नीट लीक और छात्र प्रदर्शन पर संसद में भारी बवाल, एंटी पेपर लीक विधेयक पेश होने के बीच दोनों सदनों की कार्यवाही स्थगित संसद के मानसून सत्र में नीट परीक्षा विवाद और जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को लेकर विपक्षी दलों ने जमकर हंगामा किया, जिसके कारण लोक परीक्षा संशोधन विधेयक 2026 पेश होने के बाद भी दोनों सदनों को बार-बार स्थगित करना पड़ा। संसद के मानसून सत्र के दौरान सोमवार को लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में जबर्दस्त राजनीतिक घमासान देखने को मिला। केंद्र सरकार ने प्रतियोगी परीक्षाओं में हो रही धांधली और पर्चा लीक की घटनाओं पर अंकुश लगाने के मकसद से लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक 2026 को निचले सदन में प्रस्तुत किया। केंद्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह ने हंगामे के बीच इस महत्वपूर्ण विधेयक को पटल पर रखा, लेकिन विपक्ष नीट परीक्षा धांधली और उसके विरोध में उतरे विद्यार्थियों पर हुई पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह से तत्काल जवाब मांगने की मांग पर अड़ा रहा। विपक्षी सांसदों के लगातार नारेबाजी और आसन के समीप आकर प्रदर्शन करने के कारण लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बार-बार शांति की अपील की, लेकिन गतिरोध न थमने पर सदन की कार्यवाही को दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया। लोक परीक्षा संशोधन विधेयक 2026 और निचले सदन में गतिरोध सार्वजनिक परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ रोकने के लिए केंद्र सरकार ने लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक 2026 को संसद में आगे बढ़ाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई पूर्व घोषणा के अनुरूप इस कड़े कानून को तैयार किया गया है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले सोशल मीडिया पर एक विशेष संदेश जारी कर सभी राजनीतिक दलों के सांसदों से दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इस विधेयक पर चर्चा में हिस्सा लेने की भावुक अपील की थी। उन्होंने कहा कि देश की युवा पीढ़ी की आवाज़ सुनने और उनके बेहतर भविष्य के लिए यह ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। इसके बावजूद सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी दलों के सदस्य वेल में उतर आए और जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू, केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और मुरुगन ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से उनके कक्ष में मुलाकात कर दिन के विधायी कार्यों पर चर्चा की। सरकार की ओर से इस विधेयक पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के पांच प्रमुख सांसदों को मुख्य वक्ता के रूप में नामित किया गया है। इनमें अपना दल की अनुप्रिया पटेल, शिवसेना के श्रीकांत शिंदे, लोक जनशक्ति पार्टी के अरुण भारती, एनसीपीसीआई की सायोनी घोष और तेलुगु देशम पार्टी के कृष्णा देवरायुलू शामिल हैं। इसके अतिरिक्त सरकार का इरादा उच्चतम न्यायालय में जजों की कुल संख्या बढ़ाने से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयक को भी सदन में पेश करने का है। हालांकि, विपक्षी सांसदों के भारी शोर-शराबे और प्रश्नकाल न चलने देने की वजह से विधायी कार्यों में व्यवधान पड़ा। स्पीकर ओम बिरला ने स्पष्ट चेतावनी दी कि जो सांसद आसन के पास आकर सदन की गरिमा और स्थापित परंपराओं को नष्ट करने की कोशिश कर रहे हैं, उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कदम उठाना अनिवार्य हो जाएगा। राज्यसभा में नियम 267 पर तकरार और मल्लिकार्जुन खरगे का रुख उपरी सदन यानी राज्यसभा में भी स्थिति निचले सदन से अलग नहीं रही। सुबह बैठक शुरू होते ही सभापति सी पी राधाकृष्णन ने आवश्यक दस्तावेजों को पटल पर रखवाया और सदस्यों से शून्यकाल के तहत जनहित के मुद्दे उठाने का आग्रह किया। इसी दौरान विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने नियम 267 के तहत दिए गए अपने कार्यस्थगन नोटिस का हवाला देते हुए नीट प्रश्नपत्र लीक और छात्रों पर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई का मुद्दा उठाने की इजाजत मांगी। मल्लिकार्जुन खरगे ने तर्क दिया कि देश के लाखों छात्रों के भविष्य और उन पर हुए पुलिस बल प्रयोग का विषय अत्यंत दुर्लभ और गंभीर प्रकृति का है, इसलिए पूर्वनिर्धारित सभी कार्यों को रोककर इस पर तुरंत बहस कराई जानी चाहिए। सभापति सी पी राधाकृष्णन ने इस पर अपनी व्यवस्था देते हुए कहा कि वह नियम 267 के तहत नोटिस पर पहले ही फैसला सुना चुके हैं और यह नियम केवल बेहद दुर्लभ स्थितियों में ही लागू होता है। जब सभापति ने इस विषय पर चर्चा की अनुमति देने से इनकार कर दिया, तो कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के सांसद अपनी जगहों पर खड़े होकर विरोध जताने लगे। विपक्षी सदस्यों के आक्रामक रुख और नारेबाजी के कारण राज्यसभा में शून्यकाल की कार्यवाही पूरी तरह बाधित हो गई, जिसके बाद सभापति ने सदन की बैठक को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी। जंतर-मंतर छात्र प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई पर विपक्ष के स्थगन प्रस्ताव संसद के दोनों सदनों में विपक्ष के कड़े तेवरों के पीछे मुख्य वजह 20 जुलाई को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुआ छात्र प्रदर्शन है। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के बैनर तले आयोजित 'संसद चलो' मार्च में सैकड़ों छात्रों ने भाग लिया था, जो नीट परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। विपक्षी सांसदों का आरोप है कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर दिल्ली पुलिस और सुरक्षा बलों ने बर्बरतापूर्वक बल प्रयोग किया। लोकसभा में कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल, मणिकम टैगोर, हिबी ईडन और विजयकुमार उर्फ विजय वसंत ने पृथक-पृथक स्थगन प्रस्ताव के नोटिस देकर इस घटना पर तत्काल विस्तृत चर्चा कराए जाने की मांग की। कांग्रेस सांसदों द्वारा दिए गए नोटिसों में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा गया है कि शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों पर सुरक्षा बलों ने पेलेट गन और शॉक बैटन जैसे घातक और अत्यधिक साधनों का इस्तेमाल किया। इन नोटिसों में दावा किया गया कि पुलिसिया कार्रवाई में कई छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए और कुछ की आंखों की रोशनी जाने का भी खतरा मंडरा रहा है। विपक्ष का कहना है कि केंद्र सरकार को इस पूरे मामले में जवाबदेही तय करनी चाहिए और गृह मंत्री अमित शाह को खुद सदन में आकर इस घटनाक्रम पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। दल-बदल कानून में संशोधन की मांग और विपक्ष की रणनीतिक बैठक नीट विवाद के अलावा लोकसभा में एक और महत्वपूर्ण मुद्दा कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने उठाया। मनीष तिवारी ने निचले सदन में एक पृथक स्थगन प्रस्ताव का नोटिस देकर देश में एक नए और प्रभावी दल-बदल विरोधी कानून की जरूरत पर चर्चा कराने का अनुरोध किया। लोकसभा के महासचिव को सौंपे गए अपने नोटिस में मनीष तिवारी ने लिखा कि अवसरवाद से प्रेरित होकर बड़े पैमाने पर होने वाले राजनीतिक दल-बदल को रोकने के लिए मौजूदा कानूनी ढांचे को बदलना आवश्यक है। उन्होंने जोर दिया कि जहां एक तरफ राजनीतिक अवसरवादिता पर रोक लगनी चाहिए, वहीं पार्टी के भीतर सैद्धांतिक और वास्तविक वैचारिक असहमति जताने के जनप्रतिनिधियों के अधिकार की रक्षा भी होनी चाहिए। संसदीय कार्यवाही में जारी गतिरोध के बीच विपक्षी दलों के शीर्ष नेताओं ने संसद परिसर में एक उच्चस्तरीय रणनीतिक बैठक की। इस बैठक में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, केसी वेणुगोपाल, जयराम रमेश, सौगात रॉय, महुआ मांझी, रामजी लाल सुमन, पी. संदोश, सागरिका घोष और राजा राम समेत कई प्रमुख नेता उपस्थित रहे। इस बैठक में संसद के भीतर सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने, विपक्षी एकजुटता बनाए रखने और आगे की विधायी रणनीति तय करने पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया। विपक्षी खेमे का रुख साफ है कि जब तक सरकार छात्र हितों और पुलिस कार्रवाई पर संतोषजनक जवाब नहीं देती, तब तक वे अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे। इसका आप पर असर • भारत में: संसद में नया लोक परीक्षा संशोधन विधेयक 2026 पास होने से देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं की शुचिता बढ़ेगी और पेपर लीक करने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो सकेगी। • परीक्षार्थियों के लिए: परीक्षा धांधली और लीक मामलों में कड़ी सजा के प्रावधानों से पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित होने की उम्मीद है। सवाल-जवाब 1. लोक परीक्षा संशोधन विधेयक 2026 किसने पेश किया? इस विधेयक को केंद्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह ने संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में प्रस्तुत किया। 2. संसद के दोनों सदनों में किस मुद्दे को लेकर हंगामा हुआ? विपक्षी दलों ने नीट पेपर लीक और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में हंगामा किया। 3. राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने किस नियम के तहत चर्चा मांगी थी? मल्लिकार्जुन खरगे ने नियम 267 के तहत कार्यस्थगन का नोटिस देकर तत्काल चर्चा कराने की मांग की थी। 4. मनीष तिवारी ने किस कानून में बदलाव के लिए नोटिस दिया? कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने नए दल-बदल विरोधी कानून की आवश्यकता पर चर्चा के लिए स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया। https://trendkia.com/politics/neet-leak-aur-chhatra-pradarsan-par-sansad-mein-bhari-bawal-anti-paper-leak-vidheyak-pesh-hone-ke-beech-donon-sadanon-ki-karyavahi-10683 TrendKia — Har trend, sabse pehle.