# नरेंद्र मोदी का 23 सूत्रीय विजन: विकसित भारत को जन आंदोलन बनाने और ओलंपिक की तैयारी का मेगा प्लान

> प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरकार के कामकाज, खेल, कृषि, शिक्षा और प्रशासन को बेहतर बनाने के लिए 23 बिंदुओं का एक व्यापक रोडमैप तैयार किया है। इसके तहत विकसित भारत के लक्ष्य को जन आंदोलन बनाने के साथ ही खेल संस्कृति, कौशल विकास और प्रशासनिक सुधारों पर जोर दिया जा रहा है।

**Type:** article · **Category:** राजनीति · **Published:** 2026-08-22 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/politics/narendra-modi-ka-23-sutriya-vijana-vikasita-bharata-ko-jana-andolana-banane-aura-olnpika-ki-taiyari-ka-mega-plana-20086 · **Language:** Hindi
**Tags:** विकसित भारत, नरेंद्र मोदी, कौशल विकास, खेल नीति, कृषि सुधार, प्रशासनिक सुधार, डिजिटल इंडिया

खेल और फिटनेस को बढ़ावा देने के लिए सरकार की रणनीति में लंबी अवधि की सोच पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। वर्ष 2036 में भारत में आयोजित होने वाले संभावित ओलंपिक खेलों को ध्यान में रखते हुए अभी से तैयारी शुरू कर दी गई है। वर्तमान में 5 से 10 वर्ष की आयु के जो बच्चे हैं, वे भविष्य में ओलंपिक खेलों में देश का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं। इसी उद्देश्य के तहत स्कूल और कॉलेज स्तर पर खेल प्रतियोगिताओं को प्रोत्साहित करने की योजना बनाई गई है ताकि जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं को निखारा जा सके। प्रधानमंत्री ने खेलों को केवल खेल मंत्रालय तक ही सीमित न रखकर इसे पूरी सरकार का विषय बनाने की आवश्यकता पर बल दिया है।

खेलों के विस्तार के लिए पर्यटन मंत्रालय और खेल मंत्रालय को मिलकर स्पोर्ट्स टूरिज्म विकसित करने का सुझाव दिया गया है। इसके अलावा एमएसएमई सेक्टर, तकनीकी विभागों और स्टार्टअप्स को भी खेलों के प्रचार-प्रसार से जोड़ा जाएगा। दफ्तरों के भीतर भी खेल प्रतियोगिताएं आयोजित करने की बात कही गई है ताकि कर्मचारियों के बीच आपसी सामंजस्य, टीम भावना और एक सक्रिय खेल संस्कृति को बढ़ावा मिल सके।

शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में भी बड़े बदलावों का प्रस्ताव रखा गया है। स्कूली शिक्षा के दौरान व्यावसायिक कौशल को अधिक महत्व देने की बात कही गई है। इसके साथ ही औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों यानी आईटीआई के पाठ्यक्रमों की समीक्षा कर उन्हें बाजार की वास्तविक जरूरतों के अनुसार ढालने की योजना है। आईटीआई से डिप्लोमा करने वाले युवाओं को उच्च शिक्षा और डिग्री हासिल करने के नए अवसर प्रदान करने पर भी विचार किया जा रहा है, जिससे व्यावसायिक और उच्च शिक्षा के बीच की खाई को पाटा जा सके।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुशल कामगारों की मांग को ध्यान में रखते हुए दुनिया के विभिन्न देशों के लिए ग्लोबल मैपिंग करने का सुझाव दिया गया है। इसी मैपिंग के आधार पर भारत में ट्रेनिंग प्रोग्राम तैयार किए जाएंगे। उदाहरण के तौर पर पूर्वोत्तर भारत के प्रशिक्षित युवाओं को जापान जैसे देशों में रोजगार के उपलब्ध अवसरों से जोड़ा जा सकता है। विदेशों में भारतीय श्रमिकों की उपयोगिता बढ़ाने के लिए केवल तकनीकी ज्ञान ही नहीं, बल्कि सॉफ्ट स्किल्स और डिजिटल तकनीकों में भी प्रशिक्षण देने पर जोर दिया जा रहा है।

कृषि क्षेत्र में शिक्षा प्रणाली और खेती के पारंपरिक तरीकों में सुधार लाने की बात कही गई है। देश भर के कृषि विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम की क्षेत्रवार समीक्षा करने को कहा गया है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वहां की जलवायु और मिट्टी के अनुकूल ही पढ़ाई हो रही है। सिंचाई के साधनों का दायरा बढ़ाकर क्रॉप डायवर्सिफिकेशन को बढ़ावा देने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। हालांकि इसके साथ ही अधिक पानी की खपत वाली फसलों से दूरी बनाए रखने के निर्देश भी दिए गए हैं। किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए एक नया प्रस्ताव यह भी है कि कृषि छात्रों को खेतों की मेड़ या सीमाओं पर सोलर पैनल लगाने की योजनाओं से जोड़ा जाए।

सरकारी कामकाज में सुरक्षा और आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए घरेलू डिजिटल प्लेटफॉर्म, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मैसेजिंग ऐप्स के इस्तेमाल को प्राथमिकता दी जा रही है। डेटा सुरक्षा को पुख्ता करने और विदेशी तकनीकी सेवाओं पर निर्भरता घटाने के उद्देश्य से सरकारी संस्थानों में Zoho, Sna’m और Arattai जैसे भारतीय तकनीकी विकल्पों के उपयोग का उल्लेख किया गया है।

अनुभवी पेशेवरों और वरिष्ठ नागरिकों के ज्ञान का सदुपयोग करने के लिए उन्हें महत्वपूर्ण संसाधन के रूप में देखा जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस की तर्ज पर वरिष्ठ नागरिकों को आईटीआई संस्थानों में मेंटर के रूप में जोड़ा जा सकता है और इसके लिए उन्हें मानदेय दिया जाएगा। इसी तरह इंजीनियरिंग के अंतिम वर्ष के छात्रों को दो से तीन महीने के लिए मानदेय आधारित स्वैच्छिक योगदान देने के वास्ते प्रोत्साहित करने का सुझाव दिया गया है ताकि आईटीआई के विद्यार्थियों तक आधुनिक तकनीक और उद्योग से जुड़ी बारीकियां पहुंच सकें।

प्रशासनिक मोर्चे पर अधिकारियों की आंतरिक दक्षता बढ़ाने पर विशेष जोर है। टेंडर तैयार करने, कानूनों का मसौदा तैयार करने और विवादों को सुलझाने जैसे तकनीकी कार्यों के लिए हर बार निजी कंसल्टेंसी फर्मों पर निर्भर रहने की बजाय सरकारी अमले को खुद प्रशिक्षित किया जाना चाहिए। अधिकारियों की क्षमता वृद्धि के लिए सरकार के iGOT प्लेटफॉर्म का उपयोग करने का सुझाव दिया गया है। इसके अलावा सार्वजनिक खर्च और परिसंपत्तियों से जुड़े वित्तीय शब्दों पर भी नए सिरे से विचार करने की बात कही गई है।

फार्मास्युटिकल सेक्टर में विनियामक प्रक्रियाओं को सरल बनाने और वैज्ञानिक क्षेत्र में हो रहे तेज बदलावों के अनुसार नियमों को अपडेट करने का लक्ष्य रखा गया है। विभागों से यह अपेक्षा की गई है कि वे संभावित बाधाओं की पहचान पहले ही कर लें ताकि समस्याओं के उत्पन्न होने से पहले ही जरूरी सुधारात्मक कदम उठाए जा सकें।

केवल श्रमिक तैयार करने तक ही बात सीमित नहीं है, बल्कि देश में ऐसी बड़ी निर्माण एजेंसियों की संख्या बढ़ाने पर भी बल दिया जा रहा है जो विशाल और जटिल बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को सफलतापूर्वक पूरा कर सकें। इसके अलावा भारी तथा अत्याधुनिक मशीनरी का घरेलू उत्पादन बढ़ाने की जरूरत है ताकि उद्योग जगत और शैक्षणिक संस्थानों के बीच मजबूत तालमेल स्थापित किया जा सके।

शीर्ष स्तर की नौकरशाही के लिए इस रोडमैप का मुख्य संदेश यह है कि सचिवगण केवल अपने विभाग विशेष के हितों का प्रतिनिधित्व करने के बजाय व्यापक राष्ट्रीय और सार्वजनिक हित के नेता के रूप में कार्य करें। स्वच्छता, स्वदेशी, अनावश्यक नियमों को हटाने और गैर-आपराधिक प्रावधानों जैसे विषयों पर सामूहिक दृष्टिकोण अपनाकर काम करने की आवश्यकता है। मंत्रालयों के बीच आपसी समन्वय को बेहतर बनाने के लिए यह जरूरी है कि किसी भी प्रस्ताव को कैबिनेट के समक्ष पेश करने से पहले सभी संबंधित पक्षों और हितधारकों के साथ विस्तार से चर्चा कर ली जाए।

समग्र रूप से देखा जाए तो यह 23 सूत्रीय रोडमैप सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को अलग-अलग खानों में बांटने के बजाय एक साझा राष्ट्रीय लक्ष्य के साथ जोड़ने का प्रयास है। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें पांच साल के बच्चे से लेकर आईटीआई छात्र, किसान, प्रवासी कामगार, इंजीनियरिंग छात्र और वरिष्ठ नागरिक तक हर किसी को वर्ष 2047 के विकसित भारत के निर्माण में एक अहम हिस्सेदार के रूप में शामिल किया गया है।

## सवाल-जवाब

### 1. सरकार के इस 23 सूत्रीय रोडमैप का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस रोडमैप का मुख्य उद्देश्य विकसित भारत के लक्ष्य को जन आंदोलन बनाना और सरकार के विभिन्न विभागों, खेल, शिक्षा, कृषि और प्रशासन को बेहतर समन्वय के साथ चलाना है।

### 2. ओलंपिक खेलों की तैयारी के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है?
वर्ष 2036 के संभावित ओलंपिक को ध्यान में रखते हुए वर्तमान में 5 से 10 वर्ष की आयु के बच्चों को लक्षित कर स्कूल और कॉलेज स्तर पर खेल प्रतियोगिताओं को बढ़ावा दिया जा रहा है।

### 3. कौशल विकास और आईटीआई के लिए क्या बदलाव सुझाए गए हैं?
आईटीआई पाठ्यक्रमों की समीक्षा कर उन्हें रोजगार की जरूरतों के अनुरूप बनाने और डिप्लोमा छात्रों को आगे डिग्री प्राप्त करने के अवसर देने का प्रस्ताव है।

### 4. सरकारी कामकाज में किन घरेलू डिजिटल प्लेटफॉर्मों के उपयोग का जिक्र है?
दस्तावेज़ में डेटा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए Zoho, Sna’m और Arattai जैसे भारतीय डिजिटल प्लेटफॉर्मों के उपयोग को बढ़ावा देने की बात कही गई है।

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