मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग को लेकर द्रौपदी मुर्मू से मिलने पहुंचे विपक्षी दल, बाहर विजय चौक पर सांसदों का प्रदर्शन राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में विपक्षी गठबंधन का प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति भवन पहुंचा, जबकि अन्य सांसदों ने विजय चौक पर बैठकर विरोध जताया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी गठबंधन के प्रमुख नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात करने पहुंचा। संसद के सेंट्रल हॉल से सीधे राष्ट्रपति भवन की ओर बढ़े इस मार्च के बीच कई विपक्षी सांसदों ने विजय चौक पर बैठकर जोरदार धरना दिया। यह पूरा विरोध मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार से जुड़े मामले को लेकर किया जा रहा है, जिसमें विपक्षी गठबंधन राष्ट्रपति के समक्ष उन्हें पद से हटाने की मांग उठा रहा है। राष्ट्रपति भवन में चुनिंदा नेता, विजय चौक पर बाकी सांसदों का जमावड़ा राष्ट्रपति से भेंट करने वाले इंडिया गठबंधन के प्रतिनिधिमंडल में राहुल गांधी के साथ कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सुप्रिया सुले, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, राजीव राय, मनोज झा, एमए बेबी, डी. राजा और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला शामिल रहे। राष्ट्रपति भवन के भीतर जब इन नेताओं का दल ज्ञापन और अपनी मांगें रखने गया, ठीक उसी समय संसद परिसर के बाहर बाकी विपक्षी सांसद विजय चौक पर एकजुट होकर जमीन पर बैठ गए और शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस मौके पर केंद्र पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार डरी हुई है और इसलिए विपक्ष की आवाज सुनने को तैयार नहीं दिख रही। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने ज्ञानेश कुमार पर कोई जरूरी कार्रवाई नहीं की है, जबकि निष्पक्ष चुनाव प्रणाली के हित में ज्ञानेश कुमार को अपने पद से हटना चाहिए। बैलेट पेपर से मतदान और सीईसी पर कार्रवाई की मांग संसद भवन के बाहर प्रदर्शन के दौरान विपक्षी दलों के नेताओं ने चुनाव प्रक्रिया में सुधार और बैलेट पेपर की बहाली पर भी जोर दिया। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विपक्षी दल बैलेट से वोटिंग कराने के पक्ष में हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाया जाना जरूरी है। इसी आंदोलन को लेकर कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने सड़कों पर उतरे लोगों और प्रदर्शनकारियों के प्रति अपना समर्थन जताया। गोगोई ने कहा कि सभी देशभक्त देश के लोकतंत्र को मजबूत करने के प्रयास में लगे हुए हैं, चाहे उनका संबंध किसी भी राजनीतिक दल से हो या वे किसी दल के सदस्य न हों। उन्होंने विरोध प्रदर्शन में शामिल उन सभी लोगों की सराहना की जो अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए आगे आए हैं। सीमित अनुमति और राजधानी में सुरक्षा पाबंदियों पर उठे सवाल कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने संसद भवन के बाहर मार्च निकालने की वजह साफ करते हुए बताया कि राष्ट्रपति से मिलने के लिए सभी सांसदों को समय नहीं मिल सका था। गठबंधन के सिर्फ 10 प्रतिनिधियों को ही राष्ट्रपति भवन जाने का समय दिया गया, जिसके चलते बाकी सांसदों ने बाहर आकर विरोध मार्च निकालने का फैसला किया। राजीव शुक्ला ने इस दौरान राजधानी दिल्ली में लगाई गई कड़ी पाबंदियों पर भी तीखा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक कदमों के कारण आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा है। स्थिति यह बन गई कि सुप्रीम कोर्ट को भी यह सवाल उठाना पड़ा कि मेट्रो, ट्रेन और बस सेवाओं पर इस तरह की व्यापक रोक क्यों लगाई जा रही है और शहर के प्रवेश रास्तों को क्यों बंद किया गया है। इसका आप पर असर संसद भवन और राष्ट्रपति भवन के आसपास विपक्षी प्रदर्शन और प्रशासनिक सुरक्षा उपायों से आम नागरिकों और यात्रियों पर सीधा प्रभाव पड़ा है। • दिल्ली में: राजधानी के प्रमुख हिस्सों, खासकर नई दिल्ली क्षेत्र में सुरक्षा बंदोबस्त कड़े किए गए हैं। इसके चलते सेंट्रल दिल्ली की ओर आने-जाने वाले दैनिक यात्रियों और कामकाजी लोगों को रास्तों के डायवर्जन और ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ा। • सार्वजनिक परिवहन पर: मेट्रो स्टेशनों, ट्रेनों और बस आवागमन पर पाबंदियों के कारण आम लोगों की दैनिक दिनचर्या प्रभावित हुई है। शहर में प्रवेश करने वाले रास्तों पर जांच तेज होने से सीमावर्ती इलाकों से आने वाले यात्रियों का समय अधिक लगा। • राष्ट्रीय स्तर पर: निर्वाचन प्रक्रिया की विश्वसनीयता और चुनाव आयुक्त के पद को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। आने वाले समय में चुनावी नियमों और वोटिंग प्रणाली को लेकर संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक खींचतान और बढ़ सकती है। • मतदाताओं के लिए: बैलेट पेपर और मतदान प्रणाली को लेकर विपक्षी दलों का रुख भविष्य के चुनावों में बड़ा विमर्श बनने जा रहा है। मतदाता चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और दोनों पक्षों के तर्कों को करीब से परख सकेंगे। ऐसा क्यों हुआ विपक्षी गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त के कामकाज पर सवाल उठाते हुए राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग की है, जबकि बाकी सांसदों को समय न मिलने से विरोध संसद परिसर के बाहर तक फैल गया। • सीईसी पर अविश्वास: विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए उन्हें पद से हटाने की मांग की है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार उनकी शिकायतों पर कार्रवाई नहीं कर रही है। • सीमित मुलाकात की अनुमति: राष्ट्रपति भवन में पूरे संसदीय दल के बजाय केवल 10 नेताओं के प्रतिनिधिमंडल को ही मिलने का समय दिया गया। इसी कारण अन्य सांसदों ने बाहर विजय चौक पर धरना देने का निर्णय लिया। • प्रशासनिक पाबंदियों पर नाराजगी: प्रदर्शन के दौरान दिल्ली में मेट्रो, बसों और सीमावर्ती रास्तों पर लगाए गए प्रतिबंधों ने भी विपक्षी नेताओं का रोष बढ़ाया, जिस पर अदालती सवाल भी उठाए गए। सवाल-जवाब 1. विपक्षी दल राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से क्यों मिलने पहुंचे? विपक्षी गठबंधन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर राष्ट्रपति से मुलाकात करने पहुंचा। 2. राष्ट्रपति से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कौन कर रहा था? इस 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे कर रहे थे। 3. विजय चौक पर विपक्षी सांसद धरने पर क्यों बैठे? राष्ट्रपति भवन में केवल 10 नेताओं को मुलाकात का समय मिलने के कारण बाकी सांसदों ने विजय चौक पर मार्च कर धरना दिया। 4. डीके शिवकुमार ने इस प्रदर्शन के दौरान क्या मांग रखी? कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने बैलेट पेपर से मतदान कराने और सीईसी ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग रखी। https://trendkia.com/politics/mukhya-chunava-ayukta-ko-hatane-ki-manga-ko-lekara-droupadi-murmu-se-milane-pahunche-vipakshi-dala-bahara-vijay-chowk-para-sansado-45572 TrendKia — Har trend, sabse pehle.