नीतीश-आरसीपी की मुलाकात के मायने: क्या जेडीयू में पुराने समीकरणों की वापसी हो रही है? आरसीपी सिंह और नीतीश कुमार की चार साल बाद हुई मुलाकात बिहार की राजनीति में चर्चा का विषय बनी हुई है। इस घटनाक्रम के पीछे निशांत कुमार की भूमिका और कोइरी-कुर्मी वोट बैंक को साधने की रणनीति अहम मानी जा रही है। पटना में आरसीपी सिंह और नीतीश कुमार की हालिया मुलाकात ने राज्य की राजनीतिक हलचल को तेज कर दिया है। चार साल की लंबी कड़वाहट और कई उतार-चढ़ाव भरे राजनीतिक सफर के बाद, शनिवार को आरसीपी सिंह ने पटना के ७ सर्कुलर रोड स्थित नीतीश कुमार के आवास पर जाकर उनसे मुलाकात की। मुलाकात के बाद आरसीपी सिंह ने मीडिया के सामने स्पष्ट किया कि उन्हें जेडीयू का हिस्सा ही माना जाना चाहिए। हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वे हमेशा नीतीश कुमार के साथ रहे हैं और उन्हें अपना नेता मानते हैं। कोइरी-कुर्मी वोट बैंक पर टिकी नजर बिहार की राजनीति के जानकारों का मानना है कि इस मेल-मिलाप के पीछे सबसे बड़ा कारण जेडीयू का पारंपरिक वोट बैंक है। पार्टी की मजबूती हमेशा से कोइरी-कुर्मी समीकरण पर निर्भर रही है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सम्राट चौधरी के उभार के साथ ही बीजेपी ने जेडीयू के इस कोर वोट बैंक में सेंधमारी करने की कोशिश की है। नीतीश कुमार के लिए अपनी सत्ता और राजनीतिक प्रभाव को बचाए रखने के लिए नालंदा के कुर्मी मतदाताओं को एकजुट रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है। आरसीपी सिंह इसी समाज के एक प्रभावी चेहरे के रूप में देखे जाते हैं, इसलिए उनकी वापसी जेडीयू के लिए डैमेज कंट्रोल की तरह है। मुलाकात की पर्दे के पीछे की सेटिंग इस मुलाकात के पीछे की कहानी काफी दिलचस्प है। आरसीपी सिंह पिछले कई महीनों से नीतीश कुमार से मिलने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन जेडीयू के कुछ वरिष्ठ नेताओं के विरोध के कारण उन्हें सफलता नहीं मिल रही थी। इस गतिरोध को खत्म करने में नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार का नाम चर्चा में है। आरसीपी सिंह ने पिछले कुछ समय में सार्वजनिक रूप से निशांत कुमार की प्रशंसा की थी और उनके राजनीतिक भविष्य का भी समर्थन किया था। कहा जा रहा है कि निशांत कुमार और आरसीपी सिंह के बीच हुए अनौपचारिक संवाद ने ही इस मुलाकात का मार्ग प्रशस्त किया, जिसके बाद शनिवार को नीतीश कुमार ने उनसे बात करना स्वीकार किया। ७ सर्कुलर रोड का घटनाक्रम मुलाकात का दृश्य थोड़ा नाटकीय रहा। आरसीपी सिंह वहां करीब २० मिनट तक अपने समर्थकों के साथ मौजूद रहे। नीतीश कुमार के वहां पहुंचते ही आरसीपी सिंह ने उन्हें हाथ जोड़कर अभिवादन किया, जिसका नीतीश कुमार ने जवाब दिया, लेकिन वह रुकने के बजाय आगे बढ़ गए। आरसीपी समर्थकों का आरोप है कि वहां मौजूद जेडीयू के कुछ एमएलसी और अन्य नेताओं ने आरसीपी सिंह को नीतीश कुमार के साथ लंबी चर्चा करने से रोकने की कोशिश की। इसके बावजूद, आरसीपी सिंह ने इसे एक आत्मीय मुलाकात करार दिया है। भविष्य के राजनीतिक संकेत जन सुराज के साथ जुड़ने के बाद आरसीपी सिंह का मोहभंग हो चुका था और वे राजनीतिक रूप से खुद को अकेला महसूस कर रहे थे। वहीं दूसरी तरफ, जेडीयू के लिए भी आरसीपी की वापसी उनके सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने की एक आवश्यकता बन गई है। यह मुलाकात महज एक शिष्टाचार भेंट नहीं है, बल्कि बिहार में बन रहे नए राजनीतिक समीकरणों का एक संकेत है। आरसीपी सिंह का यह दावा कि वे जेडीयू में ही हैं, पार्टी के भीतर एक नए पावर सेंटर के बनने की आहट दे रहा है, जो आने वाले समय में बिहार की सियासत में बड़े बदलाव ला सकता है। इसका आप पर असर बिहार में: इस मुलाकात से जेडीयू के भीतर नए समीकरण बन सकते हैं, जिससे कार्यकर्ताओं को पार्टी के भविष्य और सत्ता संतुलन को लेकर सतर्क रहना चाहिए। पूरे भारत में: राजनीतिक दलों में पुराने सहयोगियों की वापसी अक्सर गठबंधन की बदली हुई प्राथमिकताओं को दर्शाती है, जिसे निवेशकों और विश्लेषकों को राज्य की स्थिरता के नजरिए से देखना चाहिए। सवाल-जवाब 1. नीतीश कुमार और आरसीपी सिंह की मुलाकात कब हुई? यह मुलाकात शनिवार को पटना के ७ सर्कुलर रोड स्थित नीतीश कुमार के आवास पर हुई। 2. मुलाकात में किसने अहम भूमिका निभाई? नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार ने इस मुलाकात के लिए मार्ग प्रशस्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 3. आरसीपी सिंह ने जेडीयू में अपनी स्थिति के बारे में क्या कहा? आरसीपी सिंह ने कहा कि वे जेडीयू में ही हैं और नीतीश कुमार उनके नेता रहे हैं और रहेंगे। 4. यह मुलाकात क्यों महत्वपूर्ण मानी जा रही है? यह जेडीयू के कोर कोइरी-कुर्मी वोट बैंक को साधने और पार्टी की आंतरिक मजबूती के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। https://trendkia.com/politics/nitish-rcp-ke-mayne-kya-jdu-me-purane-samikaranon-ki-wapsi-ho-rahi-hai-3316 TrendKia — Har trend, sabse pehle.