नंदीग्राम उपचुनाव में तृणमूल कांग्रेस के दोनों उम्मीदवारों की उम्मीदवारी पर संकट, जोड़ाफूल चुनाव चिह्न और पार्टी नाम पर रोक के बाद फंसा पेंच पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव में तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुटों के उम्मीदवारों का नामांकन मुश्किल में पड़ गया है। चुनाव आयोग द्वारा जोड़ाफूल चुनाव चिह्न और पार्टी के नाम पर रोक लगाने के बाद प्रस्तावकों की संख्या को लेकर नया पेंच फंस गया है। पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव में तृणमूल कांग्रेस के दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। चुनाव आयोग द्वारा पार्टी के चुनाव चिह्न जोड़ाफूल यानी Flowers & Grass को फ्रीज किए जाने और All India Trinamool Congress नाम के इस्तेमाल पर अंतरिम रोक लगाए जाने के बाद से राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इस ताजा घटनाक्रम के बीच अब नंदीग्राम सीट से मैदान में उतरे दोनों गुटों के उम्मीदवारों के नामांकन पत्रों की वैधता पर बड़ा सवालिया निशान लग गया है। पूरा मामला उम्मीदवारों द्वारा दाखिल किए गए पर्चों में प्रस्तावकों की संख्या और पार्टी की आधिकारिक मान्यता से जुड़ा हुआ है। जोड़ाफूल फ्रीज होने से बढ़ा नामांकन का संकट स्थानीय राजनीतिक घटनाक्रम के अनुसार, नंदीग्राम उपचुनाव के लिए तृणमूल कांग्रेस के दोनों अलग-अलग गुटों ने अपने-अपने प्रत्याशी चुनावी मैदान में उतारे हैं। ममता बनर्जी गुट की तरफ से संचिता प्रधान डे को उम्मीदवार बनाया गया है, जबकि दूसरे गुट की ओर से मोहम्मद एहतशामुल हक अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। दोनों ने ही आधिकारिक तौर पर तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में अपना नामांकन पत्र दाखिल किया था। लेकिन निर्वाचन आयोग के कड़े अंतरिम आदेश के बाद अब कोई भी गुट पुराने पार्टी नाम और जोड़ाफूल चुनाव चिह्न का इस्तेमाल नहीं कर सकता है, जिससे इन नामांकनों को लेकर चुनावी प्रक्रिया में कानूनी और तकनीकी पेंच पैदा हो गया है। प्रस्तावकों की संख्या को लेकर असमंजस सामने आई जानकारियों के मुताबिक, दोनों ही उम्मीदवारों ने अपने नामांकन पत्रों में पार्टी प्रत्याशी के नियमों के तहत केवल दो-दो प्रस्तावकों के नाम दर्ज किए हैं। यहीं से पूरा मामला कानूनी दांव-पेच में उलझता नजर आ रहा है। यदि चुनाव अधिकारी इन दोनों को पार्टी उम्मीदवार के बजाय निर्दलीय या स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में देखते हैं, तो नियमों के अनुसार कम से कम 10 प्रस्तावकों की आवश्यकता होती है। चूंकि दोनों के पर्चे में सिर्फ दो-दो प्रस्तावक ही मौजूद हैं, इसलिए नए घटनाक्रम के बाद उनकी उम्मीदवारी की स्थिति को लेकर गहरा संशय बना हुआ है। हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि दोनों के नामांकन रद्द हो चुके हैं, क्योंकि इस पर अंतिम मुहर संबंधित चुनाव अधिकारी की जांच और प्रक्रिया के बाद ही लगेगी। चुनाव आयोग का कड़ा अंतरिम आदेश इससे पहले गुरुवार की रात को निर्वाचन आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न के विवाद पर एक सख्त अंतरिम आदेश जारी किया था। आयोग ने दोनों ही प्रतिद्वंद्वी गुटों को फिलहाल All India Trinamool Congress नाम का प्रयोग करने से पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है। इसके साथ ही Flowers & Grass यानी जोड़ाफूल चुनाव चिह्न को भी आगामी आदेशों तक फ्रीज कर दिया गया है। विवाद को सुलझाने के लिए आयोग ने दोनों गुटों से तीन-तीन वैकल्पिक नाम और तीन-तीन स्वतंत्र चुनाव चिन्हों की सूची मांगी है, जिनमें से प्रत्येक गुट को एक नया नाम और एक नया चुनाव चिह्न आवंटित किया जाएगा। नामांकन के भविष्य पर आज साफ हो सकती है तस्वीर नंदीग्राम सीट के लिए नामांकन पत्रों की जांच की प्रक्रिया गुरुवार को ही पूरी हो चुकी है, लेकिन इन दोनों उम्मीदवारों के भाग्य पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया जा सका। उपलब्ध सूचनाओं के अनुसार, शुक्रवार सुबह 11 बजे तक इस पूरे मामले पर स्थिति पूरी तरह साफ होने की उम्मीद जताई जा रही थी। अब सबसे बड़ा और अहम सवाल यही है कि पार्टी के पुराने नाम और पारंपरिक जोड़ाफूल चिह्न के बिना पहले से जमा किए गए ये नामांकन किस प्रकार आगे बढ़ाए जाएंगे। यदि उम्मीदवारों को पार्टी प्रत्याशी के रूप में मान्यता मिल जाती है, तो स्थिति अलग होगी, लेकिन स्वतंत्र उम्मीदवार की श्रेणी में आने पर प्रस्तावकों की संख्या का नियम निर्णायक साबित होगा। चुनाव अधिकारी के अगले कदम पर टिकी सबकी नजरें निर्वाचन आयोग का यह अंतरिम आदेश केवल नंदीग्राम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पार्टी के दोनों गुटों के बीच चल रहे वर्चस्व के विवाद का परिणाम है। जब तक इस विवाद पर अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक दोनों गुटों को बिल्कुल नए नाम और बिल्कुल नए फ्री सिंबल के साथ अपनी चुनावी गतिविधियों को आगे बढ़ाना होगा। नंदीग्राम में संचिता प्रधान डे और मोहम्मद एहतशामुल हक के नामांकन का यह प्रकरण इसलिए बेहद महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि उन्होंने पर्दा दाखिल करते वक्त अलग नियमों का पालन किया था। अब देखना यह है कि प्रस्तावकों की संख्या, नए नाम और नए चुनाव चिन्ह के इस त्रिकोणीय पेंच के बीच चुनाव अधिकारी क्या और कौन सा फैसला लेते हैं। इसका आप पर असर नंदीग्राम में तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुटों के नामांकन पर मंडरा रहे संकट का स्थानीय राजनीतिक माहौल और प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर सीधा असर पड़ रहा है। • पश्चिम बंगाल में: चुनाव आयोग के इस कड़े फैसले से राज्यभर के राजनीतिक दलों में आंतरिक विवादों और चुनाव चिह्नों के आवंटन को लेकर कड़ा संदेश गया है। राजनीतिक संगठनों को अपने संगठनात्मक मामलों और वैधानिक दस्तावेजों को लेकर अब अधिक सतर्क रहना होगा। • नंदीग्राम में: स्थानीय मतदाताओं और चुनावी मैदान में उतरे दोनों उम्मीदवारों के समर्थकों के बीच असमंजस की स्थिति बन गई है। चुनाव अधिकारी के अंतिम निर्णय से ही यह तय होगा कि इस सीट पर मुकाबला किस स्वरूप में आगे बढ़ेगा। ऐसा क्यों हुआ नंदीग्राम उपचुनाव में उत्पन्न यह कानूनी और प्रशासनिक संकट तृणमूल कांग्रेस के भीतर मचे आंतरिक घमासान और चुनाव आयोग के सख्त नियमों के कारण पैदा हुआ है। • पार्टी के भीतर आंतरिक विभाजन: तृणमूल कांग्रेस के अंदर दो अलग-अलग गुटों के उभरने और दोनों द्वारा अपने-अपने उम्मीदवारों को मैदान में उतारने से यह विवाद चुनाव आयोग की देहरी तक पहुंचा। • चुनाव आयोग का अंतरिम हस्तक्षेप: आयोग ने पार्टी के नाम और पारंपरिक चुनाव चिह्न पर दोनों पक्षों के दावों के बीच निष्पक्षता बनाए रखने के लिए यह अंतरिम रोक लगाई है। • नामांकन नियमों का तकनीकी पहलू: पार्टी उम्मीदवार के रूप में केवल दो प्रस्तावक देना मान्य होता है, लेकिन निर्दलीय होने की स्थिति में 10 प्रस्तावकों की अनिवार्यता के कारण यह कानूनी पेंच फंसा है। सवाल-जवाब 1. नंदीग्राम उपचुनाव में तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुटों से कौन-कौन उम्मीदवार हैं? ममता बनर्जी गुट की ओर से संचिता प्रधान डे उम्मीदवार हैं, जबकि दूसरे गुट की तरफ से मोहम्मद एहतशामुल हक मैदान में हैं। 2. चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ क्या अंतरिम आदेश दिया है? आयोग ने All India Trinamool Congress नाम के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है और जोड़ाफूल चुनाव चिह्न को फ्रीज कर दिया है। 3. दोनों उम्मीदवारों के नामांकन में क्या तकनीकी समस्या आ रही है? दोनों उम्मीदवारों ने पार्टी प्रत्याशी के तौर पर केवल दो-दो प्रस्तावक दिए हैं, जबकि स्वतंत्र उम्मीदवार माने जाने पर 10 प्रस्तावकों की जरूरत होती है। 4. नामांकन पत्रों की जांच कब हुई थी? नंदीग्राम सीट के लिए नामांकन पत्रों की जांच गुरुवार को संपन्न हुई थी। https://trendkia.com/politics/nandigram-upa-chunava-men-tmc-ummidavaron-ki-ummidavari-para-snkata-joraphula-aura-parti-nama-para-roka-33149 TrendKia — Har trend, sabse pehle.