौरा रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की संभावित भारत यात्रा से ठीक पहले हो रहा है और इसका उद्देश्य रक्षा, व्यापार तथा ऊर्जा समझौतों को अंतिम रूप देना है।\n\n2. IRIGC-TEC का कौन सा सत्र आयोजित किया जा रहा है?\nमास्को में 'भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग' (IRIGC-TEC) का 27वां सत्र आयोजित किया जा रहा है।\n\n3. नॉर्दर्न सी रूट से भारत को क्या लाभ होगा?\nयह रूट स्वेज नहर की तुलना में यात्रा की दूरी और समय में 30 से 40 प्रतिशत की बचत कराएगा और तेल की डिलीवरी तेज होगी।\n\n4. रूस यात्रा के दौरान व्यापार असंतुलन को कैसे दूर किया जाएगा?\nदोनों देश रुपया-रूबल भुगतान व्यवस्था को सहज बनाएंगे और भारतीय कृषि, फार्मा तथा ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए रूसी बाजार खोलेंगे।",
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  "category": "राजनीति",
  "publishedAt": "2026-08-22",
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